देश-विदेश
6 राज्यों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, छत्तीसगढ समेत इन राज्यों में जानलेवा हुई गर्मी
नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में भीषण और चिलमिलाती धूप पड़ रही है। छत्तीसगढ़ में गर्मी का कहर अब जानलेवा साबित हो रहा है। कांकेर जिले के विकासखंड चारामा के ग्राम कहाडगोदी में लगे डामर प्लांट में एक ट्रक ड्राइवर की लू लगने से मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। वही, हीटवेव और गर्मी का टॉर्चर राजस्थान में अभी भी जारी है। यहां का तापमान 50 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है।
छत्तीसगढ में भीषण गर्मी तो अप्रैल माह से ही शुरू हो गई थी। मई में तो इस भीषण गर्मी में घर से निकलना तक दूभर हो चुका था, लेकिन नौतपा की गर्मी ने तो सबका हाल बेहाल कर दिया। रविवार को नौतपा का आखिरी दिन है। मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में लू चलने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में लू चलने की संभावना है।
कांकेर जिले के विकासखंड चारामा के ग्राम कहाडगोदी में लगे डामर प्लांट में एक ट्रक ड्राइवर की लू लगने से मौत हो गई। मृतक निसार अहमद पिता स्व. निजामुद्दीन 33 वर्ष निवासी सरबाजपुर थाना लीलापुर जिला प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश का निवासी था, जो कि 31 मई को विशाखापट्नम ट्रक टैंकर में डामर भरकर कहाडगोदी डामर प्लांट में खाली करने आया था। ट्रक से उतरते ही उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसे चारामा अस्पताल लाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। मृत होने का मुख्य कारण डाक्टर ने लू बताया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 जून को हरियाणा और पंजाब में भीषण लू चलने की संभावना है। इसके अलावा, आईएमडी ने 2 जून को दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा में लू चलने की चेतावनी दी है, जबकि 3 जून तक उत्तराखंड और झारखंड में भी लू चलेगी। राजस्थान में 4 और 5 जून को लू चलने की संभावना है।
इसके साथ, मौसम विभाग ने 2 जून को अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और केरल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अरब सागर और बंगाल की खाड़ी लक्षद्वीप की ओर बढ़ने के कारण अगले दो दिनों में इसके केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु पर असर देखने को मिलेगा। आईएमडी ने 8 जून तक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और त्रिपुरा में हल्की बारिश, बिजली और तेज हवाएं चलने का अनुमान लगाया है।
बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और गोवा में 6 जून तक और महाराष्ट्र में 5 जून तक बारिश हो सकती है। इसके अलावा, मौसम बुलेटिन के अनुसार, 2 जून को ओडिशा में भारी बारिश होने की संभावना है।
पंजाब के श्री फतेहगढ़ साहिब में 2 मालगाड़ियों की टक्कर, पटरी से उतरकर पलट गया इंजन
डेस्क | पंजाब के श्री फतेहगढ़ साहिब में रविवार सुबह सरहिंद के माधोपुर के पास दो मालगाड़ीयों की आपस में टक्कर हो गईं। इस हादसे में दो लोको पायलट घायल हो गए। घायलों को श्री फतेहगढ़ साहिब स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घायल लोको पायलटों की पहचान विकास कुमार और हिमांशु कुमार के रुप में हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले हैं।
लोकसभा चुनाव के सात चरणों का मतदान सम्पभन्नव, दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया
सातवें चरण में 8.45 बजे तक 59.45 प्रतिशत मतदान
सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी मतदान पूरा
आयोग ने मतदाताओं और सभी हितधारकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया
ग्रेट निकोबार की शोम्पेन जनजाति ने पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग लिया
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर के 102 गांवों में भी मतदान केन्द्र बनाए गए थे और वहां अभूतपूर्व मतदान हुआ
नई दिल्ली | 18वीं लोकसभा के लिए सातवें और अंतिम चरण के शांतिपूर्ण मतदान के साथ आम चुनाव आज संपन्न हो गया। चुनाव 2024 के सातवें चरण के लिए 57 संसदीय क्षेत्रों में मतदान हुआ, जिसमें रात 8.45 बजे तक लगभग 59.45 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।
ओडिशा में संसदीय क्षेत्रों के साथ-साथ 42 विधानसभा क्षेत्रों के लिए भी मतदान हुआ। सातवें चरण के समापन के साथ ही 2024 के आम चुनाव के लिए मतदान पूरा हो गया है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश और ओडिशा की राज्य विधानसभाओं के चुनावों के लिए भी मतदान पूरा हो गया है।
लोकसभा 2024 के आम चुनाव और आंध्र प्रदेश व ओडिशा की राज्य विधानसभाओं के लिए मतों की गिनती 4 जून, 2024 को निर्धारित है। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की राज्य विधानसभाओं के चुनावों के लिए मतों की गिनती 2 जून, 2024 को होगी।
भारत के निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं, मतदान कर्मियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों, स्वयंसेवकों, भारतीय रेलवे व वायुसेना सहित सभी हितधारकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस विशाल प्रक्रिया को एक शानदार सफलता बनाने में योगदान दिया।
देश भर में सात चरणों में मतदान सुचारु रूप से और शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। सीईसी राजीव कुमार के नेतृत्व में आयोग ने ईसी ज्ञानेश कुमार और डॉ. सुखबीर सिंह संधू के साथ सात चरण के आम चुनावों के दौरान मतदान प्रक्रिया के हर पहलू पर कड़ी नजर रखी। मतदाताओं को बिना किसी डर या धमकी के वोट डालने के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय किए गए थे। सावधानीपूर्वक अग्रिम योजना और चुनाव अधिकारियों के कठोर प्रशिक्षण के साथ, इस बार के चुनावों में पुनर्मतदान की संख्या में भारी कमी देखने को मिली।
सात चरणों में हुए इन चुनावों में सफलता की अनगिनत कहानियां सामने आई हैं। पहले चरण में मतदान शुरू होने के बाद से ही देश भर के मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिली, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके विश्वास और भरोसे की जानकारी मिली। महिलाओं, युवाओं, पीवीटीजी, थर्ड जेंडर, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज के सभी वर्गों और आयु समूहों के मतदाताओं ने चुनाव के पर्व में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन चुनावों में महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। पांचवें और छठे चरण में महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा।
लोकसभा चुनावों के इतिहास में पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर शुरू की गई घर से मतदान की सुविधा ने लोकतंत्र को उन लोगों के घरों तक पहुंचा दिया, जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं। 85 वर्ष से अधिक आयु के अनेक मतदाताओं और 40 प्रतिशत तक की दिव्यांगता वाले लोगों ने अपने घर से मतदान करने का विकल्प चुना।

जम्मू और कश्मीर में 58.58 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले 35 वर्षों में सबसे अधिक है। कश्मीर घाटी में 51.05 प्रतिशत मतदान हुआ, जो घाटी में हुए 3 संसदीय क्षेत्रों में पिछले चुनावों की तुलना में 30 अंकों से ज़्यादा की भारी वृद्धि है। यह उपलब्धि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता का प्रमाण है और मतदाताओं द्वारा मतपत्र की शक्ति में व्यक्त किए गए भरोसे की पुष्टि करती है।
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर के 102 गांवों में भी मतदान केन्द्र बनाए गए थे और वहां अभूतपूर्व मतदान हुआ। बस्तर संसदीय क्षेत्र में बिना किसी हिंसा के मतदाताओं की 68.29 प्रतिशत की उल्लेखनीय संख्या देखने को मिली और गोली पर मतपत्र की शानदार जीत हुई। उत्तरी छत्तीसगढ़ में सरगुजा संसदीय क्षेत्र के 126 गांवों और 199 बस्तियों के 140 मतदान केन्द्रों में भारी मतदान हुआ, जिसमें पहाड़ी कोरबा की महत्वपूर्ण पीवीटीजी आबादी है।
भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों की ताकत अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह में मतदाताओं की भारी संख्या को देखने से परिलक्षित हुई। इन दोनों केन्द्र शासित प्रदेशों में पहले चरण में मतदान हुआ। अंडमान और निकोबार में 64.10 प्रतिशत मतदान हुआ। ग्रेट निकोबार की शोम्पेन जनजाति ने पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग लिया। लक्षद्वीप में भी 84.16 प्रतिशत मतदान देखने को मिला। इससे पता चलता है कि मुख्य भूमि से दूर रहते हुए भी इन द्वीपों के लोगों का विश्वास और भरोसा मुख्य भूमि में रहने वालों के समान ही मजबूत है।
सीविजिल पर 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का 100 मिनट के भीतर समाधान किया गया, जिससे अभियान की अव्यवस्था और शोर कम हो गया क्योंकि नागरिकों ने चुनाव से धन और बाहुबल को बाहर निकालने की जिम्मेदारी ले ली। पहले आओ पहले पाओ के सिद्धांत के आधार पर, सुविधा मंच ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा रैलियों, मैदानों, हॉल आदि के लिए अनुमति मांगने के लिए विभिन्न श्रेणियों के 78 प्रतिशत से अधिक अनुरोधों का पारदर्शी और समय पर अनुमोदन सुनिश्चित किया।
बिहार, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश हैं जहां इस अंतिम चरण में मतदान हुआ। कुल 904 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे।
रात 8.45 बजे तक 59.45 प्रतिशत मतदान के अनुमानित आंकड़े निर्वाचन आयोग के वोटर टर्नआउट ऐप पर राज्य/पीसी/एसी के अनुसार अपडेट किए जाते रहेंगे। राज्य/पीसी/एसी के अनुसार यह आंकड़ों के अलावा चरणवार समग्र आंकड़े भी देगा। आयोग हितधारकों की सुविधा के लिए लगभग 23.45 बजे मतदान के आंकड़ों के साथ एक और प्रेस नोट जारी करेगा।
पूरी-सब्जी बेचने वाले के यहां GST का छापा, कमाई जानकर उड़ जाएंगे आपके होश
नईदिल्ली। दिल्ली से लगे एनसीआर के गाजियाबाद के मालीवाड़ा चौक पर सैंय्या जी पूरी-सब्जी वाले की फेमस दुकान है। यूपी राज्यकर विभाग की टीम ने टैक्स चोरी को लेकर दुकान और घर पर छापा मारा। इस दौरान छापे में 17.85 लाख रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। इस छापे के लिए जीएसटी टीम को करीब एक महीने लग गए। इसके लिए टीम द्वारा एआई टूल्स का भी इस्तेमाल किया गया।
इस छापेमारी को लेकर जीएसटी विभाग के अपर आयुक्त दिनेश मिश्रा ने बताया कि टीम द्वारा कंपाउंड स्कीम की जांच के लिए एसओपी जारी हुआ है। एसओपी के नियमों पर एआई टूल्स का प्रयोग करते हुए जीएसटी टीम ने गाजियाबाद के मालीवाड़ा चौक स्थित सैंया जी पूरी वाले को चिह्नित किया। चिह्नित करने के करीब 1 महीने बाद पाया गया कि सैंया जी पूरी वाले एसओपी स्कीम के मानको पर सही नहीं हैं।
गाजियाबाद के फेमस सैंया जी पूरी वाले के यहां पड़े छापा करीब 10 घंटे तक चला। गुरुवार को पड़े छापे में पहले डेटा एनालिसिस में ढेरों कमी पाई गई थी। जिसके बाद एसआईबी द्वारा फर्म पर छापेमारी हुई। जिसके बाद आठ अधिकारियों की टीम ने सैंया जी पूरी सब्जी वाले के यहा छापा मारा। जहां कंपाउंड स्कीम की आड़ में दुकानदार कम टैक्स दे रहा था। छापेमारी के बाद जब सभी आंकड़ों को मिलाया गया तो पता चला कि 17.85 लाख रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई।
मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र और ड्राइविंग स्कूलों के बारे में स्पष्टीकरण
नई दिल्ली | मीडिया के प्रसारित की जा रही खबरों के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि नियम 31बी से 31जे जो मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्रों (एडीटीसी) के प्रावधान निर्धारित करते हैं को केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर), 1989 में जीएसआर 394(ई) के माध्यम से दिनांक 07.06.2021 को डाले गए थे और 01.07.2021 से लागू हैं, में 01.06.2024 से किसी भी बदलाव की परिकल्पना नहीं की गई है।
यह भी दोहराया जाता है कि मोटर यान (एमवी) अधिनियम, 1988 की धारा 12 मोटर वाहनों के ड्राइविंग में निर्देश देने के लिए स्कूलों या प्रतिष्ठानों के लाइसेंस और विनियमन का प्रावधान करती है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित निकाय द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों या प्रतिष्ठानों के लिए उपधारा (5) और (6) को सम्मिलित करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 संशोधित किया गया था।
ऐसे एडीटीसी के लिए मान्यता राज्य परिवहन प्राधिकरण अथवा केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के नियम 126 में संदर्भित किसी परीक्षण एजेंसी की सिफारिशों पर केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी प्राधिकृत एजेंसी द्वारा प्रदान किया जा सकता है। सीएमवीआर, 1989 के नियम 31ई के उप-नियम (iii) के तहत पाठ्यक्रम (फॉर्म 5 बी) के सफल समापन पर एडीटीसी द्वारा जारी प्रमाण पत्र सीएमवीआर, 1989 के नियम 15 के उप-नियम (2) के के परंतुक तहत ड्राइविंग टेस्ट की आवश्यकता से ऐसे प्रमाण पत्र धारक को छूट देता है।
सीएमवीआर, 1989 के नियम 24 के तहत स्थापित अन्य प्रकार के ड्राइविंग स्कूल, जिनकी आवश्यकता एडीटीसी की तुलना में कम सख्त है, वे भी सीएमवीआर, 1989 के नियम 27 के उप-नियम (डी) के माध्यम से पाठ्यक्रम (फॉर्म 5) के सफल समापन पर एक प्रमाण पत्र जारी करते हैं। तथापि, यह प्रमाणपत्र सीएमवीआर, 1989 के नियम 15 के उप-नियम (2) के परंतुक के अंतर्गत ड्राइविंग टेस्ट की आवश्यकता से इसके धारक को छूट नहीं देता है।
सीएमवीआर, 1989 के नियम 14 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन फॉर्म 5 या फॉर्म 5 बी के साथ होना आवश्यक है, जैसा लागू हो।
उपर्युक्त पैरा 3 में उल्लिखित ड्राइविंग टेस्ट की आवश्यकता से छूट के बावजूद, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की शक्ति लाइसेंसिंग प्राधिकारी के पास होगी।
बिजली की अधिक मांग के बावजूद तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता है
नई दिल्ली | देश में बिजली की काफी अधिक मांग के बावजूद तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार 45 मीट्रिक टन से अधिक है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। यह भंडार 19 दिनों की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। मई, 2024 के दौरान तापीय विद्युत संयंत्रों में औसत दैनिक कमी केवल 10,000 टन प्रतिदिन रही है। यह कोयले की आपूर्ति के लिए सुचारु और पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के कारण संभव हो पाया है। विद्युत मंत्रालय, कोयला मंत्रालय, रेल मंत्रालय और बिजली उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों वाले उप-समूह की व्यवस्था कुशल आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में अपनी प्रभावी भूमिका निभा रही है।
कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक है। खान पिट-हेड में कोयले का भंडार 100 मीट्रिक टन से अधिक का है। इसके परिणामस्वरूप विद्युत क्षेत्र के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध है। रेल मंत्रालय ने रेलवे रेकों की दैनिक उपलब्धता पर 9 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी सुनिश्चित की है। इसके अलावा तटीय पोत परिवहन के माध्यम से निकासी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है क्योंकि, पारंपरिक रूप से कोयले का परिवहन केवल पारादीप बंदरगाह के माध्यम से ही किया जाता था। अब कोयला लॉजिस्टिक्स नीति के अनुसार उचित समन्वय के परिणामस्वरूप धामरा और गंगावरण बंदरगाहों के माध्यम से भी कोयले की निकासी संभव हो गई है। वहीं, रेल नेटवर्क में बुनियादी ढांचे के विस्तार ने सोन नगर से दादरी तक रेकों की तीव्र आवाजाही में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके परिणामस्वरूप इसके टर्नअराउंड समय में 100 फीसदी से अधिक का सुधार देखा गया है।
कोयला मंत्रालय मॉनसून मौसम के दौरान तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आशा है कि 1 जुलाई, 2024 तक इन संयंत्रों में 42 मीट्रिक टन से अधिक कोयला उपलब्ध रहेगा।
पुरानी केंद्रीय जेल स्थित मतगणना स्थल का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने किया निरीक्षण
भोपाल। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (मध्यप्रदेश) अनुपम राजन ने 1 जून को भोपाल के पुरानी केंद्रीय जेल स्थित मतगणना स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने तेज गर्मी के मद्देनजर मतगणना स्थल पर कूलर, पंखे, ठंडा पानी, मेडिकल किट, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। लोकसभा निर्वाचन-2024 अंतर्गत 4 जून को भोपाल लोकसभा क्षेत्र में जिले के 7 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना होगी।
राजन ने विधानसभावार बनाए गए मतगणना कक्षों में जाकर तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को भी देखा। मतगणना टेबल, मतगणना कार्य में संलग्न अधिकारी/कर्मचारियों की संख्या तथा सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। साथ ही कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। मतगणना स्थल परिसर में रूके हुए निर्वाचन अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि से चर्चा की। प्रतिनिधियों ने स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। सीसीटीवी से स्ट्रांग रूम की मॉनीटरिंग संबंधी व्यवस्था को देखा। उन्होंने मीडिया सेंटर में टीवी, कम्प्यूटर, इंटरनेट, पानी, कूलर आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
राजन ने बताया कि 4 जून को प्रदेश के सभी 29 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से मतगणना कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है। मतगणना के दौरान सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। मतगणना के बाद भी शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकार ने बताया कि 4 जून को होने वाली मतगणना के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मध्य प्रदेश में 116 मतगणना प्रेक्षक नियुक्त किए गए हैं। ये प्रेक्षक अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इनकी निगरानी में मतगणना की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी। सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होगी।
मेजर जनरल हर्ष छिब्बर ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद के कमांडेंट का पदभार ग्रहण किया
नई दिल्ली | मेजर जनरल हर्ष छिब्बर ने 31 मई, 2024 को रियर एडमिरल संजय दत्त से सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट के कमांडेंट का पदभार ग्रहण कर लिया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र रहे मेजर जनरल हर्ष छिब्बर को दिसंबर, 1988 में सैन्य सेवा कोर में कमीशन प्राप्त हुआ था।
मेजर जनरल हर्ष छिब्बर पब्लिक पॉलिसी में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की डिग्री के साथ-साथ बिजनेस मैनेजमेंट एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में दो एमफिल की डिग्रियों के धारक भी हैं। उन्होंने तकनीकी स्टाफ अधिकारी पाठ्यक्रम (टीएसओसी), उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम (एचडीएमसी) और लोक प्रशासन में उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम (एपीपीपीए) का पाठ्यक्रम भी पूरा किया है।
मेजर जनरल छिब्बर के सैन्य अनुभव में पूर्वी, उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करना शामिल हैं। उन्होंने पैरा एएससी कंपनी, एक एएससी बटालियन और एएससी प्रशिक्षण केंद्र की कमान को बखूबी संभाला है। वे पूर्वी क्षेत्र में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (सूचना प्रणाली) और उत्तरी क्षेत्र में मेजर जनरल (ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स) भी रह चुके हैं। मेजर जनरल छिब्बर ने आर्मी सर्विस कोर सेंटर एंड कॉलेज में प्रशिक्षक के रूप में और कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट में वित्तीय प्रबंधन विभाग के निदेशक कार्मिक तथा प्रमुख के रूप में भी काम किया है। उनके द्वारा विकसित एवं कार्यान्वित किए गए सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन बड़ी संख्या में कई इकाइयों में उपयोग किये जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री विवेकानंद रॉक मेमोरियल में लगा रहे ध्यान, 45 घंटे का मौनव्रत और अन्न का एक दाना भी नहीं…
45 घंटे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ तरल आहार लेंगे।
रॉक मेमोरियल पहुंचने के बाद उन्होंने ‘ध्यान मंडपम’ में अपना ध्यान शुरू किया।
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम से देश के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी के प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 45 घंटे की ध्यान साधना शुरू की। कन्याकुमार पहुंचने के बाद उन्होंने भगवती अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना की।
उसके बाद वो नौका पर सवार होकर तट से करीब 500 मीटर दूर समुद्र में चट्टान पर स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचे और ध्यान शुरू किया, जो एक जून तक चलेगा। रॉक मेमोरियल पहुंचने के बाद उन्होंने ‘ध्यान मंडपम’ में अपना ध्यान शुरू किया।
जानकारी के अनुसार, 45 घंटे के दौरान पीएम मोदी सिर्फ तरल आहार लेंगे। वो नारियल पानी का सेवन करेंगे। अंगूर के जूस का सेवन करेंगे। प्रधानमंत्री इस दौरान मौनव्रत का पालन करेंगे। प्रधानमंत्री ध्यान कक्ष से बाहर नहीं आएंगे।
यह स्मारक स्वामी विवेकानंद की याद में ही बनाया बनाया गया है, जिन्होंने देशभर का दौरा करने के बाद 1892 के अंत में समुद्र के अंदर इन चट्टानों पर तीन दिन ध्यान लगाया था और विकसित भारत का सपना देखा था।

इस स्थान पर स्वामी विवेकानंद ने तीन दिनों तक ध्यान लगाया था और विकसित भारत का सपना देखा था। इस स्थान का नाम स्वामी विवेकानंद की याद में ही विवेकानंद रॉक मेमोरियल रखा गया था। यह भारत का सुदूर दक्षिण का हिस्सा है, जहां पर कि पूर्वी व पश्चिमी घाट आपस में मिलते हैं।
यह मेमोरियल हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का भी मिलन स्थल भी है। देखने वाली बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान 2047 तक विकसित भारत का निर्माण प्रमुख मुद्दा बनाया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने इसी स्थान पर एक पैर पर खड़े होकर भगवान शिव का इंतजार किया था। दरअसल विवेकानंद रॉक मेमोरियल का स्थान स्वामी विवेकानंद के जीवन में सबसे अहम स्थान माना जाता है। जिस तरह से गौतम बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था । उसी तरह पूरे देश का भ्रमण करने के बाद स्वामी विवेकानंद के ध्यान में भारत माता का विकसित स्वरूप सामने आया था |
विवेकानंद रॉक मेमोरियल के आस-पास 2,000 पुलिसकर्मियों के साथ-साथ विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी भी है। यही नहीं, भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना भी समुद्री सीमाओं पर निगरानी बनाए हुए हैं।
भारत ने 46वीं अंटार्कटिक संधि परामर्श बैठक (एटीसीएम-46) और 26वीं पर्यावरण संरक्षण समिति (सीईपी-26) की सफलतापूर्वक मेजबानी की
पक्षों ने अंटार्कटिक विशेष रूप से संरक्षित क्षेत्रों (एएसपीए) के लिए 17 संशोधित और नई प्रबंधन योजनाओं को अपनाया
नई दिल्ली | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री किरेन रिजिजू ने अंटार्कटिक अनुसंधान स्टेशन, मैत्री-II स्थापित करने की भारत की योजना की घोषणा की।
एटीसीएम-46 का आयोजन वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात् एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य - की विस्तृत थीम के साथ किया गया था। यह अंटार्कटिक संधि प्रणाली के साथ गहराई से प्रतिध्वनित होता है, जो शांति, वैज्ञानिक सहयोग और मानव जाति के लिए अंटार्कटिका के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है। एटीसीएम-46 का उद्घाटन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री किरेन रिजिजू, राजदूत पवन कपूर, सचिव (पश्चिम), विदेश मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज, बेंगलुरु के निदेशक डॉ. शैलेश नायक ने किया। राष्ट्रीय सुरक्षा बोर्ड के पूर्व उप सलाहकार राजदूत पंकज सरन को 46वें एटीसीएम का अध्यक्ष चुना गया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में वैज्ञानिक जी-सलाहकार डॉ. विजय कुमार मेजबान देश सचिवालय के प्रमुख थे।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव और भारतीय प्रतिनिधिमंडल (मेजबान देश) के प्रमुख डॉ. एम. रविचंद्रन ने बताया कि भारत शीघ्र ही मैत्री-II की स्थापना के लिए व्यापक पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रस्तुत करेगा। उन्होंने कहा, "भारत में 46वें एटीसीएम और 26वें सीईपी की सफल मेजबानी अंटार्कटिका के अनूठी ईको सिस्टम की रक्षा करने और वैश्विक पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहित करने हमारे सामूहिक संकल्प को रेखांकित करती है। हम यह संवाद, सहयोग और ठोस कार्रवाई के माध्यम से सुनिश्चित कर सकते हैं कि अंटार्कटिका आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बना रहे।"
एटीसीएम-46 और सीईपी-26 का आयोजन भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा गोवा के राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के माध्यम से अर्जेंटीना स्थित अंटार्कटिक संधि सचिवालय के सहयोग से किया गया। इस कार्यक्रम में पक्षों द्वारा अंटार्कटिक संधि (1959) और अंटार्कटिक संधि के लिए पर्यावरण संरक्षण पर प्रोटोकॉल (मैड्रिड प्रोटोकॉल, 1991) की फिर से पुष्टि की गई। एटीसीएम और सीईपी अंटार्कटिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण वैश्विक मंच का आयोजन वार्षिक रूप से किया जाता है, जो पृथ्वी के सबसे प्राचीन और नाजुक ईको सिस्टम को संरक्षित करने की दिशा में सामूहिक और ठोस संवाद और कार्रवाई निर्धारित करते हैं। एक अतिरिक्त कार्य समूह ने इस वर्ष दक्षिणी श्वेत महाद्वीप के लिए पर्यटन ढांचे के विकास पर चर्चा की।
20 से 24 मई, 2024 तक आयोजित सीईपी-26 ने अनेक विषयों पर चर्चा की और अंटार्कटिका में पर्यावरण प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में योगदान दिया। समिति ने समुद्री बर्फ परिवर्तन के प्रबंधन निहितार्थों पर भविष्य के कार्य को प्राथमिकता देने, प्रमुख गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को बढ़ाने, सम्राट पेंगुइन की रक्षा करने और अंटार्कटिका में पर्यावरण निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। सीईपी के परामर्श के बाद पक्षों ने एएसपीए (अंटार्कटिक विशेष रूप से संरक्षित क्षेत्रों) के लिए 17 संशोधित और नई प्रबंधन योजनाओं को अपनाया और ऐतिहासिक और स्मारक स्थलों की सूची में कई संशोधन और परिवर्धन किए। एटीसीएम ने अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने तथा अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा के जोखिमों को कम करने के लिए जैव सुरक्षा उपायों को मजबूती से लागू करने के काम को सुनिश्चित करने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया।
एटीसीएम-46 और सीईपी-26 के अवसर पर एनसीपीओआर (एमओईएस) ने कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए। इसने 20 मई, 2024 को कोरियाई ध्रुवीय अनुसंधान संस्थान और ध्रुवीय सहयोग अनुसंधान केंद्र, कोबे विश्वविद्यालय के साथ मिलकर 'बदलते अंटार्कटिका और आगे की चुनौतियां' शीर्षक से एक संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें 'अंटार्कटिका गवर्नेंस में चुनौतियां' और 'अंटार्कटिका भविष्य के लिए साझा जिम्मेदारियां और प्रतिबद्धताएं' विषय पर दो पैनल चर्चाएं शामिल थीं।
स्कूली बच्चों द्वारा डिजाइन की गई 'प्रजातियों से समृद्ध अंटार्कटिका' थीम वाली एक भित्तिचित्र का अनावरण जर्मनी, एएसओसी और उसके सहयोगियों के सहयोग से किया गया, जिसका उद्देश्य युवा मन में अंटार्कटिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। कोच्चि, केरल के कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए एक आउटरीच प्रयास के रूप में 'अंटार्कटिक तालमेल: कूटनीति के माध्यम से वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देना, अनुसंधान के माध्यम से सहयोग को बढ़ावा देना' पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई थी। एनसीपीओआर के निदेशक डॉ. थंबन मेलोथ ने कोच्चि में उच्च स्तरीय अंटार्कटिक बैठकों की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए अपनी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, "अंटार्कटिका मामलों में हमारी सक्रिय और रणनीतिक भागीदारी भारत की ध्रुवीय कार्यक्रम और मेजबान के रूप में इसकी भूमिका वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने और वैश्विक मंच पर पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में हमारे समर्पण को दर्शाती है।"
पक्षों ने अनेक महत्वपूर्ण अंटार्कटिक विषयों पर भी चर्चा की, जिसमें दायित्व, जैविक संभावना, सूचना का आदान-प्रदान, शिक्षा और जागरूकता, एक बहु-वर्षीय रणनीतिक कार्य योजना, सुरक्षा, निरीक्षण, विज्ञान, भविष्य की विज्ञान चुनौतियां, वैज्ञानिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन निहितार्थ और पर्यटन प्रबंधन आदि शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण परिणाम अंटार्कटिका में पर्यटन और गैर-सरकारी गतिविधियों को विनियमित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी, व्यापक, लचीला और गतिशील ढांचा विकसित करने के निर्णय को अपनाना था। पक्षों ने कनाडा और बेलारूस से परामर्श स्थिति अनुरोधों पर भी चर्चा की, लेकिन कोई आम सहमति नहीं बन पाई।
भारत ने अंटार्कटिक मामलों पर वैश्विक बैठक में 56 देशों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों की मेजबानी की, जिसमें विज्ञान, नीति, गवर्नेंस, लॉजिस्ट्रिक्स, संचालन, पर्यावरण प्रबंधन आदि सहित अंटार्कटिका के विभिन्न मामलों पर चर्चा करने के लिए राजनयिकों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया। ये बैठकें आभासी दर्शकों के साथ व्यक्तिगत उपस्थिति की थीं।
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नई उपलब्धि, 30 मई को 250 गीगावाट की रिकॉर्ड मांग को पूरा किया
गैर-सौर ऊर्जा की मांग भी 29 मई को 234.3 गीगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंची
नई दिल्ली | भारत के विद्युत क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देश ने 30 मई 2400 को 250 गीगावाट की रिकॉर्ड अधिकतम बिजली की मांग को पूरा किया है। इसके अलावा, पूरे देश में गैर-सौर ऊर्जा की मांग भी 29 मई को 234.3 गीगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जो इन क्षेत्रों में मौसम की वजह से बढ़े भार और बढ़ती औद्योगिक व आवासीय बिजली खपत के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है।
30 मई को उत्तरी क्षेत्र ने भी रिकॉर्ड मांग पूरी की, जो 86.7 गीगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। वहीं पश्चिमी क्षेत्र ने भी 74.8 गीगावाट की अपनी अधिकतम मांग को पूरा किया।
इसके अलावा, अखिल भारतीय तापीय बिजली के उत्पादन ने सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ। ख़ासकर गैर-सौर घंटों के दौरान 176 गीगावाट (बसों को छोड़कर) के शीर्ष स्तर को हासिल किया। इसमें एक प्रमुख योगदान धारा-11 के रणनीतिक कार्यान्वयन का रहा है, जिसने आयातित कोयला आधारित संयंत्रों के साथ-साथ गैस आधारित संयंत्रों से उत्पादन को अधिकतम करना सुगम किया। यह उछाल भारत के तापीय विद्युत संयंत्रों की महत्वपूर्ण क्षमता और परिचालन दक्षता को दिखलाता है, जो कि देश के ऊर्जा मिश्रण की रीढ़ बने हुए हैं।
इस मांग को पूरा करने में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, ख़ासकर सौर घंटों के दौरान सौर ऊर्जा और गैर-सौर घंटों के दौरान पवन ऊर्जा से मिला समर्थन भी बहुत महत्वपूर्ण रहा।
ये उपलब्धियां सरकारी एजेंसियों, बिजली उत्पादन कंपनियों और ग्रिड ऑपरेटरों सहित बिजली क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के समन्वित प्रयासों का प्रमाण हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ाने, संसाधन आवंटन को अनुकूलित करने और नीतियों को लागू करने की उनकी प्रतिबद्धता देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में खासी सहायक रही हैं।
अब महिलाओं को मिला अपनी पसंद की सीट चुनने अधिकार, इंडिगो एयरलाइंस
नई दिल्ली | इंडिगो एयरलाइंस ने एक नया फीचर महिला यात्रियों के लिए पेश किया है, जिसके तहत महिला यात्रियों को अपनी पसंद की सीट चुनने का विकल्प मिलेगा। महिला यात्री अब वेब चेक-इन पर यह पता कर सकेंगी कि किस सीट को पहले से ही आरक्षित किया जा चुका है और किसे नहीं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिला यात्रियों के लिए हवाई यात्रा को और सुरक्षित और आरामदायक बनाना है।
इस तरह की सुविधा विशेष रूप से महिला यात्रियों के यात्री नाम रिकॉर्ड (पीएनआर) के लिए तैयार की गई है। जिसमें अकेले यात्रा कर रही महिलाओं और अपने परिवार के साथ यात्रा कर रही महिलाओं के लिए भी यह सुविधा मिलेगी। इंडिगो एयरलाइंस ने एक बयान में कहा कि इंडिगो को एक नई सुविधा की शुरुआत करते हुए बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है। इस सुविधा का उद्देश्य हमारी महिला यात्रियों के लिए यात्रा के अनुभव को और अधिक आरामदायक बनाना है। इसे बाजार की रिसर्च के बाद तैयार किया गया है और इसे पायलट मोड में लागू किया गया है।
इंडिगा ने कहा कि अपने सभी यात्रियों को एक अद्वितीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और यह नई सुविधा उसी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में हमारे द्वारा उठाए जा रहे प्रयासों में से ही एक है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी इंडिगो ने हाल ही में इस साल से अपने विमानों में बिजनेस श्रेणी उपलब्ध कराने का भी ऐलान किया है। इंडिगो अपनी स्थापना की 18वीं वर्षगांठ पर अगस्त में अपनी भविष्य की योजना का खुलासा भी करेगी। कंपनी ने 30 चौड़े आकार वाले विमान खरीदने की योजना का भी बीते दिनों ऐलान किया था। इंडिगो एयरलाइंस में अभी सिर्फ इकॉनोमी क्लास है और इसके बेड़े में 360 विमान हैं और यह रोजाना लगभग 2000 से ज्यादा उड़ानों का संचालन करती है।
भारत ने जिनेवा में चल रहे 77वें विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान : महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य पर एक कार्यक्रम की मेजबानी की
केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सक्रिय कार्यों को अमल में लाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई
किशोरों के समूह तक संदेश पहुंचाने के लिए सही संचार रणनीतियों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया
नई दिल्ली | जिनेवा में चल रहे 77वें विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान, भारत ने नॉर्वे, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) और मातृ, नवजात शिशु और बच्चों की स्वास्थ्य भागीदारी (पीएमएनसीएच) के सहयोग से महिला, बाल और किशोर स्वास्थ्य पर एक अन्य कार्यक्रम की मेजबानी की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उभरते साक्ष्य और खोजों को साझा करना, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य और कल्याण में निवेश के लिए महत्वपूर्ण अवसरों पर बातचीत को बढ़ावा देना था। इसका उद्देश्य निरंतर और संवर्धित निवेश की वकालत करना, विभिन्न हितधारकों और क्षेत्रों में नीति समायोजन और उनके प्रभावों को बढ़ावा देने के अलावा विभिन्न जनसंख्या समूहों की जरूरतों को प्राथमिकता देना था।
कार्यक्रम का मुख्य विषय किशोर स्वास्थ्य था और विभिन्न वक्ताओं ने किशोर स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर बात की, जिसमें इस मुद्दे पर अधिक निवेश करने की आवश्यकता भी शामिल थी। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख अपूर्व चंद्रा ने इस विषय पर हुई प्रगति और इस संबंध में की गई पहलों पर जोर दिया।

उन्होंने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सक्रिय कार्यों को अमल में लाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भारत के प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच)-I, आरसीएच-II पहलों और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम पर प्रकाश डाला, जिसमें किशोर स्वास्थ्य पर जोर दिया गया। टेलीमानस की शुरुआत को भी भारत द्वारा की गई एक प्रमुख पहल के रूप में उल्लेख किया गया।
भारत ने किशोर दर्शकों के समूह तक संदेश पहुंचाने के लिए सही संचार रणनीतियों का उपयोग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। किसी भी कार्यक्रम की योजना और कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में युवा समूह के प्रतिनिधियों की भागीदारी पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव हेकाली झिमोमी, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव एवं प्रबंध निदेशक (एनएचएम) आराधना पटनायक तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
भारत को 2047 में विकसित राष्ट्र बनाने के महायज्ञ में सबसे महत्वपूर्ण आहुति किसान की होगी -उपराष्ट्रपति
राष्ट्र की बढ़ती अर्थव्यवस्था में किसान का बहुत बड़ा योगदान - उपराष्ट्रपति
किसान कृषि उत्पादों के व्यवसाय, उनसे जुड़े उद्योगों और उनके मूल्य संवर्धन में भागीदार बनें – उपराष्ट्रपति
कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में किसानों की भागीदारी बढ़नी चाहिए – उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का दौरा किया
नई दिल्ली | उत्तराखंड के अपने एक दिवसीय दौरे में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का दौरा किया और विश्वविद्यालय के शिक्षकगणों के साथ संवाद किया। राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में कृषि और किसानों के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “भारत को 2047 में विकसित राष्ट्र बनाने के महायज्ञ में सबसे महत्वपूर्ण आहुति किसान की होगी।”
उपराष्ट्रपति ने किसानों को कृषि उत्पादों के व्यवसाय, उनसे जुड़े उद्योगों में भागीदार बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि उत्पादों की मार्केटिंग और उनके मूल्य संवर्धन में शामिल होना चाहिए। धनखड़ ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को किसानों में उच्च मूल्य वाली उपज और नई तकनीकों के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया।
अपने दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया एवं विश्वविद्यालय की प्रारम्भ से वर्तमान तक की यात्रा को दर्शाते ‘पंतनगर संग्रहालय’ का भी निरीक्षण किया। ज्ञात रहे की गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय देश का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी एवं हरित क्रांति में इस विश्वविद्यालय ने अहम भूमिका निभाई।
उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्ट जनरल (रि.) गुरमीत सिंह जी, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विभिन्न विभागों के डीन, निदेशक एवं अन्य संकाय सदस्य भी इस दौरान मौजूद रहे।
केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने आयुर्वेद के लिए भविष्य की योजना बनाने की एक पहल "प्रगति-2024" की शुरुआत की
नई दिल्ली | केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्तशासी निकाय, केन्द्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने आज "प्रगति-2024" (फार्मा रिसर्च इन आयुरज्ञान एंड टेक्नो इनोवेशन) की शुरुआत की। यह आयुर्वेद के क्षेत्र में सहयोगपूर्ण अनुसंधान के लिए बेहद उपयोगी अवसर प्रदान करता है। आज की बैठक का उद्देश्य अनुसंधान के अवसरों का पता लगाना और सीसीआरएएस और आयुर्वेद दवा उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने में उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। यह टिप्पणी करते हुए कि नए चिकित्सकों और स्टार्टअप की आमद विकास के जबरदस्त अवसर प्रस्तुत करती है, उन्होंने इस क्षेत्र के विस्तार और आगे बढ़ने के लिए उद्योगों की विशाल क्षमता पर प्रकाश डाला।
प्रगति-2024 में अपने संबोधन के दौरान, सीसीआरएएस के महानिदेशक, प्रोफेसर रबीनारायण आचार्य ने भारत और दुनिया भर में आयुष उत्पादों, विशेष रूप से आयुर्वेद की बढ़ती गति पर प्रकाश डाला। “सीसीआरएएस का उद्देश्य प्रत्येक हितधारक तक पहुंचना है और इसलिए हमने छात्रवृत्ति देना शुरू किया है ताकि छात्र अनुसंधान के महत्व को समझें। हमने अनुसंधान और छात्रवृत्ति के माध्यम से शिक्षकों, छात्रों तक पहुंचने के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं।
आयुष मंत्रालय के सलाहकार (आयु.) डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय ने प्रगति-2024 में एक व्यावहारिक भाषण दिया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि "अनुसंधान और उद्योग को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि उनके संयुक्त प्रयासों से अंततः समाज को लाभ मिलेगा।" अनुसंधान आधारित, उच्च गुणवत्ता वाले, सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक उत्पादों को विकसित करने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आयुष उत्पादों की गुणवत्ता मूल रूप से गहन अनुसंधान में निहित है। कार्यक्रम के दौरान सीसीआरएएस का नवीनतम समाचार पत्र और 2024-25 के कार्यक्रमों का सीसीआरएएस कैलेंडर भी जारी किया गया।
सीसीआरएएस के उप महानिदेशक, डॉ. एन. श्रीकांत ने सीसीआरएएस और उद्योग के बीच सहयोग के लिए प्रगति-2024 द्वारा प्रस्तुत अनोखे कार्य क्षेत्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मंच आयुर्वेद और हर्बल उद्योग की विशाल क्षमता को प्रदर्शित करते हुए अनुसंधान और सहयोग के लिए एक अमूल्य अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया।
इस कार्यक्रम में 37 फार्मा कंपनियों के सीईओ/एमडी/निदेशक और अनुसंधान इकाइयों के प्रमुखों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
महिला एवं बाल विकास की सचिव शम्मी आबिदी ने ली बैठक, चाईल्ड हेल्पलाईन को प्रभावी बनाने
रायपुर | बच्चों एवं महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 24 घंटे आपातकालीन सेवा के रूप में बच्चों के लिए चाईल्ड हेल्पलाईन सी.एच.एल-1098 एवं महिलाओं के लिए महिला हेल्पलाईन डब्ल्यू.एच.एल-181 संचालित है। उक्त हेल्पलाईन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा संचालित ई.आर.एस.एस-112 के साथ इंटीग्रेशन किया जा रहा है। हेल्पलाईन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास की सचिव शम्मी आबिदी ने सी-डैक तिरूअनंतपुरम, पुलिस विभाग की ई.आर.एस.एस-112 की टीम, बीएसएनएल, रेलवे एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को हेल्पलाईन को बच्चों एवं महिलाओं की त्वरित मदद के लिए प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में संचालक महिला एवं बाल विकास तुलिका प्रजापति भी मौजूद थी।
सचिव शम्मी आबिदी ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देश के परिपालन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में सभी 33 जिलों में चाईल्ड हेल्पलाईन संचालन हेतु हार्डवेयर लगाया जा चुका है। 32 जिलों में चाईल्ड हेल्पलाईन का डब्ल्यू.सी.डी. कंट्रोल रूम से इंटीग्रेशन कर संचालन प्रारंभ हो चुका है। इंटीग्रेशन की कार्यवाही पूर्ण करने हेतु सी-डैक एवं बीएसएनएल के अधिकारियों को निर्देश दिये गये। राज्य के 27 जिलों के वन स्टॉप सेंटर (सखी सेंटर) में महिला हेल्पलाईन यूनिट की स्थापना एवं इंटीग्रेशन कर संचालन किया जा रहा है। सचिव, महिला एवं बाल विकास ने रेलवे रायपुर एवं बिलासपुर से आए अधिकारियों तथा विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों के सर्वाेत्तम हित में रायपुर एवं बिलासपुर रेलवे स्टेशन के उपयुक्त स्थान पर चाईल्ड हेल्पलाईन का संचालन किया जाए। इस संबंध में उन्होंने संबंधित आधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने तथा अधिकारियों को स्वयं स्थल का निरीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सचिव, महिला एवं बाल विकास ने चाईल्ड हेल्पलाईन-1098 एवं डब्ल्यू.एच.एल-181 में प्राप्त प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की और लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
आजीवन सीखने को प्रोत्साहन देने के लिए रणनीतिक साझेदारी, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने कौशल विकास द्वारा
नई दिल्ली | कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने कौशल मिशन को आगे बढ़ाते हुए, भारत और विश्व स्तर पर कौशल विकास एवं आजीवन सीखने को आगे बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस सहयोग का उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को आवश्यक कौशल और योग्यताओं से सुसज्जित करके उन्हें सशक्त बनाना है, जिससे रोजगार क्षमता व सतत आर्थिक विकास में वृद्धि हो सके। इस कार्यक्रम में कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के सचिव अतुल कुमार तिवारी और मंत्रालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस समझौता ज्ञापन पर राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एनएसडीसी इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक वेद मणि तिवारी और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में रोजगार नीति, नौकरी निर्माण और आजीविका विभाग के निदेशक संघोन ली द्वारा हस्ताक्षर किए गए। समझौते में दोनों संगठनों की अपनी ताकत और विशेषज्ञता का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। यह साझेदारी प्रभावी नीतियों, शासन और वित्तपोषण संरचनाओं को विकसित करने के लिए समर्पित है जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास को प्रोत्साहित करेगी। साझेदारी का एक प्रमुख पहलू स्किल इंडिया डिजिटल केंद्र (एसआईडीएच) का कार्यान्वयन है। यह डिजिटल परिवर्तन कौशल विकास पहलों को सुव्यवस्थित करेगा तथा उनकी दक्षता, पहुंच और वैश्विक प्रभाव को बढ़ाएगा।
साझेदारी की सराहना करते हुए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के सचिव अतुल कुमार तिवारी ने कहा कि साझेदारी का एक प्रमुख पहलू स्किल इंडिया डिजिटल केंद्र (एसआईडीएच) को अपनाना है और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के सदस्य देशों में सरकारें, श्रमिक और नियोक्ता संगठन शामिल होंगे तथा लागत प्रभावी मॉडल के आधार पर प्रणाली, प्रक्रियाओं, कौशल वितरण और नौकरी मिलान को डिजिटल बनाने के लिए एसआईडीएच का उपयोग करने में सक्षम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह डिजिटल परिवर्तन कौशल विकास पहल की दक्षता को बढ़ाएगा, जिससे वे विश्व स्तर पर अधिक सुलभ और प्रभावशाली बनेंगे। उन्होंने ऐसी नीतियां और मंच बनाने के लिए कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की प्रतिबद्धता पर बल दिया जो राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर सफल होने के लिए प्रतिभाओं के लिए आजीवन सीखने और निरंतर कौशल विकास का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईडीएच इस प्रतिबद्धता का उदाहरण है और यह साझेदारी सीमाओं के पार कौशल विकास के माध्यम से व्यक्तियों को सशक्त बनाने के साझा मिशन को दर्शाती है।
तिवारी ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) का उद्देश्य विशेषज्ञता को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की स्किलिंग, रीस्किलिंग और अपस्किलिंग की प्रतिबद्धता के साथ जोड़कर, व्यक्तियों को व्यवधानों से निपटने और एक स्थायी भविष्य बनाने के लिए सशक्त बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) कौशल को बढ़ाएगा और रोजगार क्षमता को प्रोत्साहन देगा, जिससे उभरते नौकरी बाजार में प्रभावशाली बदलाव आएगा।
साझेदारी का उद्देश्य सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) को बढ़ाने, माइक्रो-क्रेडेंशियल विकसित करने और वैश्विक ज्ञान-साझाकरण मंच के माध्यम से पूर्व शिक्षण की मान्यता (आरपीएल) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करना है। कौशल और योग्यताओं की तुलनीयता को मजबूत करके, संभावित गंतव्य देशों में आवश्यक लोगों के साथ भारतीय श्रमिकों के कौशल व योग्यताओं का आकलन और तुलना करने के लिए डिजिटल उपायों को विकसित करके उन्हें काम में लगाया जाएगा, जिससे भारतीय श्रमिकों के लिए आवाजाही और वैश्विक रोजगार की संभावनाओं में सुधार होगा।
साझेदारी के बारे में चर्चा करते हुए, वेद मणि तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और एनएसडीसी के बीच समझौता ज्ञापन भारत में कौशल संबंधी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक अवसरों के लिए भारतीय युवाओं का एक समूह बनाने में मदद करेगी, क्योंकि साझेदारी का उद्देश्य भारतीय योग्यताओं को वैश्विक कौशल मानकों के साथ तालमेल बिठाते हुए उनका मानकीकरण करना है। तिवारी ने यह भी कहा कि भारत जीसीसी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन रहा है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए पूरी दुनिया के लिए दूर से वितरित ज्ञान कार्यों में भाग लेने के अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुशल प्रवासन पर सरकार द्वारा जोर दिए जाने से उन लोगों के लिए अवसर तैयार होता है, जो अंतर्राष्ट्रीय कार्यबल में शामिल होने के लिए प्रवास करना चाहते हैं। उन्होंने साउथ एशियन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क जैसे क्षेत्रीय योग्यता संबंधी संरचना को विकसित करने के लिए आईएलओ के साथ काम करने के लिए भी उत्साह व्यक्त किया, जिससे पड़ोसी देशों के युवाओं को भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि एनएसडीसी की साझेदारी से आईएलओ के सदस्य देशों को एनएसडीसी डिजिटल की सेवाएं प्रदान करने में भी मदद मिलेगी।
रणनीतिक साझेदारी के बारे में बोलते हुए, संघोन ली ने कहा कि एनएसडीसी तकनीकी क्षमता और आईएलओ मानक-सेटिंग कार्यों, त्रिपक्षीयता एवं वैश्विक पहुंच के संयोजन से वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षण पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि एनएसडीसी के साथ साझेदारी एक तालमेल आधारित प्रभाव पैदा करेगी, जो न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर और भी अधिक सामाजिक न्याय के लिए कौशल विकास के परिवर्तन का नेतृत्व करने की सामूहिक क्षमता को बढ़ाएगी।