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26 साल बाद मिजोरम मे चलेगी ट्रेन, जंगल पहाड़ो पर बनायी ऐतिहासिक परियोजना

मिजोरम| 26 साल का इंतजार खत्म और मिजोरम के सपनों की रेल आखिरकार पटरियों पर दौड़ने को तैयार है। बैराबी-सैरांग रेल लाइन, जो देश की सबसे कठिन परियोजनाओं में से एक कही जा रही है, अब पूरी हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को इसका ऐतिहासिक उद्घाटन करेंगे।

8 हज़ार 71 करोड़ रुपए की लागत से बनी 51 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना ने भारत के इंजीनियरिंग इतिहास में नया अध्याय लिखा है।
12.8 किलोमीटर में 48 सुरंगें और 142 पुल बनाए गए हैं। इनमें से एक 104 मीटर ऊंचा ब्रिज है, जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है।सिर्फ ट्रैक ही नहीं… बल्कि 5 रोड ओवरब्रिज और 6 अंडरपास भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। पूरी लाइन को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकें।यह सफर आसान नहीं था। घने जंगल, पहाड़ी रास्ते, लगातार बारिश और भूस्खलन की वजह से काम कई बार रुक गया।साल 1999 में काम शुरू हुआ, लेकिन कई बार सर्वे रिपोर्ट बदली गई।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया और आखिरकार 11 साल की मेहनत के बाद सपना साकार हुआ।पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का कहना है कि काम पूरा करने के लिए करीब 200 किलोमीटर का अलग रास्ता बनाना पड़ा। हज़ारों मजदूरों ने दिन-रात काम कर इस मुश्किल प्रोजेक्ट को सफल बनाया। रेलवे मंत्रालय शुरुआती दौर में 2 से 3 ट्रेनों की योजना बना रहा है, जिनमें दिल्ली और गुवाहाटी की ट्रेनें प्राथमिकता पर होंगी। भविष्य में राजधानी एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें भी दौड़ सकती हैं।
 
इस रेल लाइन का महत्व सिर्फ मिजोरम तक नहीं रहेगा। आगे इसे म्यांमार बॉर्डर तक बढ़ाया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति मिलेगी और मिजोरम की जीडीपी में 2-3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है। बैराबी-सैरांग रेल लाइन सिर्फ लोहे की पटरियां नहीं… बल्कि पूर्वोत्तर के विकास की नई राह है। अब मिजोरम सीधे दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी से जुड़ जाएगा और पर्यटन, व्यापार व रोज़गार के नए अवसर खुलेंगे। 
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