यह विद्यालय नहीं मां सस्वती की आराधना है, तप हैः आचार्य धनंजय शास्त्री
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय पहुंचे आचार्य धनंजय शास्त्री ने बच्चों से कहा- अपने जन्मदिवस पर लगाए पौधे
रायपुर। संत ज्ञानेश्वर विद्यालय नहीं अपितु मां सरस्वती की आराधना और तप करने का केंद्र है, जहां आप सभी बच्चे और महाराष्ट्र मंडल ट्रस्ट से जुड़े लोग तप कर रहे है। विद्यालय विद्या, संस्कार और ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। आप सभी बच्चे अपने जन्मदिन या किसी क्षण के अवसर पर उसे यादगार बनाने अपने घर के आसपास या सुरक्षित स्थान पर एक पौधा अवश्य लगाए। पौधा जब पेड़ बनेगा तो उसमें पक्षी आएंगे, चीटिंयां अपना घर बनाएगी। उसे देखकर आपको बड़ा आनंद आएगा, और यही धर्म है। उक्ताशय के विचार आचार्य धनंजय शास्त्री ने संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के बच्चों से कहीं।
उन्होंने बच्चों से कहा कि 10वीं तक की पढ़ाई आपके जीवन में महत्वपूर्ण रोल अदा करती है क्योंकि यहां से आप अपने भविष्य के लिए विषय का चयन करते है। विषय पर आपकी इतनी अधिक रूचि होनी चाहिए कि क्लास रूम से बाहर निकलकर आप अपने मित्रों के साथ उसी विषय पर चर्चा करें। इतिहास में रूचि रखने वाले छात्रों को इतिहास के प्रसंगों पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने स्कूल के शिक्षकों से कहा कि बच्चों की रूचि को पहचानना आपका धर्म है। बच्चों की सिखाने के लिए आप लोगों में स्पर्धा होनी चाहिए।
आचार्य ने कहा कि स्कूलों में दी जाने वाली शारीरिक शिक्षा जीवन भर काम आने वाली होती है। अगर आप स्कूल में नियमित व्यायाम, प्राणायाम सीख जाएंगे, तो आगे चलकर आपको डाक्टरों की सलाह पर इसे नहीं करना होगा। राष्ट्र का हम पर बड़ी उपकार है। बचपन में हमें पोलियों की दवा निःशुल्क पिलाई गई, चिकन पाक्स और कोरोना की वैक्सीन हमें निःशुल्क लगाई गई। इसका एहसान चुकाने राष्ट्र की आपका कर्तव्य राष्ट्र भक्ति कहलाता है।
आचार्य ने कहा कि आप सभी ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु: मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्:’ श्लोक सुना है। इसमें ॐ सर्वे भवन्तु सुखिन यानि सभी सुखी रहें। सर्वे सन्तु निरामयाः मतलब सभी रोगमुक्त रहें। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु: अर्थात् सभी का जीवन मंगलमय हो / सभी कल्याण देखें और मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्: मतलब कोई भी दुःख का भागी न बने। यह मंत्र सभी के लिए अच्छे स्वास्थ्य, सुख और शांति की कामना करता है। धर्म हमें सिखाता है कि हमें सिर्फ अपने बारे विचार नहीं करना चाहिए सभी की प्रगति और विकास की बात होनी चाहिए। महाराष्ट्र मंडल रायपुर इसी दिशा में कार्य कर रहा है।