रायपुर
मानवतावादी डिजाइन शिखर सम्मेलन 2026 में नैतिकता, मानवता और जलवायु परिवर्तन पर विमर्श
रायपुर। राजकुमार कॉलेज रायपुर एवं बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 16अक्टूबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक एक ऐसे सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों, नैतिकता, मानवता ,सामाजिक समरसता, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण की देखभाल और आपसी सहयोग के साथ व्यक्ति के समग्र विकास के महत्वपूर्ण आयामों पर व्यापक विचार विमर्श का अवसर मिला।
प्रथम सोपान में देश के 12 विद्यालयों की 45 टीमों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के अंतिम सोपान के फायनल राउंड में 3जनवरी को स्थानीय राजकुमार कॉलेज रायपुर में 8 टीमों ने हिस्सा लिया। शीर्ष आठ फाइनलिस्ट टीमों में इन विद्यालयों के विद्यार्थी शामिल हुए डीपीएस दुर्ग, रॉयल किड्स कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजनांदगांव, रिवरडेल वर्ल्ड स्कूल महासमुंद, छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल रायपुर, भारतीय भवन्स आर के शारदा विद्या मंदिर रायपुर और राजकुमार कॉलेज रायपुर ।
इस कार्यक्रम में मुंजाल विश्वविद्यालय के डॉ.सौम्यजीत और प्रोफेसर कल्पिता पॉल के अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को जानने समझने को मिला कि मानवाधिकारों का सम्मान और सामाजिक - नैतिक विकास की वास्तविक चुनौतियों के कारण और निदान।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि श्री समीर बाजपेयी मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग प्रमुख एनआईटी रायपुर ने विद्यार्थियों को बताया कि कैसे अपनी दैनिक दिनचर्या में आधुनिक सुविधाओं के साथ आने वाली पीढ़ी कैसे अपनी प्रकृति को बचाने में सहायक हो सकती है और कैसे पिछली पीढ़ी की गलतियों को दोहराने से बचाने में हम स्वयं मददगार बन सकते हैं ?
राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य ले कर्नल अविनाश सिंह ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित ऐसे सम्मेलन विद्यार्थियों में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक कौशल को तो बढ़ाते हैं साथ ही सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ाते हुए वास्तविक दुनिया की समस्याओं से अवगत होते हुए अधिक सक्षम बनने में सहायक सिद्ध होते हैं। समापन अवसर पर विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सियान गुड़ी में जुटा ‘सहयोग’…. लेमन ग्रास के पौधों का किया रोपण
- ज्येष्ठ नागरिक मंच ने समता कालोनी स्थित सियान गुड़ी में मनाया नववर्ष मिलन
- हल्दी कुंकू के साथ किया सदस्यों का स्वागत, खेले रोचक गेम्स
रायपुर। चौबे कालोनी स्थित ज्येष्ठ नागरिक मंच सहयोग ने नव वर्ष पर संस्था की पहली बैठक रविवार, 4 जनवरी को समता कालोनी स्थित सियान गुड़ी यानी दिव्यांग बालिका विकास गृह में आयोजित की। नववर्ष मिलने के साथ रोचक गेम्स ने कार्यक्रम को और मनोरंजक बना दिया। आयोजन में आए सभी सदस्यों का हल्दी कुंकू लगाकर स्वागत किया गया। वहीं परिसर में लेमन ग्रास के पौधों का रोपण भी किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत गणेश वंदना के साथ की गई। वहीं जिन सदस्यों का जन्मदिन जनवरी माह में होता है, उन्हें शुभकामनाएं दी गई। जनवरी माह में प्रथम त्योहार मकर संक्रांति आता है, इसलिए मकर संक्रांति निमित्त तिलगुड़ देने का कार्यक्रम भी ग्रुप के वरिष्टतम सदस्य द्वारा किया गया। जिसमें सभी सदस्यों को तिल के लड्डू बांटे गए एवं महिलाओं द्वारा महाराष्ट्रीयन प्रथा अनुसार हल्दी कुंकू लगाया गया।

तत्पश्चात सहयोग की अध्यक्ष अपर्णा काळेले ने विगत 2025 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें उक्त वर्ष में किए गए सामाजिक, धार्मिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों एवं हिंदू तीज त्योहारों का किस प्रकार से मासिक बैठकों में मनाते हुए इस ग्रुप द्वारा आनंद उठाया गया उसका विवरण प्रस्तुत किया।
काळेले ने बताया कि संस्था में वर्तमान में 96 सदस्य हैं। जिसमें कई सदस्य 90 वर्ष के ऊपर के हैं। कार्यक्रमों में उनका उत्साह सभी को प्रेरित करता है। पिकनिक वगैरह में उनका सम्मिलित होना एक आश्चर्य की बात है। सचिव रविंद्र भागवत द्वारा आर्थिक प्रतिवेदन 2025 का वाचन किया गया। जिसमें विगत वर्ष का संपूर्ण खर्च एवं आवक-जावक सब सदस्यों के समक्ष रखा गया।

सदस्य अरविंद वाघ व श्रवण चोरनेल द्वारा कविता पाठ करने के पश्चात दिव्या पात्रीकर एवं दीपांजली भालेराव द्वारा बहुत ही रोचक व मनोरंजक हाऊजी खिलाई गई। जिससे सभी सदस्य बहुत आनंदित हुए है विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सियान गुडी के संरक्षक श्याम सुंदर खंगन ने सियान गुड़ी योजना के बारे में सभी सदस्य को अवगत कराया। अंत में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर जे एस उरकुरकर के निर्देशन में सियान गुड़ी परिसर में सजावटी पौधों और लेमन ग्रास का भी रोपण किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन दिव्या पात्रीकर द्वारा किया गया। अंत में कार्यक्रम का समापन स्वादिष्ट भोजन के साथ हुआ।
तीन किलो वाट के सोलर रूफटॉप संयंत्र में बैटरी की जरूरत नहीं, अन्य रखरखाव भी आसान
रायपुर। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे सोलर रूफटॉप संयंत्रों के रख-रखाव में खर्च को लेकर कुछ भ्रांतियां सामने आई हैं, जबकि वस्तुस्थिति में ऐसी कोई समस्या नहीं है। 3 किलोवॉट तक तो बैटरी की जरूरत ही नहीं है। वेंडर्स द्वारा 3 किलोवॉट से अधिक क्षमता के उपभोक्ताओं को 5 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक लंबी वारंटी बैटरी के लिए दी जा रही है। वेंडर्स को 5 वर्ष तक वार्षिक रख-रखाव अनुबंध के तहत सेवा देनी होगी। सोलर पैनल की सफाई के लिए कोई विशेष तकनीकी आवश्यक नहीं है। धूल जमने पर इसे सामान्य पानी से साफ किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत लगाए जाने वाले सोलर रूफटॉप संयंत्र को लेकर एक भ्रामक प्रचार प्रकाश में आया है कि इसमें जितनी राशि का बिजली बिल माफ होता है उससे अधिक खर्च इसके रख-रखाव में हो जाता है। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूर्णतः गलत है। वास्तव में 3 किलोवॉट तक के संयंत्रों से 300 यूनिट निःशुल्क बिजली प्राप्त होने की बात ही सही है। हजारों उपभोक्ता इस योजना के माध्यम से अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुए हैं।
केंद्र और राज्य शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान किए जाने एवं 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर बैंक ऋण दिए जाने से रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट लगाने का काम काफी किफायती हो गया है। जहां तक बैटरी की खराबी और उसके रख-रखाव का विषय है तो वास्तविकता यह है कि 3 किलोवॉट तक के संयंत्रों के लिए ऑन-ग्रिड प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें बैटरी की आवश्यकता ही नहीं होती। अतः बैटरी बदलने या बैटरी संबंधी रख-रखाव का सवाल ही पैदा नहीं होता।
यदि कोई उपभोक्ता ‘हाइब्रिड’ सिस्टम का चयन करता है, तो वर्तमान में उपलब्ध आधुनिक लिथियम-आयन बैटरियों की तकनीक अत्यंत उन्नत है। इन बैटरियों का चार्जिंग-डिस्चार्जिंग चक्र लगभग 6,000 तक है, जो कि अत्यंत विश्वसनीय है। इसके साथ ही कंपनियां बैटरी पर 5 से 10 वर्ष तक की लंबी वारंटी प्रदान कर रही हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार वेंडर-संस्थापनकर्ता को 5 वर्ष का वार्षिक रख-रखाव अनुबंध प्रदान करना अनिवार्य है। अतः 5 वर्षों तक उपभोक्ता पर रख-रखाव का कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आता है।
कुछ लोगों द्वारा वर्ष 2019 के एक उदाहरण को उल्लेखित किया जाता है, जबकि पीएम सूर्यघर योजना 13 फरवरी 2024 को नवीनतम और कड़े तकनीकी मानकों के साथ शुरू की गई है। पुराने और अप्रचलित उदाहरणों के आधार पर वर्तमान योजना की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाना अनुचित एवं भ्रामक है। धूल के कारण उत्पादन में कमी एक आना और सामान्य सफाई से इसका उपचार एक बहुत सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें सामान्य पानी से सफाई कर ठीक किया जा सकता है। इसे एक बड़ी तकनीकी विफलता या भारी खर्च के रूप में प्रस्तुत करना अतिश्योक्तिपूर्ण है।
रायपुर में 150 से अधिक भाषाओं की पुस्तकें, कैलेंडर और पत्रिकाओं का अनोखा संग्रहालय
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली विभिन्न बोलियों और भाषाओं में प्रकाशित कैलेंडर के साथ पत्र पत्रिकाओं और देश के कई राज्यों के साथ नीदरलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, फिलिपिंस, नेपाल, अमेरिका, रुस, फ्रांस, चेकोस्लोवाकिया जैसे देशों की 150 से अधिक पुस्तकों का अद्भुत संग्रह नारायणी बहुभाषी संग्रहालय में देखने को मिलेगा। जी.. हां. नारायणी साहित्यिक संस्थान के संचालक राजेंद्र और डॉ मृणालिका ओझा इन पुस्तकों का संग्रह किया। जिसे नारायणी साहित्यिक संस्थान के मुख्यालय पहाड़ी तालाब के सामने, बंजारी मंदिर के पास, वामन राव लाखे वार्ड -66 कुशालपुर रायपुर में देखा जा सकता है।
राजेंद्र और डॉ मृणालिका ओझा ने बताया कि नारायणी साहित्यिक संस्थान द्वारा "नारायणी बहुभाषी संग्रहालय" की स्थापना की गई है। इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी, भथरी, सरगुजिहा, दोरली, धुर्वी आदि बोलियों की पुस्तकें रखी गई है। इसके साथ छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी भाषा के कैलेंडर एवं छत्तीसगढ़ी तथा सरगुजिहा भाषा की पत्रिकाएं प्रदर्शित की गई है।

राजेंद्र ओझा ने बताया कि इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त भारत के अन्य राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, सिक्किम, मिज़ोरम, अरूणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, असम, मणिपुर, नागालैंड, लद्दाख, उत्तराखंड, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, बिहार, राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश, गोवा सहित नेपाल, अमेरिका, रुस, जर्मनी, फ्रांस, चेकोस्लोवाकिया आदि की 150 से ज्यादा भाषा / बोलियों की पुस्तकें प्रदर्शित की गई है। इसके अलावा उपरोक्त प्रदेशों एवं विदेशी मिलाकर करीब 70-80 भाषाओं के लगभग 200 कैलेंडर भी इस संग्रहालय की एक विशेषता है। हिन्दी के अतिरिक्त करीब 25 भाषाओं की 200 से अधिक पत्रिकाएं भी इस संग्रहालय को और महत्वपूर्ण बनाती है।

छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण त्योहार छेरछेरा पुन्नी के दिन डा. सुशील त्रिवेदी, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज, डॉ सुरेन्द्र रावल, डॉ सुधीर शर्मा, शशांक शर्मा, डॉ चित्तरंजन कर, डॉ माणिक विश्वकर्मा, रामेश्वर शर्मा, मुकेश गुप्ता, रवि प्रताप सिंह , कुमार जगदलवी, सुनील पांडेय, जीवेश प्रभाकर, सुभाष शर्मा, आनंद हर्षुल, अरविंद ओझा, शिवाकांत त्रिपाठी, राजेश जैन 'राही', माधुरी कर, उमेश कुमार सोनी, अनुकृति, किशोर, ह्रषीक, रोशनी, चिन्मय झा, सुयश ठाकुर, विजय झा, प्रदीप मिश्रा, अरुण ठाकुर, नवीन निगम, आदि लोग उपस्थित हुए थे।
आबकारी निरीक्षक के पद पर चयनित हुई शिवांगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली शिवांगी का चयन आबकारी निरीक्षक के पद पर हुआ है। शिवांगी सेंट्रल बैंक रायगढ़ शाखा से सेवानिवृत्त कर्मचारी गणेश लाल तिवारी की पुत्री है।
शिवांगी की इस सफलता पर सेंटलाइट क्लब रायगढ़ की ओर से उनके निवास जाकर उन्हें शाल एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और भविष्य में निरंतर प्रगति की सोपान चढ़ने के लिए शुभकामनाएं दी। ज्ञात हो कि शिवांगी ने अन्य प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की हैं। जिनका परिणाम प्रतिक्षासूची में है। सुश्री शिवांगी की सफलता पर पुन: बधाई।
रेरा सख्त: स्वीकृत ले-आउट से विचलन पर “वॉलफोर्ट एलेन्सिया” परियोजना के प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना
रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने रायपुर स्थित “वॉलफोर्ट एलेन्सिया” परियोजना के प्रमोटर के विरुद्ध कड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया है।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि परियोजना में विकास कार्य नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग– T&CP) द्वारा स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप नहीं किया गया। स्वीकृत ले-आउट से हटकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण किया गया, जो रेरा अधिनियम की धारा 14(1) का स्पष्ट उल्लंघन है। उक्त धारा के अनुसार, किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विकास सक्षम प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित रेखांकन, ले-आउट एवं विनिर्देशों के अनुसार ही किया जाना अनिवार्य है।
प्राधिकरण ने यह भी संज्ञान में लिया कि वर्तमान में उक्त STP का उपयोग परियोजना के आबंटितियों द्वारा किया जा रहा है। आबंटितियों के हितों और सार्वजनिक उपयोग को प्रभावित न करने के उद्देश्य से इस स्तर पर STP को ध्वस्त करने अथवा पुनर्निर्माण संबंधी कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, स्वीकृत ले-आउट से किए गए इस विचलन को गंभीर उल्लंघन मानते हुए प्राधिकरण ने प्रमोटर को उत्तरदायी ठहराया है और रेरा अधिनियम की धारा 14(1) के उल्लंघन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। छत्तीसगढ़ रेरा ने पुनः स्पष्ट किया है कि स्वीकृत ले-आउट अथवा योजनाओं से बिना सक्षम प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के किया गया कोई भी परिवर्तन गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छेरछेरा तिहार: घर-घर अन्न दान लेकर मंत्री टंकराम ने निभाई छेरछेरा की परम्परा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परम्पराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
मंत्री वर्मा ने छेरछेरा की परम्परा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों से आत्मीय भेंट की और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
मंत्री ने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का तिहार नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परम्पराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक-पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।
प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 14 फरवरी से.... मेजबानी करेगा छत्तीसगढ़
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित “प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स – 2026” के सफल आयोजन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की।
सरगुजा संभाग में कुश्ती, तीरंदाजी एवं वेटलिफ्टिंग,रायपुर में हॉकी, फुटबॉल एवं तैराकी तथा बिलासपुर में एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स–2026 का उद्घाटन समारोह 14 फरवरी 2026 को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री मांडविया को उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व तथा भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के मार्गदर्शन में खेलों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलना समूचे राज्य के लिए गर्व और सम्मान का विषय है, यह अवसर राज्य की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा।
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने अवगत कराया कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तैराकी सहित कुल 07 मुख्य खेलों की स्पर्धाएँ आयोजित की जाएँगी, वहीं 2 खेल डेमो स्वरूप प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रस्तावित आयोजन के अनुसार
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं में खेल प्रतिभा प्रचुर मात्रा में है और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इस प्रकार के आयोजन खेलों के प्रति नए उत्साह और अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने आयोजन की सभी तैयारियों में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से आदिवासी अंचलों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा तथा छत्तीसगढ़ खेल महाशक्ति के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।
मक्का किसानों की सुविधा के लिए बढ़ाई बिजली उपकेंद्र की क्षमता
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज बिजली उपभोक्ताओं और किसानों के लिए अधोसंरचना को निरंतर अपग्रेड कर रही है। इस दिशा में ट्रांसमिशन कंपनी ने मसोरा स्थित 132 केवी अतिउच्च दाब उपकेंद्र में 63 एमवीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया। इसका लाभ कोंडागांव जिले के 21 हजार किसानों को मिलेगा, जो ग्रीष्मकाल में फसलचक्र परिवर्तन को अपनाकर मक्के की खेती कर रहे हैं। साथ ही आदिवासी क्षेत्र के डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हो सकेगी।
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के इस मौके पर कहा कि माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आदिवासी व वनांचल क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को कार्य तीव्र गति से किये जा रहे हैं। इसी के तहत कोंडगांव जिले के 132/33 केवी उपकेंद्र मसोरा में 8.5 करोड़ की लागत से स्थापित 63 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर सफलतापूर्वक उर्जीकृत किया गया। इस उपकेंद्र मसोरा में पूर्व से 40 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर कार्यरत थे, जिनसे 33 केवी के कुल 8 फीडर निकलते हैं। इन फीडरों के माध्यम से कोंडागांव जिला के कोंडागांव, फरसगांव एवं माकड़ी ब्लॉक के संपूर्ण क्षेत्र तथा बड़ेराजपुर ब्लॉक के आंशिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती है। वहीं, जिले के केशकाल ब्लॉक का संपूर्ण क्षेत्र एवं बड़ेराजपुर ब्लॉक का शेष भाग 132/33 केवी उपकेंद्र कांकेर से विद्युत आपूर्ति प्राप्त करता है।
डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के मुख्य अभियंता (जगदलपुर क्षेत्र) टीके मेश्राम ने बताया कि कोंडागांव जिले में रबी सीजन के दौरान मक्के की व्यापक खेती होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में सिंचाई हेतु विद्युत मांग अत्यधिक बढ़ जाती थी। इसके परिणामस्वरूप उपकेंद्र मसोरा पर ओवरलोड की स्थिति उत्पन्न होती थी, जिससे पूरे जिले में लो वोल्टेज एवं विद्युत कटौती जैसी समस्याएँ सामने आती थीं। क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के समक्ष किसानों ने इस समस्या के निराकरण की मांग भी की थी। अब 63 एमवीए अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर के उर्जीकृत होने से उपकेंद्र मसोरा की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे जिले में विद्युत आपूर्ति स्थिर, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण होगी, ग्रीष्म ऋतु में होने वाली लो वोल्टेज एवं कटौती की समस्या से स्थायी निजात मिलेगी तथा कृषि, घरेलू एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ प्राप्त होगा। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि कोंडागांव जिले के समग्र विकास, किसानों की सिंचाई सुविधा, तथा आम नागरिकों के बेहतर जीवन स्तर की दिशा में एक सशक्त कदम है।
72 की उम्र में समाज सेवी की बने मिसाल... 50 लाख खर्च कर खोल दी ई-लाइब्रेरी
रायपुर। रायपुर नगर निगम से सेवानिवृत्त अपर आयुक्त डॉ. जे.आर. सोनी ने 72 वर्ष की उम्र में समाज सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने आर्थिक रुप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए 50 लाख रुपये की लागत से न्यू राजेंद्र नगर स्थित सतनाम भवन में अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी विकसित की। जिसमें आज सैक़ड़ों विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने में जुटे है।
1981-82 बैच के मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. सोनी ने सेवानिवृत्ति के बाद गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, रायपुर की स्थापना की। अकादमी का संचालन न्यू राजेंद्र नगर स्थित सतनाम भवन से किया जा रहा है। अकादमी के अंतर्गत दो वर्ष पूर्व एयर कंडीशन्ड 50-सीटर हाईटेक ई-लाइब्रेरी की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को सिविल सर्विसेज, कंप्यूटर शिक्षा, करियर गाइडेंस और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
72 वर्ष की आयु में भी डॉ. सोनी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक ई-लाइब्रेरी के संचालन में स्वयं उपस्थित रहकर योगदान दे रहे हैं। उनका जीवन उन नागरिकों और अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, जो मानव सेवा में अपना समय, संसाधन और जीवन समर्पित करने का संकल्प रखते हैं।
डॉ. सोनी के अनुसार, विद्यार्थी तीन बैचों में सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक ई-लाइब्रेरी में अध्ययन करते हैं। समय-समय पर सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस अधिकारियों और करियर काउंसलरों द्वारा वर्कशॉप और मार्गदर्शन कक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं, जिससे विद्यार्थियों को यूपीएससी और सीजीपीएससी जैसी परीक्षाओं की बेहतर समझ मिल सके। बीते दो वर्षों में 200 से अधिक युवाओं ने इस पहल का लाभउठाकर विभिन्न सरकारी नौकरियों और लोक सेवा परीक्षाओं में सफलता हासिल की है।
लाइब्रेरी में अध्ययन कर रहे सिविल सर्विस अभ्यर्थी प्रतीक अग्रवाल और पीएचडी शोधार्थी सुमन घृतलहरे बताते हैं कि यहां यूपीएससी, सीजीपीएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध से संबंधित 10 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही फ्री वाई-फाई, इंटरनेट सुविधा युक्त 20 कंप्यूटर सिस्टम भी छात्रों के लिए लगाए गए हैं। हर चार महीने में नवीन समसामयिक पुस्तकों को लाइब्रेरी में शामिल किया जाता है, वहीं जरूरत के अनुसार परीक्षार्थियों को तत्काल आवश्यक किताबें भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
पॉवर कंपनी मुख्यालय परिसर में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली शुरू
शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीजों के परिजनों के लिए बनेंगे विश्राम गृह
रायपुर। जब कोई गंभीर बीमारी घर में दस्तक देती है, तो पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है। ऐसे वक्त में दूर-दराज के गांवों से शहर आने वाले गरीब परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इलाज के साथ-साथ खुद के ठहरने की होती है। अक्सर मरीज तो वार्ड में इलाज करा रहा होता है, लेकिन उसके अपने लोग अस्पताल के गलियारों, ठंडी सीढ़ियों या खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर होते हैं। इसी मानवीय पीड़ा को महसूस करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बहुत ही प्रशंसनीय कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के परिजनों के लिए सर्वसुविधायुक्त ‘विश्राम गृह’ बनाए जाएंगे, ताकि किसी भी मजबूर आंख को रात बिताने के लिए सुरक्षित छत की तलाश में भटकना न पड़े।
इस नेक काम को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में मंत्रालय नवा रायपुर में मेडिकल एजुकेशन विभाग और सेवादान आरोग्य फाउंडेशन के बीच एक एमओयू संपादित हुआ है। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब , स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त रितेश अग्रवाल सहित सेवादान फाउंडेशन के सदस्य उपस्थित थे।
इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन आश्रय स्थलों के निर्माण, सजावट और उनके रोजमर्रा के संचालन का पूरा जिम्मा संस्था खुद उठाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार और संस्था मिलकर एक ऐसा मानवीय ढांचा तैयार कर रहे हैं जहाँ परिजनों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहद किफायती ठहराव मिलेगा। इन विश्राम गृहों में केवल सिर छुपाने की जगह ही नहीं मिलेगी, बल्कि अपनों की सेवा में लगे लोगों के लिए 24 घंटे सुरक्षा, सीसीटीवी की निगरानी, साफ-सुथरा भोजन और एक गरिमामय माहौल भी सुनिश्चित किया जाएगा।
योजना के पहले पड़ाव में रायपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और जगदलपुर जैसे प्रमुख शहरों के मेडिकल कॉलेजों को चुना गया है, जहां दूरस्थ अंचलों से बड़ी संख्या में लोग उम्मीद लेकर पहुँचते हैं। यह पहल दिखाती है कि स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ दवा और डॉक्टर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनमें उन लोगों के लिए भी जगह होनी चाहिए जो अपने बीमार परिजनों के लिए संबल बनकर साथ खड़े रहते हैं। यह कदम न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि उन हजारों परिवारों को एक बड़ी मानसिक राहत भी पहुँचाएगा जिनके पास शहर में रहने का कोई ठिकाना नहीं होता।
10वीं-12वीं की प्रायोगिक परीक्षा आज से शुरू, अनुपस्थिति पर नहीं मिलेगा दोबारा मौका
रायपुर। कक्षा 10वीं एवं 12वीं की प्रैक्टिकल परीक्षा आज 1 जनवरी से प्रारंभ होने वाली है। बाह्य परीक्षकों की उपस्थिति में होने वाली प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को दोबारा अवसर नहीं दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा इस बार 20 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जा रही है। इसके कारण ही प्रैक्टिकल परीक्षा भी 10 दिन पहले होगी। मंडल ने प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए 1 से 20 जनवरी की तिथि तय की है।
हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्य अपनी सुविधा के अनुसार प्रैक्टिकल परीक्षा आयोजित करेंगे. प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए माशिमं ने पहले ही गाइड लाइन जारी की है। जिसके अनुसार प्रैक्टिकल परीक्षा में सभी विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य है। इसकी जिम्मेदारी संस्था प्रमुख की अनुपस्थित विद्यार्थियों को किसी भी स्थिति में विशेष अनुमति नहीं मिलेगी और न ही दोबारा अवसर दिया जाएगा। प्रैक्टिकल परीक्षा माशिमं द्वारा नियुक्त बाह्य परीक्षक की उपस्थिति में संपन्न होगी। स्कूल अपनी मर्जी से बाह्य परीक्षक नियुक्त नहीं कर सकते। यदि ऐसा किया जाता है तो प्रैक्टिकल परीक्षा मान्य नहीं की जाएगी. वहीं आंतरिक परीक्षक की नियुक्ति संस्था स्तर पर की जाएगी। संस्था स्तर पर विषय शिक्षक को ही आंतरिक परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे. प्रोजेक्ट वर्क के लिए बाह्य परीक्षक की नियुक्ति मंडल द्वारा नहीं की जाएगी.
मंडल के अधिकारी प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करेंगे. ऐसे में प्रैक्टिकल परीक्षा को गंभीरता से लेते हुए संपन्न कराने निर्देशित किया गया है. प्रैक्टिकल परीक्षा हेतु गत वर्षों की बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं का उपयोग किया जाएगा। कमी होने पर स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करने कहा गया है। पात्रता के अभाव में निरस्त किए गए विद्यार्थियों के प्रायोगिक अंक मंडल द्वारा अमान्य किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और बड़ी सौगात
रायपुर: नववर्ष से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले को विकास की बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में आवागमन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 10 महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के लिए कुल 31 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्षों से लंबित इन सड़कों की मांग पूरी होने से क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।
स्वीकृत कार्यों में एनएच-43 रोड (मुड़ापारा) से चर्चपारा होते हुए सुकबासुपारा तक सड़क निर्माण के लिए 2 करोड़ 47 लाख 97 हजार रुपये, ग्राम पंचायत कछार से सरपंच बस्ती चौक पक्की सड़क से तिरसोठ तक के लिए 3 करोड़ 41 लाख रुपये, कांसाबेल के डांडपानी से खूटेरा पहुंच मार्ग हेतु 4 करोड़ 52 लाख रुपये तथा पाले पखना से जुनवाईंन पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 68 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसी क्रम में कांसाबेल के सेमरकछार भट्टीटोली से लपई पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 69 लाख रुपये, ग्राम पंचायत कर्रबेवरा से पखनापारा माड़ो गुफा तक पहुंच मार्ग हेतु 1 करोड़ 88 लाख रुपये, ग्राम पंचायत घरजियाबथान के ठाकुरमुड़ा से रघुनाथपुर जोड़ा तालाब मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत पाकरगांव से तुरवाआमा होते हुए चौराआमा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत भगरपुर से भगोरा पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 60 लाख रुपये तथा अटल चौक से पंडरीपानी होते हुए तिलंगा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 43 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।
इन सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा। इससे किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा मिलेगी, विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच और अधिक सुलभ होगी।
दूरस्थ आदिवासी अंचलों को स्वास्थ्य की नई राह — मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को दिखाई हरी झंडी
दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया।
वीर बाल दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने किया चार वीर वालकों को वीरता सम्मान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वीर बाल दिवस के अवसर पर अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाईटी द्वारा आयोजित वीरता सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर छत्तीसगढ़ प्रदेश के 4 वीर साहसी बालकों को सम्मानित किया जिसमें साहिब फतेह सिंह वीरता पुरस्कार प्रेमचन्द साहू,साहिबजादा जोरावर सिंह वीरता पुरस्कार कु अंशिका साहू साहिबजादा जुझार सिंह वीरता पुरस्कार कु कांति सिंह, साहिबजादा अजीत सिंह वीरता पुरस्कार ओम उपाध्याय को प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा साहिबजादों का बलिदान हमेशा लोगो को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में धर्म,आस्था एवं देश की रक्षा के लिए सिख समाज का योगदान अतुलनीय है। साय ने कहा 26 दिसंबर को हम वीर बाल दिवस मनाते हैं। आज के दिन हम दशम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हैं। इतनी छोटी सी उम्र में साहिबजादों ने वीरता और गौरव की जो मिसाल दिखाई, वो अनुकरणीय है। इतनी छोटी आयु में भी वे किसी दबाव में नहीं आए, अपनी आस्था को नहीं छोड़ा, अपनी आस्था के लिए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान किया। वह हमारे लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने आगे कहा कि आज हमें इस बात का गर्व है कि हम नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान के बारे में अवगत करा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की। निश्चित रूप से इस पहल से बच्चों में शौर्य जगाने की जो अलख जगाई गई है वह सराहनीय कदम है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने आयोजन के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी की प्रशंसा की एवं सभी साहसी बालकों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को दुर्ग सांसद विजय बघेल एवं राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ कुलदीप सिंह सोलंकी ने स्वागत भाषण दिया एवं कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दीं।
मुख्यमंत्री साय ने किया ‘गाय धर्म एवं विज्ञान’ ग्रंथ का विमोचन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा–2025 के लिए तैयार किए गए संदर्भ ग्रंथ “गाय धर्म एवं विज्ञान” के नवीनतम संस्करण का अपने निवास कार्यालय में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने ग्रंथ को गौ विज्ञान के क्षेत्र में विद्यार्थियों और समाज के लिए उपयोगी बताते हुए समिति के प्रयासों की सराहना की और इसे ज्ञानवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर ग्रंथ के संपादक सुबोध राठी ने जानकारी देते हुए बताया कि पुस्तक में गौ की उत्पत्ति से जुड़े पौराणिक तथ्यों के साथ-साथ गाय के दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र पर हुए विभिन्न वैज्ञानिक शोधों को प्रमाणों सहित बच्चों के अध्ययन हेतु सरल एवं व्यवस्थित रूप में संकलित किया गया है। इसके साथ ही गौ-आधारित कृषि, पंचगव्य उत्पादों का वैज्ञानिक विश्लेषण तथा गौ के पर्यावरणीय महत्व को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
विमोचन कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रांत संयोजक अन्ना सपारे, मनोज पाण्डेय, हार्दिक कोटक, मन्मथ शर्मा, दुलार सिंह सिन्हा, हेमराज सोनी, विक्रम केवलानी, अनुज तुलावी, रेवा यादव, विक्रांत शर्मा, श्याम अड़ेपवार, शंभु दास महंत सहित संपादक मंडल के सभी सदस्य उपस्थित रहे।