रायपुर

धरोहर टॉक्सः छत्तीसगढ़ के 25 बरस पर बोले बच्चे... चीला, फरा,सिद्दा को मिले पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बच्चों ने कहा कि प्रदेश की संस्कृति को बढ़ाने और विश्वस्तर पर पहचान दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ व्यंजन चीला, फरा, अइरसा, ठेठरी,,, सिद्दा जैसा आकर्षक आभूषणों को विश्व स्तरीय पहचान मिलनी चाहिए। मौका था छत्तीसगढ़ की दो बेटियां वकील रूपल विजय पांडे और वकील यशप्रदा रामदास जोगलेकर द्वारा शुरू की गई सामुदायिक पहल ‘धरोहर टॉक्स’, का। जिसमें शामिल होकर आरडी तिवारी, मायाराम सुरजन और डंगनिया स्कूल के 9वीं से 12वीं के 400 से अधिक बच्चों ने  “छत्तीसगढ़ के पच्चीस बरस: मोर सोच मं, मोर कल्पना” पर अपने विचार कागज पर लिखे। 

यशप्रदा रामदास जोगलेकर ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं में नागरिक चेतना, कानून की समझ और शासन से जुड़ाव बढ़ाना है। इस अभियान को रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। धरोहर टॉक्स ने इस प्रथम चरण के साथ युवाओं की सोच और समाज निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम बढ़ाया है।  

यशप्रदा ने बतायाकि विद्यार्थियों ने आने वाले 25 वर्षों के छत्तीसगढ़ की अपनी कल्पनाओं को निबंधों, आलेखों और चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। कई विद्यार्थियों ने स्वच्छ और हरित छत्तीसगढ़ की दृष्टि को डायग्राम और रेखाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। किसी ने वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, तो किसी ने महिला सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, और सांस्कृतिक संरक्षण पर अपने विचार रखे। ‘धरोहर टॉक्स’ ने युवाओं में अपने राज्य के प्रति जिम्मेदारी और गर्व की भावना को प्रोत्साहित किया है। विद्यार्थियों के शब्दों में - “धरोहर सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि वह सपना है जो हम भविष्य को सौंपना चाहते हैं।”