आइये जाने, भगवान महावीर के प्रमुख सिद्धांत क्या हैं ?
डेस्क | महावीर जयंती 21 अप्रैल 2024 को है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। हर वर्ष इसी तिथि को महावीर जयंती मनाई जाती है। भगवान महावीर ने अपने जीवनकाल में कई ऐसी शिक्षाएं दी हैं जो आज भी प्रासंगिक हैं। इनकी प्रमुख शिक्षाओं और सिद्धांतों के बारे में आज हम जानेंगे।
अप्पाणमेव जुज्झाहि, किं ते जुज्झेण बज्जझयो। अप्पाणमेव अप्पाणं, जइत्ता, सुहमेह ए।।
अर्थ- भगवान महावीर ने कहा है कि, हमें अपनी आत्मा के साथ ही युद्ध करना चाहिए। बाहरी शत्रुओं के साथ लड़कर क्या होगा ? आत्मा द्वारा आत्मा को जीतने से ही सत्य सुख की प्राप्ति होती है।
अप्पा कत्ता विकत्ता य, दुक्खाण य सुहाणय। अप्पा मित्तममित्तं च, दुप्पट्ठिय सुपट्ठिओ।।
अर्थ- आत्मा खुद दुख और सुख को जन्म देती और नाश भी करती है। जो आत्मा सत्यमार्ग पर चलती है वो मित्र की तरह है और जो कुमार्ग पर चलती है वो शत्रु की तरह।
धम्मो शुद्धस्स चिट्टई।
अर्थ- धर्म शुद्धात्मा, शुद्ध मन में ही निवास करता है। इसलिए जो भी व्यक्ति धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहता है उसको सबसे पहले अपने मन में शुद्धता लानी चाहिए।
खणं जाणाहि पंडिए।
अर्थ- जो क्षण यानि हर पल के महत्व को जानता है, हर पल को लेकर जो जागरुक है वो जीवन में सफलता के मार्ग पर अग्रसर होता है। यानि इन शब्दों के जरिये महावीर जी हमें एकाग्रता के महत्व को समझा रहे हैं।
आज भी अगर कोई व्यक्ति भगवान महावीर की इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं तो वो सभी जगह सुख शांति पा सकता है।
जीवन का अर्थ हमें समझ में आ सकता है। महावीर जयंती के शुभ अवसर पर हर किसी को इन सिद्धांतों पर आगे बढ़ने के साथ इसे अपनाना भी चाहिए।