दिवाली पहाट: भक्ति- भाव गीतों की रसधारा में सुबह सराबोर हुए संगीतप्रेमी
2025-10-19 06:06 PM
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0 मराठी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए महाराष्ट्र मंडल के कार्यक्रम अनुकरणीय: दीपक म्हस्के
रायपुर। नचिकेत हरकरे की आवाज में प्रस्तुत मराठी अभंग ‘उठ पंढरीचा राया...’ से शुरू हुआ मराठी पहाट ‘स्वरदीप’ सुमधुर प्रस्तुतियों के साथ देर तक चलता रहा। दिवाली पहाट में सुबह छह बजे स्नान- ध्यान कर भाव- भक्ति गीतों का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु श्रोता हर एक गीत पर मंत्रमुग्ध होते रहे। पारंगत गायकों को हारमोनियम पर वरिष्ठ संगीतज्ञ चंद्रशेखर सुरावधनीवार और नचिकेत हरकरे, तबले पर अशोक कुर्म का ऐसा साथ मिला कि पूरा कार्यक्रम ही यादगार बन गया।

महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित ‘स्वरदीप’ की दूसरी प्रस्तुति के रूप में कल्याणी देसाई ने ‘विट्ठल माझी मय’ गाकर सुमधुर संगीत के कार्यक्रम को गति दी। ‘नारायण रमा रमणा….’ अभंग से चंद्रशेखर सुरावधनीवार ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। मंच पर सबसे छोटी उम्र की दीक्षा वराडपांडे ने ‘जेथे जातो तेथे तु माझा सांगावी’ की सुमधुर गायकी से अपनी दक्षता सिद्ध की।
‘सुंदर ते ध्यान...’ की बेहतरीन पेशकश से अंकिता फाटक हरकरे ने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज की। इसी तरह सुप्रसिद्ध भाव गीतों की प्रस्तुति लगाता चलते रही। कार्यक्रम का एक बड़ा आकर्षण हरकरे दंपती का युगल गायन रहा, जिसे दोनों ने बड़ी खूबसूरती से निभाया। ‘स्वरदीप’ की शुरुआत जितनी सुमधुर रही, समापन भी सुरावधनीवार और नचिकेत के भैरवी ‘स्वामी कृपा कधी करणार’ से जबर्दस्त रही। इसमें मंचस्थ सभी गायकों का भी बेहतरीन तालमेल भरा साथ रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश भाजपा आईटी सेल के प्रभारी और छत्तीसगढ़ राज्य मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक म्हस्के ने कहा कि ‘स्वरदीप’ की लगातार बढ़ती लोकप्रियता इस बात को प्रमाणित करती है कि मराठी संस्कृति को संजोए रखने में हर आयु वर्ग के लोग जागरूक हैं। मराठी संस्कृति को लेकर महाराष्ट्र मंडल की ओर से किए जा रहे प्रयास प्रशंसनीय और अनुकरणीय हैं।
मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंडल के 90 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा पर चर्चा की। साथ ही म्हस्के से मंडल के फिजियोथेरेपी सेंटर के लिए आवश्यक एक्यूपमेंट उपलब्ध कराने की मांग की। इस मौके पर अध्यक्ष काले व सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने मुख्य अतिथि म्हस्के का सूत माला, शाल-श्रीफल, स्मृति चिह्न से अभिनंदन किया। इसी तरह मंच पर विराजित हर गायक व संगतकार को भी श्रीफल- शाल, सूत माला व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।