शिवाजी महाराज के जीवन मूल्यों की संपूर्ण व्याख्या आज भी अधूरी: निमोणकर
2024-02-26 05:34 PM
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रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज ने 394 साल पहले अपने जीवन मूल्य जो निर्धारित किए गए थे, उसकी संपूर्ण व्याख्या आज भी अधूरी ही है। अपने 50 साल के दिव्यमान जीवनकाल में उन्होंने अपनी मां जिजाऊ बाई जिन्हें वे आई साहेब भी कहते थे, के हिंदवी स्वराज के सपने को न सिर्फ पूरा किया बल्कि कटक से अटक तक भगवा पताका फहराते हुए मुगल साम्राज्यों को मराठा शक्तियों से भली-भांति परिचित भी कर दिया। महाराष्ट्र नाट्य मंडल के सचिव प्रसन्न निमोणकर ने इस आशय के उद्गार मराठा समाज के छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर व्यक्त किए।
निमोणकर ने कहा कि हिंदवी स्वराज के स्वप्न को साकार करने के लिए शिवाजी महाराज ने 15 साल की आयु में पुणे के पास स्थित तोरण दुर्ग को आदिल शाह की सेना से छीनकर वहां भगवा पताका फहरा दिया था। हिंदवी स्वराज को लेकर उनकी जिद और जुनून का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। निमोणकर के मुताबिक शिवाजी महाराज ने अपने जीवन काल में 300 किलों का निर्माण अथवा पुनर्निर्माण करवाया और वहां पर शासन भी किया। उन्होंने हिंदवी स्वराज का कोंकण से सहाद्री तक और खानदेश से तंजावुर तक विस्तार किया।
हजारों श्रोताओं के भीड़ भरे जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रसन्न विजय निमोणकर ने कहा कि 20 नवंबर 1659 को 29 वर्ष की आयु में प्रतापगढ़ किले की तराई में स्थित जवाली की छावनी में बीजापुर सुल्तान आदिलशाह के सबसे विश्वसनीय और ताकतवर सिपहसालार अफजल खान का छत्रपति शिवाजी महाराज ने वध किया था। दरअसल अफजल खान ने आदिल शाह के दरबार में शिवाजी महाराज को पहाड़ी चूहा कहकर उनका उपहास किया था और आदिल शाह से दंभ भरे अंदाज में शिवाजी महाराज को चूहे की तरह पकड़ कर लाने का वादा किया था। अफजल खान ने मराठा साम्राज्य के करीब पहुंचकर वाई में अपना डेरा डाला, तो उसे समझ में आ गया था कि शिवाजी महाराज की सामरिक क्षमता और सैनिकों के जबरदस्त हौसलों के बीच वह अपनी 30 हजार की सेना के साथ जीत नहीं कर सकता। अंततः उसने संधि की आड़ में शिवाजी महाराज की हत्या करने का षड्यंत्र रचा। निमोणकर के अनुसार शिवाजी महाराज पहले ही अफजल खान की षड्यंत्र को समझ चुके थे। फिर भी वह अपने दो अंगरक्षकों के साथ नि:शस्त्र अफजल खान के पास चर्चा करने के लिए चले गए। अफजल खान ने अपने पास कटार छुपाकर रखा था। सात फीट से भी ऊंचे अफजल खान ने पहले तो कटार से शिवाजी महाराज की सर पर वार किया। लेकिन सिर पर मजबूत टोप की वजह से उसका वार बेकार हो गया, तो उन्होंने शिवाजी महाराज को बाहों में पूरी ताकत से जकड़ कर उनकी पसलियां को तोड़ने का प्रयास किया। वैसे तो शिवाजी महाराज छोटे कद के थे, लेकिन उनमें सैकड़ों हाथियों का बल विद्यमान था, ऐसी प्रचलित मान्यता है, फलस्वरुप अफजल खान का यह प्रयास भी विफल हो गया। इधर हथेली में बाघनखा छिपकर ले गए शिवाजी महाराज ने अफजल खान से गले मिलने के बहाने उनकी अतड़ियां बाघनखे से फाड़ दी। जिससे वह वहीं पर ढेर हो गया।
प्रसन्न निमोणकर ने बताया कि इसके बाद शिवाजी महाराज की मावली मराठा सैनिकों ने अफजल खान के एक-एक सैनिक को मार डाला। शिवाजी महाराज के युद्ध कौशल, नेतृत्व कौशल और रणनीति बनाने के कौशल के ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिनकी संपूर्ण चर्चा की जाए, तो समय काम पड़ेगा। निमोणकर के व्याख्यान के बीच कई बार उत्साहित दर्शकों ने तालियां बजाई और शिवाजी महाराज का जय घोष किया। इस बीच मराठा समाज की प्रतिभाओं की ओर से रंगारंग संस्कृति कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।