देश-विदेश
डाक विभाग ने सिकल सेल उन्मूलन : 2047 पर स्मारक डाक टिकट जारी किया
नई दिल्ली | 15 नवंबर 2024 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीजी कॉलेज, धार में "सिकल सेल उन्मूलन- 2047" को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया। इस कार्यक्रम में डाक विभाग की ओर से मध्य प्रदेश सर्कल, भोपाल के मुख्य डाकपाल महा-प्रबंधक विनीत माथुर और इंदौर की डाकपाल महा-प्रबंधक श्रीमती प्रीति अग्रवाल उपस्थित रहे।
सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, खासकर जनजातीय आबादी के बीच। मध्य प्रदेश इस बीमारी से निपटने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिसमें आनुवांशिक परामर्श, सामुदायिक जांच, और एचपीएलसी मशीनों जैसे उन्नत निदान उपकरणों की उपलब्धता शामिल है।
सिकल सेल उन्मूलन- 2047 पहल का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के लिए एक स्वस्थ भविष्य बनाना है। आवश्यक उपायों में नवजात शिशुओं की जांच के लिए एम्स भोपाल की विशेष प्रयोगशाला की स्थापना, संकल्प इंडिया के साथ साझेदारी में प्रसवपूर्व निदान, और प्रभावी ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत मोबाइल ऐप और राष्ट्रीय सिकल सेल पोर्टल शामिल हैं।
यह स्मारक डाक टिकट आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के उच्च प्रसार से निपटने के लिए राज्य की पहल का सम्मान करता है और 2047 तक इस वंशानुगत बीमारी को खत्म करने की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालता है। सिकल सेल उन्मूलन मिशन को चरणों में शुरू किया गया था, शुरुआत में अलीराजपुर और झाबुआ जैसे जिलों को कवर किया गया और बाद में भारत के 17 राज्यों में इसका विस्तार किया गया।
डाक विभाग द्वारा जारी यह स्मारक डाक टिकट भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने और अपने नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस टिकट में दर्शाई गई दूरदर्शी नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों की भावना एक सिकल-सेल मुक्त भारत की प्रतिबद्धता की याद दिलाती रहेगी।
वैश्विक नवाचार में भारत का बढ़ता प्रभाव : डब्ल्यूआईपीओ 2024 की बौद्धिक संपदा रिपोर्ट पर एक नजर
नई दिल्ली | विश्व बौद्धिक संपदा संगठन प्रतिवर्ष विश्व बौद्धिक संपदा संकेतक रिपोर्ट प्रकाशित करता है, जो बौद्धिक संपदा फाइलिंग में वैश्विक रुझानों का व्यापक विश्लेषण प्रदान करती है। 2024 की रिपोर्ट प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में पेटेंट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन की वृद्धि और विकास पर प्रकाश डालती है, जिसमें उभरते बाजारों और नवाचार केंद्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन अर्थव्यवस्थाओं के बीच, भारत वैश्विक आईपी परिदृश्य में तेजी से बढ़ते खिलाड़ी के रूप में खड़ा है, जिसने सभी तीन प्रमुख आईपी श्रेणियों- पेटेंट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भारत ने पेटेंट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन के लिए शीर्ष 10 देशों में स्थान हासिल करके बौद्धिक संपदा फाइलिंग में वैश्विक नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यह उपलब्धि भारत की बढ़ती नवाचार क्षमता को रेखांकित करती है, देश पेटेंट आवेदनों, ब्रांड संरक्षण और डिजाइन नवाचारों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। 2024 की रिपोर्ट में सबसे उल्लेखनीय निष्कर्षों में से एक वैश्विक आईपी परिदृश्य में भारत का असाधारण प्रदर्शन है। भारत ने 2023 में पेटेंट आवेदनों में अभूतपूर्व +15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिससे लगातार पांचवें वर्ष दो-अंकों (दस से ऊपर) की वृद्धि जारी रही। यह उछाल भारत को वैश्विक पेटेंट फाइलिंग में योगदान देने वाले शीर्ष देशों में रखता है, जो वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में देश की बढ़ती भूमिका का संकेत देता है। कोविड-19 संकट के दौरान आईपी फाइलिंग का लचीलापन आर्थिक सुधार और विकास को आगे बढ़ाने में बौद्धिक संपदा के स्थायी महत्व को रेखांकित करता है।
वर्ष 2023 में 64,480 पेटेंट फाइलिंग के साथ भारत अब पेटेंट आवेदनों के मामले में विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है। इससे बौद्धिक संपदा गतिविधि के मामले में भारत ने चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया सहित अग्रणी देशों में जगह बना ली है। वैश्विक पेटेंट रैंकिंग में भारत की वृद्धि इसकी विशाल और विविध अर्थव्यवस्था को देखते हुए विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसमें कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से लेकर फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक उद्योग शामिल हैं।
इतिहास में पहली बार, 2023 में भारत के आधे से अधिक (55.2 प्रतिशत) पेटेंट आवेदन निवासियों द्वारा दायर किए गए, जो महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। यह भारत की बढ़ती घरेलू नवाचार क्षमताओं को दर्शाती है, भारतीय कंपनियां, विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान अब नई प्रौद्योगिकियों और बौद्धिक संपदा पैदा करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रवृत्ति नवाचार-अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) नीति और आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी पहल के माध्यम से स्थानीय अन्वेषकों का समर्थन करने के सरकार के प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
भारत में पिछले वर्ष की तुलना में 2023 में दिए गए पेटेंट की संख्या में 149.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। स्वीकृत पेटेंटों में यह तीव्र वृद्धि आवेदनों को प्रोसेस करने और आईपी अधिकार प्रदान करने में भारत के पेटेंट कार्यालय की दक्षता को रेखांकित करती है। यह दायर किए जा रहे आवेदनों की बढ़ती गुणवत्ता को भी दर्शाता है, जिसमें कई नवाचार वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं। यह प्रगति तकनीकी और वैज्ञानिक विकास के केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती परिपक्वता का प्रतीक है।
भारत का पेटेंट-से-जीडीपी अनुपात - पेटेंट गतिविधि के आर्थिक प्रभाव का माप - उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया, जो 2013 में 144 से बढ़कर 2023 में 381 हो गया। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था का विस्तार हो रहा है, इसकी पेटेंट गतिविधि भी साथ-साथ बढ़ रही है, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में नवाचार के महत्व में वृद्धि का संकेत है। उच्च पेटेंट-से-जीडीपी अनुपात को अक्सर ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था के संकेत के रूप में देखा जाता है, जहां नवाचार और बौद्धिक संपदा आर्थिक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
मेलों और उत्सवों को पूरा प्रोत्साहन देगी राज्य सरकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मेलों और उत्सव संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी। प्राचीन मेले हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। भोपाल का अपना गौरवशाली इतिहास है। भोपाल में राजा भोज द्वारा निर्मित विशाल सरोवर भी है। सम्राट विक्रमादित्य से भी इस क्षेत्र का संबंध रहा है। तीर्थ मेला प्राधिकरण के माध्यम से मेलों के आयोजन को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल के टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में भोपाल मेले का शुभारंभ कर संबोधिम कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेले के आयोजन से संबंधित सुझावों पर राज्य सरकार द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में लम्बा समय व्यतीत किया। लोकमाता अहिल्या देवी ने उस दौर में जब मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा था, देव स्थान संस्कृति को स्थापित किया। वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य, किसी से भी कम नहीं था। उन्होंने निरंतर 51 युद्ध जीते थे और आखिरी 52वें युद्ध में विपरीत परिस्थतियां बन जाने पर पराजय स्वीकार करने की जगह आत्म बलिदान करना उचित समझा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्तों और कुशल शासकों का इतिहास समेटे मध्यप्रदेश में अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी को समृद्ध और गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी जाती है। मेले और उत्सव आमजन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में मकर संक्रांति से लेकर गुड़ी पड़वा ,रक्षाबंधन, विजयदशमी पर शस्त्र पूजन और गोवर्धन पूजा जैसे कार्यक्रम सरकार और समाज ने मिलकर मनाए हैं। सरकार आगे भी ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में सहभागिता करेगी। इस अवसर पर सांसद श्री आलोक शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, नगर निगम भोपाल के अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, श्री गोविंद गोयल आदि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शंख वादन की ध्वनियों के बीच जनप्रतिनिधियों के साथ गणेश वंदना में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकाश में गुब्बारे छोड़कर मेले का शुभारंभ किया। भोपाल उत्सव मेला समिति के अध्यक्ष श्री मनमोहन अग्रवाल ने स्वागत भाषण में कहा कि मेले में व्यापारी बंधु लाभ-हानि की चिंता किए बिना नागरिकों के हित में सहभागिता करते हैं। श्री अग्रवाल ने मेले से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। यह मेला टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में 31 दिसंबर 2024 तक चलेगा।
जीतन राम मांझी ने 43वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले : 2024 में "एमएसएमई मंडप" का उद्घाटन किया
एमएसएमई मंडप में देश के 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 200 प्रदर्शकों की भागीदारी
नई दिल्ली | केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने आज नई दिल्ली में 43वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) में हॉल नंबर 6 में "एमएसएमई मंडप" का उद्घाटन किया। उनके साथ डॉ. रजनीश, एएस एवं डीसी (एमएसएमई) और एमएसएमई मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे।
मंडप की मुख्य थीम "हरित एमएसएमई" है, जो एमएसएमई द्वारा अपने व्यवसाय संचालन में बदलाव के लिए स्वच्छ/हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर मंत्रालय के फोकस पर जोर देती है। इसके अलावा मंडप में 18 व्यवसायों में लगे कारीगरों और शिल्पकारों को शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रालय की प्रमुख योजना "पीएम विश्वकर्मा योजना" की भी जानकारी उपलब्ध कराता है। यह योजना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर, 2023 को शुरू की थी।
ऊर्जा आज आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए आधार स्तम्भ बन गई है : पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी
पुरी ने कहा कि सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी बढ़ाने के लिए व्यापक सुधार लागू किए
सरकार ने वर्जित क्षेत्रों (नो-गो) को लगभग 99% तक कम कर दिया है, जिससे अन्वेषण के लिए नए व्यापक क्षेत्र खुल गए हैं: पुरी
पुरी ने कहा कि भारत 2025 तक तलछटी बेसिन अन्वेषण को 16 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए तैयार है, 2030 तक 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर का लक्ष्य
नई दिल्ली | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ग्रेटर नोएडा में भारत के प्रमुख ‘दक्षिण एशियाई भूविज्ञान सम्मेलन एवं प्रदर्शनी जियो इंडिया 2024’ के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, "ऊर्जा आज आर्थिक वृद्धि एवं विकास का आधार स्तम्भ बन गई है।" पुरी ने आर्थिक प्रगति को गति देने में ऊर्जा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल देश में, बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनुरूप ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है।
केन्द्रीय मंत्री ने इस आयोजन का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की, जिसमें भारत और विदेश से अन्वेषण और उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञ एक साथ आ रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ पेट्रोलियम जियोलॉजिस्ट्स, इंडिया द्वारा आयोजित जीईओ इंडिया 2024, सम्मेलन और प्रदर्शनी का छठा आयोजन है और इसका विषय “ऊर्जा गतिशीलता के नए आयामों की खोज” है।
भारत में ईंधन की मांग वैश्विक औसत से तीन गुना बढ़ोतरी के मद्देनजर, श्री पुरी ने कहा कि भारत में प्रतिदिन 67 मिलियन लोग पेट्रोल पंपों पर जाते हैं। इस बढ़ती मांग से अगले दो दशकों में ऊर्जा की खपत में वैश्विक स्तर पर 25 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, "उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता के संतुलन को बनाए रखना न केवल प्राथमिकता है, बल्कि एक प्रतिबद्धता भी है जिसे हम अन्वेषण, उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर पूरा कर रहे हैं।"
भारत का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, देश के तलछटी बेसिनों में 651.8 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल के भंडार और 1,138.6 बिलियन क्यूबिक प्राकृतिक गैस के भंडार हैं, जिनका अभी तक अन्वेषण नहीं किया गया है। इन प्रचुर संसाधनों के बावजूद, भारत अपनी अन्वेषण क्षमता का पूर्ण रुप से दोहन नहीं कर पाया है। पुरी ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई, तब भारत के केवल 6 प्रतिशत तलछटी बेसिनों का ही अन्वेषण किया गया था। आज, यह आँकड़ा बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया है, और खुला रकबा लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) दौर के तहत आगे की अन्वेषण गतिविधि के साथ, यह 2025 तक बढ़कर 16 प्रतिशत हो जाएगा। वर्ष 2030 तक, सरकार का लक्ष्य देश के अन्वेषण क्षेत्र को 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
केन्द्रीय मंत्री ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान सरकार के कई महत्वपूर्ण सुधारों का भी जिक्र किया। इन प्रमुख सुधारों में अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाना, 37 अनुमोदन प्रक्रियाओं को घटाकर केवल 18 करना शामिल है, जिनमें से नौ अब स्व-प्रमाणन के लिए उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, 2024 में तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक की शुरूआत तेल और गैस उत्पादकों के लिए नीति स्थिरता सुनिश्चित करती है, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता की अनुमति देती है, और पट्टे की अवधि बढ़ाती है। इसके अलावा, सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में वर्जित क्षेत्रो (नो-गो) को लगभग 99 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जिससे अन्वेषण के लिए विशाल नए क्षेत्र खुल गए हैं।
ओएएलपी की हाल ही में नौवें दौर की बोली प्रक्रिया ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिसमें 8 तलछटी घाटियों में 28 ब्लॉकों में 136,596 वर्ग किलोमीटर अन्वेषण क्षेत्र की पेशकश की गई। उल्लेखनीय रूप से, इस दौर में पेश किए गए 38 प्रतिशत क्षेत्र को पहले वर्जित क्षेत्रों (नो-गो) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इस दौर में 28 ब्लॉकों के लिए कुल 60 बोलियाँ प्राप्त हुईं, जो भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों की बढ़ी हुई रुचि को दर्शाता है। पिछले दौर में प्रति ब्लॉक बोलियों की औसत संख्या केवल 1.3 प्रति ब्लॉक की तुलना में अब बढ़कर 2.4 हो गई है।
जीईओ इंडिया 2024 में लगभग 2,000 प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है और इसमें 20 से अधिक सम्मेलन सत्र, 4 पूर्ण चर्चाएँ, 200 से अधिक तकनीकी शोधपत्र और 50 से अधिक प्रदर्शनी सत्र होंगे। पुरी ने कहा, "मुझे भू-वैज्ञानिकों के नवोन्मेषी विचारों पर पूरा भरोसा है कि वे भारत में ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करेंगे, हर नागरिक के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और भविष्य की चुनौतियों का सामना करेंगे।"
पुरी ने जीईओ इंडिया 2024 के प्रतिभागियों को नवाचार को बढ़ावा देने, स्थिरता को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
अंतरिक्ष में फंसी है सुनीता विलियम्स : अगले साल फरवरी में वापस आने की उम्मीद
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 50 से ज्यादा लीकेज।
नई दिल्ली | भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स पर अब एक नई मुसीबत आ पड़ी है। दरअसल, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कई सालों से हल्की लीकेज हो रही थी, जो अब बढ़ गई है। पता चला है कि ये दरारें 50 से ज्यादा हो गई है, जिससे सुनीता पर खतरा मंडराने लगा है। इसको लेकर अब नासा भी चिंता में है।
नासा की एक जांच रिपोर्ट लीक हो गई है, जिससे पता चला की आईएसएस पर खतरा है और सभी अतंरिक्ष यात्री भी सेफ नहीं है।
रूस ने भी चेताया है कि पृथ्वी की कक्षा में लैब में माइक्रो वाइब्रेशन हो रहा है। वहीं, नासा ने कहा कि स्पेस स्टेशन से बड़ी मात्रा में हवा निकल रही है, जो खतरे की घंटी है। हालांकि, नासा यात्रियों को बचाने की कोशिश में जुटी है।
रूसी स्पेस एजेंसी रोस्कोमोस और नासा में इस बात पर सहमति नहीं बनी है कि समस्या की असल वजह क्या है। सीएनएन के अनुसार, नासा के अंतरिक्ष यात्री बॉब कैबाना ने कहा है कि दोनों ने इस पर चिंता जाहिर की है।
सुनीता विलियम्स अपने साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ जून से ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर हैं। पिछले 150 दिनों से अधिक समय से दोनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे हुए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री ने पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी थी और छह जून को आईएसएस पहुंचे थे। अगले साल फरवरी में इनके वापस आने की उम्मीद है।
हालांकि, इतने समय से अंतरिक्ष स्टेशन में रहने वाली सुनीता विलियम्स के स्वास्थ्य को लेकर कई बार चिंता जाहिर की जा चुकी है। हालांकि, नासा ने एक बार फिर उनके स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए राहत भरी खबर सुनाई। नासा ने बताया कि अंतरिक्ष में मौजूद सभी यात्री काफी सुरक्षित हैं।
डाक विभाग ने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विशेष डाक टिकट जारी किया
नई दिल्ली | जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देते हुए, डाक विभाग ने महान आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी को सम्मानित करने के लिए उनकी 150वीं जयंती के अवसर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस डाक टिकट को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के जमुई में आयोजित एक भव्य समारोह में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में जारी किया।
15 नवंबर 1875 को बिहार (वर्तमान झारखंड) के उलिहातु में जन्मे बिरसा मुंडा ने 1899 से 1900 तक ऐतिहासिक उलगुलान (महान विद्रोह) का नेतृत्व किया, जिसमें आदिवासी भूमि को पुनः प्राप्त करने और औपनिवेशिक उत्पीड़न का विरोध करने के लिए उन्होंने हजारों लोगों को एकजुट किया। "मुंडा राज" के लिए उनका समर्थन शोषण से मुक्त एक न्यायपूर्ण और स्व-शासित समाज के उनके सपने का प्रतीक थी। 25 वर्ष की आयु में ही वे इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे, लेकिन उनका साहस और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति का उनका संदेश पूरे देश में समुदायों को आज भी प्रेरित करता है।
शंख सामंत द्वारा डिजाइन किए गए इस डाक टिकट में भगवान बिरसा मुंडा का एक शक्तिशाली चित्रण है, जिसकी पृष्ठभूमि में उन्हें अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए दिखाया गया है। उनकी दृढ़ अभिव्यक्ति आदिवासी एकता, सशक्तिकरण और स्वशासन के लिए उनके अटूट विजन का प्रतीक है। यह स्मारक डाक टिकट भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके महान योगदान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए एक कालातीत श्रद्धांजलि है।
स्मारक डाक टिकट, फर्स्ट डे कवर (एफडीसी) और ब्रोशर के साथ, संग्रहणीय वस्तु के रूप में उपलब्ध है, जो भारत की स्वतंत्रता में भगवान बिरसा मुंडा के अमूल्य योगदान और आदिवासी समुदायों पर उनके स्थायी प्रभाव का जश्न मनाता है। अपना संग्रह अभी प्राप्त करने के लिए https://www.epostoffice.gov.in/ पर जाएँ।
भारत के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और लोक सभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और आदर्श हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे : लोक सभा अध्यक्ष
भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष का शुभारंभ आज से
नई दिल्ली | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद भवन परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर उनकी 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर भारत के उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष का शुभारंभ हो रहा है।
ओम बिरला ने X पर संदेश लिखा, “आदिवासी अस्मिता और संस्कृति के गौरव, उलगुलान के प्रणेता, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर सविनय नमन। भगवान बिरसा मुंडा का 150वां जन्मजयंती वर्ष आज से शुरू हो रहा है। जनजातीय गौरव दिवस के इस उपलक्ष्य पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। भगवान बिरसा देश, समाज और संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व समर्पण कर देने वाले महानायक थे। उनके जीवन आदर्श हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे। #BirsaMunda150 #JanjatiyaGauravDiwas।”
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मानित करने के लिए 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। जनजातीय समुदायों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह दिवस जनजातीय समुदायों के इतिहास, संस्कृति और धरोहर को सम्मानित करता है, एवं देशभर में एकता, गर्व और जनजातियों का देश की स्वतंत्रता और प्रगति में योगदान के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध का प्रतीक बन गए। भगवान मुंडा का नेतृत्व राष्ट्रीय जागरण का कारण बना, और उनका योगदान जनजातीय समुदायों द्वारा गहरे सम्मान के साथ याद किया जाता है।
इस अवसर पर, विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय लोक कलाकारों ने संसद भवन परिसर के प्रेरणा स्थल पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में आग, जिंदा जल गए 10 नवजात, मौत से जूझ रहे 16 बच्चे
डेस्क। झांसी मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में आग लगने से 10 बच्चों की मौत हो गई है जबकि 16 अन्य घायल हो गए और जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हादसा यूपी के झांसी जिले में स्थित महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज की है। यहां के एनआईसीयू में शुक्रवार रात करीब 10.45 बजे आग लग गई। हादसे में घायल 16 बच्चों का इलाज किया जा रहा है और उनकी जान बचाने के प्रयास जारी हैं।
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में शुक्रवार रात भीषण आग लग गई। हादसे में 10 बच्चों की मौत हो गई। वार्ड की खिड़की तोड़कर 39 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया। वार्ड ब्वॉय ने आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र चलाया। मगर वह एक्सपायर हो चुका था, इसलिए काम ही नहीं किया। सूचना पर फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां पहुंचीं। खिड़की तोड़कर पानी की बौझारें मारीं। भीषण आग को देखते हुए सेना को बुलाया गया। करीब 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया।
डीएम ने बताया कि जो बच्चे एनआईसीयू के बाहरी हिस्से में थे, उन्हें बचा लिया गया। प्रथम दृष्टया 10 बच्चों की मौत की सूचना है। कम गंभीर मरीजों को एनआईसीयू के बाहरी हिस्से में भर्ती किया जाता है जबकि अधिक गंभीर मरीजों को आंतरिक हिस्से में रखा जाता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) झांसी सुधा सिंह ने कहा कि इस घटना में घायल हुए अन्य 16 बच्चों का इलाज चल रहा है। घटना के वक्त एनआईसीयू में 50 से ज्यादा बच्चे भर्ती थे। झांसी पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त बयान में कहा कि एक फायर ब्रिगेड को घटनास्थल पर भेजा गया जबकि जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और जिला प्रशासन के अधिकारियों को घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम योगी ने संभागीय आयुक्त बिमल कुमार दुबे और उप महानिरीक्षक (झांसी पुलिस रेंज) कलानिधि नैथानी को 12 घंटे के भीतर मामले पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। झांसी से लोकसभा सांसद अनुराग शर्मा ने कहा कि ‘मैं इस घटना से बेहद दुखी हूं। उन्होंने कहा कि वह इस समय स्टेशन से बाहर हैं। घटना के कुछ देर बाद सदर विधायक रवि शर्मा भी अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
‘जल, जंगल, जमीन के साथ ही संस्कृति की रक्षा में भी बिरसा मुण्डा का अहम योगदान’
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिये किये जा रहे प्रयासों के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से प्रारंभ हुए जनजातीय गौरव दिवस के माध्यम से हमारी आजादी में जनजातीय नायक-नायिकाओं के योगदान से देश-दुनिया को परिचित कराने में मदद मिली है। अंग्रेजों से वीरता पूर्वक युद्ध करने वाले, जन-समुदाय द्वारा भगवान के रूप में पूजे जाने वाले, मुण्डा क्रांति के जनक बिरसा मुण्डा थे। उन्होंने सशस्त्र छापामार संघर्ष में बलिदानी रायन्ना, संथाल विद्रोह या हूल आंदोलन में तीर-कमान के साथ शामिल होने वाले शहीद सिद्धो संथाल, कान्हू संथाल, उनके छोटे भाई चाँद और भैरव के योगदान का भी उल्लेख किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री की संवेदनाएं जनजाति वर्ग के प्रति विशेष रूप से है। जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिये उन्होंने बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि की है। पीएम जन मन योजना के माध्यम से जनजातीय वर्ग के कल्याण को नई दिशा दी जा रही है। बेगा, सहरिया सहित अन्य पिछड़े जनजातीय वर्ग के जीवन में सुधार के लिये भी विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। राज्यपाल पटेल शुक्रवार को धार में भगवान बिरसा मुण्डा जयंती के अवसर पर राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस के विशाल समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह की अध्यक्षता की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है। आज के दिन हमारे समाज के गौरव भगवान बिरसा मुण्डा ने जन्म लिया था। यह दिन हमारे लिये गौरव के साथ गर्व का दिन भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की है। बिरसा मुण्डा ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये संघर्ष किया। उन्होंने भारत माँ की रक्षा के लिये भी अपनी जीवटता और वीरता से अनेक उल्लेखनीय कार्य किये और समाज को नई दिशा दी। धर्मांतरण के विरोध में आवाज उठाते हुए वे आगे आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति बचेगी तो हम बचेंगे। संस्कृति की रक्षा के लिये बिरसा मुण्डा का भारत के इतिहास में एक बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि टंट्या मामा के नाम से विश्वविद्यालय बनाया गया है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 200 गीगावाट अक्षय ऊर्जा की उपलब्धि के सम्मान में सुदर्शन पटनायक की रेत कला को साझा किया
नई दिल्ली | केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर सुप्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक की कलाकृति साझा की।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा "नवीकरणीय ऊर्जा में 200 गीगावाट क्षमता को पार करने की भारत की उल्लेखनीय उपलब्धि का सम्मान!
भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'पंचामृत' लक्ष्य के अनुरूप अक्टूबर में अक्षय ऊर्जा में 200 गीगावाट की उपलब्धि हासिल कर ली है। यह उल्लेखनीय वृद्धि 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500 गीगावाट हासिल करने के देश के महत्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्य के अनुरूप है।
वार्षिक नौसेना उड़ान सुरक्षा बैठक और उड़ान सुरक्षा संगोष्ठी : 2024 का आयोजन किया गया
नई दिल्ली | पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय के तत्वावधान में वार्षिक नौसेना की उड़ान सुरक्षा बैठक (एनएफएसएम) और उड़ान सुरक्षा संगोष्ठी (एफएसएस) - वर्ष 2024 का आयोजन 12 से 13 नवंबर को आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। संगोष्ठी की शुरुआत 12 नवंबर को हुई, जिसमें मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ पूर्वी नौसेना कमान ने मुख्य भाषण दिया।
संगोष्ठी "उभरते खतरे और चुनौतियां-नौसेना वायु संचालन और उड़ान सुरक्षा के साथ अनुपालन" विषय पर केंद्रित रही। इस संगोष्ठी में समकालीन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें काउंटर-यूएवी/यूएएस प्रौद्योगिकी और रणनीति में प्रगति, विमानन संचालन में साइबर सुरक्षा जोखिम और विमान प्रणालियों के लिए जवाबी उपाय शामिल हैं। इसमें हवाई संचालन के दौरान मानसिक लचीलेपन के लिए 'माइंडफुलनेस ट्रेनिंग' के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा में उभरते परिचालन जोखिमों के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया गया। हवाई संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सेवाओं में साझा सतर्कता की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। विचारों के आदान-प्रदान ने आधुनिक नौसेना विमानन की चुनौतियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल और सक्रिय सुरक्षा रणनीतियों की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। संगोष्ठी में भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसे प्रमुख रक्षा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
13 नवंबर को, एनएफएसएम ने भारतीय नौसेना के प्रमुख उड़ान सुरक्षा हितधारकों को एक साथ लाया, जिसमें रियर एडमिरल जनक बेविल, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) ने बैठक की अध्यक्षता की। सभी परिचालन मिशनों को पूरा करते हुए सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए परिचालन जोखिम प्रबंधन के उद्देश्य से नौसेना में सुरक्षा सहमति पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा में पक्षियों और जानवरों के खतरे को कम करने के नवीनतम रुझानों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम के दोनों दिन पैनल चर्चाएं और विशेषज्ञों के नेतृत्व में प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल को बढ़ाने और नौसेना विमानन में तत्परता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।
बच्चों को ऊर्जा बचत की सीख और संस्कार बचपन से ही दें : मंगुभाई पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को ऊर्जा बचत की सीख और संस्कार बचपन से ही दिया जाए। उन्हें ऊर्जा की भावी ज़रूरतों और महत्व के प्रति जागरूक बनाएं। राज्यपाल श्री पटेल ऊर्जा संरक्षण पर आधारित, राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तत्वाधान में भोपाल के सुभाष भवन में आयोजित किया गया था।
राज्यपाल ने दो श्रेणियों में आयोजित, राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता में चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। पटेल ने इस अवसर पर प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया। उन्होंने NHDC को विगत 19 वर्षों से उर्जा संरक्षण की जागरूकता के लिए प्रतियोगिता के सतत् आयोजन की बधाई दी।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की कल्पनाशीलता और सृजनशीलता प्रकृति का अनुपम उपहार है। ऊर्जा बचत और संरक्षण पर बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र, उनके अंतर्मन की अभिव्यक्ति है। राज्यपाल श्री पटेल ने उपस्थित जनों से अपील की कि वे चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन ज़रूर करें और बाल कलाकारों के भावों की अभिव्यक्ति को सराहें। उन्होंने बच्चों से कहा कि ऊर्जा संरक्षण के लिए चित्रों का सृजन करते हुए, ऊर्जा बचत के जो सच्चे भाव आपके अंतर्मन में आए थे, उन भावों को हमेशा जीवंत रखें और उनका आजीवन अनुसरण करने का प्रयास करें।
राज्यपाल ने कहा कि ऊर्जा के संसाधन, प्रकृति द्वारा मानव को दिए गए अमूल्य उपहार हैं। इनका ज़रूरत और विवेक अनुसार उपयोग करना चाहिए। हम सभी को ऊर्जा के साधनों के साथ पानी की बचत और महत्व को भी समझना होगा। राज्यपाल ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है, वहां की जनता की समस्याओं का विचार करें, और सहानुभूति का भाव रखते हुए ऊर्जा, पानी और अन्य प्राकृतिक साधनों का विवेक से उपयोग करें। उन्होंने बच्चों को समझाइश दी कि बचत की अच्छी आदतों को विकसित करें।
भारतीय नौसेना के पहले बेड़ा समर्थित जहाज का हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड : विशाखापत्तनम में शिलान्यास
नई दिल्ली | पांच फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस) में से पहले का ‘कील लेइंग’ समारोह 14 नवंबर 24 को हिंदुस्तान शिपयार्ड, लिमिटेड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया। एचएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा भारतीय नौसेना एवं एचएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समारोह की अध्यक्षता युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण के नियंत्रक वाइस एडमिरल बी शिव कुमार ने की। भारतीय नौसेना ने अगस्त 2023 में पांच फ्लीट सपोर्ट शिप के अधिग्रहण के लिए एचएसएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। जहाजों को 2027 के मध्य से भारतीय नौसेना को वितरित किया जाना अनुसूचित है।
शामिल होने पर, फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्र में बेड़े के जहाजों के वापस शामिल होने के साथ भारतीय नौसेना की 'ब्लू वाटर' क्षमता को बढ़ाएंगे। 40,000 टन से अधिक की क्षमता वाले जहाज ईंधन, पानी, गोला-बारूद और भंडार ले जाने और वितरण का काम करेंगे, जिससे बंदरगाह पर वापस आए बिना लंबे समय तक संचालन संभव हो सकेगा, जिससे बेड़े की रणनीतिक पहुंच और विचलन में बढ़ोतरी होगी। द्वितीयक तौर पर, ये जहाज आपातकालीन परिस्थिति में कर्मियों को निकालने और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान साइट पर राहत सामग्री की त्वरित वितरण के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों से सुसज्जित होंगे।
स्वदेशी डिजाइन और स्वदेशी निर्माताओं से अधिकांश उपकरणों की सोर्सिंग के साथ, यह जहाज निर्माण परियोजना भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देगी और यह भारत सरकार की #AatmanirbharBharat, #Makeinindia और #MakefortheWorld की पहल के अनुरूप है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 14-27 नवंबर तक चलने वाले : 43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन भारत मंडपम में किया
एमआईसीई सुविधाओं का विस्तार भारत के और अधिक शहरों में किया जाएगा : पीयूष गोयल
गोयल ने कहा कि भारत व्यापार संवर्धन संगठन का विस्तार विश्व स्तरीय सुविधा के रूप में किया जाएगा
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का टिकट 55 दिल्ली मेट्रो स्टेशन, डीएमआरसी मोबाइल ऐप, भारत व्यापार संवर्धन संगठन की वेबसाइट पर उपलब्ध है
बिहार और उत्तर प्रदेश व्यापार मेले 2024 में भागीदार और झारखंड मेले का फोकस राज्य है
नई दिल्ली | केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ) का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन भाषण के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार भारत व्यापार संवर्धन संगठन को एक विश्व स्तरीय एजेंसी के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। यह एक ही स्थान पर पूरे उद्योग और मूल्य श्रृंखला को प्रतिबिंबित करेगी ताकि विश्व, भारत को सर्वश्रेष्ठ एमआईसीई गंतव्य के रूप में देख सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा जैसी जगहों पर काम कर रही है। सरकार के विकसित भारत के लक्ष्य को समर्पित करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को दोहराते हुए, श्री गोयल ने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के थीम विकसित भारत 2047 पर प्रसन्नता व्यक्त की।
व्यापार मेलों में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग पर जोर देते हुए गोयल ने कहा कि केंद्र तेजी से लेनदेन को सक्षम बनाने के लिए मेलों के आसपास कियोस्क लगाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले और इस तरह के आयोजनों में बाजार की तलाश करने वाले उद्योगों के साथ राजस्व साझा करने के मॉडल पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने लोकल टू ग्लोबल की ओर जाने और उपभोक्ताओं की पसंद के लिए भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों को लाने वाले खरीदारों और विक्रेताओं के समरूपता की सुविधा प्रदान करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में प्रदर्शनी दुनिया के लिए वन-स्टॉप शॉप होनी चाहिए। गोयल ने भारत व्यापार संवर्धन संगठन से वर्चुअल मेलों पर विचार करने का भी आग्रह किया।
पीयूष गोयल ने आशा व्यक्त की कि भारत विदेशी खरीदारों को आमंत्रित करने के लिए विश्व भर में मेले आयोजित करेगा। उन्होंने भविष्य के मेलों, स्टार्टअप, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित प्रौद्योगिकियों और साइबर प्रौद्योगिकी में प्रगति को प्रदर्शित करने वाले समर्पित मंडपों में एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में नवीनता की भी उम्मीद जताई।
भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) द्वारा आयोजित, 14 से 27 नवंबर, 2024 तक निर्धारित यह प्रमुख मेला, भारत की जीवंत संस्कृति, व्यापार और नवाचार का उत्सव मनाता है। यह व्यवसायों और व्यक्तियों को अवसरों का पता लगाने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
इस वर्ष की थीम, "विकसित भारत @2047," 2047 तक एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सतत राष्ट्र बनने के भारत के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है। मेला आर्थिक विकास और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक आधार के रूप में नवाचार, स्थिरता, समावेशिता और सुशासन पर जोर देता है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2024 भारत की निर्यात क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह इस महत्वाकांक्षी दृष्टि के लिए प्रतिबद्ध हितधारकों के बीच उपयुक्त संवाद सम्प्रेषण के लिए एक अद्वितीय मंच प्रदान करता है।
मेले का आयोजन लगभग 1,07,000 वर्ग मीटर के सकल क्षेत्र में फैला है। इस मेले में भारत और विदेशों के 3,500 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक समेकित बिंदु के रूप में कार्य करता है। यह व्यापार-से-व्यवसाय (बी2बी) और व्यवसाय-से-उपभोक्ता (बी2सी) जुड़ाव को बढ़ावा देता है। इस आयोजन से प्रतिदिन लगभग एक लाख दर्शकों के आने की उम्मीद है, जो दक्षिण एशिया के सबसे बड़े व्यापार मेलों में से एक के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाता है।
दर्शक 14 से 18 नवंबर, 2024 तक व्यावसायिक दिनों और 19 से 27 नवंबर, 2024 तक सामान्य दर्शक दिनों के दौरान मेले में शामिल हो सकते हैं। इस मेले का टिकट 55 डीएमआरसी मेट्रो स्टेशनों (सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को छोड़कर), भारत मंडपम मोबाइल ऐप, डीएमआरसी ऐप मोमेंटम 2.0, दिल्ली सारथी, आईटीपीओ की आधिकारिक वेबसाइट (www.indiatradefair.com), और डीएमआरसी वेबसाइट (www.itpo.autope.in) के माध्यम से उपलब्ध है। टिकट की कीमतें पिछले साल की तरह ही है, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को अपनी पहचान प्रस्तुत करने पर निशुल्क प्रवेश मिलेगा।
भारत मंडपम मोबाइल ऐप दर्शकों को एक विस्तृत मार्ग मानचित्र, स्टाल का स्थान और नेविगेशन सुविधाएं प्रदान करता है। दर्शकों के लिए प्रवेश द्वार भैरो रोड पर गेट नम्बर 3 और 5 तथा मथुरा रोड पर गेट नम्बर 6 और 10 पर स्थित है। यह मेला प्रतिदिन 10:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक खुला रहेगा।
बिहार और उत्तर प्रदेश इस मेले में भागीदार राज्यों के रूप में भाग ले रहे हैं, जबकि झारखंड मेले के इस संस्करण के लिए फोकस राज्य है। कुल 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, 49 केंद्रीय मंत्रालय, कमोडिटी बोर्ड, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी), और टाइटन, जिंदल स्टील एंड पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, रिलैक्सो, हॉकिन्स और वुडलैंड जैसी प्रसिद्ध निजी कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन कर रही हैं। चीन, मिस्र, ईरान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, थाईलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, लेबनान, किर्गिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात सहित देशों के अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक मेले का मुख्य आकर्षण हैं।
किसी भी पद पर रहे, मित्रता भाव हमेशा बनाए रखना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विद्यार्थियों को अपना जुनून हमेशा कायम रखना चाहिए। इच्छाशक्ति जितनी दृढ़ होगी, लक्ष्य उतना ही आसान होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी पद पर पहुंचे, मित्रता का प्रेमभाव हमेशा बनाए रखना। इसका सबसे अच्छा उदाहरण श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती का है। उनकी दोस्ती 11 वर्ष की उम्र में हुई थी और जब वे द्वारका के राजा बने तब भी उनकी दोस्ती ने दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्थान के कोटा जिले में एलन शिक्षण संस्थान के समउन्नत भवन में विद्यार्थियों से चर्चा कर रहे थे। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विद्यार्थियों ने गजहार पहनाकर स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति का इससे अच्छा उदाहरण दूसरा नहीं हो सकता कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में पहली बार विधायक बनने के साथ ही मुख्यमंत्री बने और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री के बाद वे पहली बार सांसद बनें और पहली बार में ही देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद लगातार सांसद बने और प्रधानमंत्री भी। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में हैट्रिक भी बनाई। आर्थिक दृष्टि से गुजरात देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैंने अपने शैक्षणिक काल से ही अपना लक्ष्य समाज सेवा के रूप में निर्धारित किया था। वर्ष 1982 में मेरा चयन मेडिकल कॉलेज के लिए हो गया था, परंतु समाज सेवा के अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मैंने मेडिकल में प्रवेश न लेते हुए, बीएससी की उपाधि प्राप्त की। मैं यूनिवर्सिटी प्रेसिडेंट रहते हुए राजनीति में सक्रिय रह सका। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के तीन मूल मंत्र हैं, जिन्हें विद्यार्थियों को आत्मसात करना चाहिए। पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने बतायाकि अपने लक्ष्य पर शुरू से ही ध्यान केन्द्रित रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण 11 वर्ष की आयु में मथुरा से राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश के उज्जैन पधारे थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी यात्रा के दौरान प्रदेश में जहां-जहां विश्राम किया या ठहरे उन स्थानों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक महत्व के तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिक्षा काल में जिन ग्रंथों का अध्ययन किया, उन ग्रंथों का सार गीता में समाया है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा : सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन के गठन को मंजूरी दी
नई दिल्ली | राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सपने को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम के रूप में मोदी सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन की स्थापना को मंजूरी दी |
विशिष्ट सैन्य टुकड़ी के रूप में गठित की जाने वाली महिला बटालियन देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे हवाई अड्डों और मेट्रो रेल की सुरक्षा और कमांडो के रूप में VIP सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी |
यह निर्णय निश्चित रूप से राष्ट्र की रक्षा के महत्वपूर्ण कार्य में भाग लेने की और अधिक महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा |
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की पहली महिला बटालियन के गठन को मंजूरी दी है।
X प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट में गृह मंत्री ने कहा, राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सपने को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने CISF की पहली महिला बटालियन की स्थापना को मंजूरी दे दी है। एक विशिष्ट सैन्य टुकड़ी के रूप में गठित की जाने वाली महिला बटालियन देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे हवाई अड्डों और मेट्रो रेल की सुरक्षा और कमांडो के रूप में VIP सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी संभालेगी। यह निर्णय निश्चित रूप से राष्ट्र की रक्षा के महत्वपूर्ण कार्य में भाग लेने की और अधिक महिलाओं की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।
केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल उन महिलाओं के लिए पसंदीदा विकल्प रहा है जो केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल में देश की सेवा करना चाहती हैं। वर्तमान में बल में महिलाओं की संख्या 7% से अधिक है। महिला बटालियन के जुड़ने से देश की अधिक महत्वाकांक्षी युवा महिलाओं को CISF में शामिल होने और देश की सेवा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे CISF में महिलाओं को एक नई पहचान मिलेगी।
CISF मुख्यालय ने नई बटालियन के मुख्यालय के लिए शीघ्र भर्ती, प्रशिक्षण और स्थान के चयन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशिक्षण विशेष रूप से एक विशिष्ट बटालियन तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, ताकि महिला बटालियन के कर्मियों को VIP सुरक्षा के साथ हवाई अड्डों, दिल्ली मेट्रो रेल ड्यूटी की सुरक्षा में कमांडो के रूप में बहुविध भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाया जा सके।
53वें CISF दिवस समारोह के अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के आलोक में बल में महिला बटालियन बनाने के प्रस्ताव पर कार्य शुरू किया गया था।