देश-विदेश

यमुना तट पर नारीशक्ति का दिव्य जागरण: महिषासुर मर्दिनी पाठ से गूँजा वासुदेव घाट, दिल्ली ने देखा अनुपम दृश्य

नई दिल्ली| कश्मीरी गेट के वासुदेव घाट पर रविवार सूर्यास्त के पहले का वह क्षण जब हजारों महिलाओं की एकस्वर आवाज़ यमुना मैया के जल को चीरती हुई आकाश में गूँजी – “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता…” – तो लगा मानो स्वयं माँ दुर्गा ने दिल्ली की धरती पर अवतार ले लिया हो। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित ‘महाशक्ति आराधना कार्यक्रम’ में यमुना तट पर पहली बार आज़ादी के बाद ऐसा भव्य महिषासुर मर्दिनी पाठ हुआ, जिसने नारीशक्ति, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया।

हजारों साड़ीधारी महिलाएँ, जिनके माथे पर लाल सिंदूर और हाथों में अगरबत्ती-दीप थे, एक साथ खड़ी होकर माँ दुर्गा का आह्वान कर रही थीं। उनका संदेश स्पष्ट था – “कोई आतंकवादी, कोई जिहादी, कोई देशद्रोही दिल्ली को नहीं डरा सकता, भारत को नहीं डरा सकता।” मुख्यमंत्री  रेखा गुप्ता ने माँ यमुना की महाआरती के बाद उपस्थित सखियों-बहनों से कहा, “आज समाज को और देश को आपकी ज़रूरत है। एक साधारण परिवार के, एक साधारण परिवार की बेटी अगर दिल्ली की मुख्यमंत्री बन सकती है, तो आपमें से हर महिला अपने सपनों का आकाश छू सकती है। बस थोड़ा सा हाथ बढ़ाइए, अपने भीतर की दुर्गा को जागृत कीजिए। परिवार के साथ-साथ देश भी आपका इंतज़ार कर रहा है।”

उन्होंने आयोजकों को आश्वासन दिया कि वह दिन दूर नहीं जब माँ यमुना पुनः अपने अविरल, स्वच्छ रूप में दिल्लीवासियों को दर्शन देंगी। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा एवं दिल्ली के कला-संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा विशेष अतिथि रहे। कपिल मिश्रा ने भावुक स्वर में कहा, “मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली ने तीज, नवरात्रि गरबा, दीपावली महोत्सव, छठ पूजा और अब यमुना तट पर महिषासुर मर्दिनी पाठ – ऐसे आयोजन दिल्ली के इतिहास में पहले कभी न देखे गए, न सुने गए।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मातृशक्ति कुंठित होती है, तब कुप्रथाएँ जन्म लेती हैं। लेकिन जब यही मातृशक्ति अपने तेज को पहचान लेती है, तब उसी से छत्रपति शिवाजी जैसे वीर पैदा होते हैं। जैसे माँ दुर्गा ने महिषासुर, चंड-मुंड, रक्तबीज का संहार किया था, वैसे ही आज भारत की नारीशक्ति आतंकवाद और देशद्रोह का नाश करेगी।”

यमुना की लहरें साक्षी बनीं, सूर्यास्त लालिमा में डूबा, और माँ दुर्गा का जयघोष दिल्ली के आकाश में देर तक गूँजता रहा। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था – यह दिल्ली की नारीशक्ति का वह घोष था जो कह रहा था: “हम जाग चुके हैं। अब कोई महिषासुर दिल्ली की शांति नहीं भंग कर सकेगा।” जय माँ दुर्गे! जय भारत! 
----------