जलील के ‘ताम्रपत्र’ ने महाराष्ट्र नाट्य मंडल का बचाया था सम्मान
रायपुर। मध्य प्रदेश कला परिषद की ओर से महाराष्ट्र मंडल रायपुर में आयोजित नाट्य समारोह में एक नाटक का मंचन महाराष्ट्र नाट्य मंडल का भी होना था। किसी गंभीर काऱण की वजह से मंचित किया जाने वाला नाटक तैयार ही नहीं हो पाया। सबसे बड़ी दुविधा कि अब क्या होगा? ऐसे विपरीत समय में जलील रिजवी ने नाटक ताम्रपत्र तैयार किया और इसे महाराष्ट्र नाट्य मंडल के बैनर में चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडळ में मंचित किया। जलील की उस मदद से महाराष्ट्र नाट्य मंडल की विश्वसनीयता और सम्मान, दोनों बच पाया। और नाट्य मंडल हमेशा उनका आभारी रहा। इस आशय के विचार महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निदेशक अनिल श्रीराम काळेले ने महाष्ट्र मंडल में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में जलील रिवजी और कृष्ण गोपाल वैशम्पायन को श्रद्धांजिल अर्पित करते हुए व्यक्त किए।
काळेले ने कहा कि महाराष्ट्र नाट्य मंडल के अनेक नाटकों में जलील रिजवी की भूमिका परदे के पीछे बेहद महत्वपूर्ण होती थी, वे 24 घंटे हर तरह की मदद के लिए तैयार रहते थे। महाराष्ट्र नाट्य मंडल ने उन्हें एक गरिमामय समारोह में सत्यदेव दुबे सम्मान से भी नवाजा था। काळेले के मुताबिक लगभग पांच दशक से उनका जलील रिजवी से याराना रहा है। और वे नाटकों के संदर्भ में एक दूसरे के अनुभव बांटते थे, और खूब बातें करते थे। जलील ने भी अपनी नाट्य संस्था अग्रगामी के माध्यम से गुरु घासीदास संग्रहालय स्थित मुक्ताकाश मंच में मेरा (प्रा. अनिल काळेले) सम्मान किया था।
पुरानी यादों को ताजा करते हुए प्रा. काळेले कहते है कि एक बार शंकर शेष लिखित नाटक फंदी के मंचन की योजना बनी, जलील ने कहा मुख्य फंदी की भूमिका मैं निभाउंगा। मुझे कोई आपत्ति नहीं थी और हमारी रिहर्सल शुरू हो गई। तीन-चार दिन के रिहर्सल के बाद हमारे एक अन्य मित्र सुब्रत बोस (सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अनुराग बोस के पिता) पहुंच गए। और जिद करने लगे कि न केवल वे फंदी नाटक करेंगे। बल्कि मुख्य भूमिका के साथ ही करेंगे। जलील रिजवी ने सह्दय यह भूमिका सुब्रत को सौंप दी। कुछ दिन रिहर्सल चली और ऐसा कुछ हुआ कि नाटक का मंचन ही नहीं हो पाया। कालान्तर में यह नाटक महाराष्ट्र नाट्य मंडल में मंचित किया गया। जिसमें फंदी की मुख्य भूमिका मैंने निभाई थी। मराठी में इसी नाटक रूपान्तरण कर नागपुर में इसका मंचन किया गया था, जिसमें एक अहम भूमिका बुधवार को ही स्वर्गवासी हुए कृष्ण गोपाल वैशम्पायन ने भी निभाई थी।