शहरी हो या वनवासी, हम सब है भारतवासीः डा. सुनीता गोडबोले
2026-05-29 05:08 PM
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 32 वर्षों से वनवासियों की सेवा के प्रतिफल के रुप में पद्मश्री पुरस्कार के पुरस्कृत डा. सुनीता गोडबोले ने कहा कि शहरी हो ग्रामवासी या वनवासी, इन सबसे से पहले हम सभी भारतवासी है। सुनीता ने कहा कि 32 साल पहले वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से जब हम दोनों यहां अपनी सेवाएं देने पहुंचे तो हमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वनवासियों में यह भावना जगाने के लिए हम उनके शुभचिंतक है, मुझे मडिया बोली सिखनी पड़ी। स्थानीय बोली के कारण वनवासियों को हमारे साथ अपनापन महसूस हुआ। बतादें कि दिल्ली से राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार लेने के बाद पहली बार वे महाराष्ट्र मंडल पहुंची थी।
पुणे में एमएलडब्लू कोर्स करने के बाद शादी हुई। और शादी के कुछ दिनों बाद छत्तीसगढ़ पहुंच समाजसेवा में जुट गई। डा. सुनीता गोडबोले ने अपने सहज और सरल अंदाज में कहा कि वनांचल ही नहीं शहरों में भी संवेदनशील रहते है। आज उन्हें सही दिशा दिखाने की जरूरत है। अभवाग्रस्त, वंचितों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहना चाहिए। मानव जीवन की यही सार्थकता है।
सुदूर वनांचल में रह रहे आदिवासी आज भी पढ़े लिखे, सूट बूट पहने वालों से बात करने में हिचकते है, संकोच करते है। इन लोगों को हमारी जरूरत है। राष्ट्रीय सेवा योजना, माय भारत के युवा या अन्य कोई सेवाभावी संगठन को उनकी सेवा के लिए वनांचल तक पहुंचना चाहिए।