दिव्य महाराष्ट्र मंडल

किशोरों में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले... तीन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

रायपुर। कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा अब बढ़ता जा रहा है। कुछ दिनों पहले तक 40 की उम्र के आसपास के युवा इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे थे, लेकिन बीते 9 मई को राजस्थान के दौसा जिले से एक खबर सामने आई। जिसमें एक 14 वर्षीय बालक की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इतनी छोटी उम्र में हार्ट अटैक काफी चिंता का विषय है। ऐसे में महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु में पीडियाट्रिक/कॉन्जेनिटल कार्डियोलॉजिस्ट और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल सुरेंद्रप्रभु  ने कहा कि सीने में दर्द, बेहोशी, धड़कन तेज होने पर गूगल पर सर्च करने बजाए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। आमतौर पर लोग इसे सामान्य मान लेते है, लेकिन खतरे को कम नहीं आंकना चाहिए।

डॉ. अतुल सुरेंद्रप्रभु  ने कहा कि व्यस्कों में हार्ट अटैक आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल के कारण कोरोनरी आर्टरीज में रुकावट से होता है। बच्चों में इस वजह से हार्ट अटैक आने के मामले असामान्य है। बच्चों में हार्ट अटैक, कॉन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट, कोरोनरी आर्टरीज की एब्नॉर्मेलिटी, कार्डियोमायोपैथी, लॉन्ग क्यूटी (Long QT) सिंड्रोम जैसे दिल की अनियमित की धड़कन (arrhythmias) या मायोकार्डिटिस के कारण अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट होता है।

डॉ. अतुल  ने कहा कि बीमारी की सही समय में पहचान जरूरी है। जागरूकता और स्क्रीनिंग इन मामलों को पकड़ लेती है, जो पहले छूट जाते थे। बच्चों में जेनेटिक बीमारी जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी या असामान्य कोरोनरी आर्टरीज खेल या तनाव के दौरान सामने आती हैं। कोविड के बाद मायोकार्डिटिस भी एक दुर्लभ लेकिन वास्तविक कारक रहा है।

डॉ. अतुल  ने कहा कि स्ट्रक्चरल हार्ट डिफेक्ट, अब्नॉर्मल कोरोनरी हार्ट डिजीज, मारफन सिंड्रोम या जेनेटिक बीमारी, क्यूटी सिंड्रोम आदि प्रमुख कारक होते है। 20-40 साल के युवाओं में, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, फैमिली हिस्ट्री और तनाव के कारण समय से पहले कोरोनरी आर्टरी डिजीज अब पहले की तुलना में ज्यादा आम है।