दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बच्चों के सवाल पर आचार्य बोले- धर्म पर रूचि, इसलिए उच्च शिक्षा में मिली सफलता

आचार्य धनंजय शास्त्री ने बच्चों की जिज्ञासाओं को किया शांत

रायपुर। संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए आचार्य धनंजय शास्त्री ने कहा कि उनकी धर्म में रूचि थी इसलिए वे उच्च शिक्षा आसानी से ग्रहण कर पाए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे इस मार्ग पर नहीं आए। बपचन से ही इस क्षेत्र में उनकी रूचि थी। धर्म और राजनीति के संबध में पूछे सवाल का जवाब देने उन्होंने कहा कि पहले से समय राजनेता धर्म का पालन करते थे। तो उनका शासन सालोंसाल चलता था। आज के राजनेताओं में इसका अभाव है। समाज को राजनीति से बाधित करते है। अच्छी राजनीतज्ञ बनने के लिए धर्म का पालन सबसे अधिक जरूरी है।

पढ़ाई में मन नहीं लगने के सवाल पर जवाब देते हुए आचार्य शास्त्री ने आगे कहा कि आज की युवा पीढ़ी के पास पढ़ाई में मन नहीं लगना आम बात है। पढ़ाई में मन लगाने का व्यवहारिक उपाय है। उस वस्तु, विषय की चाह होनी चाहिए। चाह होगी तो उसमें मन लगेगा। वहीं उसके महत्व को समझना होगा। ताकि पढ़ाई में मन लग सके। आगे आप सभी को जिस भी विषय की पढ़ाई करनी है, उसका महत्व जरूर जाने और उसमें रूचि होनी चाहिए। फिर आपको सफलता मिलेगी।

आत्मसाक्षात्कार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिस तरह मिट्टी के बने पात्र का मूल तत्व मिट्टी ही रहता है। पात्र जैसे घड़ा, तवा, गिवास, कुल्लड़ के आकृति मात्र है। मूल तत्व को मिट्टी है। इसी तरह चैतन्य को जानना ही आत्मसाक्षात्कार है। युवाओं मे बढ़ते मोबाइल फोन के चलन को लेकर उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा कर सकते हैं और हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल अक्ष को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे हृदय को नुकसान पहुँचता है। मोबाइल की ब्लू लाइट और स्क्रीन को लगातार देखने से यह समस्याएँ होती हैं, जिससे आँखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आँखें कमजोर हो सकती हैं।  मोबाइल का अत्यधिक उपयोग मस्तिष्क के कार्य, एकाग्रता, याददाश्त और मूड को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे "ब्रेन रॉट" (ब्रेन की कार्यक्षमता में गिरावट) और मानसिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  

प्राकृतिक आपदाओं पर पूछे सवाल का जबाव देते हुए आचार्य ने कहा कि अभी पंजाब में बाढ़ आई है। पंजाब में गेंहू की पैदावार अधिक होती है। ऐसे में वहां के किसानों ने पहाड़ों को नष्ट कर खेत बना दिया। नादियों में बांध बनाकर पानी के धर्म (बहने के धर्म) में बाधक बने। अब पानी का वही धर्म, अधर्म बनकर लौट गया सृष्टि में जीव-जंतु, पशु-पक्षी, मनुष्य सभी का अपना धर्म है, किसी के धर्म में बाधक बनोगे तो नुकसान तो होगा है।