मस्जिद की ओर से जेल में बंद कारसेवकों पर फेंका जाता था पत्थर... जेल की बाड़ी (खेत) आलू के पौधों के ऊपर डाला गया गद्दा
2024-01-19 01:23 PM
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सुधाकर दिनकर देशमुख, आजीवन सभासद महाराष्ट्र मंडळ रायपुर
रायपुर। श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट के आह्वान पर 1990 में हुई कारसेवा में गए तात्यापारा रायपुर निवासी सुधाकर दिनकर देशमुख कहते है कि उन दिनों को याद करते हुए आज गौरवान्वित महसूस कर रहे है। वे बताते है कि जब कारसेवकों के लिए बनाए अस्थाई जौनपुर जेल में हमे रखा गया तो वहीं पास में एक मस्जिद थी। जेल में गुजाते सात दिनों के दौरान रोजाना उसी ओर से हम कारसेवकों पर पत्थर फेंका जाता था। आज अयोध्या में रामलला विराजमान हो रहे है, ऐसे में रामनाम के इस महायज्ञ में खुद की सहभागिता को याद करते हुए मन प्रफुल्लित हो जाता है।
सुधाकर दिनकर देशमुख ने बताया कि 1990 में हम तात्यापारा से एक बस में सवार होकर करीब 50 लोग कारसेवा करने गए थे। मेरे साथ मेरे मित्र स्व. कमलाकर कुसरे भी थे। हम दोपहर 3 बजे रायपुर से रवाना हुए। दूसरे दिन हनुमना बार्डर यूपी पहुंचे। जहां पहले से मौजूद पुलिस के जवानों ने हमे रोक लिया। और कहां आप सभी लखनऊ ले जाया जाएगा। इस दौरान तीन घंटे तक हम सभी भूखे प्यासे हनुमना बार्डर पर बैठे रहे। तीन घंटे बाद हमें कहा गया कि लखनऊ जेल में जगह नहीं है, इसलिए अब आप लोगों को जौनपुर जेल ले जाया जाएगा।
खैर हमें जौनपुर ले जाया गया। देर रात करीब तीन बजे हम जौनपुर पहुंचे। लेकिन हमें जेल के अंदर प्रवेश सुबह 7 बजे मिला। जौनपुर में बने अस्थाई जेल में भी कारसेवकों की भीड़ काफी अधिक थी। जेल के अंदर उस समय आलू की खेती की जाती थी, उन खेतों पर खुले में गद्दा बिछा दिया गया। हमें उसमें रहने को कहा गया। पहली ही रात में गद्दे जमीन की नमी और ओस से भींग गए। फिर बाकि के दिन हमें इन्हीं गीले गद्दों में रात गुजारनी पड़ी। हमें कैदियों की तरह लाइन में लगकर खाना लेना पड़ता था। इस दौरान हमें अयोध्या में हुई गोलीबारी की सूचना मिली।
सुधाकर देशमुख ने एक ओर घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां जेल के डाक्टर सोनीजी हुआ करते थे। तीसरे दिन अचानक वह आए हम लोगों से पूछने लगे कि रायपुर-भिलाई से यहां कोई है क्या? मैंने कहा कि हां मैं रायपुर से आया हूं। तब उन्होंने कहा कि आप मेरी थोड़ी मदद कर सकते है क्या? मैंने हा कर दी। तो उन्होंने बताया कि उनका कोई रिश्तेदार भिलाई में रोड एक्सीडेंट का शिकार हो गया है। अब वह कहा है पता नहीं चल रहा है। मैंने कहा मुझे मेरे घर फोन लगाने दीजिए मैं एमआर हूं, दो घंटे में आपकी जानकारी अपडेट कर दूंगा।
डा. सोनी ने मुझे घर फोन लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई। फिर मैंने घर पर अपना कुशलक्षेम दिया और अपने एक परिचित तो घटना के संबंध में जानकारी लेने को कहा। तो उनसे मुझे बताया कि भिलाई में उक्त दिन रोड एक्सीडेंट हुआ है और जो घायल है उसका सेक्टर-9 में उपचार चल रहा है। मैंने यह सूचना डा. सोनी को दी। जिसके बाद जेल में गुजारे हमारे दिन कुछ अच्छे से कटे। 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक हमें जेल में रखा गया। जेल के रिहाई के बाद हमें जेलर ने प्रमाणपत्र जारी किया। जिसे मैंने आज भी संभालकर रखा है।