देश-विदेश

देव दीपावली पर काशी के घाटों ने रचा इतिहास: अस्सीघाट पर सजी विश्वविजेता महिला क्रिकेट टीम की झांकी, दीपों से उभरा विश्वनाथ का दिव्य स्वरूप

वाराणसी| काशी की आत्मा जब दीपों की लौ में झिलमिलाती है, तब केवल गंगा के घाट नहीं, बल्कि पूरी संस्कृति, आस्था और गौरव भी आलोकित हो उठते हैं। इस वर्ष देव दीपावली की संध्या ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि काशी केवल धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि जीवंत परंपराओं और समकालीन चेतना का संगम भी है।

अस्सीघाट पर आस्था और प्रेरणा का संगम
बुधवार की शाम उत्तरवाहिनी गंगा के किनारे अस्सीघाट पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। गंगा सेवा समिति द्वारा यहां भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्वविजेता प्रतिकृति सजाई गई थी—एक ऐसी झांकी जिसने नारी शक्ति, खेल भावना और राष्ट्रीय गौरव को एक साथ दीपों की रौशनी में पिरो दिया। घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने इस झांकी को न केवल सराहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा कर इसे देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।

दीयों से उकेरा गया भगवान विश्वनाथ का मुख
इसी घाट पर जगतपुर पीजी कॉलेज की 10 छात्राओं ने 250 दीयों और 10 किलो फूलों की मदद से भगवान विश्वनाथ का मुख उकेरा। यह कलाकृति श्रद्धा और रचनात्मकता का ऐसा संगम थी, जिसने हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। छात्राओं की यह प्रस्तुति घाट पर आकर्षण का केंद्र बनी रही।

घाटों पर रंग, रौशनी और रचनात्मकता की छटा
अर्धचंद्राकार घाटों पर कहीं फूलों की वंदनवारें लटक रही थीं, तो कहीं रंग-बिरंगी झालरों की चमक थी। हल्दी-चंदन से बनी अल्पनाएं और रंगोलियों ने घाटों को सजीव बना दिया था। वहीं, अनार, फुलझड़ी और पटाखों की सतरंगी रौशनी ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

दशाश्वमेध घाट पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम में आरती
दशाश्वमेध घाट पर इस बार मां गंगा की महाआरती ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर आधारित रही, जिसमें देश की सुरक्षा और मातृशक्ति को समर्पित भावनाएं झलकती रहीं। आरती के मंत्रों और शंखध्वनि के बीच घाट पर उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा।

जैन घाट पर 5100 दीपों से सजी अहिंसा की प्रेरणा
श्री भदैनी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र में इस बार जैन समाज ने दीपोत्सव को विशेष रूप से मनाया। भगवान सुपार्श्वनाथ की जन्मस्थली पर 5100 दीपों से सजावट की गई, जो न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि “जीयो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्म” जैसे सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनी।

जैन समाज के सुरेन्द्र जैन ने इस अवसर पर कहा, “जब दुनिया हिंसा, तनाव और भेदभाव से जूझ रही है, तब भगवान महावीर के सिद्धांत मानवता के लिए प्रकाशपुंज हैं। ये दीप केवल रोशनी नहीं, बल्कि शांति, सह-अस्तित्व और करुणा का संदेश हैं।”

काशी की देव दीपावली इस बार केवल धार्मिक उत्सव नहीं रही, बल्कि यह एक सांस्कृतिक संवाद बन गई—जहां परंपरा और प्रगति, आस्था और आत्मबल, दीप और दिशा—सभी एक साथ आलोकित हुए।
----------