रायपुर
सीएम की तारीफ का बड़ा असर - सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए।
‘कुष्ठ रोग-मुक्त भारत’ के लिए रणनीतियों को सुदृढ़ बनाने कार्यशाला का आयोजन
रायपुर। ‘कुष्ठ रोग-मुक्त भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नवा रायपुर में कुष्ठ रोग के शून्य संचरण को प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम प्रदर्शन की समीक्षा और केंद्रित रणनीतिक कार्रवाई पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव एवं मिशन निदेशक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) आराधना पटनायक ने कुष्ठ रोग के बोझ को कम करने में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और याद दिलाया कि देश ने 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में इस बीमारी का उन्मूलन हासिल कर लिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि कई स्थानिक जिलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में संक्रमण अभी भी जारी है, जिसके लिए संक्रमण को पूरी तरह से रोकने के लिए गहन और लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
शीघ्र निदान और त्वरित उपचार के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने स्थानिक क्षेत्रों में समय-समय पर कुष्ठ रोग मामलों की पहचान अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संपर्क ट्रेसिंग को मजबूत करने और विशेष रूप से संवेदनशील और दुर्गम आबादी में संक्रमित मामलों के पात्र स्वस्थ संपर्कों के बीच एकल खुराक रिफैम्पिसिन (एसडीआर) के माध्यम से पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) के कवरेज का विस्तार करने का भी आह्वान किया। राज्यों को संपर्क स्क्रीनिंग और पीईपी कवरेज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि ये उपाय रोग संचरण को कम करने और नए संक्रमणों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पटनायक ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि पर्याप्त प्रगति हासिल की गई है, अब चुनौती शेष स्थानिक क्षेत्रों में प्रगति को बनाए रखने और कार्रवाई में तेजी लाने में है। जवाबदेही, समयबद्ध निर्णय लेने और प्रभावी कार्यक्रम क्रियान्वयन पर बल देते हुए उन्होंने राज्यों से नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करने, क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान करने और सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया। उन्होंने कार्यक्रम क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ढांचे के तहत क्षमता निर्माण, सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों और समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कुष्ठ रोग की बेहतर जांच और शीघ्र निदान के लिए सामुदायिक आधारित मूल्यांकन चेकलिस्ट (सीबीएसी), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करने की वकालत की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत उपलब्ध फ्लेक्सी-पूल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए राज्य और जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों को मार्गदर्शन भी दिया और सभी भागीदार राज्यों से शून्य संचरण के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में गति बनाए रखने का आह्वान किया।
महामारी विज्ञान संबंधी परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए सुश्री पटनायक ने प्रतिभागियों को सूचित किया कि पांच उच्च प्राथमिकता वाले राज्य - महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश - मिलकर भारत में कुष्ठ रोग के लगभग 50 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि इन राज्यों में प्रति 10,000 जनसंख्या पर एक से अधिक मामले दर्ज करने वाले जिलों की संख्या भी काफी अधिक है, जिनमें छत्तीसगढ़ के 23 जिले, झारखंड के 21 जिले, महाराष्ट्र और ओडिशा के 18-18 जिले और मध्य प्रदेश के 10 जिले शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जहां अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कुष्ठ रोग उन्मूलन का दर्जा हासिल कर लिया है, वहीं छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ अभी भी उप-राष्ट्रीय स्तर पर उन्मूलन लक्ष्य प्राप्त करने से पीछे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शून्य संचरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों के बीच मजबूत सहयोग, साक्ष्य-आधारित योजना, गहन निगरानी, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और इस बीमारी से जुड़े कलंक और भेदभाव को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक होंगे।
स्कूल चले हम... मंगलवार को खुलेंगे स्कूल.. शिक्षकों को लगानी होगी आनलाइन हाजिरी
रायपुर। प्रदेश में मंगलवार 16 जून से स्कूल खुल जाएंगे। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। मंगलवार से प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल खुल जाएंगे। शासन ने स्कूलों में एक तरफ जहां राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान के साथ राजगीत और सरस्वती वंदना को अनिवार्य कर दिया हैं। वहीं दूसरी तरफ पहले ही दिन से पढ़ाई और शिक्षकों के लिए आनलाइन हाजिरी अनिवार्य कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षक और छात्र दोनों को समय का पूरा पालन करना होगा। गर्मी की छुट्टियों के बाद लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर विभाग की पैनी नजर रहेगी।
इस नए सत्र से हाजिरी को लेकर सबसे बड़ा डिजिटल बदलाव होने जा रहा है । शालाओं के समस्त कर्मचारियों को 16 जून से अपनी उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र द्वारा बनाए गए मोबाइल एप्लीकेशन (VSK App) के जरिए ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। अगर किसी कर्मचारी ने इस ऐप पर अपनी अटेंडेंस दर्ज नहीं की, तो उसकी उपस्थिति शून्य (Absent) मानी जाएगी। विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि ऐसा होने पर जून महीने का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
स्कूलों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब दफ्तर के स्टाफ को ‘AEBAS’ (आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम) के जरिए ही हाजिरी लगानी होगी। ऐसा न करने वालों की सैलरी भी रोक दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी की होगी।
प्रदेश के स्कूलों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ राजगीत और सरस्वती वंदना अनिवार्य
रायपुर। प्रदेश सरकार ने नए शिक्षा सत्र से राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत तथा सरस्वती वंदना का नियमित आयोजन अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए सभी विद्यालयों को निर्धारित व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक चेतना के विकास के उद्देश्य से विद्यालयों में प्रतिदिन निर्धारित समय-सारणी के अनुसार विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर आयोजित प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा।
इसके अलावा मध्याह्न भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक वाचन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि इन गतिविधियों के नियमित संचालन से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होगा। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर इन गतिविधियों के संचालन की निगरानी करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित व्यवस्था के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्य अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
22 ग्राम पंचायतों में लगी कृषक चौपाल, प्राकृतिक खेती पर जोर
रायपुर: ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए महासमुंद जिले की 22 ग्राम पंचायतों में कृषक चौपाल एवं कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। अभियान 30 जून तक संचालित किया जाएगा।
कृषि विभाग के अनुसार विकासखंड महासमुंद की 5 ग्राम पंचायतों, बसना की 8, पिथौरा की 2 और सरायपाली की 7 ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। चौपालों में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कार्यक्रमों में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती के लाभ, हरी खाद, नील हरित काई तथा जैविक उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही यूरिया और डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी, जैव उर्वरक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, जैविक खाद एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की, ताकि खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बन सके।
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस : बच्चों के हाथों में औजार नहीं, शिक्षा, संस्कार और सपनों की उड़ान होनी चाहिए : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
रायपुर : अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है, जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के अवसरों को छीन लेता है।
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके हाथों में किताबें, खेल और रचनात्मक अवसर होने चाहिए, न कि श्रम का बोझ। किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना उसके सपनों और संभावनाओं को सीमित करने के समान है। बाल श्रम केवल सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
राजवाड़े ने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि किसी बच्चे से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा हो, उसे शिक्षा से वंचित रखा जा रहा हो अथवा उसके साथ किसी प्रकार का शोषण या दुर्व्यवहार हो रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें।
उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और जागरूक समाज ही बच्चों को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य दे सकता है। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम में नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों के साथ विकसित हो, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग का विशेष अभियान: 350 वाहनों की जांच, 5.50 लाख का जुर्माना वसूला
रायपुर : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा को लेकर एक विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाना है। अभियान के दौरान अब तक लगभग 350 वाहनों की सघन जांच की जा चुकी है। नियमों की अनदेखी और विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर वाहन स्वामियों से 5.50 लाख रुपए का समन शुल्क (जुर्माना) वसूल किया गया है। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की गई है।
परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने राज्य के सभी क्षेत्रीय और जिला परिवहन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित यात्री बसों, विशेषकर स्लीपर कोच बसों की कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस विशेष अभियान के तहत मुख्य बिंदुओं पर रूप से कार्रवाई की जा रही है।
स्लीपर कोच बसों में चालक दल (क्रू) के लिए बनाए गए अनधिकृत विभाजनों (पार्टीशन) और स्लीपर बर्थ में लगाए गए अवैध स्लाइडरों को मौके पर ही हटाया जा रहा है।
सभी बसों में सुरक्षा के लिहाज से न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जा रही है। बसों में जीपीएस (GPS) की उपलब्धता और उसकी कार्यशीलता को परखा जा रहा है। साथ ही, निर्धारित मानकों के विपरीत बनी श्बस बॉडीश् के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
बसों के वैध पंजीयन, फिटनेस, परमिट और एआईएस-119 मानकों के अनुरूप निर्माण की गहनता से जांच की जा रही है।
परिवहन आयुक्त ने सख्त लहजे में अधिकारियों से कहा है कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के चालान काटने, परमिट/लाइसेंस निलंबित करने जैसी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं। परिवहन आयुक्त ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
सड़क पर प्रवर्तन कार्रवाई करने के साथ-साथ विभाग संवाद का रास्ता भी अपना रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में क्षेत्रीय व जिला परिवहन अधिकारियों द्वारा बस स्वामियों और संचालकों की बैठकें ली जा रही हैं। इन बैठकों में उन्हें तय नियमों और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत और समझाइश दी जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी संचालक को बख्शा नहीं जाएगा।
छत्तीसगढ़ में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की 27वीं क्षेत्रीय बैठक संपन्न
रायपुर। केंद्रीय न्यासी बोर्ड, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय 27वीं बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने की। गुप्ता ने निर्देश दिए है कि मृत्यु प्रकरणों में तेजी से ईएसआईसी के साथ समन्वय कर उद्योगों में होने वाले आकस्मिक मृत्यु प्रकरणों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देकर तत्काल निपटाया जाए। सचिव ने कहा कि निष्क्रिय भविष्य निधि खातों के लाभार्थियों की पहचान कर उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में प्रत्येक माह की 27 तारीख को आयोजित निधि आपके निकट कार्यक्रम में जिला कलेक्टर, ईएसआईसी सहायक श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त एवं संबंधित राज्य सरकार के विभागों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए।
बैठक का संचालन सदस्य सचिव एवं क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त जयवदन इंगले द्वारा किया गया। क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त जयवदन इंगले ने बैठक में संगठन की व्याप्ति, न्यायालयीन प्रकरणों, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, कर्मचारी पंजीकरण योजना 2025, प्रयास, तत्पर, कन्वर्जेंस बैठक तथा नवीन साइट्स प्रोजेक्ट की प्रगति पर जानकारी दी। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे नियोक्ताओं एवं पीएफ सदस्यों को निधि आपके निकट कार्यक्रम में भाग लेकर समस्याओं का समाधान कराने हेतु प्रोत्साहित करें।उल्लेखनीय है कि कर्मचारी भविष्य निधि क्षेत्रीय समिति प्रत्येक राज्य में सांविधिक प्रावधानों के तहत गठित एक महत्वपूर्ण परामर्शदात्री समिति है। बैठक में छत्तीसगढ़ में ईपीएफ अधिनियम के अनुपालन, सामाजिक सुरक्षा लाभों के विस्तार तथा कार्यालय की उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में उप केंद्रीय श्रमायुक्त बिधान चंद्र नायक, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के उप निदेशक एनके पटनायक एवं रत्नेश राजन्या उपस्थित रहे। नियोक्ता पक्ष से छ.ग. उद्योग महासंघ के अध्यक्ष महेश कक्कड़ और उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन गर्ग सम्मिलित हुए। कर्मचारी प्रतिनिधि के रूप में राधेश्याम जायसवाल, ईश्वर चंदेल, शंख ध्वनि सिंह एवं एचएस मिश्रा ने भाग लिया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की ओर से क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त- जयवदन इंगले, क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त गौरव डोगरा एवं देबाशीष चांद तथा सहायक भ.नि. आयुक्त आकाश अग्रवाल उपस्थित थे। पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति गौरव डोगरा ने दी।
एम्स रायपुर ने 13 घंटे की जटिल हृदय सर्जरी से बचाई 38 वर्षीय युवक की जान
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग ने एक अत्यंत जटिल और जानलेवा हृदय रोग से पीड़ित 38 वर्षीय युवक का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सरगुजा जिले के निवासी मरीज को “एक्यूट स्टैनफोर्ड टाइप-ए एओर्टिक डिसेक्शन” नामक दुर्लभ और गंभीर हृदय आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ रहा था, जिसे चिकित्सा विज्ञान में सबसे खतरनाक हृदय संबंधी आपात स्थितियों में शामिल माना जाता है।
मरीज सीने में गंभीर दर्द और अन्य लक्षणों के साथ एम्स रायपुर पहुंचा। हृदय रोग विभाग की बाह्य रोगी सेवा (ओपीडी) में जांच के दौरान चिकित्सकों ने बीमारी की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल विस्तृत परीक्षण कराए। इकोकार्डियोग्राफी और बाद में किए गए सीटी एओर्टोग्राम में एक्यूट स्टैनफोर्ड टाइप-ए एओर्टिक डिसेक्शन की पुष्टि हुई।
यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर की मुख्य रक्त वाहिका एओर्टा की भीतरी परत फट जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर कुछ ही घंटों में मरीज की मृत्यु हो सकती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हृदय रोग विभाग, हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग, कार्डियक एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), नर्सिंग एवं तकनीकी टीमों ने तत्काल समन्वय स्थापित किया। निदान की पुष्टि होने के मात्र 90 मिनट के भीतर मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर जीवनरक्षक शल्य चिकित्सा प्रारंभ कर दी गई।
लगभग 13 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त एओर्टा को कृत्रिम ग्राफ्ट से प्रतिस्थापित किया गया तथा एओर्टिक वाल्व का सफल प्रत्यारोपण भी किया गया। शल्य चिकित्सा हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा संपन्न की गई, जबकि कार्डियक एनेस्थीसिया टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। छह दिन तक कार्डियक आईसीयू में निगरानी के बाद उसे वार्ड में स्थानांतरित किया गया और ऑपरेशन के दसवें दिन स्वस्थ एवं स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन कुमार कश्यप ने बताया कि इस बीमारी में उपचार में प्रत्येक घंटे की देरी से मृत्यु का जोखिम 1 से 2 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यजीत ने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान, त्वरित निर्णय और विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय के कारण मरीज का जीवन बचाया जा सका।
एम्स रायपुर की यह सफलता संस्थान की उन्नत हृदय शल्य चिकित्सा क्षमता और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन की दक्षता को रेखांकित करती है। साथ ही यह भी दर्शाती है कि संस्थान छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों के मरीजों को विश्वस्तरीय हृदय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम है।
रावणभाठा सबस्टेशन में मेंटेनेंस का असर, रायपुर के 42 इलाकों में शाम की जलापूर्ति रहेगी बंद
रायपुर। शहर के 42 इलाकों में गुरुवार शाम पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी। रावणभाठा उपकेंद्र में 33 केवी लाइन पर मेंटेनेंस कार्य और भूमिगत केबल को मुख्य लाइन से जोड़ने के कारण शहर के प्रमुख जल शोधन संयंत्रों का संचालन अस्थायी रूप से बंद रहेगा। नगर निगम जलकार्य विभाग ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सुबह नियमित जलापूर्ति की गई है, जबकि शाम की सप्लाई नहीं हो सकेगी। हालांकि, 12 जून की सुबह से जलापूर्ति सामान्य होने की संभावना है।
जलापूर्ति प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में डंगनिया, ईदगाहभाठा, गंज, गुढ़ियारी, न्यू राजेंद्र नगर, श्याम नगर, तेलीबांधा, शंकर नगर, खमतराई, भनपुरी, भाठागांव, चंगोराभाठा, कुशालपुर, डीडी नगर, सरोना, टाटीबंध, कोटा, कबीर नगर, जरवाय, गोगांव, मठपुरैना, लालपुर, अमलीडीह, अवंति विहार, मंडी, मोवा, सड्डू, दलदल सिवनी, रामनगर, कचना, आमासिवनी, देवपुरी, मोतीबाग, बोरियाखुर्द, जोरा, रायपुरा, कुकरबेड़ा, बैरन बाजार, देवेंद्र नगर और संजय नगर सहित अन्य इलाके शामिल हैं।
बिजली वितरण कंपनी द्वारा रावणभाठा उपकेंद्र में 33 केवी के 10-पोल स्ट्रक्चर के बीच बिछाई गई भूमिगत केबल को मुख्य लाइन से जोड़ा जा रहा है। इस कार्य के चलते 33 केवी इंटेकवेल और फिल्टर प्लांट की बिजली सप्लाई अस्थायी रूप से बंद की गई है। इसके कारण 80 एमएलडी, न्यू 80 एमएलडी और 150 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र प्रभावित हुए हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित जलागारों से जुड़े क्षेत्रों को छोड़कर शहर के अन्य ओवरहेड टैंकों और पावर पंपों से जलापूर्ति सामान्य रूप से जारी रहेगी। निगम ने नागरिकों से आवश्यक मात्रा में पानी सुरक्षित रखने और पानी का उपयोग सावधानीपूर्वक करने की अपील की है।
अफीम-गांजा की खेती पर बढ़ेगी निगरानी
रायपुर : खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले को नशामुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। कलेक्टर ने अधिकारियों को अफीम, गांजा, तंबाकू सहित अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती पर विशेष नजर रखने तथा एनडीपीएस एक्ट के तहत जब्त वाहनों की राजसात और नीलामी की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स समन्वय समिति (एनसीओआरडी) की बैठक में कलेक्टर ने मादक पदार्थों की अवैध खेती, तस्करी, नशा मुक्ति और प्रवर्तन संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व, वन और पुलिस विभाग के अधिकारियों से कहा कि मैदानी अमले को अफीम, गांजा और अन्य प्रतिबंधित फसलों की पहचान संबंधी जानकारी एवं तस्वीरें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अवैध खेती की समय रहते पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत जब्त वाहनों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को राजसात और नीलामी की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा सभी मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नशा मुक्ति और पुनर्वास सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने पुनर्वास केंद्रों की क्षमता बढ़ाने, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और अधिक से अधिक प्रभावित लोगों तक उपचार एवं परामर्श सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। औषधि नियंत्रण विभाग को लाइसेंस प्राप्त मेडिकल दुकानों एवं संस्थानों में नियंत्रित दवाओं के स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन करने तथा किसी भी अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
खुशियों की चाबी’ से साकार हो रहा पक्के घर का सपना
रायपुर : अपना पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। बालोद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इस सपने को तेजी से साकार कर रही है। सुशासन तिहार 2026 के दौरान बालोद जिले में आयोजित समाधान शिविरों में जब जनप्रतिनिधियों ने आवास लाभार्थियों को उनके नए घरों की ‘खुशियों की चाबी’ सौंपी, तो अनेक परिवारों की वर्षों पुरानी आकांक्षा पूरी होने की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक उठी।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत 54,151 आवासों में से 48,421 आवास पूर्ण हो चुके हैं। यह कुल लक्ष्य का 89.42 प्रतिशत है। शेष 5,730 आवास निर्माणाधीन हैं, जिन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के लिए लाभार्थियों से लगातार संपर्क कर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सुशासन तिहार के शिविरों में प्रत्येक शिविर में औसतन 5 से 7 आवास हितग्राहियों को पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। लाभार्थियों ने मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए अन्य ग्रामीणों से समय पर आवास निर्माण पूरा करने तथा जल संरक्षण के लिए सोकपिट निर्माण कराने की अपील भी की।
योजना के तहत निर्माण कार्यों में वित्तीय बाधा न आए, इसके लिए शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्यों को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई है। इसी क्रम में बालोद जिले के 3,278 लाभार्थियों के लिए 10.12 करोड़ रुपये के एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) जारी किए गए हैं। यह राशि शीघ्र ही डीबीटी के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे आवास निर्माण में गति आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की तस्वीर और अधिक सशक्त होगी।
सृजन का कमाल: ‘आकार-2026’ में सिपोरेक्स और थर्माकोल से गढ़ी गई कला की नई दुनिया
रायपुर : छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ ने इस वर्ष प्रतिभागियों को केवल पारंपरिक और लोक कलाओं से ही नहीं, बल्कि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक एक अनूठी कला से भी परिचित कराया। शिविर के दौरान बोनसाई कला के अंतर्गत प्रशिक्षुओं ने ऐसी तकनीक सीखी, जिसने सामान्यतः अनुपयोगी समझे जाने वाले सिपोरेक्स ब्लॉक्स और थर्माकोल के टुकड़ों को आकर्षक कलाकृतियों में बदल दिया।
शिविर में प्रतिभागियों ने बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले सिपोरेक्स ब्लॉक्स एवं थर्माकोल पीस से विभिन्न आकार-प्रकार के कलात्मक गमले, प्राकृतिक लैंडस्केप, पहाड़, चट्टानें तथा सजावटी संरचनाएं तैयार करना सीखा। कला और पर्यावरण संरक्षण के इस अद्भुत संगम ने प्रशिक्षार्थियों को न केवल नई रचनात्मक संभावनाओं से परिचित कराया, बल्कि उन्हें अपशिष्ट सामग्री के उपयोग के प्रति भी जागरूक बनाया।
इस विशेष प्रशिक्षण का संचालन प्रसिद्ध बोनसाई विशेषज्ञ डॉ. मनोज अग्रवाल ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को सिखाया कि किस प्रकार साधारण और अनुपयोगी सामग्री को कल्पनाशीलता और तकनीकी कौशल के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियों में परिवर्तित किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सामग्री चयन, डिजाइन निर्माण, आकार निर्धारण, रंग-सज्जा तथा बोनसाई प्रदर्शन के लिए उपयुक्त लैंडस्केप तैयार करने की बारीकियों से भी प्रशिक्षुओं को अवगत कराया।
शिविर में लगभग 80 प्रशिक्षार्थियों ने इस अनूठी विधा का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बनता था। युवा कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कला प्रेमियों तक, सभी ने पूरे मनोयोग से इस कला को सीखा और अपने हाथों से आकर्षक मॉडल तैयार किए। प्रशिक्षण के अंतिम दिनों में तैयार की गई कलाकृतियों ने दर्शकों और अन्य प्रतिभागियों का भी ध्यान आकर्षित किया।
प्रशिक्षार्थियों ने बताया कि यह कला न केवल सौंदर्यबोध विकसित करती है, बल्कि कम लागत में घर, बगीचे और सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने का अवसर भी प्रदान करती है। उन्होंने इस नवाचारी प्रशिक्षण को ‘आकार-2026’ की सबसे रोचक और उपयोगी गतिविधियों में से एक बताया।
विशेष बात यह रही कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लगभग सभी प्रतिभागियों ने इस विधा के प्रति गहरी रुचि व्यक्त करते हुए आगामी ‘आकार’ शिविरों में भी इसे पुनः सीखने और उन्नत स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छा जताई। प्रशिक्षार्थियों का मानना है कि यह कला भविष्य में स्वरोजगार और रचनात्मक उद्यमिता के नए अवसर भी उपलब्ध करा सकती है।
गौरतलब है कि 25 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित संस्कृति विभाग के कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ में चित्रकला, मूर्तिकला, लोक एवं जनजातीय कलाओं सहित अनेक विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर का समापन 9 जून को रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा सीखी गई विविध कलाओं का प्रदर्शन भी किया गया। बोनसाई कला के अंतर्गत सिपोरेक्स और थर्माकोल से कलात्मक संरचनाएं बनाने का यह प्रयोग शिविर की सबसे चर्चित और सराहनीय गतिविधियों में शामिल रहा।
इस प्रकार के नवाचार न केवल कला के नए आयाम खोलते हैं, बल्कि युवाओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाते हुए रचनात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करते हैं। ‘आकार-2026’ में मिली इस नई सीख ने प्रतिभागियों को संदेश दिया कि सृजनशीलता हो तो बेकार समझी जाने वाली वस्तुएं भी कला की अद्भुत कृतियों में बदल सकती है।
मुरम और रेत के खनन और परिवहन के मामले में एक जेसीबी और दो हाईवा जब्त
रायपुर : राजनांदगांव जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक जेसीबी और दो हाईवा वाहनों को जब्त किया है। वाहनों का उपयोग मुरूम और रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में किया जा रहा था। जब्त वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए थाना मोहारा के सुपुर्द कर दिया गया है।
कलेक्टर जितेंद्र यादव के निर्देशानुसार जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग की टीम ने ग्राम अछोली, चौथना, छिरपानी, कल्याणपुर, ढारा और मुढ़िया मोहारा क्षेत्र में आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान मुरूम और रेत के अवैध उत्खनन तथा परिवहन के मामले सामने आए।
खनिज विभाग ने ग्राम बिजनापुर निवासी हेम प्रकाश वर्मा के स्वामित्व वाली जेसीबी क्रमांक सीजी-08-बीबी-4365 तथा राजनांदगांव निवासी प्रशांत सिन्हा के स्वामित्व वाली हाईवा क्रमांक सीजी-08-एआर-7660 को मुरूम के अवैध उत्खनन में संलिप्त पाए जाने पर जब्त किया। वहीं छुईखदान निवासी मनीष चंद्राकर के स्वामित्व वाली हाईवा क्रमांक सीजी-04-एनजे-2055 को रेत के अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया गया।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि संबंधित प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिले में खनिज संपदा के संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार गश्त, निरीक्षण और निगरानी अभियान जारी रखा गया है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से बृजेश्वर सागर जलाशय के नवीनीकरण हेतु 4.94 करोड़ रुपए स्वीकृत
रायपुर : महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सतत प्रयासों से सूरजपुर जिले के विकासखंड भैयाथान स्थित बृजेश्वर सागर जलाशय योजना के नवीनीकरण कार्य के लिए 4 करोड़ 94 लाख 13 हजार रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के माध्यम से क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा तथा किसानों को बेहतर कृषि सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इस कार्य के पूर्ण होने पर 464 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा, कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी तथा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सिंचाई संसाधनों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
बृजेश्वर सागर जलाशय के नवीनीकरण से भैयाथान क्षेत्र के किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए मुख्य अभियंता, हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग, अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। यह परियोजना क्षेत्र में जल संरक्षण एवं कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
अवैध खनिज परिवहन पर बड़ी कार्रवाई: बिना अभिवहन पास चूना पत्थर गिट्टी से भरे 3 ट्रेलर जब्त
रायपुर : प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन और खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सूरजपुर जिले में खनिज विभाग की टीम ने बिना वैध अभिवहन पास के खनिज परिवहन कर रहे तीन ट्रेलर वाहनों को जब्त किया है।
जानकारी के अनुसार, कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर खनिज अमला द्वारा प्रेमनगर क्षेत्र में खनिज वाहनों की सघन जांच की गई। जांच के दौरान तारा मुख्य मार्ग पर चूना पत्थर गिट्टी से भरे तीन ट्रेलर वाहन बिना अभिवहन पास के परिवहन करते पाए गए। प्रारंभिक जांच में वाहन जिला जांजगीर-चांपा स्थित क्रशर से लोड होकर संचालित होना पाए गए।
खनिज विभाग ने संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध अवैध खनिज परिवहन का प्रकरण दर्ज करते हुए तीनों ट्रेलरों को पुलिस थाना प्रेमनगर की अभिरक्षा में रखा है। प्रकरण में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
प्रदेश में खनिज संसाधनों के संरक्षण एवं राजस्व हानि रोकने के उद्देश्य से जिला स्तरीय टास्कफोर्स और खनिज अमला द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी और जांच अभियान संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन, परिवहन अथवा भण्डारण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।