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राहुल को मानहानि में राहत... सजा पर फैसला यथावत... ऐसे में क्या होगी रणनीति... ताकि

सूरत। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित पार्टी के दिग्गज नेताओं और राहुल के अधिवक्ताओं ने दो याचिका लगाई थी। मानहानि के मामले में कोर्ट ने राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए 13 अप्रैल तक के लिए जमानत दे दी है, पर सजा पर रोक लगाए जाने से सेशन कोर्ट ने इंकार कर दिया है। दरअसल, मोदी सरनेम पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में राहुल के खिलाफ मानहानि का केस दायर हुआ था। इस मामले में 23 मार्च को सूरत की अदालत ने राहुल को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी, जिसे राहुल ने चुनौती दी थी।

आज सेशन कोर्ट में राहुल गांधी मामले को लेकर सेशन कोर्ट ने सुनवाई तो की, पर निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा गया है। यानी दो साल की सजा पर किसी तरह की अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। इसका मतलब है कि सांसद के तौर पर उन्हें अयोग्य ठहराने के मामले में उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिली है। राहुल गांधी की पैरवी करने वाली टीम ने उनकी सजा पर रोक लगवाने पर जोर दिया, लेकिन अदालत ने कहा कि सभी पक्षों को सुने बिना वे अंतरिम रोक नहीं लगा सकते। 
 
कांग्रेस चल रही इस रणनीति पर
कांग्रेस चाहती है कि इस मामले को लेकर आमलोगों के बीच लगातार चर्चा हो। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस बचाव की मुद्रा में नहीं है, बल्कि राहुल लगातार इस मामले में आक्रामक हैं और वे कह रहे हैं कि वे मोदी-अडानी के रिश्ते पर लगातार सवाल करना जारी रखेंगे। कांग्रेस ये मैसेज देने की कोशिश कर रही है कि अडानी और पीएम मोदी के संबंधों पर सवाल उठाने के लिए सरकार की ओर से उन्हें टारगेट किया जा रहा है। 
 

2024 से पहले बहाली की कोशिश

कांग्रेस एक ओर इस मुद्दे के राजनीतिक पहलू पर काम कर रही है तो अदालत के फैसले के बाद पैदा हुए कानूनी बाधाओं को भी दूर कर लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राहुल गांधी की बहाली का प्रयास भी जारी है। ताकि चुनाव लड़ने में दिक्कत ना आए। कांग्रेस भी जानती है कि अगर इस फैसले पर अमल हुआ तो राहुल 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, इस परिस्थिति में वे पब्लिक मेमोरी में नहीं रह पाएंगे। 

 

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