दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडळ के योग शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में जुड़ रहे लोग

रायपुर। नियमित रुप से योग का अभ्यास कफवात और पित्त तीनों को संतुलित करने में सहायक होता है। प्राणायाम अभ्यास में कपालभाति और अनुलोम विलोम विशेष प्रभावी होते हैं। प्राणायाम अभ्यास में कपालभाति और अनुलोम विलोम महत्वपूर्ण क्रियाएं हैं। दोनों के प्रभाव अलग अलग हैं। लेकिन इनका अभ्यास सही विधि तथा सही क्रम से करना चाहिए। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडळ के योग समिति की प्रमुख आस्था काले ने शिविर के दौरान प्रशिक्षार्थियों से कहीं।

आस्था काले ने आगे बताया कि योग शिविर प्रतिदिन सुबह 6.15 से 7.15 से चलता है। शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे है। गुरुवार को शिविर के दौरान वार्मअप, वात निरोधक, पाचन समूह के आसन, प्राणायाम और ध्यान कराया गया।

काळे ने आगे बताया कि योग पाचन के सामान्य लक्षणों जैसे गैस, कब्ज और सूजन को शांत करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, तंत्रिका तंत्र को शांत करने और विश्राम को बढ़ावा देने की योग की क्षमता चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) जैसी अधिक गंभीर पाचन समस्याओं से राहत दिलाने में कारगर साबित हुई है।