संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की शिक्षिकाओं ने सीखा... क्ले से कैसे निखरती है निर्माण कला... अब बच्चों को सिखाएंगी
2023-08-27 11:37 AM
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रायपुर। विज्ञान की वजह से इंसान के जीवन में कई बड़े बदलाव आए हैं। इसके चमत्कार को किन्हीं भी परिस्थितियों में नकारा नहीं जा सकता। यह एक सच्चाई है कि देश और दुनिया में आज जो घटित हो रहा है, युगों पहले हमारे ऋषि—मुनियों से मंत्रों के माध्यम से उसे प्रतिपादित कर दिया था, लेकिन वर्तमान युग में विज्ञान ने उन चीजों को परिष्कृत किया है, यह भी उतनी ही बड़ी सच्चाई है, जिसकी वजह से जीवन आसान हो गया है।
जिन घरों में बच्चे है, स्कूल जाने लगे है या फिर बड़ी कक्षाओं में पहुंच चुके हैं, उन घरों में 'क्ले' का उपयोग होता ही है। इस क्ले के जरिए बच्चे अपनी सोच के मुताबिक कई तरह की आकृति का निर्माण कर लेते हैं। वास्तव में 'क्ले' कला को निखारने की चीज है, जिसका सही उपयोग किया जाए, तो अद्भूत तरीके से मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। इससे जहां बच्चों का मनोरंजन हो जाएगा, तो उन्हें निर्माण की शिक्षा भी मिल जाएगी।
इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजधानी के एक निजी होटल में 'क्ले' से निर्माण के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। इस वर्कशॉप में संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की शिक्षिकाएं सुदेवी विश्वास और विनीता सुंदरानी भी शामिल हुईं, जिन्होंने 'क्ले' के माध्यम से बनने वाली विभिन्न आकृतियों को बनाना सीखा, तो विज्ञान के मॉडल बनाने में 'क्ले' की भूमिका को जाना।
इन दोनों ही शिक्षिकाओं ने बताया कि 'क्ले' के माध्यम से साइंस से संबंधित आइटम भी बनाना सिखाया गया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार से आप क्ले का उपयोग करके बच्चों को विभिन्न प्रकार की एक्टिविटी सीखा सकते हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि इससे बच्चों को नई चीजों का ज्ञान दिया जा सकता है और शिक्षा को रोचक बनाया जा सकता है।