पढ़ाई का फ्लो ही बच्चों को बनाता है डाॅक्टर, इंजीनियर, आईएएस: डाॅ. शाह
2024-06-19 03:35 PM
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- महाराष्ट्र मंडल में टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम में शिक्षिकाओं को दिए गए कई अहम टिप्स
रायपुर। क्लास रूम में 40 मिनट की क्लास में शिक्षक को एक ट्रेन की तरह पढ़ाना चाहिए। जैसे स्टेशन छूटने के समय ट्रेन की गति कम होती है। तीन- चार मिनट के बाद स्पीड बढ़ती है और वह एक फ्लो में चलती है। इसी समय यात्रियों को सफर में ज्यादा आनंद आता है। अगला स्टेशन आने के पहले वह ट्रेन अपनी स्पीड धीरे-धीरे कम करती है। ठीक ऐसा ही शिक्षक को अपने क्लास रूप में पढ़ाना चाहिए। पहले पांच मिनट पिछली क्लास का रिवीजन, फिर 35 मिनट एक फ्लो में पढ़ाई और फिर आखिरी में पांच मिनट आज की पढ़ाई का रिवीजन। उस 35 मिनट की फ्लो वाली पढ़ाई ही बच्चों को डाॅक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस और जीवन में सफल बनाती है। उक्त बातें मोटिवेशन स्पीकर डाॅ. मुकेश शाह ने टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान महाराष्ट्र मंडळ के य.गो. जोगलेकर स्मृति छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में संत ज्ञानेश्वर स्कूल (एसडीवी) के शिक्षकों से कही। इस अवसर पर एसडीवी के सह प्रभारी परितोष डोनगांवकर, महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल कालेले, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी और उपप्राचार्य राहुल वोडितेलवार प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

क्लास रूम मैंनेजमेंट की कार्यशाला में डाॅ. शाह ने कहा कि क्लास रूम में आपके आने से लेकर क्लास खत्म कर क्लास रूम से वापस जाने तक आपका व्यवहार सकारात्मक होना चाहिए। प्रवेश के समय बच्चों को गुड मार्निंग विश करने और मुस्कुराते हुए चेहरा होना चाहिए। आपको क्लास रूम में पढ़ाने के समय राउंड जरूर करना चाहिए, लेकिन आप उस स्थान पर खड़े होकर पढ़ाए जहां से आपकी नजर सभी बच्चों पर होने चाहिए। फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स, काॅमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बारे में अगर आपका लेक्चर हो तो यह बेहद जरूरी है कि आप क्लास के कार्नर पर खड़े होकर पढ़ाएं, ताकि आपका शारीरिक मूवमेंट न हो, सिर्फ नजरों के मूवमेंट से आप सभी पर नजर रख सके। ऐसा करने से बच्चों का ध्यान आप पर केंद्रीत होगा। बच्चों को लगेगा सर मुझे ही देख रहे हैं।
बच्चों के लिए बनाए चार्ट
शाह ने कहा कि आपकी क्लास में सारे बच्चें एक कैटेगिरी के नहीं हो सकते। कुछ बच्चे पढ़ाई में अच्छे होंगे, तो कुछ खेलकूद, ड्राइंग, पेटिंग और अन्य एक्टिविटी में अच्छे होंगे। ऐसे में आपको सभी बच्चों का एक चार्ट बनाना चाहिए। और कुछ कैटेगिरी तय करनी चाहिए। जैसे पढ़ाई, खेलकूद, जनरल नाॅलेज, स्पीच आदि। फिर जो बच्चा किसी विषय में अच्छा नहीं है, तो उन्हें मार्क करिए। फिर क्रमशः प्रतिदिन उसमें सुधार के लिए समय दीजिए। ऐसा करने से बच्चों में सुधार आएगा।
क्लास में बच्चों के नाम याद रखिए
आमतौर पर एक क्लास में 35 से 40 बच्चे होते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आपको हर एक बच्चे का नाम याद हो। आप बच्चों को उनके नाम से बुलाएं। जब आप बच्चों को उनके नाम से बुलाएंगे तो वह आप से कनेक्ट होंगे।
बच्चों के कनेक्ट होना जरूरी
डाॅ. शाह ने शिक्षिकाओं से कहा कि क्लास रूम में बच्चों से कनेक्ट होने के लिए आपका बच्चों से कनेक्ट होना बेहद जरूरी है। ऐसे में क्लास में विश करने के साथ एक- दो मिनट के लिए आप ऐसा कुछ करें कि बच्चे आप से कनेक्ट हो जाएं। जैसै पुस्तकें बंद करवाएं और 30 सेकंड के लिए आंखें बंद करने कहें। आपके ब्लैक बोर्ड साफ करने तक बच्चों से कुछ श्लोक बुलवा लीजिए। कुछ पोयम पढ़ाइए। जो सब्जेक्ट से हटकर हो। ऐसा करने से बच्चों के ध्यान आप पर केंद्रीत होगा और बच्चे अगले 30 मिनट आपको गंभीरता से सुनेंगे।