ईश्वर की भक्ति और मोक्ष देवताओं को भी दुर्लभः कथावाचक धनंजय शास्त्री
2025-09-07 04:05 PM
295
- महाराष्ट्र मंडल में चल रही भागवत कथा के प्रथम दिन कलश यात्रा के साथ हुई संक्षिप्त कथा
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन धर्मसभा विद्वतसंघ श्रीश्री जगतगुरु शंकराचार्य पीठम के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मचारी निरंजनानंद आचार्य वेदमूर्ति धनंजय शास्त्री वैद्य ने भागवत के महत्व का समझाया। उन्होंने कहा कि देवताओं को भी दुर्लभ, ईश्वर की भक्ति और मोक्ष इस कलयुग में हमें श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण मात्र से प्राप्त होती है। अपनी मरणासन्न अवस्था पर राजा परीक्षित को महर्षि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव ने श्रीमद् भागवत की कथा पहली बार सुनाई।

आचार्य शास्त्री ने कहा कि मरणासन्न राजा परीक्षित ने ने शुकदेव से पूछा कि मृत्यु के निकट खड़े व्यक्ति को क्या करना चाहिए, जिसके उत्तर में शुकदेव ने उन्हें भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने, उनकी लीलाओं का श्रवण करने और भक्ति का अभ्यास करने का उपदेश दिया, जिससे अंततः राजा को शांति, मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि जब शुकदेव जी महाराज राजा परीक्षित को कथा सुना रहे थे, तब इंद्र अमृत कलश लेकर उनके पास आए और कहा कि यह कथा हमें सुनाएं। इस पर शुकदेव जी बोले की यह मरणासन्न अवस्था में हैं, इसे भागवत कथा अधिक जरूरी है। तब इंद्र बोले हम परीक्षित के लिए अमृत कलश लेकर आए है। तब शुकदेव जी बोले मैं राजा परीक्षित को ज्ञानामृत दे रहा हूं। जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी यह अमृत के अधिक महत्वपूर्ण है, और इस तरह राजा परीक्षित ज्ञानामृत पाने के लिए अमृत का त्याग कर दिया।

आचार्य शास्त्री जी ने आगे ‘सूत शौनक संवाद’ सुनाई। महर्षि शौनक और अन्य ऋषियों ने वेदव्यास के शिष्य, सूत जी से कलियुग में धर्म और अर्थ के उपाय पूछकर पुराण कथा श्रवण करने का आग्रह किया। सूत जी ने भगवान विष्णु के अवतारों और विभिन्न लोकों के प्राणियों के कल्याण के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन किया, जिसमें उन्होंने भागवत कथा का सार प्रस्तुत किया। इससे पूर्व उन्होंने वेद-पुराण, उपनिदेश में महिर्ष वेदव्यास के योगदानों को प्रस्तुत किया।

शीतला मंदिर तक निकली कलश यात्रा
श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ होने के पूर्व बाजे-गाजे के साथ भव्य कलशयात्रा निकाली गई। जो कथा स्थल महाराष्ट्र मंडल से प्रारंभ होकर करबला तालाब के पास माता शीतला मंदिर तक पहुंची। कलशयात्रा की प्रथम पंक्ति में अजय- मेघा पोतदार श्रीमद् भागवत कथा को सिर पर उठाकर मंदिर तक पहुंचे। वहां से पूजा अर्चना कर कलश यात्रा वापस कथा स्थल पर लौटी। जिसके उपरांत मुख्य जजमान शचिंद्र और डा. शुचिता देशमुख ने श्रीमद् भागवत और श्री बालमुकुंद की आरती की।

मुख्य द्वार पर कलशधारी महिलाओं के पैऱ धुलाएं गए
कलशयात्रा में शामिल 51 महिलाएं जैसे ही कलश लेकर वापस आयोजन स्थल लौटी तो मंडल से सचिव और आचार्य चेतन दंडवते ने सभी महिलाएं के चरण पखारे। जिसके उपरांत सभी कथा स्थल पहुंचे। फिर आचार्यों ने संहिता परायण किया और आचार्य वेदमूर्ति धनंजय शास्त्री वैद्य ने संक्षिप्त भागवत कथा का सभी को श्रवण कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
