दिव्य महाराष्ट्र मंडल

आचार्य चेतन दंडवते ने कहा... 6—7 सितंबर की मध्यरात्रि ही... भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की है सुखद बेला

रायपुर। भाद्रपक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र हर साल आने वाली एक ऐसी शुभघड़ी, जिसका हर किसी को इंतजार होता है। दरअसल, यही वह घड़ी थी, जब जगत पालनहार भगवान विष्णु ने द्वापर युग में भगवान कृष्ण के रूप में इस धरती पर अवतार लिया था। कलयुग में श्री​हरि का नाम ही अपने आप में भव्य यज्ञ के समान माना गया है। 

इस साल भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव 6 सितंबर को मनाया जाएगा। महाराष्ट्र मंडल के सचिव और आचार्य चेतन दंडवते ने बताया कि जन्मोत्सव को लेकर भ्रमित होने की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं है। भाद्रपक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का सुखद संयोग 6 सितम्बर की मध्यरात्रि को ही होना है, ऐसे में जन्माष्टमी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाना और जन्मोत्सव 6—7 सितंबर की मध्यरात्रि को मनाया जाना ही श्रेयष्कर होगा। 

आचार्य दंडवते ने बताया कि अष्टमी तिथि को लेकर 6 और 7 सितंबर की तिथि बताई जा रही है, लेकिन 7 सितंबर उदय तिथि होगी और मध्यरात्रि से पूर्व ही रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो जाएगा, ऐसे में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सार्थक होना संभव नहीं है।