अहिल्याबाई न्याय और संघर्ष का पर्याय... जीवन में आत्मसात करने की जरूरत
2026-05-31 02:25 PM
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- महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई अहिल्याबाई की जयंती
रायपुर। पुण्यश्लोका लोकमाता महारानी अहिल्या बाई होल्कर का संपूर्ण जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित रहा। वह न केवल इंदौर की महारानी थी, बल्कि न्यायप्रिय, धार्मिक और निष्पक्ष प्रशासक भी थी। उन्होंने देश भर के धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए जो कार्य किए वह आज के समाज के लिए भी प्रेरणादायी है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने पुण्यश्लोका अहिल्या बाई के जयंती पर महाराष्ट्र मंडल के मिनी हाल में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हुए तोपखानेवाले ने अहिल्या बाई के जीवन से जुड़ी उनकी न्यायप्रियता की लोककथा का वर्णन करते हुए कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर मालवा साम्राज्य की महान और न्यायप्रिय शासिका थी। उनके पुत्र का नाम मालेराव होल्कर था मालेराव के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध घटना उनके न्याय की है। एक बार मालेराव का रथ जा रहा था और उसके पहिये के नीचे आकर एक गाय का बछड़ा घायल हो गया। जब यह बात अहिल्याबाई को पता चली, तो एक निष्पक्ष शासक और मां के रूप में उन्होंने अपने बेटे को वहीं सजा देने का फैसला किया जो एक आम अपराधी को मिलती। उन्होंने मालेराव को उसी रथ के नीचे कुचलने का आदेश दिया था, हालांकि बाद में गाय की मां के आग्रह पर और एक प्रायश्चित के रूप में उस फैसले को बदल दिया गया था।
इससे पूर्व महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने देवी अहिल्या के तैलचित्र पर सूत की माला पहनाई और तिलक लगाकर पूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मंडल के आजीवन सभासद और कार्यकारिणी उपस्थित थीं।