सावरकर ने हिंदुत्व को राष्ट्रीयता का आधार बनायाः कालेले
2026-02-26 09:55 PM
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0- महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि
रायपुर। स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर को भारतीयता के मूलस्वर हिंदुत्व के विचार को देश में स्थापित करने का श्रेय जाता है। सावरकर ने हिंदू और हिंदुत्व शब्द को उपासनापरक अर्थ से बाहर निकालकर उसे राष्ट्रीयतापरक अर्थ दिया। हिंदुत्व को राष्ट्रीयता का आधार बनाया, इसीलिए उन्हें हिंदू राष्ट्र का मंत्रदृष्टा कहा जाता है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने गुरुवार, 26 फरवरी को विनायक दामोदर सावरकर की 60वीं पुण्यतिथि के मौके पर कही। बता दें कि वर्ष 1966 में आज ही के दिन 83 साल की उम्र में वीर सावरकर ने मुंबई में आखिरी सांस ली थी।
दंडवते ने कहा कि मां भारती के परिश्रमी और समर्पित पुत्र वीर सावरकर के जीवन से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्पित रहने की शिक्षा मिलती है। उनका साहस, संयम, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना देशवासियों का सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी। सावरकर के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।
वरिष्ठ रंगसाधक अनिल श्रीराम कालेले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल की अपील पर आयुर्वेदिक कालेज मुख्य मार्ग के किनारे स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा नगर निगम की ओर से स्थापित की जाएगी। एमआईसी में इस आशय का प्रस्ताव पारित होने के बाद अब जितनी जल्दी हो सके, प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए, ताकि उसका अनावरण 28 मई को वीर सावरकर जयंती पर किया जा सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत देशपांडे ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के युवाओं को अंडमान-निकोबार के सेल्यूलर जेल भ्रमण कराने की महाराष्ट्र मंडल की अपनी मांग को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल युवाओं को सावरकर के जीवन के बारे में जानने और समझने का मौका देगी।
वरिष्ठ सभासद दीपक पात्रीकर ने कहा कि 1924 में सदाशिव राजाराम रानाडे ने 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर यांचे संक्षिप्त चरित्र' नामक मराठी में उनकी लघु जीवनी लिखी थी। इसमें पहली बार सावरकर के लिए 'वीर' शब्द का उपयोग किया था। पात्रीकर के अनुसार सेल्यूलर जेल में काला पानी की सजा काट रहे विनायक को यह पता नहीं था कि बाजू के सेल में उनके भाई गणेश सावरकर हैं और न ही गणेश को यह बात अपने छोटे भाई के संदर्भ में पता थी।
मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने अपने अंडमान निकाबोर यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि सेल्यूलर जेल को देखने और वहां का लाइट एंड साउंड शो को देखने के बाद पर्यटक स्तब्ध रह जाते हैं। काफी देर तक वहां सन्नाटा रहता है। जब हम अपने आपको सावरकर की जगह रखकर देखते- सोचते हैं, तो मन अशांत हो जाता है। हमें सफर के दौरान ट्रेन में अपर बर्थ मिलता है, तो हम डिस्टर्ब हो जाते हैं। वहां वीर सावरकर साढ़े 13 बाय आठ फीट के सेल में कैसे रहते होंगे, यह सोचकर भी मन थर्रा जाता है।
इस मौके पर संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, भवन प्रभारी निरंजन पंडित, अतुल गद्रे, गौरी क्षीरसागर, मनीषा मुकादम, मनीषा वरवंडकर, सचेतक रविंद्र ठेंगडी, शुभम पुराणिक, कुणाल मिश्रा, अथर्व जोशी सहित अनेक पदाधिकारी व सभासद उपस्थित रहे।