दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई स्वातंत्र्य वीर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि

रायपुर। स्वातंत्र्य वीर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई। मुख्य वक्ता मंडल के आजीवन सभासद प्रशांत देशपांडे ने कहा कि तिलक जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। तिलक का जन्म 1856 में महाराष्ट्र के रत्नागिरि के चिक्कन गांव में एक ब्राह्णण परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से जनता की सेवा का व्रत धारण कर लिया था। उन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज की मांग उठाई। जनजागृति कार्यक्रम के तहत उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव सप्ताह भर मनाना प्रारंभ किया। इन त्योहारों के माध्मय से जनता में देश प्रेश और अंग्रेजों के अन्यायों के विरूद्ध संघर्ष का साहस भरा।  

इससे पूर्व महाराष्ट्र नाट्य मंडल के निर्देश अनिल श्रीराम काळेले, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, वरिष्ठ सदस्य प्रशांत देशपांडे, दीपक पात्रीकर, महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता दलाल, प्रसन्न निमोणकर और श्याम दलाल सहित अन्य सदस्यों ने सूतमाला और दीप प्रज्ज्वलन कर लोकमान्य तिलक को नमन किया।

 

दिव्यांग बालिका विकास गृह के प्रभारी व महाराष्ट्र नाट्य मंडल के सचिव प्रसन्न निमोणकर ने कहा कि तिलक जी गरम दल के नेता माने जाते थे। आजादी की लड़ाई में तिलक के अस्त्र उनकी कमल और वाणी थी। वे स्वतंत्रता प्राप्ति के उदारवादी आंदोलन के प्रखर विरोधी थे ।

 निमोणकर ने आगे कहा कि बाल गंगाधर तिलक स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और वह मैं लेकर रहूंगाके सिद्धांत पर कार्य करते थे। वे गणित के कुशल शिक्षक भी थे। उन्होंने बिना शस्त्र के उग्र क्रांति की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तिलक ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ निर्भिक पत्रकार थे, और 1981 में केसरी मराठी में और द मराठा अंग्रेजी में समाचार पत्रों का प्रकाशन किया। दो वर्षों में ही केसरी देश भर में कई भाषाओं में प्रकाशित होने लगा।