जाणता राजा' में छाए महाराष्ट्र मंडल के कलाकार.... सभी ने कहा- जीवन का अद्भुत, अविस्मरणीय और गौरवशाली अनुभव
रायपुर। साइंस कॉलेज मैदान पर 19 फरवरी से मंचित हो रहा महानाट्य ‘जाणता राजा’ एक ऐसा गौरवशाली महानाट्य है, जिसमें कलाकारों के लिए काम करने का आशय अपने रंगमंचीय जीवन को सार्थक कर लेना है। इस बार यह सौभाग्य महाराष्ट्र मंडल के 30 सहित रायपुर के लगभग 40 कलाकारों को मिला है। तीन घंटे के इस महानाट्य में एक भी ऐसा पांच मिनट नहीं गुजरता, जिसमें रायपुर के कलाकार 80 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े रंगमंच पर दिखाई न दें। इनमें से ज्यादातर कलाकार तो पहली बार रंगमंच पर उतरे हैं।

महाराष्ट्र मंडल के कुछ ऐसे भी कलाकार हैं, जो इस नाटक पर काम करने के अनुभव को शेयर करते हुए अपने आंसू रोक नहीं पाते। आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले 18 वर्षों के बाद 'जाणता राजा' में फिर सहभागिता को लेकर गौरवान्वित हैं। आस्था कहतीं हैं कि ऑडिशन में चयन होने और रिहर्सल करने की सूचना मिलते ही भीतर उत्साह जाग गया। चार दिनों तक पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ संवाद, गीत, कव्वाली, डिंडी और लावणी का अभ्यास करने के बाद मंच पर सिद्धहस्त पुणे के कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। वे बतातीं हैं कि उन्हें क्रिश्चियन मां की भूमिका मिली, जो अपने बच्चों के साथ भयभीत रहती है, पर छत्रपति शिवाजी महाराज उसकी सुरक्षा का संदेश भिजवाते हैं। भूमिका छोटी होते हुए भी यादगार रही। यह अनुभव केवल एक नाटक नहीं, बल्कि इतिहास, सम्मान और गौरव से जुड़ी एक अविस्मरणीय यात्रा बन गया।

विशाल राहटगांवकर ने ‘जाणता राजा’ में मराठा और मुग़ल सैनिकों के किरदार निभाए। वे नाटक के अंतिम सीन में, जब छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक होता है, तब एक मावला बनकर ऊपर से देखते है, जो उनके लिए बहुत भावुक क्षण था। गणेशा जाधव पाटिल ने कहा कि 'जाणता राजा' का चार दिवसीय मंचन जीवनभर के लिए अविस्मरणीय, भावनात्मक और प्रेरणादायी रहा। सौभाग्य से मंचन पर उन्हें अपने दोनों बेटों कृष्णाराज और राधे राणा के साथ काम करने का अवसर मिला। बाल राजाराम महाराज बने राधे राणा बताते हैं कि हम बाल कालाकारो को सभी ने बहुत प्रेम से सिखाया और संभाला। हमने खूब मस्ती की। कल शाम को बाल राजाराम महाराज के वेश में लोग हमारे साथ फोटो खींच रहे थे, तो हमें भी बहुत अच्छा लग रहा था। उनके बड़े भाई कृष्णराज के अनुसार ऑडिशन से देकर जाणता राजा में काम करने का हर पल का अनुभव लें कभी नहीं भूल सकते।
महाराष्ट्र मंडल की पर्यावरण समिति के समन्वयक अभय भागवतकर के शब्दों में ‘एक दिव्य स्वप्न का पूर्ण होना था 'जाणता राजा' के लिए चयन होना। नाटक में ज़ब हमें महाराज के मावले अर्थात सैनिक के रूप में मंच पर आना था, यह सोचकर ही दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी। राज्याभिषेक के समय हाथों में मत्स्य (मछली वाला ध्वज) लेकर मंच पर रहे। मंत्रोच्चार के समय आंखों से अनायास ही आंसू निकल गए।

सीए कृति लाड ने महानाट्य में काम करने को लेकर महाराष्ट्र मंडल सहित छत्तीसगढ़ युवा आयोग का आभार माना है क्योंकि इस नाटक के रायपुर में मंचन से न केवल उन्हें रंगमंच पर उतरने का सौभाग्य मिला, बल्कि जन जागरण अभियान को गति भी मिली। पराग दलाल कहते हैं कि ‘जाणता राजा’ को मैंने अपने आप में जिया है। इसमें मैं जीजाऊ माता और शिवाजी के पास रहता हूं। उनके हिंदवी स्वराज के सपनों को जीवंत होता हुआ देखता हूं, तो एक सिपाही के रूप में ही सही, ऐसा लगता है कि वो मेरे सामने ही खड़े होकर कह रहे हो कि जो सपना मैंने देखा है उसे आगे... और आगे लेकर जाने का यह कार्य हम सभी को करना है।
वरिष्ठ अभिनेत्री वर्षा सिन्हा के अनुसार मैंने अब तक अनेक छत्तीसगढ़ी फिल्मों, वेब सीरीज़ और एल्बमों में काम किया है, लेकिन ‘जाणता राजा’ की टीम के साथ काम करने का अनुभव सचमुच अद्भुत और अविस्मरणीय रहा। इस नाटक में अभिनय करते समय ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे बीच उपस्थित हों। मंच की ऊर्जा, संवादों की गूंज और कलाकारों का समर्पण हृदय को स्पर्श कर गया। यह केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास को जीवंत करने का पावन अवसर था, जिसने मुझे कला के प्रति और अधिक समर्पित बना दिया।

वरिष्ठ रंगसाधक शुभांगी आप्टे पति संजय आप्टे के साथ कहती हैं कि ‘जाणता राजा’ में हम दोनों पति- पत्नी को काम करने का अवसर मिलना एक यादगार अनुभव है। महानाट्य की पूरी टीम की जितनी प्रशंसा करें, कम ही होगी। सुप्रिया शेष कहतीं है कि 'जाणता राजा' में काम करने का अमूल्य अवसर अविस्मरणीय है। लगभग 200 कलाकारों के साथ काम करना बहुत अच्छा रहा।
महाराष्ट्र मंडल की सदस्या अर्चना मुकादम ने कहा हैं कि महानाट्य जाणता राजा में राजा, डायरेक्टर, कलाकार, स्टेज अरेंजमेट, सभी अपने आप में जाणता राजा ही हैं। मैंने एक आदमी को 100 लोगों को मैनेज करते देखा। हर पोजीशन के लिए सही व्यक्ति का चयन, एक शांत, फूर्तीला और टैलेंटेड डायरेक्टर के अनुभव से मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिला। सभी आर्टिस्ट अपनी जिम्मेदारी को बखूबी संभाल रहे थे। फीमेल रोल के लिए तीन महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई, वे सक कुछ करने में सक्षम थी।

जाणता राजा में मंडल के कलाकार
आस्था काले, सुप्रिया शेष, आकांक्षा गद्रे, अनन्या दंडवते, कृति लाड, वर्तिका क्षीरसागर, गौरी क्षीरसागर, प्रांजल बक्षी, प्रिया बक्षी, मंजुषा कर्पे, गणेशा जाधव, विशाल राहटगांवकर, अभय भागवतकर, कृष्ण राज जाधव, राधे राणा जाधव, शुभांगी आप्टे, संजय आप्टे, वर्षा सिन्हा, अर्चना मुकादम, वर्षा चौधरी, अमृता शेष, मास्टर पार्थ शेष, पराग दलाल, नीरजा बोधनकर।