लखनऊ। सावन का महीना चल रहा है। एक तरफ जहां शिव की उपासना हो रही है, तो खेती—किसानी भी शबाब पर है। लगभग किसान सुबह से लेकर शाम तक अच्छी फसल के लिए खेतों में पसीना बहा रहे हैं। हालांकि खेती—किसानी के दौरान किसानों को कई मुश्किलात के दौर से गुजरना पड़ता है, लेकिन किसान कभी हार नहीं मानते।
इसी खेती—किसानी के दौरान कई बार किसानों को अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ जाता है। मसलन, कभी आकाशीय बिजली गिर जाती है, तो कभी खेतों पर काम करने के दौरान जहरीले सांप डस देते हैं। हर साल सर्पदंश की वजह से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हो जाती है। जिसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सांप के काटने पर होने वाली मौत के एवज में 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि सांप काटने को राष्ट्रीय आपदा में भी शामिल किया गया है।
बताते हैं आंकड़े
सांप काटने से 97 फीसदी मौतें गांव कस्बों में हुई है। सांपों के काटने से पुरुषों की मौत महिलाओं के मुकाबले ज्यादा हुई है, इसकी एक वजह पुरुष किसानों का खेतों में काम करना भी है।
2020-21 में 27 मौतें
2021-22 में 85 मौतें
2022-23 में 65 मौतें
2023-24 में 34 मौतें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी
सर्पदंश से होने वाली मौतों के एवज में मुआवजा राशि का प्रावधान उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है, लेकिन इसके लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट होना जरुरी है। लखनऊ के सीएमओ मनोज अग्रवाल ने बताया कि मुआवजा लेने के लिए पीड़ित का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सबसे जरूरी है। उसी के आधार पर पीड़ित परिवार को मदद का पैसा मिलता है। ऐसे में यदि सांप के कांटने से किसी की मौत हो जाए तो तुरंत बाद परिजनों को चाहिए कि वे पीड़ित का पोस्टमॉर्टम कराएं।
मुआवजे के लिए अपनानी होगी ये प्रकिया
मुआवजा राशि पाने के लिए परिजनों को सिर्फ दो काम करने होते हैं, उसके बाद पूरी कार्रवाई प्रशासन करता है। पहला काम ये है कि अगर किसी की मौत सर्पदंश से हुई है तो उसके परिजन तत्काल लेखपाल को इसकी सूचना दें। इसके बाद पीड़ित को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाएं और उसकी रिपोर्ट जिसमें सर्पदंश से मौत की पुष्टि हुई है, लेखपाल को दे दें। उसके बाद पूरा काम लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एडीएम अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को देते हैं।