रायपुर
रायपुर में छाया बादल, हल्की बारिश का अलर्ट
किरंदुल में ‘इको पार्क’ की पहल: विकास के साथ दिखेगी भारतीय जैव विविधता की झलक
वन विकास निगम के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और एनएमडीसी के सहयोग से बनने वाला यह इको पार्क न केवल किरंदुल की सुंदरता को बढ़ाएगा, बल्कि विकास और पर्यावरण के सह-अस्तित्व का प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।
धान से फूलों तक: आनंदराम सिदार की मेहनत ने बदली किस्मत, 22 हजार से 3 लाख तक का सफर
यह कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की झलक है, जहां खेती अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि नवाचार और समृद्धि का माध्यम बनती जा रही है।
स्वरोजगार की राह पर बढ़ते कदम: मुख्यमंत्री ने RSETI में देखा ग्रामीण सशक्तिकरण का मॉडल
रायपुर: पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने 40 पुलिसकर्मियों को किया सम्मानित
जब मुख्यमंत्री उतरे मैदान में: सुशासन तिहार में बच्चों संग खेला क्रिकेट, बढ़ाया हौसला
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जशपुर जिला प्रवास के दौरान ग्राम भैंसामुड़ा में एक बेहद आत्मीय और उत्साहवर्धक दृश्य देखने को मिला, जब वे शासकीय प्राथमिक शाला चंदागढ़ के स्कूल परिसर में अचानक पहुंच गए। विद्यालय पहुंचते ही उनकी नजर मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर पड़ी, जिनका जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों की इस ऊर्जा ने मुख्यमंत्री को इतना आकर्षित किया कि वे बिना औपचारिकता के सीधे मैदान में उतर गए और उनके साथ क्रिकेट खेलने लगे। मुख्यमंत्री को अपने बीच खेलते देख बच्चों की खुशी दोगुनी हो गई और पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर उठा।
इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से सहज संवाद करते हुए उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और खेल के प्रति रुचि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे नियमित रूप से खेलते हैं या नहीं और किस खेल में उनकी विशेष रुचि है। बच्चों के साथ इस आत्मीय संवाद के बीच उन्होंने यह भी समझने का प्रयास किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की क्या स्थिति है और किन-किन संसाधनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
मैदान में मौजूद खिलाड़ी प्रकाश ठाकुर से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा कर उनके अनुभवों और खेल से जुड़े पहलुओं के बारे में जाना, जिससे स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी उन्हें मिल सकी। बच्चों के उत्साह और खेल के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने कौशल का समुचित विकास कर सकें और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण खेल और शिक्षा के संतुलित विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत के सरपंच रोशन प्रताप सिंह से भी बातचीत कर गांव की स्थिति, चल रहे विकास कार्यों और स्थानीय आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गांव के समग्र विकास के लिए आवश्यक पहल सुनिश्चित की जाए, ताकि बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी संतुलित प्रगति हो सके।
मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के साथ बिताए गए उनके सहज और प्रेरणादायक क्षणों ने ग्रामीणों के मन में विशेष उत्साह और विश्वास का वातावरण निर्मित किया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि शासन जब जमीनी स्तर पर पहुंचकर सीधे संवाद करता है, तो वह केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं करता, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी करता है।
सुशासन तिहारः गोद में उठाया, चश्मा पहनाया… भैंसामुड़ा में दिखा मुख्यमंत्री का आत्मीय रूप
रायपुर। सुशासन तिहार के दौरान जशपुर जिले के ग्राम भैंसामुड़ा में एक ऐसा आत्मीय और भावुक क्षण सामने आया, जिसने वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के मन को गहराई से छू लिया और पूरे वातावरण को संवेदनाओं से भर दिया। यह दृश्य उस मानवीय स्पर्श का जीवंत उदाहरण बन गया, जहां शासन और संवेदना एक साथ दिखाई देते हैं।
सुशासन तिहार के दौरान जैसे ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर 4 वर्षीय नन्हीं बच्ची मानविका चौहान पर पड़ी, वे सहज भाव से उसके पास पहुंच गए। उनके इस स्वाभाविक और अनायास कदम ने पूरे माहौल को एक अलग ही अपनत्व के वातावरण में बदल दिया।
मुख्यमंत्री ने स्नेहपूर्वक बच्ची को अपनी गोद में उठाया और मुस्कुराते हुए उससे आत्मीय संवाद करने लगे। उनके चेहरे पर झलकता स्नेह और व्यवहार की सरलता इस बात को दर्शा रही थी कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो लोगों के बीच जाकर उनके अपनेपन को महसूस करता है।
मुख्यमंत्री के पूछने पर मासूमियत भरी आवाज़ में जब मानविका ने तुतलाते हुए कहा - "मुझे डॉक्टर बनना है", तो उस छोटे-से वाक्य में एक बड़े सपने की झलक साफ दिखाई दे रही थी। यह सुनकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर सहज और स्नेहिल मुस्कान उभर आई। उन्होंने पूरे अपनत्व के साथ बच्ची को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह संवाद भले ही कुछ क्षणों का रहा, लेकिन उसमें जो भावनात्मक गहराई थी, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को यह महसूस कराया कि छोटे बच्चों के सपनों को भी सही प्रोत्साहन देने का कार्य भी मुख्यमंत्री का रहे हैं। इसी आत्मीयता में मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पास रखा चश्मा निकालकर बड़े प्यार से बच्ची को पहनाया और उसे पुचकारते हुए उसका हौसला बढ़ाया।
मानविका की माता दीपांजलि चौहान ने बताया कि उनकी बेटी मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर बेहद उत्साहित थी और उनसे मिलकर अत्यंत खुश हुई। उन्होंने इस स्नेहपूर्ण व्यवहार के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के लिए एक यादगार अनुभव बन गया है।
यह पूरा प्रसंग संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े नेतृत्व का सजीव उदाहरण बन गया, जहां शासन केवल योजनाओं और नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्नेह, संवाद और विश्वास के माध्यम से सीधे लोगों के दिलों तक अपनी जगह बनाता है।
मज़दूर अधिकारों पर हमले के खिलाफ आवाज़ बुलंद, ‘मज़दूर ज़िंदाबाद’ कार्यक्रम में गूंजे संघर्ष के स्वर
रायपुर। अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर जन संस्कृति मंच (जसम) द्वारा आयोजित ‘मज़दूर ज़िंदाबाद’ कार्यक्रम में श्रमिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक प्रतिरोध के मुद्दों पर जोरदार चर्चा हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश के मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए मज़दूरों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हो रही कार्रवाई की आलोचना की।
जसम छत्तीसगढ़, अध्यक्ष रूपेंद्र तिवारी ने कहा कि देश की सत्ता उन हाथों में है, जिनका न तो स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव रहा है और न ही श्रमिक संघर्षों से। उन्होंने आरोप लगाया कि, हाल के दिनों में गुड़गांव-मानेसर, नोएडा, फरीदाबाद और पानीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ हुई घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि, “जब-जब हमले तेज़ होते हैं, संघर्ष भी उतना ही मजबूत होता है।”
कार्यक्रम में जन कवि वासुकी प्रसाद उन्मत्त और मजदूर साथी भागीरथी वर्मा का सम्मान किया गया। वासुकी प्रसाद ने रेलवे में खलासी के रूप में अपने अनुभव साझा किए, जबकि भागीरथी वर्मा ने बताया कि किस तरह उन्होंने नौकरी से निकाले जाने के बाद कानूनी लड़ाई लड़कर अपना हक हासिल किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। सुनीता शुक्ला ने गोरख पांडेय का गीत प्रस्तुत किया, वहीं समीक्षा नायर, अजुल्का सक्सेना, नीलिमा मिश्रा और अन्य रचनाकारों ने गीत, कविता और ग़ज़लों के माध्यम से श्रमिक जीवन के संघर्ष और संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में जसम रायपुर की ओर से एक निंदा प्रस्ताव पारित कर हालिया गिरफ्तारियों पर चिंता जताई गई और सत्यम वर्मा सहित अन्य साथियों की शीघ्र रिहाई की मांग की गई।
कार्यक्रम का संचालन लेखिका सनियारा खान ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन राजकुमार सोनी ने किया। इस अवसर पर पीसी रथ, अखिलेश एडगर, मोहित जायसवाल, इंद्र कुमार राठौर, किशनलाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यकार उपस्थित रहे।
दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगाड़ता ईरान-अमेरिका युद्धः डॉ मल्लिका सूर
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में प्राचार्य डॉ विनोद कुमार जोशी के मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष डॉ मनीषा शर्मा के संयोजन में राजनीति विज्ञान परिषद द्वारा ईरान-अमेरिका युद्ध के वैश्विक प्रभाव पर व्याख्यान आयोजित किया गया। जिसके मुख्य वक्ता डॉ मल्लिका सूर वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग शासकीय हीरालाल काव्योपाध्याय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अभनपुर जिला रायपुर रही।
डॉ मल्लिका सूर ने अपने उद्बोधन में कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध का दुनिया पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है,जिसमें तेल की कीमतों में वृद्धि (पेट्रोल/डीजल), एलपीजी की किल्लत और खाद्य पदार्थों की महंगाई शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है।इसके अलावा,यह संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को तोड़कर भारत की आर्थिक विकास दर और व्यापार घाटे को प्रभावित कर रहा है।ईंधन और रसद महंगा होने के कारण भारत में परिवहन और वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं,जिससे आम लोगों पर बोझ बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत के लिए कच्चे तेल का आयात चुनौतीपूर्ण हो गया है। एलपीजी की भारी किल्लत से घरों में खाना पकाने में दिक्कतें आ रही हैं।यदि युद्ध लंबा चलता है,तो राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है और जीडीपी विकास दर धीमी हो सकती है।जहाजों के बीमा और भाड़े की लागत बढ़ने से भारतीय निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो गया है।ईरान में भारत के चाबहार बंदरगाह निवेश पर खतरा मंडरा रहा है, और इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण चीन का दबदबा बढ़ सकता है। खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों की सुरक्षा और स्वदेश वापसी की चिंता भी बढ़ गई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने के बावजूद,यह संघर्ष वैश्विक झटकों के कारण सप्लाई में बड़ी रुकावटें पैदा कर रहा है।अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के प्रमुख कारणों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम,मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थित गुटों के हमले, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश शामिल है।2015 के परमाणु समझौते के टूटने के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया,और 2026 में ईरान द्वारा नाकाबंदी के बाद युद्ध जैसी स्थिति बनी।
अमेरिका का मानना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को रोकना और नाकाबंदी करना, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। 1979 की ईरानी क्रांति और उसके बाद बंधक संकट के बाद से दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई है।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ भूपेंद्र कुमार साहू ने किया तथा डॉ कंचन गिलहरे ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग की छात्राओं उपस्थित रही।
सुशासन तिहारः प्रदेश व्यापी दौरे के लिए मुख्यमंत्री ने किया आगाज
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार अंतर्गत अपने प्रदेशव्यापी दौरे का आज आगाज कर कर दिया। राज्य शासन के महत्वपूर्ण अभियान सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री साय आज पुलिस लाइन हेलीपेड रायपुर से रवाना हुए।
इस अभियान में मुख्यमंत्री साय आम नागरिकों से रूबरू होकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति का फीडबैक लेंगे। उल्लेखनीय है कि 1 मई से प्रारंभ सुशासन तिहार 10 जून तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री के साथ दौरे पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल भी रवाना हुए।
छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना का शंखनाद.... कर्मचारी घर-घर पहुँचकर जुटा रहे जानकारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में भारत की जनगणना 2027श् के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। 01 मई से शुरू हुआ यह महाभियान 30 मई 2026 तक चलेगा। इस कार्य के लिए राज्य भर में 51 हजार 300 प्रगणक और 9 हजार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्रित कर रहे हैं।
पहली बार डिजिटल मोड में जनगणनाः इस बार की जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रश्नों की जानकारी दर्ज करेंगे।
प्रशासन सख्त- अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाईः प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इससे इनकार करना एक दंडनीय अपराध है।
उपलब्धियां और उत्साह का वातावरणः दुर्गम क्षेत्रों में मिसाल- बस्तर जिले के तोकापाल तहसील अंतर्गत ग्राम गाटम के प्रगणक ने विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन कार्य पूर्ण कर राज्य स्तर पर उत्साह का संचार किया। अभियान के पहले दिन ही जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण किया और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। स्व-गणना राज्य में डिजिटल साक्षरता का प्रभाव दिखा, जहाँ 16 से 30 अप्रैल के बीच 1 लाख 49 हजार 862 परिवारों ने वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी गणना की।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटीः जनगणना निदेशालय ने आम नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। यह जानकारी किसी भी टैक्स, पुलिस जांच या कोर्ट केस में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं की जा सकती। यहाँ तक कि सूचना का अधिकार के माध्यम से भी व्यक्तिगत डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इन आंकड़ों का उपयोग केवल राष्ट्र निर्माण और जन कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण हेतु किया जाएगा।
नागरिकों से अपीलः प्रशासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। आपका यह सहयोग केवल जानकारी मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आपका अमूल्य योगदान है।
आंध्रा एसोसिएशन का गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन 3 मई को
रायपुर। राजधानी रायपुर में समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय आंध्रा एसोसिएशन अपने स्थापना को 50 वर्ष पूरे करने जा रही है। इस अवसर पर 3 मई 2026 को संस्था द्वारा गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल होंगे।
समाज के प्रमुख जी स्वामी ने बताया कि 3 मई को आंध्रा एसोसिएशन का 50वां स्थापना दिवस गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन और श्री बालाजी विद्या मंदिर के ग्रेजुएशन-डे का आयोजन 3 मई को किया गया है। शाम 7 बजे से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा समाज को अपना आशीर्वचन देने उपस्थित होंगे। कार्यक्रम बालाजी विद्या मंदिर परिसर में होगा। इस अवसर पर बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
बतादें कि आंध्रा एसोसिएशन रायपुर, छत्तीसगढ़ में रहने वाले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के निवासियों का एक प्रमुख सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन है। यह संस्था देवेन्द्र नगर के बालाजी विद्यामंदिर (SBVM) के माध्यम से शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करती है।
आपका भी ई-चालान हैं पेडिंग तो नेशनल लोक अदालत में होगा निदान
रायपुर। राजधानी वासियों के उन लोगों के लिए यह अच्छी खबर है जिनका ई-चालान अब भी पेडिंग है। जिन्होंने यातायाता नियमों को तोड़ने के लिए आए अपने चालान को नहीं पटाया है, या उन्हें इस बात की शंका है कि उनका चालान गलत है तो वे 9 मई को आयोजित नेशनल लोक अदालत में आवेदन करके अपनी समस्या का निदान कर सकते है।
यातायात पुलिस ने बताया कि नेशनल लोक अदालत 2026 के संदर्भ में पेंडिंग ई-चालान वाले नागरिकों के लिए यह जरूरी सूचना है। 9 मई, 2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में अपने लंबित ई-चालान का निपटारा करवाने का अवसर लोगों को मिल रहा है। इसका लाभ लेने के लिए लोगों को 5 मई के पूर्व पंजीयन कराना अनिवार्य है। बिना पंजीयन के प्रकरण की सुनवाई नहीं होगी।
यातायात पुलिस ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से कुछ स्थानों पर पंजीयन काउंटर खोला गया है। जहां जाकर लोग अपना पंजीयन करा सकते है। लोग तेलीबांधा थाना (थाना भवन के ऊपर), भाठागांव बस स्टैंड, शारदा चौक (हनुमान मंदिर के पास), फाफाडीह (गंज थाना भवन), भनपुरी (व्यास तालाब तिराहा), टाटीबंध चौक, पुराना बस स्टैंड पंडरी, पचपेड़ी नाका (ब्रिज के नीचे), यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी में जाकर पंजीयन करा सकते है।
वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई क्रूज हादसे की दुखद घटना के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में संचालित सभी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ता से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जन सुरक्षा के विषय में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धमतरी और कोरबा सहित अन्य सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिन स्थलों पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां सुरक्षा मानकों का तत्काल परीक्षण (सुरक्षा ऑडिट) सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः पालन कराया जाए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित वाटर स्पोर्ट्स स्थलों पर उपयोग में लाए जा रहे उपकरणों का नियमित तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन की तैनाती की जाए, तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु समुचित आपातकालीन प्रबंधन तंत्र सक्रिय रखा जाए। इसके साथ ही रेस्क्यू उपकरणों, लाइफ जैकेट एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता एवं कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उन्होंने कलेक्टरों को यह भी निर्देशित किया कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें तथा किसी भी स्तर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/संचालकों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन नागरिकों एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करता है। इस दृष्टि से यह आवश्यक है कि वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं मानक अनुरूप संचालित हों, जिससे संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए ही हम जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
जमीन विवाद पर सीधे कलेक्टर करेंगे फैसला, कमिश्नर कोर्ट का झंझट खत्म
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन विवादों के समाधान को सरल और तेज बनाने के लिए सुशासन वाली विष्णुदेव साय सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी देते हुए वर्षों पुरानी व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे अब आम लोगों और किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नए प्रावधानों के तहत अब एसडीएम स्तर पर जमीन विवाद का समाधान नहीं होने पर अपील सीधे जिला कलेक्टर के पास की जा सकेगी। पहले ऐसे मामलों में संभागीय कमिश्नर कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और समय व धन दोनों की हानि होती थी। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह जिले के भीतर ही संपन्न होगी।
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को पहले 30 से 50 किलोमीटर दूर संभाग मुख्यालयों तक जाना पड़ता था। नए कानून के लागू होने के बाद यह परेशानी समाप्त हो जाएगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ परिवहन और कानूनी खर्चों में भी कमी आएगी।
संशोधन के तहत जमीन विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा 30 से 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे लंबित मामलों में तेजी आने की संभावना है। सरकार ने अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है। यदि सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
संशोधित धारा 59 के अनुसार औद्योगिक उपयोग की जमीनों को पुनर्मूल्यांकन से छूट दी गई है। इससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि नए कानून के अनुसार मामलों की सूची तैयार कर सुनवाई प्रक्रिया शुरू की जाए।
पुणे में देवलोक गमन हुई प. पू. प्रीतिसुधाजी म. सा. को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
अजय मधुकर काले - अध्यक्ष, महाराष्ट्र मंडल, रायपुर
रायपुर। श्रद्धेय प्रीतिसुधाजी म. सा. के निधन से जैन समाज सहित संपूर्ण समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। दादाबाड़ी में उनके प्रवचन से पूरे छत्तीसगढ़ में जो वाणी विचार प्रवाहित हुए थे उस समय की बात और चर्चा का यदि जिक्र करूं तो याद आते है ऐसे कई प्रसंग जिसमें कईयों की नशामुक्ति हुई। चरित्र का निर्माण हुआ। लोग सद्भावना के साथ प्रेम से मिलते थे। तब महसूस हुआ था कि जैन धर्म जन जन का है। सभी समाज के लोगों को आप देख सकते थे उनके प्रवचन में। उस समय विभिन्न समाज अपने अपने क्षेत्र मे उनकी उपस्थिति सम्मान प्रवचन कराना चाहते थे। 1995 में महाराष्ट्र मंडल, हनुमान मंदिर, तात्यापारा, रायपुर के चातुर्मास के दौरान अपनी रसमय वाणी में दिए गए उनके प्रवचन आज भी लोगों की स्मृतियों में ताज़ा हैं।मराठी भाषा पर उनका अगाध प्रभुत्व था और उनके शब्दों से सदैव मानवता का संदेश मिलता था। धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और सरल भाषा में उनके मार्गदर्शन ने अनेक भक्तों के जीवन को सन्मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से न केवल धर्म, बल्कि समाज सुधार और नैतिक मूल्यों के महत्व को भी अत्यंत सुंदरता से समझाया। उनके शांत और संयमित व्यक्तित्व का प्रभाव हर श्रोता पर पड़ता था, जिससे भक्तों का उनके साथ एक अटूट रिश्ता बन गया था।
पुणे की पावन धरा पर उनका देवलोक गमन हम सभी भक्तों के लिए अत्यंत दुखद और भावुक कर देने वाली घटना है। उनके जाने से जो शून्यता उत्पन्न हुई है, वह कभी भरी नहीं जा सकती; किंतु उनके विचार हम सभी को सदैव सही दिशा दिखाते रहेंगे। ऐसी महान साध्वी के चरणों में हम सभी अत्यंत नम्रता और कृतज्ञता के साथ अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी पवित्र आत्मा को चिरशांति प्रदान करे, यही हमारी मंगल प्रार्थना है।
रायपुर में IPL मैच 2026, टिकट बुकिंग कल से
टिकट आरसीबी की आधिकारिक वेबसाइट से ही ऑनलाइन बुक किए जाएंगे। सबसे सस्ती टिकट ₹2000 की होगी। इसके अलावा ₹2500, ₹3500, ₹5000 और ₹8000 तक की कैटेगरी में होगी। इसके अलावा प्लैटिनम सीटों के सामने लगे कांच के पैनल हटा दिए गए हैं। अब दर्शक खिलाड़ियों को बिना किसी रुकावट के और करीब से देख सकेंगे।