संत ज्ञानेश्वर स्कूल की लावण्या ने शशि, हिमानी ने फूलो और रुचि ने सूर्य की तरह चमकना सीखाया
रायपुर। खबर का शीर्षक पढ़कर एक बारगी आपको समझ नहीं आ रहा होगा कि आखिर मामला क्या है। बता दें कि महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर स्कूल के कक्षा चौथी की छात्रों ने खेल-खेल में पढ़ते हुए जीवन में शीतलता, फूलों की तरह महकना, सूर्य की तरह चमकना और नभ की तरह निर्मल रहना सीखाया। बच्चों ने यह ज्ञान एक दूसरे को दिया।
स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में सत्र 2024-25 के लिए पढ़ाई शुरू हो गई है। कक्षा में सभी शिक्षकों ने विभिन्न तरीकों से बच्चो को उत्साह के साथ पढ़ाना प्रारंभ कर दिया है। कक्षा चौथी में हिंदी विषय में पाठ 1 ‘मेरी अभिलाषा’ जो की बहुत ही अच्छी और शिक्षा प्रदान करने वाली कविता है । उसे सरल तरीके से समझाने, याद करवाने के लिए विषय शिक्षिका शिखा शर्मा के मार्गदर्शन में सभी बच्चों ने बहुत मेहनत करके कविता से संबंधित चित्रों को बनाया एव अपने सहपाठियों को मदद भी की सभी विद्यार्थियों को चित्र दिखाकर समझाया गया। कक्षा में सभी बच्चों ने उत्साह के साथ अपनी अपनी सहभागिता दिखाई।
शिक्षिका शिखा शर्मा ने बताया कि कक्षा चौथी की पावना ने बिहगो यानी चहकना, लावण्या ने शशि यानी शीतलता, हिमानी ने फूलो यानी महकना, रुचि ने सूर्य यानी चमकना, अविसा ने चंद्रमा यानी चमकना सीखाया। वहीं यक्षि शिवानी ने तारों की तरह दमकना, तन्मय दास ने कोयल की तरह कुहकना, सिफा फातिमा ने नभ की निर्मलता दर्शायी वहीं धीरज जोगी ने पृथ्वी की सहनशक्ति को दर्शाया, झनक ने पहाड़ जैसी दृढ़ता का प्रदर्शन कर उनके गुणों समझा और जाना।
शिक्षिका अपर्णा आठले ने बताया कि चित्रों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का कार्य स्कूल के सभी शिक्षक उत्साह के साथ करते है,ताकि बच्चे खेल-खेल में चीजों को याद लें और उसे हमेशा याद रखें। पढ़ाई का यह माध्यम मासूम बच्चों के लिए काफी सरल है। उन्होंने सभी बच्चों को एवं उनके अभिभावकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की अच्छी परवरिश ,बच्चों की सफलता , एक अच्छा इंसान बनाने में विद्यालय के शिक्षक एवं अभिभावक का भी सहयोग नितांत आवश्यक है। इसी पद्धति से आगे भी पठनक्रिया को सरल रूप दे कर बच्चों को पढ़ाया जाएगा।