देश-विदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में परिवर्तनकारी दशक ने पूर्वोत्तर में नई ऊर्जा का संचार किया : सर्बानंद सोनोवाल
प्रधानमंत्री मोदी की पूर्वोत्तर के लिए रणनीति सुशासन और विकासात्मक राजनीति पर केंद्रित है : सर्बानंद सोनोवाल
पूर्वोत्तर में एक दशक तक शांति बनाए रखने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों से कल्याणकारी सेवाएं सुनिश्चित हुईं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की गारंटी मिली: सर्बानंद सोनोवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर के लिए बजट परिव्यय में एक दशक में 300 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित की: सर्बानंद सोनोवाल
पूर्ववर्ती सरकारों को पूर्वोत्तर के लोगों से माफी मांगनी चाहिए: सर्बानंद सोनोवाल
नई दिल्ली | केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पूर्वोत्तर की ऊर्जा को पुनर्जीवित, कायाकल्प और नवीनीकृत करने के लिए राजनीतिक रणनीति के भाग के रूप में सुशासन और विकासात्मक राजनीति के प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को श्रेय दिया। पूर्वोत्तर क्षेत्र के वरिष्ठ नेता सोनोवाल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे मोदी सरकार के शासन के परिवर्तनकारी दशक ने पूर्वोत्तर भारत में एक नई ऊर्जा जाग्रत की है क्योंकि इसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विकास के इंजन को शक्ति प्रदान करना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के संबंध में जानकारी देने के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “पूर्वोत्तर का खूबसूरत क्षेत्र प्रकृति द्वारा धन्य है, लेकिन एनडीए के सत्ता में आने से पूर्व तत्कालीन सरकारों द्वारा लंबी अवधि तक इसकी अनदेखी की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, इस क्षेत्र में पिछले एक दशक में एक बड़ा परिवर्तन आया है, जब सरकारों द्वारा निष्क्रियता, भ्रष्टाचार और अज्ञानता में फंसी दशकों की निष्क्रियता की तुलना की जाती है। परिवर्तन के इस दशक ने पूर्वोत्तर में नई ऊर्जा का संचार किया है। गर्व और संभावनाओं से भरे लोग अब उपेक्षित महसूस नहीं करते हैं क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के प्रयास में देश के अन्य भागों के भाइयों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। स्पष्ट लक्ष्य और कड़ी मेहनत के साथ सफलता के उद्देश्य के साथ ये दोहरे दृष्टिकोण सफल रहे हैं, क्योंकि क्षेत्र के दूरदराज के इलाकों से लोग अपने दरवाजे पर कल्याणकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। वर्ष 2014 से पहले पूर्वोत्तर के अधिकांश लोगों के लिए यह अकल्पनीय था। आज, हमने इस परिवर्तन, इस विकास, जीवन की गुणवत्ता में इस वृद्धि को देखा है जिसने हमें राष्ट्र निर्माण के लिए आकांक्षा रखने, प्रयास करने और प्रतिबद्ध होने के लिए सशक्त बनाया है।”
क्षेत्र में कुछ प्रमुख विकास पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए पूर्वोत्तर एक प्राथमिकता बना हुआ है। 2014 से, इस क्षेत्र को बजट परिव्यय में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि मिली है। 2014 में 36,108 करोड़ रुपये से, क्षेत्र के लिए बजट परिव्यय वित्त वर्ष 2023-24 में 94,680 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बुनियादी ढांचे के संदर्भ में, राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार में 28 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2014 तक, इस क्षेत्र में 80 राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) थे, जो 2023 तक बढ़कर 103 एनएच हो गए। इंफ्रा डेवलपमेंट स्कीम परिव्यय में 26 गुना की भारी वृद्धि हुई है जो मात्र 94 करोड़ रुपये से बढ़कर ₹2,491 करोड़ रुपये हो गई है। रेलवे ने भी क्षेत्र में विस्तार किया है, जिससे हर साल 193 किलोमीटर से अधिक रेल लाइनें चालू होने के साथ संपर्क में सुधार हुआ है। क्षेत्र के लिए रेलवे बजट में 370 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हमने क्षेत्र में ब्रॉड गेज का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण भी हासिल किया है। कांग्रेस के अंतर्गत 60 साल के शासन में, इस क्षेत्र में केवल 9 हवाई अड्डे संचालित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में एक दशक से भी कम समय में, क्षेत्र में अब 17 हवाई अड्डे संचालित हैं। परिणामस्वरुप, क्षेत्र के लोगों ने प्रति सप्ताह उड़ानों में 113 प्रतिशत की वृद्धि के साथ विमानन क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया है। क्षेत्र के दूरदराज के कोनों से लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं के वितरण के संदर्भ में, 7 हजार से अधिक गांवों में पाइप से पीने का पानी उपलब्ध है। इस दशक में, क्षेत्र ने विश्वविद्यालयों की संख्या में 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ स्वस्थ विकास भी देखा है। जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से, जैविक खेती के लिए 1.55 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपयोग किया गया। 4,016 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं, जबकि 4 जी कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर के लगभग सभी भागों में पहुंच गई है।
‘प्रदेश की सबसे अलग अनोखी कान्ह डायवर्शन व अन्य एकीकृत परियोजनाओं से क्षिप्रा होगी स्वच्छ’
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 एवं आने वाले सिंहस्थों में संत-महंत और श्रध्दालु क्षिप्रा के जल से ही स्नान करेंगे। इसके लिए कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम परियोजना और हरियाखेड़ी परियोजना के कार्य पूर्ण होने पर ये परियोजनाएं एकीकृत रूप से कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं से तीन लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त किया जाएगा। इन परियोजनाओं से पावन नदी क्षिप्रा स्वच्छ एवं प्रवाहमान होगी और इससे जिले को पेयजल भी निरंतर उपलब्ध होता रहेगा। यह देश-प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना हैं, इसके संबंध में केन्द्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की जल आपूर्ति की कार्ययोजना एवं उनकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण करवाने के निर्देश दिए। बैठक में क्षिप्रा को स्वच्छ, अविरल, प्रवाहमान बनाने एवं क्षिप्रा नदी से जिले को पेयजल उपलब्ध कराने की कार्ययोजना की विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत परियोजनाओं की कार्ययोजना वर्ष 2055 तक की जनसंख्या को दृष्टिगत रखते हुए बनाई गई है। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना के माध्यम से कान्ह नदी का अस्वच्छ पानी को ट्रीटमेंट कर स्वच्छ पानी गंभीर डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बैराज से क्षिप्रा में जल की आपूर्ति निरंतर होती रहेगी, जिससे क्षिप्रा अविरल और प्रवाहमान रहेगी। हरियाखेड़ी परियोजना त्रिवेणी के अपस्ट्रीम में होने के कारण यहां से क्षिप्रा नदी का शुध्द जल प्राप्त होगा, जिससे जिले को निरंतर पेयजल प्रदाय किया जाएगा।
कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने जानकारी दी कि कान्ह डायवर्शन क्लॉज डक्ट परियोजना में क्लोज डक्ट 12 किलोमीटर लंबी टनल एवं 18.15 किलोमीटर क्लोज डक्ट से क्षिप्रा नदी को स्वच्छ करने का कार्य कान्ह नदी के पानी को अलग कर किया जाएगा। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना में बैराज निर्माण, बैलेंसिंग टैंक आदि निर्माण कार्य कर सिलारखेड़ी टैंक से त्रिवेणी घाट पाइपलाइन से ग्रेवेटी के माध्यम से क्षिप्रा में जल की सालभर उपलब्धता होगी, जिससे क्षिप्रा प्रवाहमान एवं अविरल रहेगी। हरियाखेड़ी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व बैराज परियोजना से जिले को निर्बाध रूप से पेयजल उपलब्ध निरंतर होता रहेगा।
बैठक में उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, संभागायुक्त संजय गुप्ता, एडीजीपी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, जनप्रतिनिधि विवेक जोशी, बहादुरसिंह बोरमुण्डला आदि उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने बाबा साहेब अंबेडकर को दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली | बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की 69वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भुवनेश्वर के एजी स्क्वायर पर जाकर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गईं।
वहीं, राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने गृह जिले मयूरभंज का दौरा करने का भी कार्यक्रम बनाया है।
उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर किए अपने पोस्ट में कहा, डॉ. बी.आर आंबेडकर को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। महापरिनिर्वाण दिवस पर अंबेडकर – हमारे संविधान के निर्माता, एक राजनेता और दूरदर्शी हैं, जिन्होंने सामाजिक असमानताओं के खिलाफ अथक संघर्ष किया। न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के प्रति उनकी गहन प्रतिबद्धता सभी को प्रेरित करती रहती है। आइए हम उनके आदर्शों को बनाए रखने और अधिक समावेशी भारत की दिशा में लगातार काम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी बाबा साहेब अंबेडकर को याद करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा, राष्ट्रनिर्माता, सामाजिक न्याय के प्रहरी और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। समतामूलक समाज का उनका स्वप्न, उनकी अमूल्य शिक्षाएं और संविधान निर्माण में अतुलनीय योगदान हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
कांग्रेस पार्टी ने भी बाबा साहेब अंबेडकर को याद किया। उन्होंने पार्टी की तरफ से अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, भारतीय संविधान के जनक और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर कोटि: नमन। उनके आदर्श और विचार युगों-युगों तक हमें न्याय की राह पर आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बाबा साहेब अंबेडकर को एक्स हैंडल पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, महापरिनिर्वाण दिवस पर बाबा साहब अंबेडकर को याद करते हुए, उनके विचार और दृष्टिकोण भारत को प्रेरित करते रहते हैं। राष्ट्र उनके अपार योगदान के लिए उनका ऋणी रहेगा। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।
एनएचएआई 1,000 करोड़ रुपये मूल्य के ग्रीन बांड जारी करेगा
ग्रीन बॉन्ड की आय से सौर प्रकाश व्यवस्था, वर्षा जल संचयन और वन्यजीवो के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास सहित पर्यावरण अनुकूल पहलों को वित्तपोषित किया जाएगा |
नई दिल्ली | पर्यावरण स्थिरता और हरित राजमार्गों के विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पूर्ण स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) 'डीएमई डेवलपमेंट लिमिटेड' (डीएमईडीएल) दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना पर पर्यावरण अनुकूल उपायों के कार्यान्वयन के लिए धन जुटाने हेतु ग्रीन बॉन्ड जारी करेगा। बंद बोली प्रणाली के तहत 500 करोड़ रुपये के बेस इश्यू साइज के साथ यह इश्यू कुल 1,000 करोड़ रुपये तक होगा। 500 करोड़ रुपये तक के ओवरसब्सक्रिप्शन को बनाए रखने के लिए ग्रीन-शू विकल्प होगा। सड़क और राजमार्ग क्षेत्र में अपनी तरह का पहला ग्रीन बॉन्ड इश्यू दिसंबर 2024 के दूसरे सप्ताह में लॉन्च होने की उम्मीद है और इसे भारत सरकार के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क, अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल और सेबी दिशानिर्देशों के सख्त अनुपालन के साथ पूरा किया जाएगा।
'ग्रीन बांड' से प्राप्त राशि का उपयोग सड़कों पर वृक्षारोपण, मध्य वृक्षारोपण, पशुओं के लिए अंडरपास का निर्माण, प्राकृतिक वर्षा जल निकासी, नवीकरणीय ऊर्जा (सौर) पर आधारित स्ट्रीट लाइट, अपशिष्ट पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग तथा वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियों पर खर्च के लिए किया जाएगा।
एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने इस विषय में कहा, "यह पहल हरित राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के हमारे दृष्टिकोण का एक हिस्सा है और पर्यावरण स्थिरता के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दोहराती है। ग्रीन बॉन्ड विशेष रूप से सड़क और राजमार्ग क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने में मदद करेंगे और ऊर्जा की खपत को कम करके और पर्यावरण पर वाहनों के उत्सर्जन के प्रभाव को कम करके दीर्घकालिक लागत बचत की सुविधा प्रदान करेंगे।"
यह इश्यू उधार की कुल लागत के संदर्भ में डीएमईडीएल के वित्तीय प्रदर्शन को बढ़ाने में मदद करेगा और 'पर्यावरण, सामाजिक और शासन' केंद्रित निवेशकों को आकर्षित करके निवेशक आधार में विविधता लाएगा। डीएमईडीएल ने केयर एज एनालिटिक्स को थर्ड-पार्टी समीक्षक (टीपीआर) के रूप में नियुक्त किया है, जिन्होंने डीएमईडीएल की हरित गतिविधियों की पहचान कर उन्हें प्रमाणित किया है।
अगस्त 2020 में निगमित, 'डीएमई डेवलपमेंट लिमिटेड' दिल्ली-मुंबई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिए एनएचएआई का पूर्ण स्वामित्व वाला विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) है और इसे क्रिसिल, केयर और इंडिया रेटिंग से एएए रेटिंग मिली है। डीएमईडीएल का लक्ष्य ऋण और बॉन्ड के माध्यम से बैंकों और वित्तीय बाजार से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाना है और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के कार्यान्वयन के लिए अब तक लगभग 42,000 करोड़ रुपये सफलतापूर्वक जुटाए हैं।
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
नई दिल्ली | पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) दुनिया की सबसे बड़ी घरेलू रूफटॉप सौर योजना भारत के सौर ऊर्जा परिदृश्य को बदल रही है। मार्च 2025 तक इंस्टालेशन की संख्या 10 लाख को पार कर अक्टूबर 2025 तक 20 लाख, मार्च 2026 तक 40 लाख तथा मार्च 2027 तक एक करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। 15 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस अभूतपूर्व पहल का उद्देश्य छत पर सौर पैनल लगाने की सुविधा देकर घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है।
यह योजना नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक किफायती और सुलभ बनाने के लिए घरों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान करती है। पीएमएसजीएमबीवाई के केवल 9 महीनों के भीतर 6.3 लाख इंस्टॉलेशन किए गए हैं जो औसतन 70,000 प्रति माह है। एक करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाने के लक्ष्य के साथ इस कार्यक्रम से सरकार को बिजली की लागत में सालाना 75,000 करोड़ रुपये की बचत होने की भी उम्मीद है। यह परिवर्तनकारी पहल लाखों लोगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए सशक्त बनाती है, जिससे सतत विकास और ऊर्जा नवाचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होती है।
घरों के लिए मुफ्त बिजली: यह योजना घरों की छतों पर सब्सिडी वाले सौर पैनल लगाने के माध्यम से मुफ्त बिजली प्रदान करती है, जिससे उनकी ऊर्जा लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
सरकार के लिए बिजली की लागत में कमी: सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने से इस योजना के द्वारा सरकार को बिजली की लागत में सालाना 75,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता उपयोग: यह योजना अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने को प्रोत्साहित करती है, जिससे भारत में अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा मिश्रण में योगदान मिलता है।
कार्बन उत्सर्जन में कमी: इस योजना के तहत सौर ऊर्जा में परिवर्तन से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे भारत की कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।
सब्सिडी का विवरण
सब्सिडी आवेदन और विक्रेता चयन: राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से परिवार सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं, जहां वे घर की छत पर सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन करने के लिए उपयुक्त विक्रेता का चयन भी कर सकते हैं। राष्ट्रीय पोर्टल उपयुक्त सिस्टम आकार, लाभ कैलकुलेटर, विक्रेता रेटिंग और अन्य प्रासंगिक विवरणों पर जानकारी प्रदान करके निर्णय लेने में सहायता करेगा।
आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए
आवेदक के पास एक ऐसा घर होना चाहिए जिसकी छत सौर पैनल लगाने के लिए उपयुक्त हो
आवेदक के पास बिजली का कनेक्शन होना चाहिए
आवेदक ने सौर पैनलों के लिए किसी अन्य सब्सिडी का लाभ प्राप्त न किया हो
आवेदन प्रक्रिया में नौ विशिष्ट चरणों का पालन करना शामिल है ताकि सौर पैनल स्थापना का सुचारू और कुशल प्रस्तुतीकरण और अनुमोदन सुनिश्चित किया जा सके।
3 दिसंबर, 2024 तक राष्ट्रीय पोर्टल पर कुल 1.45 करोड़ पंजीकरण और 26.38 लाख आवेदन दर्ज किए गए हैं।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना से परिवारों और पूरे देश के लिए दूरगामी परिणाम मिलने की उम्मीद है:
घरेलू बचत और आय सृजन: परिवारों को अपने बिजली बिलों में महत्वपूर्ण बचत का लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त उन्हें अपने रूफटॉप सोलर सिस्टम से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर भी मिलेगा। उदाहरण के लिए, 3 किलोवाट की प्रणाली औसतन प्रति माह 300 से अधिक यूनिट बिजली उत्पन्न कर सकती है, जो ऊर्जा और संभावित आय का एक विश्वसनीय स्रोत प्रदान करती है।
सौर क्षमता का विस्तार: इस योजना से आवासीय क्षेत्र में छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के माध्यम से 30 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ने का अनुमान है, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अंत में, प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना लाखों घरों को सौर ऊर्जा से सशक्त बनाकर भारत के ऊर्जा परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से नया आकार देने के लिए तैयार है। मार्च 2025 तक 10 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन का अनुमान हैलऔर मार्च 2027 तक एक करोड़ के लक्ष्य तक पहुँचने के साथलयह योजना व्यापक लाभ पहुँचाने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रही है। पर्याप्त सब्सिडी, सुलभ वित्तपोषण विकल्पों और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करके यह पहल न केवल घरों को मुफ्त बिजली प्रदान करेगी, बल्कि सरकार के लिए महत्वपूर्ण बचत, कम कार्बन उत्सर्जन और रोजगार सृजन में भी योगदान देगी। आदर्श सौर ग्राम पहल ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने में सहायता करती है, जो सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम भारत को हरित और अधिक ऊर्जा कुशल भविष्य की ओर अग्रसर करता है तथा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करता है।
दिल्ली में ओमनीबस तकनीकी विनियमन के संबंध में संयुक्त बैठक आयोजित की गई
नई दिल्ली | भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) में अतिरिक्त सचिव डॉ. हनीफ कुरैशी के नेतृत्व में स्वीडन के अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग एवं विदेश व्यापार मंत्री के राज्य सचिव हाकन जेवरेल और भारत में स्वीडन के राजदूत जान थेस्लेफ के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। चर्चा मशीनरी और विद्युत उपकरण सुरक्षा-2024 के लिए ओमनीबस तकनीकी विनियमन (ओटीआर) पर केंद्रित थी- भारत में एक अग्रणी ढांचा जिसका उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र की क्षमताओं को बढ़ाना और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना है।
हाकन जेवरेल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विनियमन तकनीकी प्रगति की रीढ़ हैं, उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में स्वीडन के नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में मानकीकृत विनियमन बनाए रखने और ऐसी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में भारत का समर्थन करने के लिए स्वीडन की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
ओमनीबस तकनीकी विनियमन (OTR) के बारे में: भारत एक महत्वपूर्ण क्षण पर है, जहां विनिर्माण क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के सरकार के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए अपनी जनसांख्यिकीय शक्तियों और आर्थिक आकांक्षाओं का लाभ उठाया जा रहा है। 28 अगस्त 2024 को अधिसूचित मशीनरी और विद्युत उपकरण सुरक्षा के लिए ओमनीबस तकनीकी विनियमन, इस दृष्टिकोण का उदाहरण है। यह विनियमन 28 अगस्त 2025 को प्रभावी होगा और इसमें 90 सुरक्षा मानकों को निर्दिष्ट करते हुए 444 से अधिक उत्पाद शामिल होंगे।
OTR की मुख्य विशेषताएँ जैसे बढ़ी हुई सुरक्षा और गुणवत्ता: यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े मानक स्थापित करता है कि उत्पाद सुरक्षित, विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल हों, जिससे उपभोक्ता का विश्वास बढ़े। घटिया आयात को हतोत्साहित करना: निम्न-गुणवत्ता वाली मशीनरी के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए सख्त सुरक्षा और प्रमाणन आवश्यकताओं को लागू करता है। ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना: ऊर्जा-कुशल मशीनों के निर्माण और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए परीक्षण बुनियादी ढाँचे के विकास को प्रोत्साहित करता है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) OTR को लागू करने, अनुपालन और कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। एमएचआई ने विभिन्न स्थानों पर बीआईएस के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए हैं और मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू की है।
समुद्रों में बिछाए गए दूरसंचार केबलों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार निकाय का गठन किया गया
सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल 40-सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार निकाय में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे |
सलाहकार निकाय अंतर्राष्ट्रीय नीतियों, बुनियादी ढांचे और समुद्री केबलों की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए सर्वोत्तम विधियों पर परामर्श करने के लिए वर्ष में दो बार बैठक करेगा |
आनलॉइन उद्घाटन बैठक 12 दिसंबर 2024 के लिए निर्धारित है, इसके बाद फरवरी 2025 में अबुजा, नाइजीरिया में समुद्री केबल प्रतिरोधक क्षमता शिखर सम्मेलन होगा |
नई दिल्ली | समुद्रों में बिछाए गए दूरसंचार केबल वैश्विक संचार की रीढ़ हैं, जो इंटरनेट संबंधी 99 प्रतिशत गतिविधियों को सक्षम बनाते हैं और वाणिज्य, वित्त, सरकारी संचालन, डिजिटल स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में मदद करते हैं। हालाँकि, इन केबल के क्षतिग्रस्त होने का खतरा अधिक हैं और हर साल वैश्विक स्तर पर इनमें अनुमानित 150-200 (फाल्ट) कमियां देखी गई है। मछली पकड़ने, लंगर डालने, प्राकृतिक खतरों और उपकरणों की विफलता सहित कई कारकों से इन्हें काफी नुकसान होता है।
बढ़ती चुनौतियों से निपटने और इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की प्रतिरोधक क्षमता लगातार सुनिश्चित करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और अंतर्राष्ट्रीय केबल संरक्षण समिति (आईसीपीसी) ने संयुक्त रूप से समुद्री केबल प्रतिरोधक क्षमता के लिए अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार निकाय की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य समुद्री केबलों की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है, जो वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक हैं।
नवगठित अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार निकाय केबल की प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने, नुकसान के जोखिम को कम करने और इन महत्वपूर्ण प्रणालियों की त्वरित मरम्मत और इन्हें बिछाने को सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों और उद्योगों में सर्वोत्तम विधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा। सलाहकार निकाय बढ़ते यातायात, पुराने बुनियादी ढांचे और समुद्री केबलों के लिए बढ़ते पर्यावरणीय खतरों से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने के लिए नीतिगत मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा।
विश्व के 40 सदस्य देशों से मिलकर बने इस निकाय में मंत्री, विनियामक प्राधिकरणों के प्रमुख और दूरसंचार के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल हैं जो एक विविध वैश्विक परिप्रेक्ष्य को दर्शाता है। इस निकाय के सदस्यों में छोटे द्वीप राष्ट्रों से लेकर बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल है। निकाय का सामूहिक अनुभव उन लोगों की आजीविका को पूरा करने में मदद करेगा जो इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को स्थापित करने, रखरखाव और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।
टाटा कम्युनिकेशंस, जिसके पास मुंबई, चेन्नई और कोचीन में पांच केबल लैंडिंग स्टेशन हैं।
ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज (पूर्व में रिलायंस ग्लोबलकॉम), जिसके मुंबई और त्रिवेंद्रम में स्टेशन हैं।
रिलायंस जियो, चेन्नई और मुंबई में केबल लैंडिंग स्टेशन और नई परियोजनाएं चल रही हैं।
भारती एयरटेल, चेन्नई और मुंबई में स्टेशन संचालित कर रही है, तथा 2अफ्रीकी/ईएमआईसी-1 और एसईए-एमई डब्ल्यूई 6 केबल भी बिछा रही है।
सिफी टेक्नोलॉजीज और बीएसएनएल दोनों विभिन्न प्रकार के केबल लैंडिंग स्टेशनों के संचालन में शामिल हैं।
वोडाफोन और आईओएक्स की, आईओएक्स पुडुचेरी में एक नया केबल लैंडिंग स्टेशन बनाने की योजना है।
आईसीपीसी के बारे में
1958 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय केबल सुरक्षा समिति (आईसीपीसी) समुद्री केबल उद्योग में शामिल देशों और वाणिज्यिक संस्थाओं के लिए एक वैश्विक मंच है। इसका प्राथमिक उद्देश्य तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करके समुद्री केबल की सुरक्षा को बढ़ाना है।
डिजाइन से लेकर इन्हें बिछाने तक, एक समुद्री केबल को चालू होने में दो साल से ज़्यादा का समय लग सकता है। यह समयसीमा कई कारकों से प्रभावित होती है, जिसमें धनराशि आबंटन, अनुमति और विनियामक आवश्यकताओं को पूरा करना और पर्यावरण तथा परिचालन आवश्यकताओं से जुड़े विषय शामिल है।
वर्ष 2023 में, दुनिया भर में 200 से ज़्यादा केबल केबल की मरम्मत की रिपोर्ट की गई, जो इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की कमज़ोरियों को उजागर करती है। समुद्री केबल प्रणाली में किसी भी गड़बड़ी के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जिसमें आर्थिक अस्थिरता, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ और लाखों लोगों के लिए इंटरनेट पहुंच संबंधी व्यवधान शामिल हैं।
सम्मानित विभूतियां उत्कृष्ट कार्यों की ध्वज वाहक : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सम्मानित प्रतिभाएं उत्कृष्ट कार्यों की ध्वज वाहक होती है। उनके उत्कृष्ट कार्य समाज को चुनौतियों का सामना करने का विश्वास और विज़न प्रदान करते है। भावी पीढ़ियां उनके पथ का अनुसरण कर समाज को गतिशील और जीवंत बनाती है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करना वास्तव में समाज को गौरवान्वित करने, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्य है। भावी प्रतिभाओं के पथ प्रदर्शन की नैतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से समाज की जिम्मेदारी है।
राज्यपाल पटेल, प्रेस क्लब भोपाल द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश रत्न अवॉर्ड समारोह को रवीन्द्र भवन में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। अतिथियों का तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री पटेल का प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री नवीन आनंद जोशी ने श्रीफल, स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि हम सब देख समझ रहें है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी लोकतांत्रिक संस्था, आर्थिक शक्ति, वैज्ञानिक कौशल, संस्कृति और विविधता का दुनिया ने लोहा माना है, लेकिन मजबूत राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में आज भी हमारे समक्ष आतंकवाद, विघटनकारी शक्तियों की चुनौतियां है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उच्च मानकों के साथ समाज के वंचित वर्गों के लिए न्याय के प्रयासों और विकास के अवसरों को और अधिक विस्तारित करना भी जरूरी है। उन्होंने अपेक्षा की है कि समावेशी विकास के लिए तुलनात्मक रूप से वंचित और पिछड़े क्षेत्रों के समुदायों का हाथ पकड़ कर समाज के मुख्य धारा में शामिल कराने के प्रयासों का दिशा दर्शन सम्मानित विशिष्ट प्रतिभाएं करें। समारोह समाज में सकारात्मकता को बढ़ाने और उत्कृष्ट कार्यों के लिए समाज विशेषकर युवाओं को प्रेरित प्रोत्साहित करने में सफल होने की मंगल कामना की है।
राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक सरोकारों में मीडिया की सहभागिता से वह बहुत अधिक प्रसन्न है, जिन प्रतिभाओं के कार्यों से वे अभिभूत है। उन्हें ऐसी प्रतिभाओं को सम्मानित करने का अवसर मिला है। वह स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे है। उन्होंने सामाजिक सरोकारों में मीडिया की सहभागिता की प्रशंसा की। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा यूरोप की यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रदेश में बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश आने की जानकारी के संदर्भ में कार्यक्रम के दौरान देश भर के विद्वान और विचारकों की मध्यप्रदेश के विकास के संबंध में बौद्धिक और वैचारिक विचारों को साझा किए जाने को प्रदेश की प्रगति और समृद्धि के प्रयासों की गति को और अधिक बढ़ाने में सहयोगी होने की पहल बताया।
राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल विमल वर्मा, पद्मश्री नृत्य गुरु डॉ. पुरू दाधीच, प्रसिद्ध टीवी एंकर श्री सुमित अवस्थी, वस्त्र उद्योग उद्यमी गौतम कोठारी, फिल्म और नाटक के अभिनेता शरद सक्सेना, शिक्षाविद् डॉ. एस.पी. गौतम, एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही ज्योति रात्रे, रंगमंच कलाकार वरिष्ठ अभिनेता राजीव वर्मा और प्रसिद्ध साहित्यकार लेखक डॉ. रमेश निर्मल को मध्यप्रदेश रत्न अवॉर्ड प्रदान किए।
राज्यपाल ने मध्यप्रदेश प्रतिभा अवॉर्ड से भारतीय सेना के मेजर अनिकेत चतुर्वेदी, महर्षि विश्वविद्यालय के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश वर्मा, ब्यूरो चीफ एएनआई न्यूज एजेंसी श्री संदीप कुमार सिंह, समाज सेवी शिक्षाविद् जय नारायण चौकसे, कार्यकारी वाइस चेयरमैन आईसेक्ट समूह सिद्धार्थ चतुर्वेदी, उद्योगपति रोहित गोविंद सोमानी, समाज सेवी शिक्षाविद् डॉ. डेविश जैन, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट दैनिक समाचार पत्र, पत्रिका दीपेश अवस्थी, युवा प्रतिभावान लेखक दिव्यांश व्यास और सुश्री मेघा दीक्षित को सम्मानित किया। आभार प्रदर्शन प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा ने किया।
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट पर नोट मिलने से हंगामा
नईदिल्ली। संसद में एक बार फिर नोटकांड सामने आया है। राज्यसभा में कांग्रेस की सीट पर नोटों की गड्डी मिली है। नोट मिलने पर सदन में जोरदार हंगामा मच गया है, भाजपा सांसदों ने जोर जोर से इस मामले की जांच करने की मांग की है। उधर, राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने खुद मामले को बहुत गंभीर बताते हुए कहा कि हम इसकी जांच करेंगे।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, “मैं सदस्यों को सूचित करना चाहता हूं कि कल सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद नियमित जांच के दौरान, सुरक्षा अधिकारियों ने सीट संख्या 222 से नोटों की एक गड्डी बरामद की, जो वर्तमान में तेलंगाना से निर्वाचित अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है। मामला मेरे संज्ञान में लाया गया और मैंने सुनिश्चित किया कि जांच हो।”
कांग्रेस सांसद अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अभी तक ऐसा कभी नहीं सुना। उन्होंने कहा कि मैं जब भी राज्यसभा जाता हूं तो 500 रुपये का एक नोट साथ लेकर जाता हूं। मैंने पहली बार इस बारे में सुना। मैं दोपहर में 12 बजकर 57 मिनट पर सदन पहुंचा और फिर 1 बजे उठकर 1 बजकर 30 मिनट तक कैंटीन में बैठा रहा और फिर मैं संसद से चला गया।
मामले पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमित प्रोटोकॉल के अनुसार, सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद एंटी-सैबोटेज टीम ने सीटों की जांच की। उस प्रक्रिया के दौरान, नोट पाया गया और सीट नंबरों को डिकोड किया गया और सदस्यों ने उस दिन हस्ताक्षर भी किए। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह घटना गंभीर प्रकृति की है। इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है।
आयकर विभाग ने लॉन्च किया पैन कार्ड 2.0, जानें इसके लाभ और प्रक्रिया
डेस्क। आयकर विभाग ने पैन कार्ड का नया वर्जन लॉन्च कर दिया है, जिसे पैन कार्ड 2.0 कहा जा रहा है। यह पुराने पैन कार्ड का अपडेटेड वर्जन है, जिसे 1972 से लागू किया गया था। नए पैन कार्ड में सिक्योरिटी फीचर्स और तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिसमें एक QR कोड जोड़ा गया है। इसे बनवाना अब अनिवार्य हो गया है। इस नए पैन कार्ड को फ्री में ऑनलाइन अपडेट किया जा सकता है, और अगर आप चाहें तो 50 रुपये खर्च करके इसकी फिजिकल कॉपी भी प्रिंट करवा सकते हैं।
पैन 2.0 में जो सबसे बड़ा बदलाव है, वह है QR कोड का होना। इस कोड में पैन कार्ड होल्डर का नाम और पैन नंबर शामिल होगा, जिसे स्कैन करके वेरिफिकेशन को आसान बनाया जाएगा। इस अपडेटेड पैन कार्ड को एड्रेस के प्रमाण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अब अनिवार्य होगा, जिससे टैक्सपेयर्स की पहचान सही ढंग से की जा सकेगी। इससे इनकम टैक्स चोरी और पैन कार्ड फ्रॉड को भी रोका जा सकेगा।
अगर आपके पास पहले से पैन कार्ड है, तो आपको नया पैन कार्ड बनाने के लिए फिर से आवेदन करने की जरूरत नहीं है। आपको बस अपना पैन और आधार कार्ड लिंक करना होगा और ऑनलाइन एड्रेस अपडेट करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से मुफ्त होगी और आप इसे आयकर विभाग की वेबसाइट (incometaxindiaefilling.gov.in) पर जाकर कर सकते हैं। इसके अलावा, SMS के जरिए भी पैन कार्ड लिंकिंग की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए, आपको अपने पैन और आधार नंबर के साथ एक मैसेज भेजना होगा: "UIDPAN <स्पेस> <आधार नंबर>" 56161 पर।
अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है, तो आपको आयकर विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नए पैन कार्ड के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से मुफ्त है और नए वर्जन का पैन कार्ड आपको अलॉट किया जाएगा। पैन कार्ड मिलने के बाद, आप इसे UTIITSL और NSDL की वेबसाइट से PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं और अपने मोबाइल या कंप्यूटर में सेव कर सकते हैं।
अगर आप नया पैन कार्ड नहीं बनवाते हैं, तो कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पुराने पैन कार्ड को कभी भी बंद किया जा सकता है, जिससे आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, बैंकिंग ट्रांजेक्शंस, लोन, क्रेडिट कार्ड अप्लाई करने में भी कठिनाई हो सकती है। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का फायदा उठाने में भी समस्या हो सकती है।
भारतीय सांकेतिक भाषा के लिए पीएम-ई-विद्या डीटीएच चैनल का शुभारंभ 6 दिसंबर को
नईदिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 6 दिसंबर को नई दिल्ली में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) के लिए पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल नंबर 31 का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में श्रवण-बाधित (एचआई) बच्चे, उपलब्धियां प्राप्त करने वाले श्रवण-बाधित व्यक्ति, विशेष शिक्षक, आईएसएल प्रमाणित दुभाषिए और श्रवण- बाधित समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करने वाले संगठन भाग लेंगे।
यह महत्वपूर्ण पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों का समर्थन करती है, जिसमें अधिक समावेशी शैक्षिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। एनईपी के पैरा 4.22 में कहा गया है कि 'भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) को पूरे देश में मानकीकृत किया जाएगा, और श्रवण-बाधित छात्रों द्वारा उपयोग के लिए राष्ट्रीय एवं विभिन्न राज्यों के पाठ्यक्रमों की विषय-सामग्री तैयार की जाएगी। स्थानीय सांकेतिक भाषाओं का सम्मान किया जाएगा और जहां संभव और प्रासंगिक होगा, वहां पढ़ाया भी जाएगा।'
भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक विशेष पीएम-ई-विद्या चैनल की परिकल्पना आईएसएल को एक भाषा के साथ-साथ एक स्कूली विषय के रूप में बढ़ावा देने के लिए की गई है, ताकि बड़ी आबादी को भाषा सीखने की सुविधा मिल सके। यह चैनल स्कूली बच्चों (केंद्रीय और राज्यों के पाठ्यक्रम), शिक्षकों, शिक्षक प्रशिक्षकों और अन्य हितधारकों के लिए करियर संबंधी मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य, कक्षा-वार पाठ्यक्रम सामग्री, संवाद कौशल के क्षेत्र में शिक्षण सामग्री का प्रसार करेगा। इससे हिन्दी, अंग्रेजी आदि जैसी मौखिक भाषाओं की तरह सांकेतिक भाषा को भाषा के एक विषय के रूप में बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने नौसेना दिवस पर : भारतीय नौसेना के बहादुर कर्मियों को बधाई दी
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौसेना दिवस पर भारतीय नौसेना के बहादुर कार्मिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा है कि यह हमारे राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती है।
"नौसेना दिवस पर हम भारतीय नौसेना के उन वीर जवानों को सलाम करते हैं जो अद्वितीय साहस और समर्पण के साथ हमारे समुद्रों की रक्षा करते हैं। उनकी प्रतिबद्धता हमारे राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती है। हमें भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास पर भी बहुत गर्व है।"
भाजपा विधायक दल की बैठक में फडणवीस चुने गए नेता : कल शपथ ग्रहण समारोह
महाराष्ट्र के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे देवेंद्र फडणवीस।
डेस्क | भाजपा कोर कमेटी की बैठक में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग गई है। इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में पार्टी नेता चंद्रकांत पाटिल और सुधीर मुनगांटीवार ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। इस पर सभी विधायकों ने उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता चुना।
केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में महाराष्ट्र विधानसभा भवन में विधायक दल की बैठक हुई। पांच दिसंबर को शाम पांच बजे दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में शपथ ग्रहण समारोह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
विधायक दल की बैठक केंद्रीय पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की मौजूदगी में हुई। बैठक के बाद विजय रूपाणी ने कहा कि सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से देंवेद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लगाई है। इसके बाद उन्होंने फडणवीस को विधायक दल का नेता घोषित किया। आशीष शेलार महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य सचेतक होंगे। उधर, नागपुर में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के आवास के बाहर जश्न का माहौल है।
कोर कमेटी की बैठक में महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पार्टी को जीत मिली है। सभी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। जनता ने खुलकर वोट दिया। उधर, नेता चुने जाने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महायुति को जनता ने ऐतिहासिक जनादेश दिया है। हम महाराष्ट्र को आगे ले जाने को प्रतिबद्ध हैं। पीएम मोदी ने मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है।
गुरुवार को देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पहली बार 2014 में देवेंद्र मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने पांच साल अपना कार्यकाल पूरा किया था। हालांकि 2019 में वे महज 80 घंटे ही सीएम की कुर्सी पर रहे। हालांकि बाद में फडणवीस एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम की भूमिका भी निभा चुके हैं।
पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर : अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के बाहर जानलेवा हमला
डेस्क | शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को बुधवार सुबह पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के बाहर 'सेवादार' की ड्यूटी करते समय एक शख्स ने गोली मार दी। गोली का दीवार पर लगने से व्हीलचेयर पर बैठे सुखबीर सिंह बादल बाल बाल बच गये। आखिर किस व्यक्ति ने सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाई और उसने किस मकसद से यह काम किया | फायरिंग करने वाले शख्स का नाम नारायण सिंह चौरा है जिसने गोली चलाई, जिससे हड़कंप मच गया और तुरंत ही स्वर्ण मंदिर के बाहर खड़े लोगों ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नारायण सिंह चौरा एक खालिस्तानी पूर्व आतंकवादी है, जिस पर पहले भी कई तरह के मामले दर्ज हुए हैं और वह भूमिगत रहा है। चौरा, कुछ वर्षों तक पंथिक नेता के रूप में सक्रिय था, ऐसा कहा जाता है कि वह डेरा बाबा नानक क्षेत्र से हैं। मंगलवार को वह सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर सुखबीर बादल के पास घूमता भी दिखाई दिया था।
नारायण सिंह चौरा पुलिस की गिरफ्त में है और पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। उसने सुखबीर बादल पर हमला क्यों किया, इसका अभी कारण पता नहीं चल स्का है | पुलिस पूछताछ के बाद ही सारी सच्चाई सामने आएगी।
दिव्यांगजनों की सेवा और स्वाभिमान का अमृत दशक : प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी
नई दिल्ली | 3 दिसंबर महत्वपूर्ण दिन है। पूरा विश्व इस दिन को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के रूप में मनाता है। आज का दिन दिव्यांगजनों के साहस, आत्मबल और उपलब्धियों को नमन करने का विशेष अवसर होता है।
भारत के लिए ये अवसर एक पवित्र दिन जैसा है। दिव्यांगजनों का सम्मान भारत की वैचारिकी में निहित है। हमारे शास्त्रों और लोक ग्रंथों में दिव्यांग साथियों के लिए सम्मान का भाव देखने को मिलता है। रामायण में एक श्लोक है-
उत्साहो बलवानार्य, नास्त्युत्साहात्परं बलम्।
सोत्साहस्यास्ति लोकेऽस्मिन्, न किञ्चिदपि दुर्लभम्।
श्लोक का मूल यही है कि जिस व्यक्ति के मन में उत्साह है, उसके लिए विश्व में कुछ भी असंभव नहीं है।
आज भारत में हमारे दिव्यांगजन इसी उत्साह से देश के सम्मान और स्वाभिमान की ऊर्जा बन रहे हैं।
इस वर्ष ये दिन और भी विशेष है। इसी साल भारत के संविधान के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। भारत का संविधान हमें समानता और अंत्योदय के लिए काम करने की प्रेरणा देता है।
संविधान की इसी प्रेरणा को लेकर बीते 10 वर्षों में हमने दिव्यांगजनों की उन्नति की मजबूत नींव रखी है। इन वर्षों में देश में दिव्यांगजनों के लिए अनेक नीतियां बनी हैं, अनेक निर्णय़ हुए हैं।
ये निर्णय दिखाते है कि हमारी सरकार सर्वस्पर्शी है, संवेदनशील है और सर्वविकासकारी है। इसी क्रम में आज का दिन दिव्यांग भाई-बहनों के प्रति हमारे इसी समर्पण भाव को फिर से दोहराने का दिन भी बना है।
मैं जब से सार्वजनिक जीवन में हूं, मैंने हर मौके पर दिव्यांगजनों का जीवन आसान बनाने के लिए प्रयास किए हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने इस सेवा को राष्ट्र का संकल्प बनाया। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने सबसे पहले ‘विक्लांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द को प्रचलित करने का फैसला लिया।
ये सिर्फ शब्द का परिवर्तन नहीं था, इसने समाज में दिव्यांगजनों की गरिमा भी बढ़ाई और उनके योगदान को भी बड़ी स्वीकृति दी। इस निर्णय ने ये संदेश दिया कि सरकार एक ऐसा समावेशी वातावरण चाहती है, जहां किसी व्यक्ति के सामने उसकी शारीरिक चुनौतियां दीवार ना बनें औऱ उसे उसकी प्रतिभा के अनुसार पूरे सम्मान के साथ राष्ट्र निर्माण का अवसर मिले। दिव्यांग भाई-बहनों ने विभिन्न अवसरों पर मुझे इस निर्णय के लिए अपना आशीर्वाद दिया। ये आशीर्वाद ही, दिव्यांगजन के कल्याण के लिए मेरी सबसे बड़ी शक्ति बना।
हर वर्ष देश भर में हम दिव्यांग दिवस पर अनेक कार्यक्रम करते हैं। मुझे आज भी याद है, 9 साल पहले हमने आज के ही दिन सुगम्य भारत अभियान का शुभारंभ किया था। 9 सालों में इस अभियान ने जिस तरह से दिव्यांगजनों को सशक्त किया, उससे मुझे बड़ा संतोष मिला है।
140 करोड़ देशवासियों की संकल्प-शक्ति से ‘सुगम्य भारत’ ने ना सिर्फ दिव्यांगजनों के मार्ग से कई बाधाएं हटाई, बल्कि उन्हें सम्मान और समृद्धि का जीवन भी दिया।
पहले की सरकारों के समय जो नीतियां थीं…उनकी वजह से दिव्यांगजन सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के अवसरों से पीछे रह जाते हैं। हमने वो स्थितियां बदलीं। आरक्षण की व्यवस्था को नया रूप मिला। 10 वर्षों में दिव्यांगजन के कल्याण के लिए खर्च होने वाली राशि को भी तीन गुना किया गया। इन निर्णयों ने दिव्यांगजनों के लिए अवसरों और उन्नतियों के नए रास्ते बनाए। आज हमारे दिव्यांग साथी, भारत के निर्माण के समर्पित साथी बनकर हमें गौरवान्वित कर रहे हैं।
मैंने स्वयं ये महसूस किया है कि भारत के युवा दिव्यांग साथियों में कितनी अपार संभावनाएं हैं। पैरालंपिक में हमारे खिलाड़ियों ने देश को जो सम्मान दिलाया है, वो इसी ऊर्जा का प्रतीक है। ये ऊर्जा राष्ट्र ऊर्जा बने, इसके लिए हमने दिव्यांग साथियों को स्किल से जोड़ा है, ताकि उनकी ऊर्जा राष्ट्र की प्रगति की सहायक बन सके। ये प्रशिक्षण सिर्फ सरकारी कार्यक्रम भर नहीं है। इन प्रशिक्षणों ने दिव्यांग साथियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्हें रोजगार तलाशने की आत्म शक्ति दी है।
मेरे दिव्यांग भाई-बहनों का जीवन सरल, सहज और स्वाभिमानी हो, सरकार का मूल सिद्धांत यही है। हमने Persons with Disabilities Act को भी इसी भाव से लागू किया। इस ऐतिहासिक कानून में Disability के Definition की कैटेगरी को भी 7 से बढ़ाकर 21 किया गया। पहली बार हमारे एसिड अटैक सर्वाइवर्स भी इसमें शामिल किए गए। आज ये कानून दिव्यांगजनों के सशक्त जीवन का माध्यम बन रहा है।
इन कानूनों ने दिव्यांगजनों के प्रति समाज की धारणा बदली है। आज हमारे दिव्यांग साथी भी विकसित भारत के निर्माण के लिए अपनी संपूर्ण शक्ति के साथ काम कर रहे हैं।
भारत का दर्शन हमें यही सिखाता है कि समाज के हर व्यक्ति में एक विशेष प्रतिभा जरूर है। हमें उसे बस सामने लाने की जरूरत है। मैंने हमेशा अपने दिव्यांग साथियों की उस अद्भुत प्रतिभा पर विश्वास किया है। और मैं पूरे गर्व से कहता हूं, कि हमारे दिव्यांग भाई-बहनों ने एक दशक में मेरे इस विश्वास को और प्रगाढ़ किया है। मुझे यह देखकर भी गर्व होता है कि उनकी उपलब्धियां कैसे हमारे समाज के संकल्पों को नया आकार दे रही हैं।
आज जब पैरालंपिक का मेडल सीने पर लगाकर, मेरे देश के खिलाड़ी मेरे घर पर पधारते हैं, तो मेरा मन गौरव से भर जाता है। हर बार जब मन की बात में मैं अपने दिव्यांग भाई-बहनों की प्रेरक कहानियों को आपके साथ साझा करता हूं, तो मेरा हृदय गर्व से भर जाता है। शिक्षा हो, खेल या फिर स्टार्टअप, वे सभी बाधाओं को तोड़कर नई ऊंचाइयां छू रहे हैं और देश के विकास में भागीदार बन रहे हैं।
मैं पूरे विश्वास से कहता हूं कि 2047 में जब हम स्वतंत्रता का 100वां उत्सव मनाएंगे, तो हमारे दिव्यांग साथी पूरे विश्व का प्रेरणा पुंज बने दिखाई देंगे। आज हमें इसी लक्ष्य के लिए संकल्पित होना है।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहां कोई भी सपना और लक्ष्य असंभव ना हो। तभी जाकर हम सही मायने में एक समावेशी और विकसित भारत का निर्माण कर पाएंगे।
और निश्चित तौर पर मैं इसमें अपने दिव्यांग भाई-बहनों की बहुत बड़ी भूमिका देखता हूं। पुन: सभी दिव्यांग साथियों को आज के दिन की शुभकामनाएं।
जीवन के प्रत्येक क्षण का उपयोग मानव सेवा में हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य की मृत्यु अनिवार्य है। आने-जाने के इस क्रम में महत्वपूर्ण यह है कि जीवन के प्रत्येक क्षण का उपयोग मानव सेवा के लिए किया जाए। यह मनुष्य का सौभाग्य है कि इस धरती पर आदिकाल से परमात्मा की लीला देखने को मिलती रही है। हमारे 33 करोड़ देवी-देवताओं ने सदियों तक अपनी आभा बिखेरी है। इतनी कि इसके लिए हमारा अम्बर भी कम पड़ जाए। हमारे बीच देवता विभिन्न रूप में आते हैं। हम उन्हें पहचानें या न पहचानें, वे हमारे बीच रहते हैं। ऐसे ही देवता नीब करौरी वाले बाबा हैं। इनको मानने वालों में देश- विदेश के करोड़ों लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज शाम रविन्द्र भवन बहिरंग में अनंत विभूषित बाबा नीब करौरी महाराज के 125वें प्राकट्योत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा नीब करौरी महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
तमिलनाडु में आई बाढ़ को लेकर पीएम मोदी ने : सीएम एमके स्टालिन से की फोन पर बात
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को तमिलनाडु में बाढ़ के कहर को देखते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से फोन पर बात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
तमिलनाडु के जिले विल्लपुरम में आई बाढ़ की वजह से चेन्नई-तिरुचिरापल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से 69 लाख परिवार और 1.5 लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से 2,000 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया है।
वहीं मौसम विभाग ने इस संबंध में बताया कि उत्तरी तटीय तमिलनाडु और पुडुचेरी के ऊपर चक्रवाती तूफान फेंगल कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्रों में तब्दील हो गया। इससे विल्लुपुरम और आसपास के क्षेत्र बाढ़ से पानी-पानी हो गए।
तमिलनाडु का विल्लुपुरम जिला मौजूदा समय में बाढ़ के कहर से त्राहि-त्राहि कर रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने यहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था और पीडि़तों को हरसंभव मदद का भी भरोसा दिलाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावितों से बात करके उनके बीच राहत सामग्री भी वितरित की। इस बाढ़ की वजह से रेलवे ने अपनी तरफ सेवाओं को प्रभावित कर दिया है।
रेलवे ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा कि विक्रवंडी में शहर को मुंडियामपक्कम से जोडऩे वाले एक मुख्य पुल पर बाढ़ का पानी बढऩे के कारण रेल सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं। चेन्नई एग्मोर-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया है। उत्तरी तमिलनाडु को मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों से जोडऩे वाले कई अन्य प्रमुख मार्ग भी इसकी चपेट में आए हैं।
थेंपेन्नई नदी उफान पर है, जिससे कुड्डालोर और पड़ोसी जिले जलमग्न हो गए हैं।