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अश्वमेध यज्ञ के समान मिलेगा... अधिकमास की एकादशी व्रत का फल... जानिए और क्या है खास

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत खास महत्व है। कष्ट निवारण के लिए इस दिन को बहुत ही अच्छा माना जाता है। हर महीने में दो एकादशी आती हैं। एक कृष्णपक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में यानी साल भर में 24 एकादशी होती हैं। अधिक मास की दूसरी एकादशी 12 अगस्त शनिवार के दिन मनाई जाएगी। इसे कमला या परमा एकादशी भी कहा जाता है। पुराणों में परमा एकादशी का फल अश्वमेध यज्ञ के समान बताया गया है। इस व्रत को करने से दुख-दरिद्रता की समाप्ति होती है। परमा एकादशी का व्रत जीवन में सुख-समृद्धि की कामना व मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार,अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी तिथि शुक्रवार,11 अगस्त को सुबह 05 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी और 12 अगस्त को सुबह 06 बजकर 31 मिनट पर इसका समापन होगा।  

परमा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त शनिवार, 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। जबकि परमा एकादशी का व्रत की समाप्ति 13 अगस्त को सुबह 05 बजकर 49 मिनट से सुबह 08 बजकर 19 मिनट तक किया जाएगा।

परमा एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान के बाद पूरे विधि के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर निर्जला व्रत का संकल्प लेकर विष्णु पुराण का पाठ करें। रात के समय श्री हरि और शिव जी की पूजा करें। आरंभिक प्रहर में नारियल, दूसरे प्रहर में बेल और तीसरे में सीताफल और चौथे प्रहर में नारंगी और सुपारी भगवान विष्णु को अर्पित करें। पूजा करने के बाद व्रत की समाप्ति करें।    

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस व्रत को कुबेर जी ने किया था तो भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें धनाध्यक्ष बना दिया था। इतना ही नहीं, इस व्रत को करने से सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र को पुत्र, स्त्री और राज्य की प्राप्ति हुई थी। माना जाता है कि इस व्रत के दौरान पांच दिन तक स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौ दान करने से व्यक्ति को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसे धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती।