देश-विदेश
केन्द्रीय कोयला तथा खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने निर्माण पोर्टल का शुभारंभ किया
जिला खनिज संस्थान/ प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों और खनन कंपनियों द्वारा समर्थित एसएचजी के उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा
नई दिल्ली | केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज शास्त्री भवन में डीएमएफ गैलरी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे भी उपस्थित थे। डीएमएफ गैलरी में जिला खनिज संस्थान/ प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और खनन कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत समर्थित स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को शास्त्री भवन परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा।
मंत्रियों ने स्वयं सहायता समूहों के साथ संवाद किया और ओडिशा के डीएमएफ क्योंझर और कोरापुट के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उनके उत्पादों की सराहना की तथा देश के विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने के लिए हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और हिंडाल्को के विशेष प्रयासों की सराहना की।
डीएमएफ क्योंझर द्वारा वित्तपोषित कृष्णा स्वयं सहायता समूह इस सप्ताह मोटे अनाज से जुड़े खाद्य पदार्थों, बीज और तसर रेशम उत्पादों का प्रदर्शन कर रहा है। वहीं डीएमएफ कोरापुट द्वारा वित्तपोषित महिमेमा स्वयं सहायता समूह इस सप्ताह लेमनग्रास, जापानी मिंट ऑयल उत्पादों का प्रदर्शन कर रहा है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा समर्थित 25 स्वयं सहायता समूह रोटेशन के आधार पर डीएमएफ गैलरी में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।
सतत खनन चार्टर अधिदेश (सस्टेनेबल माइनिंग चार्टर मैंडेट) के अनुसार, हिंडाल्को कई स्वयं सहायता समूहों को समर्थन दे रहा है, जिससे 3000 से अधिक कारीगर सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इसके तहत, कोसल - छत्तीसगढ़ कोसा बुनाई को पुनर्जीवित करना, काशी घास से बुनाई की कला के लिए एक पहल त्रिना, जिरहुल - नवीन जैल सैनिटरी नैपकिन, वंशला - बांस और काशी घास शिल्प, कठौतिया और विवर्तन - लैंटाना खरपतवार से लेकर जैव-मिश्रित कलाकृतियां सहित अन्य उत्पादों का उत्पादन हो रहा है।
खान मंत्रालय ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) (एमएमडीआर) अधिनियम, 2015 में संशोधन करके खनन से प्रभावित सभी जिलों में जिला खनिज संस्थान (डीएमएफ) की स्थापना का प्रावधान किया है। डीएमएफ का उद्देश्य खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्रों के हित और लाभ के लिए काम करना है। डीएमएफ के माध्यम से विभिन्न जिलों ने विभिन्न स्थानीय उत्पादों का उत्पादन करने वाले स्वयं सहायता समूहों की स्थापना की है।
केन्द्रीय कोयला तथा खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने निर्माण पोर्टल का शुभारंभ किया
यह योजना यूपीएससी के योग्य उम्मीदवारों को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान करेगी
इस योजना का उद्देश्य प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण उन उम्मीदवारों को 1,00,000/- रुपये (एक लाख रुपये) की सहायता प्रदान करना है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से कम है और जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला या थर्ड जेंडर से संबंधित हैं तथा सीआईएल की गतिविधियों के संचालन वाले 39 जिलों में से किसी एक के स्थायी निवासी हैं।
आवेदनों की पूर्ण पारदर्शी एवं निर्बाध जांच सुनिश्चित करने हेतु पूरी आवेदन प्रक्रिया एक ऐसे समर्पित पोर्टल के जरिए होती है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करता है।
कोयला मंत्रालय की सीपीएसई, कोल इंडिया लिमिटेड, एक ऐसी महारत्न कंपनी है जो न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है, बल्कि कोयला धारक क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉरपोरेट की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाती है।
“सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास” के जरिए “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने हेतु, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और इसकी सहायक कंपनियों ने कोयला वाले क्षेत्रों के योग्य एवं वंचित छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पेशेवर संस्थानों में प्रवेश पाने में मदद करने के लिए विभिन्न पहल की हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में जून 24 में कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
नई दिल्ली | जून 2024 के दौरान भारत का कोयला उत्पादन 84.63 मीट्रिक टन (अनंतिम) तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जो 73.92 मीट्रिक टन थी। जून 2024 के दौरान, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने 63.10 मीट्रिक टन (अनंतिम) कोयला उत्पादन हासिल किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 8.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जब यह 57.96 मीट्रिक टन था। इसके अतिरिक्त, जून 2024 में कैप्टिव/अन्य द्वारा कोयला उत्पादन 16.03 मीट्रिक टन (अनंतिम) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 55.49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जो तब 10.31 मीट्रिक टन था।
जून 2024 के दौरान भारत का कोयला डिस्पैच 85.76 मीट्रिक टन (अनंतिम) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 10.15 प्रतिशत अधिक है, जब यह 77.86 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था। जून 2024 के दौरान, सीआईएल ने 64.10 मीट्रिक टन (अनंतिम) कोयला डिस्पैच किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 60.81 मीट्रिक टन की तुलना में 5.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, जून में कैप्टिव/अन्य द्वारा कोयला डिस्पैच 16.26 मीट्रिक टन (अनंतिम) दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 43.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जो 11.30 मीट्रिक टन था।
इसके अतिरिक्त 30 जून, 2024 तक, कोयला कंपनियों के पास विद्यमान कोयले के स्टॉक में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो 95.02 मीट्रिक टन (अनंतिम) तक पहुंच गई। यह उछाल कोयला क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और दक्षता को रेखांकित करते हुए 41.68 प्रतिशत की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान, थर्मल पावर प्लांट्स (टीपीपी) में कोयले का स्टॉक भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 46.70 मीट्रिक टन (अनंतिम) हो गया, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 30.15 प्रतिशत रही।
प्रधानमंत्री के "आत्मनिर्भर भारत" के विजन के अनुरूप, कोयला मंत्रालय द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए अथक प्रयास और रणनीतिक पहल की जा रही है।
वायु सेना प्रमुख ने हैदराबाद के बेगमपेट में हथियार प्रणाली स्कूल का उद्घाटन किया
नई दिल्ली | वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने 01 जुलाई, 2024 को हैदराबाद के एयर फोर्स स्टेशन बेगमपेट में हथियार प्रणाली स्कूल (डब्ल्यूएसएस) का उद्घाटन किया। इसके साथ ही भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के इतिहास में एक नया अध्याय का शुभारंभ हुआ है। वर्ष 2022 में भारतीय वायुसेना में अधिकारियों की एक नई इकाई हथियार प्रणाली स्कूल (डब्ल्यूएसएस) को स्वीकृति देने के बाद इसकी शुरूआत हुई। भारतीय वायु सेना को भविष्योन्मुख बल के रूप में पुन: व्यवस्थित करने और समयानुसार परिवर्तित करने के उद्देश्य से, इस नए प्रशिक्षण प्रतिष्ठान का गठन हुआ है। सामान्य रूप से सशस्त्र बलों और विशेष रूप से भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
वायु सेना प्रमुख का स्वागत हथियार प्रणाली स्कूल के कमांडेंट एयर वाइस मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी ने किया। उद्घाटन समारोह में एयर मार्शल नागेश कपूर, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, प्रशिक्षण कमान और भारतीय वायुसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जिनमें एयर फोर्स अकादमी के कमांडेंट, कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर के कमांडेंट, एयर फोर्स स्टेशन (हकीमपेट) के एयर ऑफिस कमांडिंग, और एयर फोर्स स्टेशन बेगमपेट के स्टेशन कमांडर शामिल थे
हथियार प्रणाली शाखा (डब्ल्यूएसएस) प्रकृति के अनुकूल प्रभाव आधारित प्रशिक्षण प्रदान करेगा और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की आवश्यकताओं के अनुरूप नवगठित शाखा के अधिकारियों को तैयार करेगा। हथियार प्रणाली शाखा के फ्लाइट कैडेट इस संस्थान में अपने दूसरे सेमेस्टर का प्रशिक्षण लेंगे। नई शाखा में सुखोई-30 एमकेआई और सी-130जे, हवाई प्लेटफार्मों में हथियारों और प्रणालियों को संचालित करने के लिए फ्लाइंग स्ट्रीम; दूर से संचालित विमानों को संचालित करने के लिए रिमोट स्ट्रीम; सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली हथियार प्रणालियों के लिए मिशन कमांडर, ऑपरेटर और अंतरिक्ष-आधारित खुफिया और इमेजरी को संभालने के लिए इंटेलिजेंस स्ट्रीम चार धाराएँ शामिल होंगी।
वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि हथियार प्रणाली स्कूल के निर्माण के साथ, जमीन आधारित और विशेषज्ञ हथियार प्रणालियों के संचालक एक मंच पर आ जाएंगे, जिससे भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने प्रशिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे इस एक नवगठित शाखा में अग्रणी है। इस कारण वे ऐसे स्तंभ हैं जिन पर परिकल्पित प्रशिक्षण व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी है। इससे वायु सेना सुदृढ़ होगी। स्कूल के संस्थापक सदस्यों की प्रशंसा करते हुए, वायु सेना प्रमुख ने सभी कर्मियों से देश में हथियार प्रणालियों के प्रशिक्षण के लिए स्कूल को एक नोडल केंद्र के रूप में स्थापित करने का आग्रह किया।
वायु सेना प्रमुख (सीएएस) ने 08 अक्टूबर, 2022 वायु सेना दिवस परेड समारोह के दौरान हथियार प्रणाली स्कूल के गठन की घोषणा की थी।
भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री में भाग लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी थाईलैंड रवाना
नई दिल्ली | भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री के 13वें संस्करण में भाग लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी कल थाईलैंड रवाना हुई। यह अभ्यास 1 से 15 जुलाई 2024 तक थाईलैंड के टाक प्रांत के फोर्ट वाचिराप्रकन में आयोजित किया जा रहा है। इसी अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2019 में मेघालय के उमरोई में आयोजित किया गया था।
भारतीय सेना की टुकड़ी में 76 कर्मी शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से लद्दाख स्काउट्स की एक बटालियन के साथ-साथ अन्य शाखाओं और सेवाओं के कर्मी भाग ले रहे हैं। रॉयल थाईलैंड आर्मी की टुकड़ी में भी 76 कर्मी शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से 4 डिवीजन की 14 इन्फैंट्री रेजिमेंट की पहली बटालियन से हैं।
मैत्री अभ्यास का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग को प्रोत्साहन देना है। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के अन्तर्गत जंगल और शहरी वातावरण में संयुक्त उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने के लिए अभियानों को अंजाम देने में संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाएगा। यह अभ्यास उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना और संयुक्त सामरिक अभ्यास पर केंद्रित होगा।
इस दौरान किए जाने वाले सामरिक अभ्यासों में संयुक्त ऑपरेशन केंद्र का निर्माण, खुफिया और निगरानी केंद्र की स्थापना, ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम का उपयोग, लैंडिंग साइट की सुरक्षा, छोटी टीम का प्रवेश और निकासी, विशेष हेलीबोर्न ऑपरेशन, कॉर्डन और तलाशी अभियान, रूम इंटरवेंशन ड्रिल और अवैध संरचनाओं को नष्ट करना शामिल होंगे।
मैत्री अभ्यास से दोनों पक्षों को संयुक्त अभियानों के संचालन के लिए रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं में अपने सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा करने का अवसर मिलेगा। यह अभ्यास दोनों देशों के सैनिकों के बीच अंतर-संचालन और आपसी सौहार्द विकसित करने में सहायक होगा।
2022 बैच के आईएएस अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की
किसी प्रशासक के लिए सबसे अहम बात लोगों का विश्वास जीतना और उसे बनाए रखना है: आईएएस अधिकारियों से राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा
नई दिल्ली | वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिवों के पद पर तैनात 2022 बैच के आईएएस अधिकारियों के एक समूह ने आज (1 जुलाई, 2024) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि हमारे देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा एक बेहतरीन करियर माना जाता है। उन्होंने कहा कि लाखों महत्वाकांक्षी युवा आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखते हैं। उनमें से कई इस सेवा में चयन के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे सभी युवाओं में से आप ही हैं जिन्हें इस सेवा के माध्यम से नागरिकों के कल्याण के लिए काम करने का अवसर मिला है। उन्होंने मिलने पहुंचे आईएएस अधिकारियों को सलाह दी कि वे जहां भी काम करें, अपनी संवेदनशीलता, ईमानदारी और दक्षता से अपनी छाप छोड़ें।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस उच्च प्रौद्योगिकी युग में जब लोगों को देश-दुनिया की जानकारी वास्तविक समय में मिल रही है, तब अधिकारियों की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। जब तक वे किसी योजना के सामाजिक या आर्थिक लक्ष्य को प्राप्त करते हैं, तब तक लोगों की ज़रूरतें, जागरूकता और आकांक्षाएं और बढ़ चुकी होती हैं। इसलिए उन्हें ऐसी व्यवस्थाएं बनानी चाहिए जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार रहने में सक्षम बनाएं।
राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी और सतत विकास तथा हर वर्ग के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हेतु बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रशासन की कार्य संस्कृति जनभागीदारी पर आधारित होनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि संदर्भ में अधिकारियों को न केवल प्रशासक बल्कि सुविधा प्रदाता और प्रबंधक की भूमिका भी निभानी होगी। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे सबको साथ लेकर कैसे जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन प्रदान कर पाते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशासक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात लोगों का विश्वास जीतना और उसे बनाए रखना है। उन्होंने अधिकारियों को लोगों के लिए अपनी सुलभता, पारदर्शिता और विश्वास निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की सलाह दी। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों को आत्म-प्रचार के लिए प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से सोशल मीडिया का उपयोग करने से बचने की सलाह दी।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें नैतिकता के मामले में कोई समझौता नही करना चाहिए और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए शुरू से ही सतर्क और सक्रिय रहना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने के साथ-साथ अधिकारी अपने व्यक्तिगत आचरण में ईमानदारी, धार्मिकता और स्थिरता को भी बढ़ावा देंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित मानसिकता आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अधिकारी नई सोच और नए समाधानों के साथ देश के विकास को आगे बढ़ाएंगे।
मध्य प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट में लघु और सूक्ष्म उद्योगों के विकास पर भी होगी चर्चा : मुख्यमंत्री
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड बीएफएसआई कौशल विकास प्रशिक्षण के द्वारा युवाओं को सशक्त बना रहा है
नई दिल्ली | भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने अपनी सीएसआर पहल के तहत प्रमिथ फाउंडेशन कोलकाता के सहयोग से कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया, जिससे धनबाद क्षेत्र के 150 युवाओं को लाभ मिला। बीएफएसआई-क्रेडिट प्रोसेसिंग ऑफिसर पर केंद्रित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को बैंकिंग, निवेश, बीमा आदि सहित वित्तीय सेवाओं में आवश्यक कौशल से लैस करना और व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए वित्तीय कल्याण सुनिश्चित करना था।
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के सीएमडी समीरन दत्ता ने प्रतिभागियों को धनबाद के जुबली हॉल में आयोजित एक समारोह में प्रमाण पत्र और ऑफर लेटर वितरित किए। इस कार्यक्रम में बीसीसीएल के निदेशक (कार्मिक) एमके रामैया, प्रमिथ फाउंडेशन के सलाहकार प्रसेनजीत कुंडू और प्रमिथ फाउंडेशन के निदेशक स्वप्नेंदु विकास मंडल सहित बीसीसीएल के अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
आकांक्षी उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए, बीसीसीएल के सीएमडी ने कार्यक्रम के सफल समापन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने भारत के युवाओं के लिए आर्थिक कौशल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के लिए एक प्रमुख आर्थिक कौशल अनिवार्य है और यदि हमारे कार्यबल को उचित रूप से प्रशिक्षित किया जाए, तो हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में नंबर एक बनने की क्षमता रखती है। बीसीसीएल के सीएमडी ने पूरे देश के लिए कोकिंग कोल के उत्पादन में बीसीसीएल की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि बीसीसीएल भविष्य में अपने सीएसआर और सामुदायिक विकास गतिविधियों के तहत कई अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 100 प्रतिशत प्रतिभागियों को प्लेसमेंट मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल प्रशिक्षण और नौकरियों पर ही नहीं बल्कि उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी है।
960 घंटों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को रहने और खाने की सुविधा के साथ व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह पहल सभी छात्रों द्वारा सफलतापूर्वक पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ सम्पन्न हुआ। उल्लेखनीय रूप से, 100 प्रतिशत इच्छुक उम्मीदवारों को झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में विभिन्न कंपनियों में प्लेसमेंट मिला।
बीसीसीएल ने कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते इस पहल के लिए 41.74 लाख रुपए का निवेश किया। बीसीसीएल ने प्रतिभागियों से फीडबैक और अन्य महत्वपूर्ण विवरण प्राप्त करने के लिए एक वेब-पोर्टल विकसित किया है।
असम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त अवसर, केंद्र पूरी मदद करेगा - शिवराज सिंह चौहान
केंद्र सरकार किसानों और कृषि क्षेत्र के हित में असम को हर संभव सहायता प्रदान करती रहेगी- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
नई दिल्ली | केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में कृषि क्षेत्र की तीव्र प्रगति के उद्देश्य से राज्यवार चर्चा शुरू की है। इसके तहत केंद्रीय मंत्री ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। चर्चा के दौरान असम में मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, पीएमएफबीवाई, भंडारण क्षमता बढ़ाने, बागवानी आदि के साथ-साथ कृषि एवं किसान कल्याण से जुड़े कई अन्य विषयों पर चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों और कृषि क्षेत्र का हित हमारे लिए सर्वोपरि है और इसी के तहत केन्द्र सरकार असम को क्षमता निर्माण कार्यशाला और प्रशिक्षण के आयोजन पर पूरा सहयोग प्रदान करती रहेगी।
केन्द्रीय मंत्री चौहान ने असम के कृषि मंत्री बोरा से कृषि मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में चर्चा की तथा राज्य में फसल पश्चात प्रबंधन क्षमता को बढ़ाने और फसल के बाद होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की एमआईडीएच, पीएमकेएसवाई और पीएमएफएमई की योजनाओं के साथ समन्वय कर एआईएफ के अंतर्गत ड्राई स्टोरेज, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाईयों जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि असम के किसानों को केन्द्र के स्तर पर किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी, इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर काम करती रहेंगी। चौहान ने आश्वासन दिया कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय असम के विकास के लिए अपने स्तर पर पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने केन्द्र सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति के बारे में भी बताया। श्री चौहान ने कहा कि असम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के पर्याप्त अवसर हैं।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सचिव संजीव चोपड़ा सहित केन्द्र केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य के कृषि एवं बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नई दिल्ली में पारिवारिक पेंशनभोगियों की शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए विशेष अभियान का शुभारंभ
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 21,614 शिकायतों का निवारण किया, श्रम और रोजगार मंत्रालय (7324), वित्तीय सेवा विभाग (6206) और आयकर विभाग (2890) ने शिकायतों का निवारण किया
नई दिल्ली | कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह 1 जुलाई, 2024 को नई दिल्ली में पारिवारिक पेंशनभोगियों की शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए विशेष अभियान का शुभारंभ करेंगे। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने अपनी 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत 1-31 जुलाई, 2024 के दौरान पारिवारिक पेंशनभोगियों की शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए एक महीने का विशेष अभियान चलाया है, जिसमें 46 मंत्रालय/विभाग भाग ले रहे हैं। इस विशेष अभियान का उद्देश्य लंबित पारिवारिक पेंशन शिकायतों में पर्याप्त कमी लाना है। इस कार्यक्रम में पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभागों के सचिव, पूर्व सैनिक कल्याण, डीजी बीएसएफ, लेखा महानियंत्रक, उप प्रबंध निदेशक, भारतीय स्टेट बैंक के साथ-साथ 46 मंत्रालयों/विभागों के नोडल लोक शिकायत अधिकारी, सभी पेंशन वितरण बैंकों के प्रतिनिधि और पेंशनभोगी कल्याण संघों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
वर्तमान में, केंद्रीकृत पेंशन शिकायत और निवारण प्रणाली (सीपीई एनजीआरएएमएस) पर प्रति वर्ष लगभग 90,000 मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पोर्टल (URL: www.pgportal.gov.in/PENSION/) पर आवेदक द्वारा सीधे या डीओपीपीडब्ल्यू द्वारा ई-मेल, डाक या टोल फ्री नंबर 1800-11-1960 के माध्यम से विवरण प्राप्त होने पर, शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। कुल शिकायतों में से, पारिवारिक पेंशन शिकायत के मामले लगभग 20-25 प्रतिशत हैं। पारिवारिक पेंशनभोगियों की ज्यादा शिकायतें महिला पेंशनभोगियों द्वारा की गई हैं । विशेष अभियान में निपटाए जाने वाले पारिवारिक पेंशन संबंधी शिकायतों को सीपीई एनजीआरएएमएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में से चुना गया है। अभियान के दौरान निवारण के लिए 46 मंत्रालयों/विभागों/संगठनों से संबंधित कुल 1891 (15.06.2024 तक) पारिवारिक पेंशन संबंधी शिकायतों की पहचान की गई है। अधिकांश शिकायतें रक्षा पेंशनभोगियों, रेलवे पेंशनभोगियों और गृह मंत्रालय के तहत सीएपीएफ पेंशनभोगियों से संबंधित हैं। बैंक से संबंधित मामले भी बड़ी संख्या में हैं। डीओपीपीडब्ल्यू, संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग/संगठन की निगरानी कर और उन्हें मिशन मोड पर शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए सभी सहायता प्रदान करेगा। मंत्रालय/विभाग ट्वीट और पीआईबी वक्तव्यों के माध्यम से सफल कहानियों को बताएंगे। डीओपीपीडब्ल्यू ने अभियान की सफलता के लिए एक हैशटैग यानी #स्पेशलकैंपेनफैमिलीपेंशन बनाया है।
प्रधानमंत्री ने हूल दिवस के अवसर पर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे जनजातीय नायकों को ब्रिटिश साम्राज्य के अत्याचारों के खिलाफ उनके स्वाभिमान और पराक्रम के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की है। मोदी ने कहा कि हूल दिवस हमारे आदिवासी समाज के अप्रतिम साहस, संघर्ष और बलिदान को समर्पित एक महान अवसर है।
“हूल दिवस हमारे आदिवासी समाज के अप्रतिम साहस, संघर्ष और बलिदान को समर्पित एक महान अवसर है। इस पावन दिवस पर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे जनजातीय वीर-वीरांगनाओं को मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। ब्रिटिश साम्राज्य के अत्याचार के खिलाफ उनके स्वाभिमान और पराक्रम की कहानियां देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।”
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने थल सेना प्रमुख का पदभार संभाला
नई दिल्ली | जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम ने जनरल मनोज पांडे, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी से 30वें थल सेना प्रमुख (सीओएएस) के रूप में पदभार ग्रहण किया, जो आज (30 जून 2024) राष्ट्र की चार दशकों से अधिक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी एक निपुण सैन्य नेता हैं, जिन्होंने सशस्त्र बलों में 40 वर्षों की सेवा की है। जनरल द्विवेदी सैनिक स्कूल, रीवा (मध्य प्रदेश) के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्हें 1984 में जम्मू और कश्मीर राइफल्स की रेजिमेंट में कमीशन दिया गया था। जनरल द्विवेदी के पास विभिन्न परिचालन वातावरण में उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी थिएटरों में संतुलित कमान के साथ-साथ स्टाफ एक्सपोजर का एक अनूठा अनुभव है।
उन्होंने ऐसे समय में थल सेना प्रमुख का पदभार संभाला है, जब वैश्विक भू-रणनीतिक माहौल गतिशील बना हुआ है, तकनीकी प्रगति और आधुनिक युद्ध के लगातार बदलते स्वरूप के कारण सुरक्षा क्षेत्र में चुनौतियाँ और भी स्पष्ट होती जा रही हैं। इसलिए एक उभरते राष्ट्र के लिए सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने हेतु परिचालन संबंधी तैयारियाँ, थल सेना प्रमुख के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में प्रमुखता से उभरेंगी। साथ ही, बेशुमार गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए एक केंद्रित प्रतिक्रिया रणनीति भी राष्ट्र की रक्षा को बढ़ाने की दिशा में प्राथमिकता होगी। जनरल द्विवेदी अपने साथ अनुभव का खजाना और अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए प्रभावी ढंग से योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने का सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड लेकर आए हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा कैनवास में ग्रे ज़ोन अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जनरल ऑफिसर को सुरक्षा क्षेत्र में आधुनिक और उभरती हुई तकनीकों की गहरी समझ है, और परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए सैन्य प्रणालियों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग और एकीकरण करने का एक विचारशील दृष्टिकोण रखते हैं। यह दृष्टिकोण भारतीय सेना द्वारा आत्मनिर्भरता के माध्यम से अपने आधुनिकीकरण और क्षमता विकास की जरूरतों को पूरा करने के चल रहे प्रयास के अनुरूप है। उनका उद्देश्य देश की जीवंत, सक्षम और उत्पादक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाकर महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ाना होगा।
चेटवुड आदर्श वाक्य के दृढ़ विश्वासी और अनुयायी, जनरल विश्वास की संस्कृति को बढ़ावा देने, जूनियर अधिकारियों के सशक्तीकरण, सैनिकों की भलाई और दिग्गजों और वीर नारियों के कल्याण पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे।
जीतन राम मांझी ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा संचालित योजनाओं/कार्यक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा की
नई दिल्ली | केन्द्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी और एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा देश में खादी एवं ग्राम उद्योग (केवीआई) क्षेत्र के विकास के लिए संचालित योजनाओं/कार्यक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा की। इस अवसर पर एमएसएमई मंत्रालय और केवीआईसी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
केन्द्रीय मंत्री ने केवीआई क्षेत्र को बढ़ावा देने और खादी कारीगरों को समर्थन देने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन पर केन्द्रित दृष्टिकोण के माध्यम से प्रयासों को गहन और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के दूसरे पर्वतारोहण अभियान ‘विजय’ के सफलतापूर्वक लौटने पर नई दिल्ली में स्वागत किया
केन्द्रीय गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन उपकरण और फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, प्रदर्शनी में NDRF कर्मियों द्वारा अभियानों में प्रयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों को दर्शाया गया है
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अब आपदा प्रबंधन के लिए राहत-केन्द्रित अप्रोच नहीं बल्कि ज़ीरो कैजुअल्टी अप्रोच को अपनाया जा रहा है
डायल 112 हो, मौसम, दामिनी, मेघदूत इस तरह की मोबाइल एप्लीकेशन हो या अर्ली वार्निंग का सिस्टम हो... मोदी सरकार हर तरह से NDRF को वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करवा रही है
विजय की आदत ही व्यक्ति और बल दोनों को महान बनाती है
देश ही नहीं बल्कि दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आती है तो सभी लोग NDRF की तरफ देखते हैं
कितनी भी विपरीत परिस्थिति हो NDRF की ड्रेस में अगर जवान वहाँ पर खड़ा है तो, आपदा में फँसे लोगों का हौंसला अनेक गुना बढ़ा जाता है
नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने NDRF के दूसरे पर्वतारोहण अभियान ‘विजय’ के 21625 फुट ऊंचे माउंट मणिरंग पर सफल पर्वतारोहण से लौटने पर आज नई दिल्ली में स्वागत किया।
गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन उपकरण और फोटो प्रदर्शनी का भ्रमण भी किया। इस प्रदर्शनी में NDRF कर्मियों द्वारा अभियानों में प्रयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों को दर्शाया गया है। भारत और तुर्की में आपदा प्रबंधन अभियानों में शामिल रहे बचाव दलों के लीडर्स द्वारा गृह मंत्री को प्रदर्शनी के बारे में बताया गया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने बाढ़ के दौरान बचाव अभियान, भूस्खलन, ढांचों के मलबे में खोज एंव बचाव अभियान, कैमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल न्यूक्लियर रिस्पॉंस मैकेनिज़्म (CBRN), पर्वत बचाव अभियान, बोरवैल बचाव अभियान और तूफान प्रतिक्रिया आदि के बारे में विस्तार से जाना। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव और एनडीआरएफ के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
21625 फुट ऊँचे माउंट मणिरंग पर सफल अभियान के लिए NDRF के जवानों की सरहना करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि इतनी ऊंचाई पर जाने के लिए अदम्य साहस दिखाने का फैसला करने वाले हमारे जवानों के ऐसे कठिन अभियानों से व्यक्ति और बल दोनों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कठिन अभियानों से लक्ष्य को सिद्ध करने, विजय प्राप्त करने और अकल्पनीय कठिनाइयों को पार कर लक्ष्य तक पहुंचने की आदत पड़ती है। शाह ने कहा कि विजय की आदत ही व्यक्ति और बल को महान बनाती है और ये व्यक्ति के जीवन में सत्मार्ग पर चलने, विजयी बनने और विश्वास में वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत होती है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज इस अभियान में कुछ जवानों ने सफलता प्राप्त की है लेकिन सही मायनों में यह पूरे NDRF की सफलता है। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने सिर्फ मणिरंग पर्वत की ऊंचाई पर विजय प्राप्त नहीं की है, बल्कि पूरे बल के हौंसले को बढ़ाने का काम किया है। गृह मंत्री ने कहा कि पर्वतारोहण सिर्फ एक स्किल नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है और इस कला को सिद्धहस्त करना पूरे जीवन के लिए एक शिक्षा बनता है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने अभियान ‘विजय’ में सफलता प्राप्त करने वाले 35 जवानों और NDRF के महानिदेशक को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी। शाह ने कहा कि इन जवानों द्वारा 21600 फुट से अधिक की ऊंचाई पर तिरंगा फहराना पूरे बल के लिए बहुत बड़ी सिद्धि का परिचायक रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमें सफलता के शिखर पर पहुंचना है तो जीवनभर सातत्यपूर्ण लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करना होता है, तभी सफलता मिलती है।
अमित शाह ने कहा कि एक ज़माने में भारत में आपदा को लेकर हमारा दृष्टिकोण सिर्फ राहत-केन्द्रित था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अब आपदा प्रबंधन के लिए राहत-केन्द्रित अप्रोच नहीं बल्कि ज़ीरो कैजुअल्टी अप्रोच को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने से संबंधित अप्रोच के मामले में ये हमारी बहुत बड़ी यात्रा रही है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 10 साल के कार्यकाल में आपदा से निपटने के लिए दुनियाभर की बेस्ट प्रैक्टिसिस को हमने भारत में ज़मीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग, बल का हौंसला बढ़ाने, बल का गठन करने, बल की पर्याप्त संख्या, इतने बड़े देश में हर जगह बल के जवानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपदा के आंकलन के लिए अग्रिम सूचना के माध्यम से NDRF और NDMA का एक विजयी गठजोड़ बनाने का काम मोदी सरकार के इन 10 साल में हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश या दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आती है तो सभी लोग NDRF की तरफ देखते हैं। शाह ने कहा कि एनडीआरएफ के जवानों को देखकर आपदा में फंसे लोगों का हौंसला कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस पर्वतारोहण अभियान में सफलता प्राप्त करने के लिए हमारे 35 जवानों ने पल-पल जागरूकता के साथ अपने आप को लक्ष्य के साथ जोड़ा है, उसी प्रकार हमारे बल को ज़ीरो कैजुअल्टी के लक्ष्य के साथ स्वयं को जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपलब्धि कभी संतुष्टि का कारण नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसे और कठिन लक्ष्य तय करने का कारण बनना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि तुर्की हो या सीरिया, बिपॉरजॉय हो या मिचुआंग, रोपवे की घटना हो या पर्वतारोहियों को बचाना, सुरंग की घटना हो या जापान का ट्रिपल डिज़ास्टर या फिर नेपाल का भूकंप, जहां भी NDRF कर्मी गए हैं वहां एक अच्छी शुरूआत करके वापस लौटे हैं और ये पूरे देश के लिए बहुत ही गर्व की बात है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भविष्य़ में जलवायु परिवर्तन के कारण सभी जगह हिमस्खलन, भूस्खलन, बाढ़ और तूफान जैसे खतरे बढ़ने वाले हैं औऱ इसे ध्यान में रखते हुए हमें विज्ञान का सहारा लेकर ज़ीरो कैज़ुअल्टी के लक्ष्य की ओर दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अभी भी जंगल में लगने वाली आग जैसे कई क्षेत्रों में अपनी कार्यकुशलता को बढ़ाने के साथ ही परिणाम भी लाने हैं। गृह मंत्री ने कहा कि जंगल की आग के समय सिर्फ मानव जीवन बचाना हमारा एकमात्र उद्देश्य नहीं है, बल्कि जंगलों का बचाव कैसे हो और हम ऐसा क्या कर सकते हैं कि आग लगे ही नहीं, इसके लिए दुनियाभर में होने वाले प्रयोगों को ज़मीन पर उतारना पड़ेगा। शाह ने यह भी कहा कि बादल फटने से आने वाली बाढ़ के लिए हमें अपने आप को और अधिक तैयार करने की ज़रूरत है।
लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद
लद्दाख में न्योमा-चुशुल क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शनिवार तड़के एक टी-72 टैंक में नदी पार करते समय सेना के 5 जवान नदी में बह गए। नदी में डूबने से 5 जवान बलिदान हुए।
टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद, नदी पार करते समय अचानक बढ़ा जलस्तर..
डेस्क | लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद हो गए। यह दुर्घटना शनिवार की सुबह करीब 1 बजे की है। दरअसल, यहा टैंक अभ्यास के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। जिसमें सेना के जवान फंस गए। इस हादसे में सेना के 5 जवान शहीद हो गए।
रक्षा अधिकारी ने बताया कि, लद्दाख में न्योमा-चुशुल क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शनिवार तड़के एक टी-72 टैंक में नदी पार करते समय सेना के 5 जवान नदी में बह गए। नदी में डूबने से 5 जवान बलिदान हुए। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना मंदिर मोड़ के पास देर रात करीब 1 बजे अभ्यास के दौरान हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि टी-72 टैंक, जिसमें कई सैनिक सवार थे। जब वे नदी पार कर रहे थे तो अचानक आई बाढ़ के कारण डूब गए। जेसीओ सहित पांच जवानों की मौत हो गई। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। पांचों जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं। जो जवान बलिदान हुए हैं, उनकी पहचान कर ली गई है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लद्दाख हादसे पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि दुख के इस घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर लिखा, 'लद्दाख में नदी पार कराते समय हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में हमारे पांच बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से मुझे गहरा दुख हुआ है...शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। दुख की इस घड़ी में राष्ट्र उनके साथ खड़ा है।'
आज से शुरू हुई : पवित्र अमरनाथ यात्रा
सनातन धर्म में अमरनाथ यात्रा पवित्र तीर्थस्थल है | इस यात्रा का समापन सावन पूर्णिमा को होता है | यात्रा में अधिक संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं |
नई दिल्ली | आज यानी 29 जून 2024 से अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हो गई है। सनातन धर्म में अमरनाथ यात्रा का बेहद खास महत्व बताया गया है। यह तीर्थ स्थान सबसे पवित्र माना जाता है। इस यात्रा में शिव भक्त अधिक संख्या में शामिल होते हैं। खराब मौसम होने के बाद भी श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अमरनाथ गुफा में बने शिवलिंग के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस यात्रा को करने से 23 तीर्थों का पुण्य की प्राप्ति होती है। पुराणों में जिक्र किया गया है कि काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य तीर्थ से हजार गुना अधिक पुण्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करने से मिलता है। यह भी मान्यता है कि यात्रा को करने से जातक को सभी रोगों और पापों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसलिए कठिन रास्तों के बाद शिव भक्त अमरनाथ यात्रा में शामिल होते हैं। यात्रा करने से श्रद्धालुओं को महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
सभी जरूरी डॉक्यूमेंट अपने पास जरूर रखें। इस तरह होता है शिवलिंग का निर्माणसमुद्र तल से 3978 मीटर की ऊंचाई पर अमरनाथ गुफा में शिव जी की शिवलिंग स्थित है। पवित्र गुफा 90 फीट लंबी और 150 फीट ऊंची है। ऐसी मान्यता है कि गुफा में जल की बूंद टपकती है, जिसकी वजह से शिवलिंग बनता है। चंद्रमा के घटने बढ़ने के साथ बर्फ से बने शिवलिंग के आकार में परिवर्तन होता है और अमावस्या तक शिवलिंग धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।
हर साल अमरनाथ की यात्रा की शुरुआत आषाढ़ माह से होती है, जिसका समापन रक्षाबंधन पर होती है। ऐसे में इस साल अमरनाथ यात्रा का आरंभ आज यानी 29 जून से हो गया है और 19 अगस्त को समाप्त होगी।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दश, ऋषि कश्यप और उनके पुत्र का वास कश्मीर घाटी में था। मान्यता है कि एक बार कश्मीर घाटी पूरी तरह से जलमग्न हो गई। इससे झील का रूप ले लिया। इसके पश्चात इसके पानी को ऋषि कश्यप ने कई नदियों के द्वारा बहा दिया। उस दौरान भृगु ऋषि हिमालय पर्वत की यात्रा के लिए वहां से निकले, तो घाटी में जल स्तर कम हुआ और उन्होंने सबसे पहले अमरनाथ यात्रा की पवित्र गुफा में विराजमान बर्फ के शिवलिंग को देखा। तभी से यह पवित्र जगह शिव जी की पूजा और यात्रा का देवस्थान बन गया। मान्यता है कि यहां पर देवों के देव महादेव ने तपस्या की थी।
'रद्द उड़ानों का पूरा रिफंड सुनिश्चित करने अथवा वैकल्पिक मार्ग का टिकट उपलब्ध कराने के लिए 24/7 वॉर रूम स्थापित किया जाएगा'