दिव्य महाराष्ट्र मंडल

कर्मठता व दृढ़ इच्छाशक्ति से सरदार पटेल बने लौहपुरुषः काले

 महाराष्‍ट्र मंडल में लौह पुरुष वल्‍लभभाई पटेल के साथ बृहन्महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले की मनाई गई वर्षगांठ 

रायपुर। स्‍वतंत्र भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी कर्मठता और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर देशभर में लौहपुरुष कहलाए। आज़ादी के बाद के कठिन हालातों में उन्होंने अपनी सूझबूझ और फौलादी इरादों से 562 रियासतों का भारत में विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया। किसानों के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अमूल्य रहा। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर व्‍यक्‍त किए। 

काले ने कहा कि अपने विशिष्ट व्यक्तित्व में कठोरता और करुणा का अद्भुत संगम लिए वे जहां एक ओर राष्ट्रहित प्रथम के पक्ष पर सदैव अडिग थे, वहीं देश की जनता के प्रति वे गहरी संवेदना रखते थे। वे जनता की नब्ज़ समझते थे। सरदार पटेल ने अपने जीवन से सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व, स्पष्ट वक्तव्य, निर्णायक कार्यों, स्थिर बुद्धि, लौह संकल्प और शक्तिशाली निर्णयों से राष्‍ट्र को सशक्‍त बनाया जा सकता है।

मंडल के पदाधिकारियों के साथ अपनी 48वीं वर्षगांठ मना रहे बृहन्‍न महाराष्‍ट्र मंडल के छत्‍तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले ने कहा कि सरदार पटेल साधारण किसान परिवार से थे। बड़े भाई विठ्ठलभाई पटेल व उन्‍होंने अपने- अपने क्षेत्रों में असाधारण काम किया। वल्लभभाई ने अपने भाई के कहने पर विदेश जाकर कानून की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने किसानों के साथ हुए अन्याय को देखकर गांधी जी के आंदोलन में सक्रियता से भाग लेना शुरू किया। 

टोले ने बताया कि बारडोली आंदोलन के बाद वल्‍लभभाई को “सरदार” की उपाधि मिली। फिर चाहे नमक आंदोलन हो या भारत छोड़ो आंदोलन, सरदार वल्लभभाई पटेल हर आंदोलन की रीढ़ बन गए। स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल का योगदान वास्तव में अद्वितीय था। जयंती के मौके पर सचिव चेतन गोविंद दंडवते, मुख्‍य समन्‍वयक श्‍याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्‍वर स्‍कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी, वरिष्‍ठजन सेवा समिति के प्रभारी दीपक पात्रीकर, सांस्‍कृतिक समिति के प्रवीण क्षीरसागर, रंगसाधक समीर टुल्‍लू सहित अनेक लोग शामिल रहे।