महज 9 साल की देविका ही थी... जिसके हौसले ने कसाब को फांसी तक पहुंचाया... शिवानी स्मृति सेवा संस्थान ने किया बहादुर बेटी का सम्मान
2023-08-21 07:24 PM
527
रायपुर। मुंबई आतंकी हमले 26/11 की 15वीं बरसी आने वाली है। साल 2008 में जब यह हमला हुआ था, आतंकी अजमल कसाब अपने 10 साथियों के साथ मुंबई में लाशों की ढेर बिछा रहा था। उसकी गोलियों से 168 निर्दोष लोगों के साथ ही 8 पुलिस वालों की भी जान चली गई थी। उस आतंकी हमले का निशाना एक 9 साल की मासूम देविका रोटावन भी बनी थी, लेकिन गनीमत था कि वह गोली उसके पैर पर लगी। तब की मासूम बहादुर बेटी देविका अब 24 बरस की हो चुकी है, जिसका बहादुर बेटी के तौर पर इस बार शिवानी स्मृति सेवा संस्थान, रायपुर ने सम्मान किया।
देश के उस काले इतिहास के पन्नों को पलटते हुए देविका ने बताया कि पैर पर गोली खाने के बावजूद उसने उस आतंकी का चेहरा देख लिया था। उस समय देविका ही एकमात्र चश्मदीद गवाह थी, जिसने अजमल कसाब को मौत का तांडव करते देखा था। गोली लगने से देविका बेहोश हो गई। उसका ऑपरेशन हुआ, महीनों उसे बैसाखी के सहारे चलना पड़ा। उसका खेलना—कूदना सब बंद हो गया।
इस बीच पुलिस ने कसाब को दबोच लिया था। उसके खिलाफ कोर्ट की कार्रवाई चल रही थी और चश्मदीद गवाह की जरुरत थी। ऐसे में देविका और उसके पिता ने हौसला दिखाया और आतंकी की पहचान के लिए कोर्ट जाने के लिए तैयार हो गए। इस बीच जान का खतरा भी बना हुआ था, लेकिन देविका के हौसले की वजह से आखिरकार कसाब को फांसी की सजा हुई।
देविका के इस हौसले को देखते हुए शिवानी स्मृति सेवा संस्थान, रायपुर ने मैक कॉलेज सभागार, समता कॉलोनी रायपुर में सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस दौरान भजन संध्या भी आयोजित की गई। संस्थान के अध्यक्ष मुकेश शाह ने बताया कि इस सम्मान समारोह के लिए देविका रोटावन को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। शाह ने बताया कि देश की बहादुर बेटी का खिताब पाने वाली देविका के हौसले और साहस के लिए रतन टाटा और अमिताभ बच्चन ने भी उसका सम्मान किया है।