दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘धर्मसभा में व्‍यासपीठ से हो रक्तदान, नेत्रदान और देहदान के लिए आह्वान’

-  मराठी मेले में तीसरे दिन सर्वसमाज की संगोष्‍ठी में सर्वसम्‍मत विचार- बड़े पैमाने पर चलाया जाए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान

रायपुर। किसी जाति- धर्म, संप्रदाय की धर्मसभा, प्रवचन स्‍थल से यदि हमारे धर्मगुरु अथवा प्रवचनकर्ता रक्‍तदान, नेत्रदान अथवा देहदान का आह्वान करें, तो जागरूकता की दृष्टि से इसका लोगों पर सर्वाधिक असर पड़ेगा। इस आशय के विचार डॉ. मनीष शरण श्रीवास्‍तव ने व्‍यक्‍त किए। वे महाराष्‍ट्र मंडल के मराठी सोहळा (मेला) में तीसरे दिन आयोजित सर्वसमाज की संगोष्‍ठी में अपने विचार व्‍यक्‍त कर रहे थे।

डॉ. श्रीवास्‍तव ने कहा कि यदि धर्मसभा में व्‍यासपीठ से यह समझाया जाए कि नेत्रदान अथवा देहदान के बाद भी अंतिम क्रियाएं पूरी की जा सकती हैं और मोक्ष नहीं मिलने की बात पूरी तरह भ्रामक है। इससे बहुत पैमाने पर लोगों में इसे लेकर जागरूकता आएगी और वे इसके लिए तैयार होंगे। नाना पाटेकर को अपना रक्‍तदान समर्पित करने के बाद डॉ. श्रीवास्‍तन ने कहा कि नेत्रदान अब तो बेहद आसान हो गया है और फार्म भी नहीं भरना पड़ता। उन्‍होंने कहा कि देहदान को लेकर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है, खासकर इसकी प्रक्रिया आसान बनाई जानी चाहिए। 

बढ़ते कदम के संयोजक इंदर डोडवानी ने कहा कि मरीजों व उनके परिजनों की सर्वाधिक भीड़ डॉ. आंबेडकर हॉस्पिटल में जुटती है इसलिए यहां न सिर्फ जागरूकता के सर्वाधिक कदम उठाए जाने चाहिए, बल्कि नेत्रदान व देहदान के लिए तत्पर टीम तैनात की जाने चाहिए, ताकि लोगों को इसके लिए परेशान न होना पड़े। इसी तरह नेत्रदान और देहदान करवाने वाले परिवारों का बड़े मंचों पर सार्वजनिक सम्‍मान किया जाना चाहिए। इससे लोग प्रोत्‍साहित व प्रेरित होंगे। कान्‍य कुब्‍ज समाज के राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि रक्‍तदान आज भी समाज की बड़ी समस्‍या है। कई लोग अन्‍य समाज व साधारण रक्‍त दाताओं का रक्‍त लेने से मना कर देते हें। इसलिए रक्‍तदान, देहदान के लिए व्‍यापक प्रचार अभियान शुरू करना चाहिए।

भाजपा की प्रदेश प्रवक्‍ता व महाराष्‍ट्र मंडल की वरिष्‍ठ सभासद शताब्‍दी पांडे ने कहा कि रक्‍तदान को लेकर महिलाओं के भ्रम को दूर करने की जरूरत है। छत्‍तीसगढ़़ फिल्‍म इंडस्‍टी के निर्माता विजय कुमार साहू के अनुसार बड़े आयोजनों, समारोहों में नेत्रदान व देहदान को प्रमोट किया जाना चाहिए, इससे लोग अधिक प्रभावित होंगे। उज्‍जैन से पधारे रंगकर्मी प्रशांत सहस्‍त्रबुद्धे कहा कि नेत्रदान, देहदान को लेकर हो रही परेशानियों को पीएम फोरम में डालने से उसकी त्‍वरित सुनवाई होती है। हमें इसका लाभ लेना सीखना चाहिए।

बृहन्‍महाराष्‍ट्र मंडल के राष्‍ट्रीय महासचिव व महाराष्‍ट्र मंडल के पूर्व अध्‍यक्ष शेखर रावसाहेब अमीन ने कहा कि नेत्रदान व देहदान को लेकर मोटिवेशन व अवेयरनेस की कमी है। स्‍वास्‍थ्‍य शिविरों के माध्‍यम से भी इस दिशा में बहुत अधिक काम करने की जरूरत है। तीनों दान के लिए जागरूकता अभियान में सबसे पहले युवाओं को जोडने की जरूरत है क्‍योंकि इसमें आमतौर पर 50 साल से अधिक आयु के लोग ही दिखाई देते हैं। डॉ. कमल वर्मा के मुताबिक जो वरिष्‍ठ नागरिक वृद्धाश्रम में रहते हैं या जिनके बच्‍चे अपने अभिभावकों को छोड़कर विदेशों में जा बसे हैं, ऐसे बुजुर्गों से देहदान कराने को लेकर फोकस किया जाना चाहिए। देहदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कानून को सरलीकृत भी किया जाना चाहिए।

रोटरी क्‍लब मध्‍य रीजन के पूर्व गवर्नर, महाराष्‍ट्र मंडल के वरिष्‍ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर के अनुसार अगर कहीं जरूरत से ज्‍यादा रक्‍त दान में मिल गया, तो वो उस खून का क्‍या करेंगे, क्या दूसरी जरूरतमंद संस्‍था अथवा अस्‍पताल को देंगे, इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है। इस भी ध्‍यान देने की जरूरत है। घर की महिला सदस्‍य के लिए खून इकट्ठा कर रहे परिवार से जब रक्‍तदान करने का आग्रह किया जाता है, तो वो उसे वहीं छोड़कर भाग जाता है। ऐसे देश में रक्‍तदान के लिए कितने अधिक और कहां- कहां जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

सीमेंट कंपनी के सेवानिवृत्‍त अधिकारी विनय काले ने कहा कि नुक्‍क्‍ड़ नाटक, चौपाल चर्चा जैसे माध्‍यमों से रक्‍तदान को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। देहदान को लेकर शहरों में भी लोगों को अवेयर करना होगा। प्रतिदिन रायपुर में सौ से अधिक लोगों की मौत होती है, इनमें से पांच शव भी दान वाले नहीं होते। जबकि प्रतिदिन देहदान और नेत्रदान करने वालों को अखबार कें माध्‍यम से भी भरपूर प्रचार- प्रचार व सम्‍मान मिलना चाहिए। संगोष्‍ठी में महाराष्‍ट्र मंडल के अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने अध्‍यक्षीय संबोधन दिया। वहीं संचालन उपाध्‍यक्ष गीता श्‍याम दलाल ने किया। महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, भवन प्रभारी निरंजन पंडित, दिव्‍यांग बालिका विकास गृह प्रभारी मालती मिश्रा, संत ज्ञानेश्‍वर स्‍कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, विक्रम हिशीकर, गणेशा जाधव पाटिल, श्‍याम दलाल, मंगल जाधव पाटिल सहित अनेक लोग संगोष्ठी में उपस्थित रहे।

सुझाव

:- जिन अस्‍पतालों व मेडिकल कॉलेजों में नेत्रदान और देहदान किया गया हो, वहां दान करने वालों के नाम उस पूरे दिनभर इलेक्‍ट्रॉनिक बोर्ड पर हाईलाइट किए जाने चाहिए।    

:- कॉलेजों में प्रति वर्ष वार्षिकोत्‍सव के दौरान रक्‍तदान शिविर लगाकर युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए वहां दो सप्‍ताह पहले ही प्रचार-प्रसार कर लोगों को शिविर के दिन बुलाना चाहिए।

:- गांव- गांव में प्रचार- प्रसार करके रक्‍तदान को लेकर जागरूकता अभि‍यान चलाने की जरूरत है, ताकि वहां रक्‍तदान वाली बसों को भेजकर ग्रामीणों को इसके लिए प्रोत्‍साहित किया जा सके। 

:- नेत्रदान व देहदान का फार्म भरने वालों को सार्वजनिक मंचों व सम्‍मानित किया जाना चाहिए और उनके ही माध्‍यम से भी इसे लेकर अभियान चलाना चाहिए।

:- जो वरिष्‍ठ नागरिक वृद्धाश्रम में रहते हैं अथवा जिनके बच्‍चे विदेशों में जाकर बस गए हैं, उन्‍हें पहले ही नेत्रदान व देहदान के लिए सहमत कर फार्म भरवा लेना चाहिए।

:- रायपुर में सबसे पहले देहदान करने वाले दुर्गा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य, शिक्षाविद और पूर्व मंत्री रणवीर सिंह शास्‍त्री की प्रतिमा लगाकर लोगों को इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। 

:- धार्मिक मान्‍यताओं के आधार पर देहदान व नेत्रदान करने से रोकने वालों को समझाना चाहिए कि दधीचि ने सृष्टि का पहला देहदान दिया था, तो ये कैसे अव्‍यवहारिक, असंगत, अधार्मिक हो सकता है।