आइये जानते है....देवियों के मंदिर अधिकतर पहाड़ों पर ही क्यू ?
डेस्क | भारत में हिंदू धर्म की ज्यादातर देवियों के मंदिर पहाड़ों पर ही बने हुए होते हैं | अगर आपने ध्यान दिया होगा तो भारत में लगभग देवियों के जितने भी प्रमुख स्थान या मंदिर हैं वे सब के सब पहाड़ों पर ही स्थित है | चाहे वह जम्मू में माता वैष्णो देवी का मंदिर हो या फिर गुवाहाटी में मां कामाख्या का मंदिर हो, हरिद्वार में मनसा माता का मंदिर हो या फिर बनसकंठा में कालिका माता का मंदिर ही क्यों न हो | इन सभी मंदिरों में माता पहाड़ों पर ऊंचाइयों में विराजमान है | आइये जानते है कि आखिर क्या कारण है कि देवियों के सभी मंदिर पहाड़ों पर होते हैं |

भूमि के देवता है भोलेनाथ शिव, वायु के देवता है विष्णु, जल के देवता हैं गणेश जी, तो अग्नि के देवता हैं अग्नि देव और आकाश के देवता हैं सूर्य है | माता दुर्गा जिन्हें आदि शक्ति का भी कहा जाता है | उन्हें इन सब देवताओं से सर्वोपरि माना गया है | पहाड़ों को धरती का मुकुट और सिंहासन भी कहा जाता है, इसलिए अधिकतर देवियों के स्थान पहाड़ों की ऊंची ऊंची चोटियों पर स्थित होते है |

ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर देवियों के मंदिर होने के पीछे यह भी माना जाता है कि पुराने समय में साधु संतों और महात्माओं को इस बात का अंदेशा था, कई इंसान जितनी भी समतल जमीन है उसे अपने उपयोग में ले लेगा और कहीं पर भी एकांत नहीं बचेगा |
क्योंकि जप,साधना और ध्यान करने के लिए एकांत होना अति आवश्यक होता है | ऐसे में पहाड़ों को देवियों का स्थान बनाने के लिए उचित समझा गया और ऊंचे पहाड़ों का वातावरण भी शुद्ध होता है | तो साथ ही वहां जाकर सकारात्मकता का भी अनुभव होता है | इसलिए देवियों के मंदिर पहाड़ो पर हैं |

पहाड़ों पर देवियों के मंदिरो की बात की जाए तो सबसे मुख्य मंदिर है माता वैष्णो देवी का जो जम्मू में है | तो वहीं इसके साथ ही गुवाहाटी में बना हुआ कामाख्या देवी का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है | हरिद्वार में माता मनसा देवी का मंदिर भी पहाड़ों पर ही बना है | भले यह मंदिर ऊंची चोटियों पर बने हो लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और आस्था में कोई कमी नहीं होती | हर बरस यहां हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं |