रायपुर
विशेष लेख : सरकार का संकल्प - आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए।
गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं।
कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में होगीं कविता-कहानी प्रतियोगिताएं
रायपुर। नवा रायपुर में अगले महीने होने वाले साहित्य उत्सव के पहले प्रदेश के सभी जिलों में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कहानी एवं कविता प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार भी मिलेंगे। जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल किया जायेगा और सर्वोत्कृष्ठ कहानी तथा कविता को रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जायेगा। इस प्रतियोगिता के लिये जिलेवार नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी स्वरचित कविता और कहानी 30 दिसंबर 2025 तक जिले के नोडल अधिकारी कार्यालय में जमा करा सकते हैं। 30 दिसंबर के बाद मिली कहानियों-कविताओं को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जायेगा। प्रदेश की समृद्धशाली साहित्यिक विरासत को लोगों तक पहुंचानें और साहित्य लेखन में युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नवा रायपुर में 23-25 जनवरी 2026 तक रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होगा।
साहित्य उत्सव के तहत जिलेवार महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाली कविता-कहानी प्रतियोगिताओं में पहले पुरस्कार के रूप में 5,100 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 3,100 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 1,500 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में 1000-1000 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे। जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त कहानी-कविताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। राज्य स्तर पर पहले पुरस्कार के रूप में 21,000 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 11,000 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 7,000 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर 5,100-5,100 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे।
प्रतियोगिता में शामिल की जाने वाली कविता न्यूनतम 8 छंदों की मौलिक, अप्रकाशित तथा टंकित होनी चाहिए। इसी तरह कहानी 1200 शब्दों में मौलिक, अप्रकाशित और टंकित होनी चाहिए। प्रतिभागी किसी महाविद्यालय-विश्वविद्यालय का विद्यार्थी हो एवं उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रतिभागी को अपने महाविद्यालय का परिचय पत्र अथवा प्राचार्य का प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। पुरस्कारों की घोषणा जनवरी 2026 में की जाएगी और पुरस्कृत प्रतिभागियों को 23, 24, 25 जनवरी 2026 को होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा। प्रविष्टी जमा करते समय कविता-कहानी के प्रारंभ में ऊपर एवं लिफाफे पर “युवा हिंदी कविता-कहानी लेखन प्रतियोगिता“ अवश्य अंकित करना होगा। पुरस्कृत कविताओं-कहानियों का संकलन कर प्रकाशित किया जाएगा जिसका विमोचन रायपुर साहित्य उत्सव के मंच पर किया जाएगा।
एचएनएलयू–सीएसजे–आईजेआर सम्मेलन : “न्याय वितरण तंत्र और संस्थागत क्षमता” पर कांफ्रेंस
रायपुर। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने न्याय व्यवस्था की मजबूती और संस्थागत क्षमता में वृद्धि विषयक राष्ट्रीय विमर्श को नई गति देते हुए “न्याय वितरण तंत्र और संस्थागत क्षमता” पर एक उच्चस्तरीय एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन सेंटर फॉर क्रिमिनल लॉ एंड ज्यूरिसप्रूडेंस तथा सेंटर फॉर लॉ एंड ह्यूमन राइट्स द्वारा सेंटर फॉर सोशल जस्टिस और इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के सहयोग से आयोजित किया गया। न्याय व्यवस्था के चार स्तंभ—पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और विधिक सहायता—पर केंद्रित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न संस्थानों से आए 55 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में सेंटर फॉर सोशल जस्टिस की मैनेजिंग ट्रस्टी सुश्री नूपुर ने अपनी रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए और महिलाओं व कमजोर समूहों को प्रभावित करने वाली व्यवस्थागत चुनौतियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के लीड श्री वलय सिंह ने रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण का सारांश प्रस्तुत करते हुए राज्यवार न्यायिक क्षमता की तुलनात्मक स्थिति को रेखांकित किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने कहा कि विधि विश्वविद्यालय विधिक सुधार और संस्थागत क्षमता निर्माण के प्रमुख उत्प्रेरक हैं। उन्होंने संविधान द्वारा अपेक्षित न्याय व्यवस्था और संस्थागत तत्परता के बीच स्थित अंतर को रेखांकित करते हुए प्रशिक्षण, विधिक सहायता और क्लीनिकल लीगल एजुकेशन को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। “वॉइसेस फ्रॉम द फील्ड” खंड में अधिवक्ता दिव्या जायसवाल, गायत्री और शोभाराम गिलहरे ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए सामने आए अनुभव साझा किए और वंचित समुदायों की वास्तविक स्थितियों पर चर्चा की।
इस अवसर पर सेंटर फॉर सोशल जस्टिस की रिपोर्ट “असेसिंग द इफेक्टिवनेस ऑफ जस्टिस डिलीवरी मेकनिज्म इन इंश्योरिंग एक्सेस टु जस्टिस” का औपचारिक विमोचन कुलपति द्वारा किया गया। सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों का प्रस्तुतीकरण डॉ. कौमुदी छल्ला ने किया, जबकि कुलसचिव डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन दिया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण कोरी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
पैनल चर्चाओं में न्याय व्यवस्था के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों के गहन विचार सामने आए।
पैनल–I में न्यायपालिका और विधिक सहायता पर केंद्रित संवाद हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उपसचिव श्री पार्थ तिवारी ने दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक सहायता क्लीनिकों और पैरा–लीगल वालंटियर्स की भूमिका का उल्लेख किया। सुश्री नूपुर ने क्षेत्र-विशिष्ट योजनाओं की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि श्री वलय सिंह ने न्यायपालिका, पुलिस, कारागार और विधिक सहायता की तुलनात्मक क्षमताओं पर अपने निष्कर्ष साझा किए।
शासकीय दंत चिकित्सालय की नवीन कार्यकारिणी ने ली शपथ
रायपुर। शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के अध्यक्ष राम प्रताप दिनकर एवं उनकी कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर वीरेंद्र वाढ़ेर की अध्यक्षता मे आयोजित किया गया।
शपथ ग्रहण समारोह में विशेष रूप से छत्तीसगढ अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष आलोक मिश्रा, अधिकारी कर्मचारी संघ के फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा, सतीश पसेरिया प्रदेश महामंत्री एवं द.पु.म.रे.श्रमिक यूनियन रायपुर के वरिष्ठ नेता मोहम्मद शाहीद, संध्या रानी मोहल्ले उपाध्यक्ष महासमुंद, जिला अध्यक्ष सतनारायण घृतलहरे, एनएचम प्रकोष्ठ के बारले, संदीप पैकरा प्रशासकीय अधिकारी संरक्षक विजय डहरिया, देवेंद्र चंद्राकर, प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश सिंह ठाकुर, रायपुर जिला महामन्त्री गणेशा जाधव पाटिल उपस्थित थे।
कर्मचरियों में जय कुमार सोनटके, सीसी मारकंडे, चंद्रभूषण सिंह ठाकुर, दीपमाला भार्गव, अनीशा दिनकर, लता नीलमर्कर, रीना खुटे, शफकत होदा, मानसिंह ठाकुर, लक्ष्मण कोसले, नीरज शर्मा, तिलक भोगल, गणेश लिमसाखरे, सुमित दुबे, बलराम सेंन, रिंकी बसोड़, तेज कुमार श्याम, कार्तिक साहू, हेमंत चद्राकर एवं सैकड़ो संख्या में अधिकारी कर्मचारी सम्मिलित हुए।
मुख्यमंत्री साय ने जयस्तंभ चौक में किया शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग और संघर्ष का स्मरण
रायपुर : छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जननायक अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अनुपम मिसाल है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध शहीद वीर नारायण सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया, वह छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विरासत का स्वर्णिम अध्याय है। मातृभूमि की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनकी निष्ठा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी शहीद वीर नारायण सिंह का हृदय सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के दुःख-संघर्ष से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से व्याकुल थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए अनाज गोदाम का अनाज ज़रूरतमंदों में बाँटकर करुणा, त्याग और साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण और असमानताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक उद्घोष था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और जनप्रतिरोध की जीवंत प्रेरणा हैं। गरीबों, किसानों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन-संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव न्याय, मानवता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों और उनके सपनों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।
इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
विधायक भैयालाल राजवाड़े अस्पताल में भर्ती, मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री साय
रायपुर नगर पालिक निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए आईआईटी खड़गपुर-परिक्षित ‘प्रमिति ’ तकनीक को अपनाया
प्रमिति तकनीक का आज से शहर में 15वे वित्त विभाग द्वारा संचालन शुरू होने के साथ ही रायपुर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक नया, प्रभावी और प्रमाणिक समाधान अपनाने वाला अग्रणी शहर बन गया है। रायपुर आगे बढ़ रहा है — स्वच्छ हवा, स्वस्थ जीवन और सतत विकास की दिशा में।
रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा।
कस्टम मिलिंग स्कैम: दीपेन चावड़ा के खिलाफ 20 करोड़ की अवैध वसूली के साक्ष्य, EOW ने न्यायालय में पेश किया चालान
छत्तीसगढ़ की धातुकला को राष्ट्रीय पहचान: ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार, CM ने दी बधाई
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायत बैगीनडीह जैसे वनांचल क्षेत्र से निकलकर अपनी विशिष्ट शिल्पकला के माध्यम से देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊँचाइयाँ देने वाली श्रीमती बघेल की उपलब्धि हमारे प्रदेश की समृद्ध लोककला, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा की अद्भुत चमक को राष्ट्रीय मंच पर पुनर्स्थापित करती है। ढोकरा कला सदियों पुरानी धरोहर है, और श्रीमती बघेल जैसी शिल्प कलाकार इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं।
मुख्यमंत्री साय से सतनामी विकास परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य भेंट
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सतनामी विकास परिषद, सारंगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय जयंती गुरुपर्व–2025 में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि 18, 19 और 20 दिसंबर को आयोजित होने जा रहे इस तीन दिवसीय महोत्सव में सतनामी समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे। यह आयोजन समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भव्य उत्सव होगा।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल के आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि सतनामी समाज ने सदैव छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि गुरु बाबा घासीदास जी के आदर्श-सत्य, अहिंसा और समानता-समाज को नैतिक शक्ति और सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पावन उत्सव में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जयंती पर्व की सराहना करते हुए इसे समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाला, प्रेरणादायी और मार्गदर्शक आयोजन बताया।
प्रतिनिधिमंडल में विधायक डोमनलाल कोर्सेवाडा, पूर्व विधायक केराबाई मनहर सहित सतनामी विकास परिषद के अध्यक्ष बीडी भारद्वाज, उपाध्यक्ष रमेश अनंत, भानुप्रभा जोल्हे, कृष्णा अजगले, तेजेश्वर सिंह रात्रे और रोहित महिलांग उपस्थित थे।
सेक्टर-9 अस्पताल में न्यूनतम इनवेसिव उपचार की ऐतिहासिक उपलब्धि
रायपुर। भिलाई स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र (जे.एल.एन.एच.&आर.सी.) ने न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसा अध्याय रचा है, जो चिकित्सकीय उपलब्धि के साथ-साथ क्षेत्रीय शल्य चिकित्सा की संस्कृति में निर्णायक परिवर्तन का संकेत भी है। ‘स्यूचर्ड लेप्रोस्कोपिक सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी’ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब संस्थागत क्षमता आधुनिक तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाती है, तब रोगी-केन्द्रित उपचार के नए प्रतिमान संभव होते हैं।
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) एवं यूनिट इंचार्ज (सर्जरी) डॉ. मनीष देवांगन ने किया। 32 वर्षीय ओडिशा के सीआईएसएफ जवान को छह माह से चली आ रही पैनक्रियाटाइटिस की पीड़ा लगातार पेट दर्द, भारीपन और जल्दी पेट भरने की शिकायतों का कारण ‘स्यूडोसिस्ट पैन्क्रियाज़’ निकला। यह पेट के पिछले हिस्से में बना द्रव-भरा थैला न केवल असहनीय असुविधा उत्पन्न करता है बल्कि जटिलताओं का भी बड़ा कारण होता है। साधारणतः इस स्थिति में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ती थी, जिसमें एक बड़ा चीरा, अत्यधिक दर्द और लंबी रिकवरी शामिल होते हैं। ऐसे में लेप्रोस्कोपिक मार्ग चुनना केवल एक तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि जे.एल.एन.एच.&आर.सी. की उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट पुनर्पुष्टि था।
ऑपरेशन पूरी तरह समन्वित टीमवर्क से संभव हुआ जिसमें, डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं यूनिट इंचार्ज (सर्जरी) डॉ. मनीष देवांगन; चीफ कंसल्टेंट, डॉ. धीरज शर्मा; डॉ. सौरभ धिवार; डीएनबी रेजिडेंट डॉ. मशूद बी. ; तथा नर्सिंग स्टाफ भगवती विश्वकर्मा और एमटीए लोकेंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. तनुजा आनंद, और कंसल्टेंट, डॉ. निलेश चंद्र ने किया। वहीं प्री-ऑपरेटिव रेडियोलॉजिकल मूल्यांकन में डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (रेडियोलॉजी), डॉ. धीरज गुप्ता, तथा कंसल्टेंट, डॉ. त्रिप्ति पारीक, के योगदान ने इस जटिल प्रक्रिया की रीढ़ मजबूत की।
परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहा, रोगी ने बिना किसी जटिलता के तीव्र रिकवरी की और मात्र पाँच दिनों में चिकित्सालय से स्वस्थ होकर छुट्टी पा ली। ओपन सर्जरी की तुलना में यह अवधि काफी कम है, जो न केवल चिकित्सा गुणवत्ता का संकेत है बल्कि जे.एल.एन.एच.&आर.सी. के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी है।
चिकित्सालय प्रबंधन ने भी इस उपलब्धि को विशेष महत्व दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. वीनीता द्विवेदी, ने संपूर्ण टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि भिलाई इस्पात संयंत्र के हितधारकों और स्थानीय समुदायों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
एनआईटी रायपुर में पीएम-श्री स्कूल्स टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम का हुआ शुभारंभ
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में 8 दिसंबर 2025 से 12 दिसम्बर 2025 तक पीएम-श्री स्कूल्स टीचर्स’ ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा। 8 दिसम्बर को इसका उदघाटन समारोह आयोजित किया गया जिसके मुख्य अतिथि डॉ. एन. वी. रमना राव रहे। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. एन डी लोंढे, डीन (कॉर्पोरेट रिलेशंस एंड रिसोर्स मोबिलाइजेशन) डॉ. एस. सन्याल, डीन (एकेडमिक) डॉ. शुभ्रता गुप्ता, तथा सीईसी (कंटीन्यूइंग एजुकेशन सेल) चेयरमैन डॉ. एस. घोष, फैकल्टी मेम्बर्स और प्रतिभाग उपस्थित रहे। कार्यक्रम समन्वयकों में भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आयुष खरे, रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस. पी. महापात्रा और डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन की प्रोफेसर डॉ. प्रियंका त्रिपाठी शामिल हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आयुष खरे के स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने पीएम-श्री प्रशिक्षण पहल का परिचय देते हुए बताया कि आईआईटी, एनआईटी और आईआईएसईआर जैसे संस्थानों में से एनआईटी रायपुर को इस प्रशिक्षण हेतु चयनित किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान का शैक्षणिक स्तर नवोदय विद्यालयों के समकक्ष है और यह प्रशिक्षण स्कूल से कॉलेज तक छात्रों द्वारा अनुभव किए जाने वाले ज्ञान-अंतर को कम करने में सहायक होगा।
डीन (एकेडमिक) डॉ. शुभ्रता गुप्ता ने शिक्षण को सबसे पवित्र पेशा बताते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों के ज्ञान और अध्यापन कौशल को और समृद्ध करेगा। डीन (सीआरआरएम) डॉ. सन्याल ने प्रतिभागी शिक्षकों की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, सावित्रीबाई फुले, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, विनोबा भावे और डॉ. होमी भाभा के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों को ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जहाँ विद्यार्थी बिना किसी भय के प्रश्न पूछ सकें, गलतियाँ कर सकें और सीख सकें। रजिस्ट्रार डॉ लोंढे ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए दूसरे अभिभावक की तरह होते हैं और सामाजिक-भावनात्मक सीख तथा समग्र विकास के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि निदेशक एन. वी. रमना राव ने प्रतिभागियों को इस कार्यक्रम हेतु चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि नवोदय विद्यालय जैसे उत्कृष्ट संस्थान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए थे। उन्होंने सुदृढ़ सरंचना , 21वीं सदी के कौशल, पर्यावरणीय स्थिरता तथा प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रभावी नेटवर्क निर्माण के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. एस. पी. महापात्रा द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रतिभागियों को सफल एवं समृद्ध प्रशिक्षण अनुभव की शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय से पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति छात्रावास के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, पेंशनबाड़ा रायपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गुरु पर्व कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया।
प्रतिनिधियों ने बताया कि इस अवसर पर राजधानी रायपुर के विभिन्न छात्रावासों—कालाबाड़ी कन्या छात्रावास, शंकर नगर कन्या छात्रावास, आमापारा छात्रावास, डी.डी.यू. छात्रावास, कबीर छात्रावास, प्रयास छात्रावास, देवपुरी छात्रावास सहित अनेक छात्रावासों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी के विचार सामाजिक सद्भाव, समरसता और मानव-सेवा की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास एवं मूल्य शिक्षा के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया। प्रतिनिधिमंडल में छात्रावास के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।
जी.ई. रोड पर बहुप्रतीक्षित गुरू तेगबहादुर उद्यान से तेलीबांधा में नेताजी सुभाष चौक से गुरूनानक चौक तक फ्लाईओवर के लिए 173 करोड़ मंजूर
एक्सप्रेस-वे के फुंडहर चौक में भी फ्लाईओवर प्रस्तावित है। फुंडहर चौक से आगे अटल एक्सप्रेस-वे को व्ही.आई.पी. रोड (एयरपोर्ट रोड) से जोडऩे के लिए राज्य शासन द्वारा पहले ही फ्लाईओव्हर निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। इसका निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के लिए कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने पी.टी.एस. चौक में फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। इन फ्लाईओवर्स के निर्माण से रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक यातायात सुगम हो जाएगा।
आरंग-खरोरा मुख्य मार्ग में चावल से भरे ट्रक में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू …
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में नई सिंचाई तकनीक ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’ का प्रजेंटेशन देखा, बोले, इस तकनीक के व्यापक उपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा
PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।