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काशी शब्दोत्सव 2025: 16 नवंबर से तीन दिवसीय वैचारिक और सांस्कृतिक पर्व, उद्घाटन करेंगे संघ प्रचारक सुनील आंबेकर

वाराणसी| काशी की ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को समर्पित तीन दिवसीय काशी शब्दोत्सव 2025 का शुभारंभ 16 नवंबर को होगा। यह आयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और विश्व संवाद केंद्र (काशी) के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता भवन में संपन्न होगा। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, जो वैचारिक विमर्श की इस श्रृंखला को औपचारिक रूप से प्रारंभ करेंगे।

उद्घाटन सत्र और प्रथम दिन की गतिविधियाँ
कार्यक्रम संयोजक डॉ. शैलेश कुमार मिश्रा ने बताया कि शब्दोत्सव का उद्घाटन सत्र 16 नवंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा, जिसमें साहित्य, शिक्षा और संस्कृति जगत के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। इसके बाद प्रथम सत्र में ‘भारतीय समाज दर्शन’ विषय पर गहन चर्चा होगी।

प्रथम समानांतर सत्र में ‘प्रबंधन के भारतीय सूत्र’ विषय को केंद्र में रखकर विचार-विमर्श होगा। शाम 5 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा, जिसमें काशी की कला, संगीत और नाट्य परंपरा की झलक देखने को मिलेगी।

दूसरे दिन: भारतीय चिंतन और संस्कृति पर विमर्श
17 नवंबर को द्वितीय सत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आध्यात्मिक, राष्ट्रीयता एवं एकात्म जीवन दर्शन पर विस्तृत चर्चा होगी। द्वितीय समानांतर सत्र में भारतीय संस्कृति एवं कलाएं विषय पर विद्वानों के विचार सुनने को मिलेंगे।

तृतीय सत्र में दोपहर 2 बजे से पर्यावरण संवाद होगा, जिसमें भारतीय दृष्टिकोण से पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा होगी। तृतीय समानांतर सत्र में भारतीय साहित्य की विविध धाराओं पर विमर्श होगा। शाम को फिर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा।

समापन दिवस: वैश्विक संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण
18 नवंबर को चतुर्थ सत्र में ‘कुटुंब व्यवस्था का वैश्विक संदर्भ’ विषय पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। चतुर्थ समानांतर सत्र में समसामयिक वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा होगी। भोजन उपरांत समापन सत्र में तीन दिवसीय आयोजन की उपलब्धियों और निष्कर्षों को साझा किया जाएगा।

आयोजन समिति
कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. हरेंद्र कुमार राय के संयोजन में तैयार की गई है। उनके सहयोगी के रूप में डॉ. अम्बरीष राय, डॉ. शैलेश कुमार मिश्रा, डॉ. ओम प्रकाश सिंह और डॉ. सदाशिव द्विवेदी सह संयोजक की भूमिका निभा रहे हैं। 
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