दिव्य महाराष्ट्र मंडल

चिकित्सा जगत की भावी क्रांति को रेखांकित करता दिखा ‘मैं अनिकेत हूं’*

0- रायपुर एम्स के ऑडिटोरियम में महाराष्ट्र मंडल ने किया हिंदी नाटक का मंचन
 
रायपुर। चिकित्सा जगत की नित नवीन क्रांति मृत्यु और जीवन के बीच संघर्ष कर रहे लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होती है। ऐसी ही एक क्रांति है ब्रेन ट्रांसप्लांट की, जिसकी चर्चा गुरुवार रात को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ऑडिटोरियम में बैठा हर दर्शक कर रहा था। मौका था रायपुर एम्स में महाराष्ट्र मंडल रायपुर द्वारा ‘मैं अनिकेत हूं’  नाटक के मंचन का। जिसमें एक युवक अपने वजूद को लेकर संघर्ष करना नजर आया।
90 मिनट के इस नाटक में पूरी कार्रवाई कोर्ट रूम की दिखाई गई है। जहां भारतीय न्याय संहिता की धारा 419 और 448 के तहत एक मामले की सुनवाई शुरू होती है, जो तमाम गवाहों के बयान के साथ चिकित्सा जगत की भावी क्रांति को रेखांकित करती नजर आती है। इस नाटक में वरिष्ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर अनिकेत की केंद्रीय भूमिका में छा गए है। उनके शानदार अभिनय और डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। जिसमें वे अपनी पहचान को दोबारा स्थापित करने के लिए जूझते नजर आए। 
पूरे नाटक में अनिकेत के पात्र को टक्कर देते वकील नजर आए, जिसे चेतन दंडवते ने जीवंत किया। नाटक में अनिकेत की पत्नी मीनाक्षी शर्मा की भूमिका में डॉ. अनुराधा दुबे सभी को प्रभावित किया। सावित्री बाई की भूमिका में भारती पलसोदकर के हिंदी- मराठी संवादों ने खूब तालियां बटोरीं। धर्मा की भूमिका में रविंद्र ठेंगड़ी और आचार्य रंजन मोड़क ने डॉक्टर शिरोडकर की भूमिका निभाई और उनके ओजस संवादों और डॉक्टर की उपलब्धियों ने खूब तालियां बटोरीं। 
इस नाटक में वरिष्ठ रंगसाधक प्रकाश खांडेकर, दिलीप लांबे, डा. प्रीता लाल, समीर टल्लू,  विनोद राखुंडे, पंकज सराफ, श्याम सुंदर खंगन, डा. अभया जोगलेकर भी नजर आए। आर्टिसन अजय पोतदार व प्रवीण क्षीरसागर का सेट डिजाइन पूरे नाटक में वास्तविक कोर्ट रूम का एहसास कराती है। रूप सज्जा दिनेश धनकर, वेशभूषा डा. अभया जोगलेकर, प्रकाश व्यवस्था लोकेश साहू व नितिन यादव, संगीत सुमीत मोड़क और नेपथ्य अस्मिता कुसरे व प्रकाश का भी सहयोग प्रशंसनीय रहा। 
नाटक शुरू होने के पहले एम्स के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. अशोक जिंदल, डिप्टी डायरेक्टर कर्नल डीएस चौहान, ग्रुप कैप्टन मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ. रेणु राजगुरु, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डॉ. अशोक जिंदल ने कहा कि मैं मराठी बोल नहीं सकता लेकिन समझ जरूर सकता हूं। इस नाटक ने बड़ा नैतिक सवाल उठाया।