दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘रात का समा झूमे चंद्रमा’….की मनमोहक प्रस्तुति ने मोहा मन

महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर केंद्र ने मनाया कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव

रायपुर। सन् 1964 में आई फिल्म 'जिद्दी' का गीत रात का समा, झूमे चंद्रमा तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ.... एक सदाबहार क्लासिक गीत है। जो आज भी उतने ही उत्साह के साथ गाया और सुना जाता है। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर महिला केंद्र की सदस्या शेफाली फडणवीस ने इस सदाबहार गीत पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति देकर शंकर नगर बाल वाचलनालय में आयोजित कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव को यादगार बना दिया।

शंकर नगर केंद्र की संयोजिका मधुरा भागवत ने बताया कि रविवार, 12 अक्टूबर को शंकर नगर केंद्र द्वारा कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूरा कार्यक्रम बहुत ही उल्लास और आनंद के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन तथा गणेश वंदना के साथ की गई। जिसके बाद निर्मला पिंपले ने कोजागिरी पूर्णिमा के बारे बताते हुए कहा कि कोजागिरी पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा के 16 कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण महत्वपूर्ण है इस दिन 'को जाग्रत' यानी 'कौन जाग रहा है' की परंपरा का पालन करते हुए लोग रात भर जागते हैं और माँ लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।

मधुरा भागवत ने आगे बताया कि इस अवसर पर नन्ही बालिका मानुषी  फडणवीस ने शुभं करोति कल्याणं, आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुतेका पाठ किया। नेहा फडणवीस के द्वारा सुंदर मराठी गीत प्रस्तुत किया गया। विनया करदले और श्रद्धा विठालकर ने भूलाबाई के गीत प्रस्तुत किए। मधुरा भागवत ने "गली में आज चांद निकला" गीत गाया।

कार्यक्रम में बहुत ही रोचक खेल हुआ, जिसमें आंखों पर पट्टी बांधकर एक ट्रे में सफेद पदार्थ भर कर रखी कटोरियों के सामान को सिर्फ छू कर पहचानना था। इस खेल का संचालन अनुराधा शिवलकर तथा स्मिता करदले ने किया। खेल में प्रथम मधुरा भागवत, द्वितीय अदिति जोशी तथा सांत्वना पुरस्कार अरुंधति नांदेडकर को प्राप्त हुआ।  कार्यक्रम का संचालन हर्षदा टिचकुले और शेफाली फडनवीस ने किया। संयोजिका  मधुरा भागवत ने  केंद्र के कार्यक्रमों की  रूपरेखा के बारे में सभी सदस्यों से चर्चा की । इसके अलावा एक सरप्राइज खेल था, जिसमें कविता लांजेवार को पुरस्कार मिला। हर्षदा टिचकुले, स्मिता करदले और शेफाली फडणवीस ने बहुत सुंदर सजावट की थी।