महाराष्ट्र मंडल में शहीद राजगुरु की... सादगी से मनाई गई जयंती... बलिदान को किया गया स्मरण
2023-08-25 10:11 AM
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रायपुर। महाराष्ट्र मंडल ने गुरुवार को शिवराम हरी राजगुरु की जयंती सादगी से मनाई और भारत की आजादी के लिए उनके बलिदान का स्मरण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता, महाराष्ट्र नाट्य मंडल के सचिव प्रसन्न निमोणकर ने कहा कि जलियांवाला बाग सामूहिक नरसंहार के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने तय कर लिया था कि इस नरसंहार का आदेश देने वाले जेपी सांडर्स का वध तो करना ही है। यही से देश को हर हाल में आजाद करने की भावना प्रबल और वेगवान हुई थी।
उन्होंने उनके जज्बे को याद करते हुए बताया कि शिवराम हरी राजगुरु इतने सटीक निशानेबाज थे कि उन्होंने जेपी सांडर्स को साइकिल की आड़ में बहुत दूर से दो आंखों के बीच पहली गोली मारी थी। इससे वहीं उनकी मौत हो गई थी। हालांकि एक-दो गोलियां और उन्होंने सांडर्स के गिरने से पहले दागी थी। गोली चलाने के बाद जेपी सांडर्स से राजगुरु इतने दूर थे कि बड़ी आसानी से साइकिल से भाग सकते थे। लेकिन उन्होंने अपनी गिरफ्तारी देना ज्यादा जरूरी समझा, ताकि लोगों को बता सकें कि आखिर संडार्स को क्यों मारा गया।
निमोणकर ने कहा कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का प्रभाव आम जनमानस पर इतना अधिक था कि ब्रिटिश सरकार उनको फांसी देने से सहमी हुई थी। उन्हें डर था कि अगर जेल के अंदर तय समय पर तीनों को फांसी दी गई, तो जेल से बाहर भीड़ बेकाबू हो सकती है। भयानक उपद्रव हो सकता है। यही वजह है कि इतिहास की एकमात्र फांसी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 की शाम को दी गई। जबकि अलिखित नियम प्रातः काल में फांसी देना का है।
निमोणकर ने बताया की शिवराम हरी राजगुरु अल्प आयु में शिक्षा, खासकर संस्कृत सीखने के लिए बनारस रवाना हुए। उसके बाद वे कभी घर नहीं लौटे। चंद्रशेखर आजाद के देश की आजादी के लिए किये जा रहे कार्यों और आंदोलन से राजगुरु बेहद प्रभावित थे और उनकी हिंदुस्तान सोशलिस्ट पार्टी में वे शामिल हो गए। प्रसन्न ने कहा कि भगत सिंह और सुखदेव के साथ राजगुरु भरी असेंबली में पटाखा बम फोड़ने में भी सहभागी थे। इस बम से कोई आहत नहीं हुआ था। दरअसल यह हरकत तीनों ने ब्रिटिश सरकार को भारत वासियों पर किए जा रहे अत्याचार से सचेत करने और सोई हुई सरकार को जगाने के लिए किया था। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन ने किया।
इस मौके पर मंडल के अध्यक्ष अजय काले, सचिव चेतन दंडवते, परितोष डोनगांवकर, पर्यावरण समिति के अध्यक्ष अभय भागवतकर, प्रशांत देशपांडे, विभिन्न समितियों के प्रभारी, सदस्य, समाजसेवी अशोक साहू और उनके साथी उपस्थित रहे।