दिव्य महाराष्ट्र मंडल

रामदास स्वामी की धोती से शिवाजी महाराज ने बनाया ध्वज, महाराष्ट्र मंडल में की गई छत्रपति महाराज की महाआरती

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में शनिवार की शाम को छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती की गई। प्रति माह 19 तारीख को मंडल में होने वाली आरती में विभिन्न समितियों और प्रकल्पों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल होते हैं। 
 
आज महाआरती के मौके पर वरिष्ठ आजीवन सभासद दीपक पात्रीकर ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू साम्राज्य के प्रतीक थे। उनके साम्राज्य का राष्ट्रीय नारंगी ध्वज हिंदुत्व का प्रतीक था। इस ध्वज से अपने गुरु के प्रति उनके सम्मान की झलक भी मिलती है। पात्रीकर ने कहा कि शिवाजी महाराज ने समर्थ रामदास स्वामी से बहुत सी शिक्षा ग्रहण की। एक बार उनके साम्राज्य में शिवाजी महाराज ने रामदास स्वामी को भीख मांगते हुए देख लिया। उन्होंने अपने गुरुवर को महल बुलवाया और उनके कदमों पर गिरकर फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने रामदास स्वामी से कहा कि आप मेरा पूरा साम्राज्य ले लीजिए लेकिन फिर कभी भीख मत मांगना। मैं आपको भीख मांगते हुए नहीं देख सकता।
 
दीपक पात्रीकर ने कहा कि शिवाजी महाराज ने समर्थ रामदास से महल में रहने की जिद पकड़ ली। छत्रपति शिवाजी को दुखी- व्यथित देख गुरुवर रामदास ने उन्हें समझाया कि सांसारिक जीवन त्यागने के बाद अब उन्हें महल में रहने जैसा ऐश्वर्या शोभा नहीं देता। रही बात उन्हें याद करने की, तो इसके लिए उन्होंने आशीर्वाद स्वरुप अपनी धोती का एक टुकड़ा फाड़कर शिवाजी महाराज को दिया और कहा कि आप इसे अपना राष्ट्रीय ध्वज बना लो। इस ध्वज के माध्यम से तुम्हें मेरा आशीर्वाद मिलेता रहेगा और मेरी याद भी हमेशा तुम्हारे मन मस्तिष्क में बनी रहेगी। महाआरती पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय काले, उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के सह प्रभारी परितोष डोनगांवकर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।