भारत में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी कि PFI प्रतिबंधित है, लेकिन जमीन हकीकत यह है कि यह संगठन दबे तौर पर कई राज्यों अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए उसे फंडिंग भी लगातार मिल रही है। इस बीच खबर आई थी कि PFI 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता है। इस उदेश्य के लिए वो मुस्लिम युवाओं को गुमराह कर रहा है, उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग दे रहा है। अब उसी मामले में जांच एजेंसी NIA ने अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। PFI के ही दो सदस्यों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
दो मुख्य साजिशकर्ता
राजस्थान के कोटा के मोहम्मद आसिफ उर्फ आसिफ और बारां के सादिक सर्राफ पर आईपीसी की धारा 120 बी, 153ए और यूए(पी) अधिनियम 1967 की धारा 13, 17, 18, 18ए और 18बी के तहत आरोप लगाए गए। यह दोनों पीएफआई के ऐसे सदस्य हैं जो हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए पीएफआई के लिए प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं की भर्ती और उन्हें कट्टरता के लिए उकसाने में शामिल थे।
एनआईए की सामने आई दलील
एनआईए से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों आरोपी हथियारों और विस्फोटकों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने, पीएफआई कैडरों को हथियार उठाने के लिए उकसाने और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसे जुटाने में भी शामिल पाए गए। यह आरोपी भारत में विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और देश में इस्लामिक शासन स्थापित करने के लिए युवाओं को हिंसक तरीकों का सहारा लेने के लिए उकसाते पाए गए।
इन बातों के जरिए उकसाने का प्रयास
एनआईए ने चार्जशीट के बारे में कहा कि आरोपी व्यक्तियों ने मुस्लिम युवाओं को यह विश्वास दिलाकर कट्टरपंथी बना दिया कि भारत में इस्लाम खतरे में है। जांच एजेंसी के मुताबिक पीएफआई कैडरों और समुदाय के लिए यह जरूरी था कि वे 2047 तक इस्लाम की रक्षा करने और भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने के लिए हथियारों के उपयोग में खुद को प्रशिक्षित करें। आरोपी व्यक्ति हथियारों की खरीद के लिए पैसा जमा कर रहे थे।