देश-विदेश
दिल्ली के सीएम को बड़ा झटका... ईडी की शिकायत पर कोर्ट ने भेजा समन
नईदिल्ली। ईडी द्वारा बार-बार समन दिए जाने के बाद भी पेश नहीं होने के मामले में कोर्ट ने पेशी के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन जारी किया है। कोर्ट ने केजरीवाल को 17 फरवरी को पेश होने के लिए कहा है। दरअसल, दिल्ली शराब घोटाला मामले में ईडी के 5 समन के बावजूद दिल्ली सीएम केजरीवाल के पेश न होने के खिलाफ ईडी द्वारा कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुनवाई करते हुए राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया और केजरीवाल को 17 फरवरी को पेश होने का समन जारी किया।
बतादें कि शराब नीति घोटाला मामले में ईडी दिल्ली के सीएम केजरीवाल से पूछताछ करना चाहती है। इसको लेकर केजरीवाल को पांच बार समन जारी किया जा चुका है। हालांकि केजरीवाल ने इन समन को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया और ईडी के सामने पेश नहीं हुए। ईडी ने इसी महीने 2 फरवरी को ही 5वां समन जारी किया था। फिर भी केजरीवाल नहीं पेश हुए. इसके बाद ईडी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट में ईडी ने दलील दी कि अलग-अलग तारीखों पर उन्हें जारी किए गए समन का पालन नहीं किया और उपस्थित नहीं हुए। केजरीवाल को उनकी भूमिका और दूसरों की भूमिका का पता लगाने और अपराध से हुई आय का पता लगाने के लिए बुलाया गया था। केजरीवाल एक उच्च पदस्थ सार्वजनिक पदाधिकारी हैं जिनसे कानून का पालन करने की उम्मीद की जाती है। अगर इतने ऊंचे पद पर बैठे लोग कानून की अवहेलना करेंगे तो यह आम आदमी के लिए गलत उदाहरण होगा।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी..... ''जिन्हें मिल चुका लाभ, वे आरक्षण श्रेणी से निकलें बाहर..."
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिछड़ी जातियों में जो लोग आरक्षण के हकदार थे और इससे लाभान्वित भी हो चुके हैं, उन्हें अब आरक्षित कैटेगरी से बाहर निकालना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि उन्हें अधिक पिछड़ों के लिए रास्ता बनाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संविधान पीठ ने ‘इस कानूनी सवाल की समीक्षा शुरू कर दी है कि क्या राज्य सरकार को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में उप-वर्गीकरण करने का अधिकार है?’ संविधान पीठ ने सुनवाई के पहले दिन कहा कि वह 2004 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की वैधता की समीक्षा करेगा, जिसमें कहा गया था कि राज्यों के पास आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आगे उप-वर्गीकृत करने का अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह की दलीलों का सारांश देते हुए कहा, “इन जातियों को बाहर क्यों नहीं निकालना चाहिए? आपके अनुसार एक विशेष वर्ग में कुछ उपजातियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वे उस श्रेणी में आगे हैं। उन्हें उससे बाहर आकर जनरल से मुकाबला करना चाहिए। वहां क्यों रहें? जो पिछड़े में अभी भी पिछड़े हैं, उन्हें आरक्षण मिलने दो। एक बार जब आप आरक्षण की अवधारणा को प्राप्त कर लेते हैं, तो आपको उस आरक्षण से बाहर निकल जाना चाहिए।” महाधिवक्ता ने कहा, “यही उद्देश्य है। यदि वह लक्ष्य प्राप्त हो जाता है तो जिस उद्देश्य के लिए यह अभ्यास किया गया था वह समाप्त हो जाना चाहिए।”
संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ मात्रात्मक डेटा से संबंधित तर्कों में नहीं पड़ेगी जिसके चलते पंजाब सरकार को कोटा के अंदर 50 फीसदी कोटा प्रदान करना पड़ा। संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ के अलावा न्यायमूर्ति बीआर गवई, विक्रम नाथ, बेला एम त्रिवेदी, पंकज मिथल, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र मिश्रा भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट उन 23 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती दे दी गई है। इसमें पंजाब सरकार की मुख्य अपील भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संविधान पीठ अब इस सवाल की जांच कर रही है कि क्या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के अंदर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी जानी चाहिए और क्या राज्य विधानसभाएं इस अभ्यास को करने के लिए राज्यों को सशक्त बनाने वाले कानून पेश करने में सक्षम हैं। इससे पहले, पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने अपनी बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि कानूनी प्रावधानों और दो जातियों के लिए विशेष प्रावधान बनाने के कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘जाति व्यवस्था और भेदभाव के चलते समाज में गहरे विभाजन हुए और कुछ जातियां हाशिए पर चली गई हैं और निराशा की स्थिति में आ गई हैं। जो लोग हाशिए पर चले गए हैं, उनके पास पिछड़ापन आ गया है।
‘पिछड़ों में से सबसे पिछड़ों को सबसे आगे लाना उद्देश्य’
आगे बढ़ना उन लोगों का अधिकार है, जिनके पास यह है और हमें पिछड़ेपन पर ध्यान देने की जरूरत है जो सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक आदि हो सकता है।’ पंजाब सरकार की ओर से उन्होंने कहा कि 2006 के कानून में आरक्षण 50 प्रतिशत तक सीमित था और इसे तरजीही आधार पर लागू किया गया था और यह किसी भी मानक द्वारा बहिष्करण का कार्य नहीं था और इसका उद्देश्य पिछड़ों में से सबसे पिछड़ों को सबसे आगे लाना था।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान दो कानूनी सवालों की पहचान करते हुए कहा कि ‘इस पर पंजाब सरकार को ध्यान देना चाहिए। पहला, यह कि क्या वास्तविक समानता की धारणा राज्य को आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़े वर्गों के भीतर व्यक्तियों के अपेक्षाकृत पिछड़े वर्ग की पहचान करने की अनुमति देती है। दूसरा, यह कि क्या संघीय ढांचा, जहां संसद ने पूरे देश के लिए जातियों और जनजातियों को नामित किया है, यह राज्यों पर छोड़ देता है कि वे अपने क्षेत्र के भीतर अपेक्षाकृत हाशिए पर रहने वाले समुदायों को कल्याणकारी लाभ के लिए नामित करें।’
इस मामले में, 27 अगस्त, 2020 को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने चिन्नैया मामले में 2004 में पारित 5 जजों के फैसले से असहमति जताई थी और इस मामले को सात सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेज दिया था।
बिम्सटेक एक्वेटिक्स चैंपियनशिपः 7 बिम्सटेक देश आए एक साथ... केंद्रीय खेल मंत्री ने किया शुभारंभ
नईदिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज नई दिल्ली में बिम्सटेक एक्वेटिक्स चैंपियनशिप 2024 की शुरुआत की। बिम्सटेक एक्वेटिक्स चैंपियनशिप पहली बार आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि दुनिया की 25 प्रतिशत आबादी दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में रहती है। उन्होंने आगे कहा कि 7 बिम्सटेक देशों के एक साथ आने से, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र न केवल यात्रा और परिवहन के लिए उपयोग किया जाने वाला क्षेत्र बनेगा, बल्कि प्रगति, विकास और सहयोग का क्षेत्र भी बन जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे न केवल घनिष्ठ दोस्ती में मदद मिलेगी, बल्कि एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण भी होगा, जो एथलीटों के बीच दोस्ती को मजबूत करने में भी मदद करेगा। इसी विचार के साथ माननीय प्रधानमंत्री ने नेपाल में शिखर सम्मेलन में इस खेल आयोजन की परिकल्पना की थी।
यह संगठन इतिहास में पहली बार किसी ऐसी खेल प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है जिसकी मेजबानी भारत में की जा रही है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी, जहां उन्होंने भारत में बिम्सटेक यूथ वाटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा की थी। यह आयोजन शुरू में वर्ष 2021 के लिए प्रस्तावित था, हालाँकि, बाद में दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण इसे 2024 तक स्थगित कर दिया गया।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय खेल मंत्री के साथ, युवा मामले और खेल मंत्री नेपाल के दिग बहादुर लिंबू और इंद्र मणि पांडे, महासचिव, बिम्सटेक उच्चायुक्त और बिम्सटेक के भारत में राजदूत, भाग लेने वाले देशों और भारत सरकार के गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
पहली बिम्सटेक एक्वेटिक्स चैंपियनशिप 6 फरवरी से 9 फरवरी 2024 तक दिल्ली के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्विमिंग पूल कॉम्प्लेक्स में आयोजित की जा रही है, जिसमें तैराकी, वाटर पोलो और डाइविंग स्पर्धाओं में 20 से कम आयु वर्ग के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
तीन खेल स्पर्धाओं में कुल 39 पदक प्रदान किए जाएंगे और साथ ही कुल 9 ट्रॉफियां भी दी जाएंगी। आयोजनों में 500 से अधिक कर्मियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें विभिन्न बिम्सटेक सदस्य देशों के 268 एथलीट शामिल हैं। बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच एक अद्वितीय कड़ी का गठन करता है, जिसमें दक्षिण एशिया (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका) के पांच सदस्य और दक्षिण-पूर्व एशिया (म्यांमार और थाईलैंड) के दो सदस्य हैं।
जबलपुर वासियों के अच्छी खबर... मुंबई और दिल्ली के लिए सीधी विमान सेवा 1 मार्च से
जबलपुर। मध्य प्रदेश में उड़ान सेवाओं का विस्तार लगातार जारी है। इस बार जबलपुर वासियों के लिए विमानन मंत्रालय ने अच्छी खबर दी है। अगले महीने से दिल्ली से जबलपुर और मुंबई से जबलपुर की सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू की जाएगी। जबलपुर को दिल्ली और मुंबई से जोड़ने वाली उड़ान सेवा स्पाइसजेट कंपनी द्वारा संचालित की जाएगी।
दिल्ली से जबलपुर के लिए सीधी उड़ान 1 मार्च 2024 से शुरू होगी। दिल्ली और जबलपुर के बीच उड़ान सेवा 1 मार्च 2024 से सप्ताह में दो दिन रहेगी। वहीं मुंबई से जबलपुर के बीच उड़ान सेवा 2 मार्च 2024 से संचालित होगी। केंद्रीय नागरिक विमानन और इस्पात मंत्री, ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने कहा, "मुझे खुशी है कि स्पाइसजेट के सहयोग से, जबलपुर को मुंबई और दिल्ली के लिए अतिरिक्त संपर्क प्राप्त होगा।"
उन्होंने कहा, “यह न केवल जबलपुर के लोगों के लिए एक आसान और समय बचाने वाला यात्रा अनुभव सुनिश्चित करेगा बल्कि व्यापार, वाणिज्य और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ाएगा। जबलपुर हवाई अड्डे को एक नया टर्मिनल भवन भी मिलने वाला है, जो 412 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। यह टर्मिनल भवन यात्रा और आर्थिक विकास को नई ऊर्जा देगा।”
UCC बिलः विवाह पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माना.... शादी के एक साल तक नहीं होगा तलाक
डेस्क। उत्तराखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता को लेकर बिल पेश कर दिया है। अब इसको लेकर विधानसभा में चर्चा होगी, जिसके बाद बिल पर वोटिंग होगी। इस बिल के ड्राफ्ट में विवाह का पंजीयन अनिवार्य, न्यायिक प्रक्रिया से तलाक समेत मुद्दों को शामिल किया है।
1. विवाह के समय पुरुष की आयु 21 वर्ष पूरी हो और स्त्री की आयु 18 साल हो। विवाह का पंजीकरण धारा 6 के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगेगा।
2. तलाक के लिए कोई भी पुरुष या महिला कोर्ट में तब तक नहीं जा सकेगा, जबतक विवाह की अवधि एक साल न हो गई हो।
3. विवाह चाहे किसी भी धार्मिक प्रथा के जरिए किया गया हो, लेकिन तलाक केवल न्यायिक प्रक्रिया के तहत हो सकेगा।
4. किसी भी व्यक्ति को पुनर्विवाह करने का अधिकार तभी मिलेगा, जब कोर्ट ने तलाक पर निर्णय दे दिया हो और उस आदेश के खिलाफ अपील का कोई अधिकार नहीं रह गया हो।
5- कानून के खिलाफ विवाह करने पर छह महीने की जेल और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा नियमों के खिलाफ तलाक लेने में तीन साल तक का कारावास का प्रावधान है।
6- पुरुष और महिला के बीच दूसरा विवाह तभी किया जा सकता है, जब दोनों के पार्टनर में से कोई भी जीवित न हो।
7- महिला या पुरुष में से अगर किसी ने शादी में रहते हुए किसी अन्य से शारीरिक संबंध बनाए हों तो इसको तलाक के लिए आधार बनाया जा सकता है।
8- अगर किसी ने नपुंसकता या जानबूझकर बदला लेने के लिए विवाह किया है तो ऐसे में तलाक के लिए कोई भी कोर्ट जा सकता है।
9- अगर पुरुष ने किसी महिला के साथ रेप किया हो, या विवाह में रहते हुए महिला किसी अन्य से गर्भवती हुई हो तो ऐसे में तलाक के लिए कोर्ट में याचिका लगाई जा सकती है. अगर महिला या पुरुष में से कोई भी धर्मपरिवर्तन करता है तो इसे तलाक की अर्जी का आधार बनाया जा सकता है।
10- संपत्ति को लेकर महिला और पुरुषों के बीच बराबर अधिकार होगा. इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा. इसके अलावा इच्छा पत्र और धर्मज को लेकर भी कई तरह के नियम भी शामिल हैं।
यहां की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट... तीन लोगों की हुई मौत, 40 से अधिक घायल
भोपाल। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मगरधा रोड पर स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया। इस हादसे में तीन लोगों की मौत की खबर आ रही है, जबकि 40 से अधिक लोग हादसे में घायल हो गए। फैक्ट्री में विस्फोट होने के बाद वहां की दीवारों में दरारें आ गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। वहीं फायर ब्रिग्रेड की गाड़ी भी मौके पर पहुंच गई है। अस्पताल में भी भगदड़ का माहौल है। इस घटना का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने तत्काल मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, उदय प्रताप सिंह, एसीएस अजीत केसरी, डीजी होम गार्ड अरविंद कुमार हेलीकॉप्टर से जाने के निर्देश दिए। वहीं भोपाल और इंदौर में मेडिकल कॉलेज और एम्स भोपाल में बर्न यूनिट को आवश्यक तैयारी करने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर ऋषि गर्ग ने कहा कि पटाखा फैक्ट्री में अचानक आज सुबह ब्लास्ट हुआ है. भीषण आग लगी हुई है। इस विस्फोट में कई लोग घायल हुए हैं। 20-25 लोगों को हमने अस्पताल में एडमिट कराया है। कई लोगों की हालत गंभीर है। हमने आसपास के जिलों से एंबुलेंस, डॉक्टरों की टीम, स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स टीम और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया है।
Paytm: ED की जांच के बीच विजय शेखर शर्मा से मिले RBI के अधिकारी
डेस्क। डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन कंपनी Paytm का संकट जारी है। मंगलवार को सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि कंपनी के खिलाफ ED ने FEMA के नियमों के तहत जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर Paytm से जुड़ी एक ओर खबर सामने आम रही है, कि केंद्रीय रिजर्व बैंक RBI के अधिकारियों ने कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा से मुलाकात की है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक उनसे मिलकर कंपनी को लेकर चल रही रेगुलेटरी चिंताओं को दूर करने के लिए रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई है। इसे लेकर बकायदा बैठक हुई है। जिसमें कंपनी के अधिकारी भी शामिल रहे। कंपनी पर फॉरेक्स वॉयलेशन को लेकर जांच चल रही है। हालांकि, पेटीएम ने फेमा उल्लंघन की खबरों को सिरे से खारिज किया है।
बतादें कि आरबीआई ने बीते 3 जनवरी को पेटीएम की बैंकिंग शाखा पेटीएम पेमेंट बैंक की सर्विसेज को रोकने का आदेश दिया था। जो कि आने वाली 29 फरवरी से लागू किया जाएगा। इस आदेश के बाद से ही पेटीएम के स्टॉक में लगातार तीन दिन तक लोअर सर्किट लगा रहा।
भारत ऊर्जा सप्ताह 2024: ऊर्जा उत्पाद देश लीबिया, सूडान और घाना के ऊर्जा मंत्री होंगे शामिल
नईदिल्ली। गोवा में आयोजित होने वाला भारत ऊर्जा सप्ताह, 2024, विश्व के ऊर्जा उत्पादक देशों के ऊर्जा मंत्रियों और तेल तथा गैस बाजार से जुड़े प्रमुख निर्णय लेने वालो को एक छत के नीचे लाएगा। आईईडब्ल्यू मंच दुनिया को एक स्वच्छ भविष्य की ओर ले जाने के लिए अनुभवों के आदान-प्रदान के आधार पर नीतियों पर सहयोग के लिए एक अनुकूल जगह के रूप में काम करेगा।
इस कार्यक्रम में बोलने वाले प्रमुख विदेशी सरकारी पदाधिकारियों में लीबिया, नाइजीरिया, सूडान के पेट्रोलियम मंत्री और घाना, जिबूती और श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री शामिल हैं। तेल निर्यातक देशों के लिए निर्णय लेने वाला शीर्ष संगठन, ओपेक, का प्रतिनिधित्व इसके महासचिव हैथन अल ग़ैस करेंगे।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी आईईडब्ल्यू में कई सम्मेलनों और सत्रों की अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा, वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य पर हर तरह का परिप्रेक्ष्य प्रदान करने के लिए, आईईडब्ल्यू 2024 में नियामक निकायों, नवीकरणीय और वैकल्पिक ईंधन संघों और कंपनियों, नीति शोधकर्ताओं और सलाहकारों के वक्ता भी शामिल होंगे।
इसके अतिरिक्त, आईईडब्ल्यू 2024 में वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने वाले आयोजित होने वाले रणनीतिक सम्मेलनों में टिकाऊ ऊर्जा के भविष्य पर विचार-विमर्श करेंगे।
इन सत्रों में, दुनिया भर के ऊर्जा मंत्रियों और नीति निर्माताओं के मंत्रिस्तरीय पैनल, वैश्विक व्यापार नेताओं और उद्योग विशेषज्ञों को शामिल करने वाले नेतृत्व पैनल, भारतीय नीति निर्माताओं और ऊर्जा क्षेत्र के नेताओं के नेतृत्व में अनौपचारिक बातचीत और विशेषज्ञ साक्षात्कार और व्यापार संचालन में सबसे आगे रहने वाले वैश्विक नेताओं के साथ कार्यकारी सत्र शामिल होंगे।
इन सत्रों में से कुछ सत्र हैं: 8 फरवरी को होने वाला "भारत का तेल बाजार 2030" और, "भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और वर्तमान ईंधन मिश्रण के विकल्पों का प्रभाव।" "भूकंपीय बदलाव – डीपवाटर फरंटियर्स विकसित करने के लिए नई अन्वेषण प्रौद्योगिकी का उपयोग करना" 9 फरवरी को और उद्घाटन दिवस पर “वीयूसीए विश्व में राष्ट्रों और उद्योग के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना” सहित कई अन्य सत्र शामिल हैं।
विद्यार्थियों को सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानशीलता, पुरुषार्थ, पराक्रम और सुशासन की प्रेरणा मिलेगी: मुख्यमंत्री
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वामी ईश्वरानंद महाराज (उत्तम स्वामी), आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, विजय कुमार सिन्हा, अशीष चौहान, श्रीराम अरावकर ने भी संबोधित किया। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद रमाकांत भार्गव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विद्या भारती संस्थान द्वारा इस सैनिक स्कूल के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कार और राष्ट्रनिर्माण की भावना को विकसित करने का काम किया जायेगा। नई शिक्षा नीति के निर्माण में विद्या भारती संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रदेश में जहाँ भी सैनिक स्कूल शुरू किए जाएंगे वहां प्रदेश सरकार पूरी मदद करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्या भारती मध्यभारत प्रांत द्वारा यहां सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल का निर्माण किया जा रहा है। स्कूल परिसर में आधुनिक शिक्षा की सुविधा, सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं उपलब्ध रहेंगीं।
नर्मदा नदी एवं नेशनल हाईवे-46 के पास वन एवं पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे इस स्थान पर भारतीय सेना के कौशल और संस्कारों के साथ शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस भवन की नींव नवग्रह विधान, वास्तु पुरुष एवं अन्य सांस्कृतिक मूल्यों पर रखी जा रही है l परिसर में शैक्षणिक खंड, ऑडिटोरियम खंड, रेसीडेंशियल खंड, स्विमिंग पूल, हॉकी मैदान, हॉर्स राइडिंग, शूटिंग रेंज सहित अन्य खेलों एवं साहसिक गतिविधियों के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण की सुविधा रहेगी।
राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 31वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति से की मुलाकात
नईदिल्ली। अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान में प्रोबेशनर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 31वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट की। ये अधिकारी भारतीय सिविल लेखा सेवा, भारतीय रक्षा लेखा सेवा और भारतीय पीएंडटी (वित्त और लेखा) सेवा से हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने इन अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सभी को इस बात की जानकारी है कि एक अच्छी सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली ही सुशासन का आधार है। राष्ट्रपति ने कहा कि वे जिस संगठित वित्तीय सेवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन पर एक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के निर्माण और उसे बनाए रखने का दायित्व है, जो सरकार के कुशल कार्यप्रणाली को संचालित करने में सहायता करता है। इस बात को देखते हुए प्रशासन में उनकी भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि, उन्हें शासन में उपयुक्तता और विवेकशीलता सुनिश्चित करनी होती है। उन्होंने उनसे अपनी क्षमताओं को प्राप्त कर और उनका उपयोग करके इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने का अनुरोध किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि वे ऐसे समय इन सेवाओं में शामिल हुए हैं, जब देश डिजिटल रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है। जनता के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के साथ-साथ सेवा वितरण में अधिक दक्षता की अपेक्षा बढ़ रही है। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकारी विभागों द्वारा प्रौद्योगिकी का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करना और शासन प्रणाली को नागरिक-केंद्रित, कुशल व पारदर्शी बनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उनका काम न केवल वित्तीय संसाधनों की उपयोगिता को अधिकतम करने तक सीमित है, बल्कि नीतिगत परिवर्तनों के प्रभाव का विश्लेषण करना और वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों सहित शासन की विभिन्न प्रणालियों में संवर्द्धन के लिए सुधारों का प्रस्ताव रखना भी शामिल है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से इन कार्यों को करने के लिए लगातार बदलती और उन्नत होती प्रौद्योगिकी की दुनिया के साथ तालमेल बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास नवीनतम तकनीक का उपयोग करने और हमारी लेखांकन व लेखा परीक्षा प्रणालियों को सुगम बनाने के लिए तंत्र को विकसित करने का होना चाहिए।
मंत्रीगण को विभागीय कार्यप्रणाली को अच्छे से समझना चाहिए : विधानसभा अध्यक्ष तोमर
भोपाल। मंत्रीगण विधानसभा में दिए आश्वासनों को प्रतिबद्धता के साथ पूरा करें। यह बात विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में लीडरशिप समिट के दूसरे दिन के पहले सत्र को सम्बोधित करते हुए कहीं। विधान सभा अध्यक्ष प्रशासनिक समन्वय एवं विधानसभा कार्यप्रणाली विषय पर उद्बोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मंत्रीगण को अपने विभाग की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझना चाहिए। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल एवं मंत्रि-परिषद के सदस्य उपस्थित थे।
विधान सभा अध्यक्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली को समझाते हुए कि नीतियों के बनाने, क्रियान्वयन करने और समीक्षा को बेहतर ढंग से करने के लिए अध्ययन करने की सलाह दी। मंत्रीगण अपने अपने विभाग में नवाचार पर भी ध्यान दें। समीक्षा करने के साथ विभाग में समय की मांग के अनुसार प्रशासनिक सुधार करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संवाद और सहयोग महत्वपूर्ण है। सरकार और प्रशासन एक इसरे के पूरक है। मंत्रीगण को विभागीय अधिकारियों की कान्फ्रेन्स करना चाहिए। इसमें विभागीय अधिकारियों से महत्वपूर्ण फीडबेक मिलता है। उन्होंने कहा कि विभाग के विशेषज्ञों का ग्रुप बना कर विभाग के कार्य में विशेषज्ञ का सहयोग लेना चाहिए।
विधान सभा अध्यक्ष ने जिला प्रभारी मंत्री के रूप में बेहतर ढंग से दायित्व निर्वहन पर भी जानकारी दी। उन्होंने विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए केंद्र सरकार से राशि प्राप्त करने के संबंध में भी बताया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बजट, मंत्रालयीन कार्य प्रणाली, कार्य आवंटन नियम, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना नियमावली विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अनुपूरक अनुमान विधानसभा के प्रत्येक सत्र में लाया जा सकता है। उन्होंने वजट और बजट प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। मंत्री पटेल ने कहा कि वित्तीय अनुशासन के साथ विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। वित्तीय आत्मनिर्भरता लक्ष्य होना चाहिए। उन्होने बजट प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
अपर सचिव सुधीर कोचर ने राज्य स्तरीय प्रशासनिक संरचना विषय पर जानकारी दी। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रशासनिक शब्दावली की जानकारी भी दी। दुष्यंत सिंह ने भी सोशल मीडिया प्रबंधन, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ समन्वय पर और श्री वाय. के. पाठक ने सुशासन में प्रोद्योगिकी का महत्व ई-ऑफिस, भण्डार क्रम प्रक्रिया ई-टेंडरिंग नियम तथा जेम की जानकारी दी।
Gyanvapi: ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में क्या है? आखिर क्यों अंग्रेजों ने इसे दिया था हिंदुओं को
डेस्क (साभार-न्यूज-18)। वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी (Gyanvapi) के व्यासजी के तहखाने में पूजा पाठ शुरू हो गई है। 31 साल पहले, साल 1993 में यहां पूजा-पाठ पर रोक लगा दी गई थी, तब से व्यास परिवार कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा था। आखिर क्या है व्यासजी का तहखाना? कौन है व्यास परिवार? कैसे मिला था यहां पूजा का अधिकार? आइये बताते हैं।
ज्ञानवापी परिवार के अंदर स्थित 10 तहखानों में एक हैं व्यासजी का तहखाना। व्यासजी का तहखाना ज्ञानवापी मस्जिद के बैरिकेड वाले दक्षिणी हिस्से में है। यह तहखाना काशी विश्वनाथ परिसर के गर्भगृह के पास, नंदी की मूर्ति के ठीक सामने है। इस तहखाने के अंदर भगवान शिव, गणेश, कुबेर जी, हनुमान जी और मां गंगा की मगरमच्छ की सवारी वाली मूर्तियां हैं। व्यास परिवार के वकील सुभाष चतुर्वेदी के मुताबिक यह परिवार, तहखाने में 200 साल से ज्यादा वक्त से पूजा-पाठ करता आ रहा है।
व्यास परिवार का इतिहास पंडित केदारनाथ व्यास से शुरू होता है, जो दुर्लभ पांडुलिपियों और कई ग्रंथ के रचयिता रहे हैं। परिवार का दावा है कि उनके वंशज 1551 से ज्ञानवापी में पूजा करते रहे हैं। साथ ही साल 1880 से ज्ञानवापी मस्जिद प्रशासन के खिलाफ लड़ाई भी लड़ रहे हैं।
व्यास परिवार को ज्ञानवापी परिसर का तहखाना अंग्रेजों से मिला। साल 1819 में बनारस में हिंदू-मुस्लिम दंगा हुआ और इस दंगे को शांत करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने तहखाने वाला हिस्सा हिंदू पक्ष को दे दिया और ऊपर वाला हिस्सा मुसलमानों को। उस वक्त व्यास परिवार ज्ञानवापी के ठीक बगल में रहा करता था और सोमनाथ व्यास यहां पूजा-पाठ करते थे। अंग्रेजों ने इसी व्यास परिवार को तहखाने में पूजा-पाठ की इजाजत दे दी। बाद में यह 'तहखाना व्यासजी का तहखाना' के नाम से मशहूर हो गया।
तब से यही परिवार तहखाने में पूजा-पाठ करता आ रहा था। हालांकि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने ज्ञानवापी के तहखाना के अंदर भी प्रवेश और पूजा पाठ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही व्यास परिवार अदालत में लड़ाई लड़ रहा था। व्यास परिवार की तरफ से 'आचार्य वेद व्यास पीठ मंदिर' के मुख्य पुजारी शैलेंद्र पाठक व्यास ने याचिका दायर कर रखी थी। वह सोमनाथ व्यास के नाती हैं।
अदालत के आदेश के बाद व्यास जी के तहखाने में पूजा पाठ शुरू हो गई है। व्यास परिवार ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में बैरिकेडिंग को हटाकर लोहे का गेट लगवाया। सुबह करीब ढाई बजे से सवा तीन बजे तक पूजा-अर्चना होती रही। वाराणसी के जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन करवा दिया गया है।
महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की अनेक परियोजनाओं का आज उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी
नईदिल्ली। कोयला उत्पादक क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क को बढ़ाने के उद्देश्य से सीआईएल, इरकॉन और ओडिशा सरकार ने "महानदी कोल रेल लिमिटेड" के रूप में संयुक्त उद्यम गठित किया है। सीआईएल ने अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाने, मौजूदा रेल लाइनों के दोहरीकरण, रेल-ओवर-रेल (आरओआर), वाई-कर्व्स आदि के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण रेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 फरवरी, 2024 को ओडिशा में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें से एक भुवनेश्वरी चरण- I, तालचेर कोलफील्ड्स, अंगुल जिले में एक फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजना है। 335 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परियोजना रेक लोडिंग का समय लगभग 50 मिनट तक कम कर देगी, पर्यावरण-अनुकूल ढुलाई शुरू कर देगी, इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और कोयले की ढुलाई लागत कम हो जाएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना लगभग 375 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लाजकुरा रैपिड लोडिंग सिस्टम (आरएलएस) है। इस प्रणाली को कोयले की गुणवत्ता और आपूर्ति बढ़ाने, लगभग 50 मिनट का लोडिंग समय प्राप्त करने, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को अपनाने, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और कोयले की समग्र ढुलाई लागत को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये प्रयास न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करते हैं बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मूल्यवान अवसर भी पैदा करते हैं।
इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के अलावा, प्रधानमंत्री ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में 550 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आईबी वैली वॉशरी का भी उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना गुणवत्ता के लिए कोयला प्रसंस्करण में एक बुनियादी परिवर्तन, नवाचार और स्थिरता को दर्शाने, कोयला गुणवत्ता मानकों के लिए मानक बढ़ाने का प्रतीक होगी और स्वच्छ और अधिक कुशल ऊर्जा समाधानों के लिए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप होगी।
मोदी सरकार का बड़ा ऐलान... लालकृष्ण आडवाणी को मिलेगा भारत रत्न.. लगा बधाइयों का तांता
नईदिल्ली। केंद्र सरकार भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। इसके बाद से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित तमाम नेता उन्हें बधाई देने पहुंचने लगे।
हम सबके प्रेरणास्रोत एवं देश के वरिष्ठ नेता, श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न दिये जाने के निर्णय से बड़े हर्ष और आनंद की अनुभूति हुई है। वे राजनीति में शुचिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं। आडवाणीजी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अनेक भूमिकाओं में, देश के विकास… pic.twitter.com/bHfvkI354Q
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) February 3, 2024
रक्षा मंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'हम सबके प्रेरणास्रोत एवं देश के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के फैसले से बड़े हर्ष और आनंद की अनुभूति हुई है। वे राजनीति में शुचिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं। आडवाणीजी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अनेक भूमिकाओं में, देश के विकास और राष्ट्रनिर्माण में जो महत्वपूर्ण योगदान किया है, वह अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद है।' उन्हें भारत रत्न का सम्मान मिलना हर भारतवासी के लिए हर्ष का विषय है। मैं इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं और आडवाणी का अभिनंदन करता हूं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'देश के वरिष्ठतम नेता और हमारे मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न की घोषणा अत्यंत सुखद और आनंददाई है। आजादी के बाद देश के पुनर्निर्माण में आडवाणी जी की अहम भूमिका रही है। आडवाणी जी राजनीति में शुचिता के जीवंत उदाहरण हैं। आडवाणी जी को 'भारत रत्न' घोषित करने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं तथा आडवाणी जी के स्वस्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करता हूं।'
राष्ट्रपति ने 37वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले का किया उद्घाटन
नईदिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हरियाणा के सूरजकुंड में 37वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हमारी सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है। यह मेला हमारी परंपरा के साथ-साथ रचनात्मकता का भी उत्सव है। यह हमारे शिल्पकारों को कला प्रेमियों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। यह मेला एक कला प्रदर्शनी और व्यापार केंद्र, दोनों है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कला और शिल्प सीमाओं के बंधन को तोड़ते हैं तथा आपसी समझदारी के सेतु बनाते हैं। कलाकार और शिल्पकार मानवता के रचनात्मक राजदूत हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के मेले के भागीदार राज्य गुजरात में कला की बेहद ही समृद्ध परंपरा है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि उत्तर-पूर्वी हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम इस वर्ष के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में सांस्कृतिक भागीदार है।
राष्ट्रपति ने हमारे देश की कलात्मक विरासत को संरक्षित करने के लिए कारीगरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिल्पकार एवं मूर्तिकार मिट्टी व पत्थर में जान डाल देते हैं। चित्रकार रंगों के माध्यम से चित्र बनाते हैं, जो जीवंत दिखाई देते हैं। शिल्पकार विभिन्न धातुओं और लकड़ी जैसी ठोस सामग्रियों से अविश्वसनीय आकृति और रूप का निर्माण करते हैं। कल्पनाशील बुनकर वस्त्रों और परिधानों में अद्भुत सौंदर्य रचते हैं। ऐसे शिल्पकार भारत की सभ्यता एवं संस्कृति के निर्माता और संरक्षक, दोनों रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के कारीगर भाई-बहन हमारी सभ्यता और संस्कृति की अनमोल विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि तंजानिया इस वर्ष के मेले का भागीदार देश है। उन्होंने कहा कि यह मेला तंजानिया के नृत्य, संगीत और व्यंजनों को प्रदर्शित करने का एक अद्भुत मंच है, जिसमें हम भारत और पूर्वी अफ्रीकी तट के बीच सदियों से लोगों के बीच पारस्परिक संपर्क के कारण पड़े कुछ भारतीय प्रभाव की झलक भी देख सकते हैं। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि इस मेले में भागीदार राष्ट्र के रूप में तंजानिया की भागीदारी अफ्रीकी संघ के साथ भारत की भागीदारी को प्रकट करती है।
‘शिक्षण संस्थाएं राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने वाली पीढ़ी का करें निर्माण’
भोपाल। प्रदेश की सभी शिक्षण संस्थाओं का यह दायित्व है कि वह ऐसी पीढ़ी का निर्माण करें, जो राष्ट्र के प्रति सजग रहे, अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करे, वंचितों के लिये कार्य करके देश एवं समाज में आमूलचूल परिवर्तन लाये। विकसित भारत के निर्माण के लिये यह आवश्यक है कि नई शिक्षा नीति ऐसी हो, जिसमें युवाओं का स्किल डेवलपमेंट हो। उन्हें रोजगार के विभिन्न अवसर प्राप्त हो। विद्यार्थी अपनी पसन्द के क्षेत्र में ज्ञान अर्जित कर सकें। उक्त बातें राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उज्जैन में विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन पर आयोजित सेंट्रल झोन वाईस चांसलर कॉन्फ्रेंस में कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि एक कुलपति के पास लगभग एक हजार विद्यार्थी आते हैं। कुलपतियों का यह दायित्व है कि वे उनके बौद्धिक ज्ञान को सही मार्गदर्शन प्रदान करे। उन्होंने कहा कि मैं जब भी किसी दीक्षान्त समारोह में जाता हूं तो विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करता हूं। उपाधि मिलने के बाद विद्यार्थी को नौकरी मिलती है। उसकी शादी भी हो जाती है, लेकिन मैं आजकल यह देखता हूं कि उच्च शिक्षित डिग्रीधारी युवक अपने माता-पिता का तिरस्कार करता है। उन्हें अकेला छोड़ देता है। यह प्रवृत्ति ठीक नहीं है। लोग अपने घरों के नाम मातृछाया एवं पितृछाया रखते हैं, लेकिन न माता का, न पिता का सम्मान करते हैं तो मुझे समझ में यह नहीं आता है कि उनके शिक्षित होने का क्या फायदा।
राज्यपाल ने कहा कि सभी विद्यार्थी अपने माता-पिता द्वारा उन्हें पढ़ाने एवं बड़ा करने में उठाये गये कष्टों को न भूलें। यदि विद्यार्थी अपने माता-पिता की सेवा करता है तो यह मान लीजिये कि वह राष्ट्र के प्रति भी अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेगा। ऐसे व्यक्ति का जीवन सफल रहता है।
सेंट्रल झोन वाईस चांसलर कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं उत्तराखण्ड के 270 से अधिक शासकीय एवं अशासकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, प्राध्यापक शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की समीक्षा और चुनौतियों पर चर्चा हुई।
यूजीसी के चेयरमेन एम.जगदीश कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 से भारतीय शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी बदलाव आ रहे हैं। विभिन्न हितधारकों के बीच नीति के विवरणों को प्रसारित करने और उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों ने इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। यूजीसी के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में क्षेत्र के प्रबंधन, शैक्षणिक, प्रशासनिक सदस्यों और अन्य हितधारकों के सन्दर्भ में जानकारी को सुगम बनाया जा रहा है।
विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार पाण्डे ने विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में 280 कोर्स वर्तमान में संचालित किये जा रहे हैं। बहुउद्देशीय अनुसंधान, फॉरेंसिक साइंस, डिजिटल टेक्नालॉजी के पाठ्यक्रम भी इसमें शामिल हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है कि विद्यार्थियोयं में स्कील डेवलपमेंट विकसित हो एवं वे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम लेकर रोजगार प्राप्त करें।
तालाबों और जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी से चलाया जाएगा अभियान
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तालाबों व जल स्त्रोतो के संरक्षण के लिए प्रदेश में जनभागीदारी से गतिविधियों को अभियान का रूप दिया जाएगा। इंदौर के तालाबों के साथ-साथ प्रदेश के अन्य वेटलैंड क्षेत्रों को रामसर साइट के रूप में घोषित कराने का प्रयास किया जाएगा। विश्व के सभी देशों में केवल भारत में ही देश को माता स्वरूप माना जाता है। उक्त बातें मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने विश्व वेटलैंड दिवस 2024 पर इंदौर के रामसर साईट सिरपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि संपूर्ण वसुधा हमारे लिए कुटुम्ब के समान है। हमारी संस्कृति में सभी प्रकार के जीव-जंतु, नदी-पहाड़-पर्वत में ईश्वर का स्वरूप माना गया है। पौधों में जीवन होने के तथ्य को प्रमाणित करने वाले नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना ने कहा था कि पेड़-पौधों में प्राण होने का विश्वास भारतीय मानस में सांस्कृतिक रूप से रचा-बसा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व वेटलैंड दिवस पर देश में वेटलैंड के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और वेटलैंड से प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के पदार्थ तथा उत्पादों पर लगाई गई प्रदर्शनी का फीता काटकर शुभारंभ कर प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यशवंत सागर के कमल और सिरपुर की जलकुंभी से बने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काल के प्रवाह में आई विसंगतियों के परिणामस्वरूप हमारे प्राकृतिक संसाधन प्रदूषित हुए। इंदौर में 300 साल पहले निर्मित हुआ सिरपुर तालाब पेयजल की आपूर्ति करता था। बदली जीवनशैली के परिणामस्वरूप घरों से निकलने वाले वेस्ट वॉटर के कारण हमारे कई जल स्त्रोत प्रदूषित हुए हैं। परिणामस्वरूप केवल जल ही नहीं खराब हुआ अपितु सम्पूर्ण पारस्थितिकी तंत्र में असंतुलन आया है, पेड़-पौधे-पक्षी प्रभावित हुए हैं।