महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और कार्यकारिणी का कार्यकाल अब तीन वर्षों का
- विशेष संविधान संशोधन सभा: पहली बार होंगे एक महिला एक पुरुष उपाध्यक्ष
- संविधान संशोधन में अध्यक्ष के न रहने पर सलाहकार समिति समूचे मंडल का कार्यभार संभालते हुए दो माह में कराएगी चुनाव
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में रविवार को हुई विशेष संविधान संशोधन सभा में चुनावी प्रक्रिया में होने वाले अधिक आर्थिक भार को देखते हुए अध्यक्ष और कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्षों का करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, जो संशोधन पारित होने के बाद से क्रियाशील होगी। इसी तरह 91 वर्षीय महाराष्ट्र मंडल में अब पहली बार दो उपाध्यक्ष बनाए जाएंगे। इनमें एक पद महिला सभासद के लिए होगा तो दूसरा पुरुष के लिए। इनमें से एक उपाध्यक्ष का पद प्रशासनिक और दूसरा सांस्कृतिक कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा। विशेष संविधान संशोधन सभा में और भी अनेक नियमों को संशोधित कर सामयिक बनाया गया है, तो वहीं कुछ नए नियम में सुनिश्चित किए गए हैं।

नए संशोधित नियम के अनुसार यदि किसी कारणवश अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाए, तो संस्था के उपाध्यक्ष (प्रशासनिक) दो माह की अवधि के लिए अस्थायी अध्यक्ष होंगे। इस अवधि में उन्हें नए सिरे निर्वाचन प्रक्रिया को पूरा करना होगा। बताना जरूरी है कि अस्थायी अध्यक्ष को महाराष्ट्र के नीति निर्धारण का अधिकार नहीं होगा।
विशेष संविधान संशोधन की सभा में एक विशेष सलाहकार समिति बनाने का निर्णय लिया गया। इनमें तीन सदस्य मंडल के पूर्व अध्यक्ष, सचिव व ट्रस्टी (विश्वस्त) होंगे। इनके अलावा महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ही इस समिति के अध्यक्ष होंगे। सचिव भी सलाहकार समिति में सचिव के पद पर ही होंगे। अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर यह समिति महाराष्ट्र मंडल की प्रशासनिक व्यवस्था संभालने और चुनाव कराने के लिए सक्रिय हो जाएगी।

महाराष्ट्र मंडल ने किया 500% ग्रोथ
विशेष संविधान संशोधन सभा के उपरांत सर्व साधारण सभा (एजीएम) हुई। इसमें मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने मंडल की बीते कार्यकाल में हुए सामाजिक कार्यों, सियान गुड़ी के सफल संचालन की जानकारी साझा की। वहीं आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि मंडल ने वर्ष 2010 से लेकर वर्ष 2025 तक करीब 500 प्रतिशत का ग्रोथ किया। उन्होंने मंडल के इस ग्रोथ का श्रेय मंडल की समितियों के सदस्यों और मंडल के स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा कि यही वो दो कड़ी हैं, जो सीधे तौर पर आम जनमानस से जुड़ी है। बैठक के अंत में मंडल के दिवंगत सदस्यों को आदरांजलि अर्पित की गई।