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कोविड के लक्षणों वाला इन्फ्लूएंजा वायरस, टेंशन में सरकार और देश के लोग, कैसे बचें, पढ़िए

दिल्ली। कोविड से अभी भी भारत पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। इस बीच देश में H3N2 वायरस (इन्फ्लूएंजा वायरस) ने सरकार से लेकर आमजन तक का टेंशन बढ़ा दिया है। हाल में सरकार ने इस वायरस से कर्नाटक और हरियाणा में एक-एक मौत की पुष्टि भी हुई है। जिसके चलते केंद्र सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह सामान्य बीमारी है और हर साल गर्मियों में होती है। 

बताते चलें कि H3N2 वायरस को लेकर सभी राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि H3N2 वायरस से बचाव के लिए निगरानी और एहतियात कहीं ज्यादा जरूरी है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कहा कि H3N2 वायरस अन्य वैरिएंट की तुलना में ज्यादा तकलीफदेह है। 

देशभर के अस्पतालों में एक साथ H3N2 इन्फ्लूएंजा का अचानक प्रकोप देखने को मिल रहा है। H3N2 वायरस एक तरह का इन्फ्लूएंजा वायरस है जिसे इन्फ्लूएंजा A वायरस कहा जाता है। यह एक श्वसन वायरल संक्रमण है जो हर साल बीमारियों का कारण बनता है। 
 

इस वायरस के प्रमुख लक्षण 

दिल्ली एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि इन्फ्लूएंजा के मामले बुखार के साथ गले में खराश, खांसी, शरीर में दर्द और नाक बहने के रूप में देखे जाते हैं। लक्षणों में दस्त, उल्टी और सांस फूलना भी शामिल है। ICMR ने कहा कि बुखार तीन दिनों के बाद चला जाता है, लेकिन खांसी तीन सप्ताह तक बनी रह सकती है। डॉ गुलेरिया ने कहा कि मामलों में वृद्धि हुई है, क्योंकि लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है। 

एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बचे

ICMR ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को इस इन्फ्लूएंजा के प्रकोप में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से बचने के लिए कहा है। आईसीएमआर ने बुखार और बदन दर्द की स्थिति में पैरासिटामोल के इस्तेमाल की सलाह दी है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि वायरस से बचने का तरीका भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना और शारीरिक दूरी बनाना है। 

 

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