महाराष्ट्र मंडल ने मनाई छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि... मंडल अध्यक्ष बोले- मुगलों के साम्राज्य विस्तार के बड़े बाधक थे संभाजी
2024-03-11 09:55 PM
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रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज के बड़े बेटे छत्रपति संभाजी महाराज मुगल साम्राज्य के विस्तार में सबसे बड़े बाधक थे। सन् 1682 से 1688 के बीच दक्कन पर कब्जा करने के लिए औरंगज़ेब ने रामशेज किले पर कई बार हमला किया लेकिन हर बार उसे दबे पांव लौटना पड़ा था। सबसे पहले जब औरंगजेब ने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में दक्कन में प्रवेश के लिए हमले की योजना बनाई, तो इसकी भनक संभाजी को लग गई और उन्होंने औरंगजेब पर पहले ही हमला कर दिया और रामशेज किले पर कब्जा कर लिया। यह मुगलों के लिए बड़ा झटका था। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सोमवार को छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि कार्यक्रम में इस आशय के विचार व्यक्त किए।
चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में आयोजित इस कार्यक्रम में काले ने कहा कि संभाजी महाराज जितने मुगलों को खटकते थे, उतने ही पुर्तगालियों की आंखों के भी कांटा थे।क्योंकि गोवा में पुर्तगालियों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संभाजी महाराज की सेना बेहद आक्रामक थी। उन पर लगातार छापामार युद्ध करके उन्हें कमजोर कर रही थी। काले ने कहा कि यही वजह था कि एक समय में पुर्तगालियों ने मुगलों से हाथ मिला लिया था।
महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल कालेले ने कहा कि छत्रपति संभाजी महाराज की सबसे बड़ी ताकत उनके सेनापति और प्रिय मित्र हंबीराव मोहिते थे। साल 1687 में वाई की लड़ाई में सेनापति मोहिते मारे गए। इससे न केवल मराठा सेना का मनोबल टूट गया, बल्कि संभाजी महाराज भी विचलित हो गए। धीरे-धीरे उनके सैनिक साथ छोड़कर जाने लगे। कई रिश्तेदारों ने उन्हें धोखा दिया। अंततः 1689 में मुगल सेना ने संभाजी राव को बंदी बना लिया और औरंगजेब के सामने पेश किया।
अनिल कालेले ने कहा कि संभाजी राव को औरंगजेब ने अकल्पनीय यातनाएं देकर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। औरंगजेब चाहता था कि संभाजी महाराज अब तक जीते हुए सभी किले और मराठा साम्राज्य के खजाने की जानकारी दें। संभाजी महाराज न तो जानकारी देना तैयार थे, न ही धर्म परिवर्तन करने। औरंगजेब के जुल्मों सितम को सहते- सहते आखिरकार 11 मार्च 1689 को वे बलिदान हो गए।
पुण्यतिथि के अवसर पर सचिव चेतन दंडवते, उपाध्यक्ष श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के सह प्रभारी परितोष डोनगांवकर, महाराष्ट्र नाट्य के सचिव प्रसन्न निमोणकर, अरविंद जोशी, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी सहित अनेक समितियों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। खंगन ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल में प्रति माह के अनुसार 19 मार्च को छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती और बौद्धिक का आयोजन किया जाएगा।