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काशी की गलियों में इटली का प्रेम: हिंदू रीतियों से बंधी अनोखी शादी

वाराणसी| वाराणसी, वह प्राचीन नगरी जहां गंगा की लहरें सदियों की स्मृतियों को समेटे बहती हैं, और जहां हर कोने में आध्यात्म की सुगंध फैली रहती है। यह शहर न केवल मोक्ष की खोज में आने वाले तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, बल्कि अब वैश्विक प्रेम कहानियों का साक्षी भी बन रहा है। हाल ही में, इटली से आए एक जोड़े ने यहां हिंदू रीतियों से अपनी शादी रचाई, जो न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बनी, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति की गहराई को उजागर कर रही है। यह घटना बताती है कि कैसे काशी का जादू सीमाओं को पार कर दिलों को जोड़ रहा है।

इटली से काशी तक का सफर: प्रेम की दूसरी पारी
इटली के हरे-भरे पहाड़ों और समुद्री तटों से हजारों मील दूर, ग्लोरियस और एंटोलिया नामक यह जोड़ा पहले से ही एक-दूसरे से बंध चुका था। लगभग एक साल पहले, उन्होंने अपनी परंपरागत यूरोपीय शैली में शादी की थी – शायद चर्च की घंटियों की गूंज और सफेद गाउन की चमक के बीच। लेकिन भारतीय संस्कृति की ओर उनका झुकाव कुछ अलग ही था। हिंदू रीतियों की सरलता, परिवार की एकजुटता और आध्यात्मिक गहराई ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि वे इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहते थे।

नवंबर के मध्य में, जब काशी की हवाएं ठंडी होकर देव दीपावली की तैयारियों में व्यस्त हो रही थीं, यह जोड़ा वाराणसी पहुंचा। उन्होंने श्री नवदुर्गा मंदिर को चुना – वह पवित्र स्थल जहां देवी की कृपा सदैव बरसती है। यहां, पूरे विधि-विधान से हिंदू विवाह संपन्न हुआ। दूल्हा ग्लोरियस ने शेरवानी और पगड़ी में खुद को सजाया, जबकि दुल्हन एंटोलिया लाल बनारसी साड़ी, मंगलसूत्र और सिंदूर की लालिमा में ऐसी खिलीं मानो काशी की कोई बहू हों। सात फेरे लिए गए, मंत्रोच्चार हुए, और अग्नि को साक्षी मानकर वादे दोहराए गए। मंदिर के पुजारी ने वेद मंत्रों से वातावरण को पवित्र बनाया, और आसपास की गलियों से आते भजन की धुन ने पूरे आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।

यह सिर्फ एक समारोह नहीं था; यह दो संस्कृतियों का मिलन था। इटली की रोमांटिक परंपराओं और हिंदू रीतियों की आध्यात्मिकता का संगम, जो बताता है कि प्रेम की भाषा सार्वभौमिक है।

स्थानीय उत्साह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
मंदिर परिसर में जुटे वाराणसीवासियों की आंखें आश्चर्य और खुशी से चमक रही थीं। बच्चे दौड़ते-भागते तस्वीरें खींच रहे थे, बुजुर्ग आशीर्वाद दे रहे थे, और महिलाएं दुल्हन की मेहंदी और चुन्नी की तारीफ कर रही थीं। “ये काशी है, जहां हर कोई अपना मानता है,” एक स्थानीय निवासी ने मुस्कुराते हुए कहा। शादी के बाद, जोड़े को फूलों की मालाएं पहनाई गईं, मिठाइयां बांटी गईं, और सभी ने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।

यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया – विदेशी दूल्हा-दुल्हन की तस्वीरें काशी की पृष्ठभूमि में, गंगा घाटों के साथ, जो भारतीय परंपराओं की जीवंतता को दुनिया तक पहुंचा रही हैं। एंटोलिया ने बाद में बताया कि हिंदू विवाह की रस्में उन्हें परिवार की मजबूती और जीवन के चक्र की याद दिलाती हैं, जो उनकी अपनी संस्कृति में कम हो गई है। ग्लोरियस ने फेरों को ‘अनंत बंधन’ का प्रतीक बताया, जो अग्नि की गवाही में मजबूत होता है।

वैश्विक आकर्षण: भारतीय संस्कृति की बढ़ती चमक
वाराणसी जैसे शहर क्यों हो रहे हैं विदेशियों के लिए शादी का पसंदीदा स्थल? इसका जवाब छिपा है काशी की उस जीवंतता में, जहां सदियां पुरानी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। यहां हर दिन कोई न कोई रस्म निभाई जाती है – चाहे वह गंगा आरती हो या विवाह की मंगल ध्वनि। सात समंदर पार से आने वाले लोग न केवल शादी करते हैं, बल्कि योग, ध्यान और वेदांत की खोज में भी डूबते हैं। यह जोड़ा इसका जीता-जागता उदाहरण है। उनकी शादी ने साबित किया कि भारतीय अध्यात्म और रीतियां न सिर्फ संरक्षित हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं।

ऐसे आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं। विदेशी मेहमान स्थानीय कारीगरों से साड़ियां खरीदते हैं, पंडितों से मंत्र सीखते हैं, और बनारसी व्यंजनों का स्वाद चखते हैं। इससे न केवल पर्यटन को बल मिलता है, बल्कि आपसी समझ भी गहराती है। काशी, जो कभी सिर्फ तीर्थस्थल था, अब प्रेम और एकता का प्रतीक बन रहा है।

प्रेम की सीमाएं मिटाती काशी
ग्लोरियस और एंटोलिया की यह शादी एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश है – कि संस्कृतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवीय भावनाएं एक ही हैं। वाराणसी की संकरी गलियों में गूंजते मंत्रों ने इटली के इस जोड़े को न केवल पति-पत्नी बनाया, बल्कि भारतीय परंपराओं का हिस्सा भी। यह घटना हमें याद दिलाती है कि दुनिया छोटी हो रही है, और काशी जैसे स्थान इसके पुल बन रहे हैं। आने वाले दिनों में शायद और ऐसे प्रेमी यहां आएंगे, हिंदू रीतियों को अपनाकर अपने जीवन को नई रोशनी देंगे। आखिर, काशी तो वह जगह है जहां हर दिल को घर मिल जाता है।

 

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