देश-विदेश
'आदर्श युवा ग्राम सभा' पहल का राष्ट्रव्यापी शुभारम्भ 30 अक्टूबर को
नईदिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 30 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में अपनी तरह की पहली पहल आदर्श युवा ग्राम सभा (एमवाईजीएस) का संयुक्त रूप से राष्ट्रीय शुभारम्भ करेगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान आदर्श युवा ग्राम सभा और एमवाईजीएस पोर्टल पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी अनावरण किया जाएगा। ये डिजिटल उपकरण इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाने, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र में छात्रों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विकसित किए गए हैं। यह पहल जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी), एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) और राज्य सरकार के स्कूलों सहित देश भर के 1,000 से अधिक स्कूलों में शुरू की जाएगी। इस अवसर पर पंचायती राज, शिक्षा और जनजातीय कार्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के पंचायती राज संस्थानों और राज्य पंचायती राज विभागों आदि के छात्रों, शिक्षकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों सहित 650 से अधिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।
आदर्श युवा ग्राम सभा (एमवाईजीएस) जनभागीदारी को मज़बूत करने और छात्रों को ग्राम सभा सत्रों में शामिल करके सहभागी स्थानीय शासन को बढ़ावा देने की एक अग्रणी पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, इसका उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता का विकास करना और पारदर्शिता, जवाबदेही और विकसित भारत के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध नागरिक तैयार करना है।
ईपीएफ अधिकारियों को दिया जा रहा “निवेश एवं जोखिम प्रबंधन” पर प्रशिक्षण
नईदिल्ली। ईपीएफ अधिकारियों के लिए नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) में “निवेश एवं जोखिम प्रबंधन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन अकादमी के निदेशक कुमार रोहित ने किया। देशभर से प्रशिक्षण हेतु अकादमी पहुंचे अधिकारियों को संबोधित करते हुए रोहित ने उन्हें सत्रों के दौरान सक्रिय भागीदारी करने और खुले मन से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि निवेश प्रबंधन एवं वित्तीय विवेक पर केंद्रित इस प्रकार के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन पीडीयूएनएएसएस की एक समयानुकूल एवं सार्थक पहल है, जिससे अधिकारियों की वित्तीय समझ तथा रणनीतिक निर्णय क्षमता को और सुदृढ़ होगी।
निदेशक कुमार रोहित ने बताया कि इस पहल के प्रेरणास्रोत केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) और पीडीयूएनएएसएस के डीन रमेश कृष्णमूर्ति हैं। उन्हीं की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व दृष्टि के माध्यम से अकादमी के पेशेवर विकास और संस्थागत उत्कृष्टता के निरंतर प्रयासों को दिशा मिलती है। रोहित ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को ईपीएफओ अधिकारियों के क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण व दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने इस अवसर पर विवेकानंद गुप्ता, आरपीएफसी-II का उदाहरण देते हुए यह बताया कि उन्हें विश्व बैंक और मिल्केन इंस्टीट्यूट के पब्लिक फाइनेंशियल एसेट मैनेजमेंट (पीएफएएम) कार्यक्रम 2025–26 के लिए चुना गया है, जिसका आयोजन यूनाइटेड किंगडम के बेयस बिजनेस स्कूल में किया जा रहा है। यह उपलब्धि ईपीएफओ अधिकारियों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पेशेवर पहचान और क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।
आईसीएफएआई बिजनेस स्कूल, हैदराबाद के प्रोफेसर सतीश कुमार इस कार्यक्रम में संसाधन कार्मिक के रूप में आमंत्रित थे। उन्होंने संस्थागत निवेश, पोर्टफोलियो निर्माण, बॉन्ड मूल्यांकन, परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन और जोखिम प्रबंधन के अंतर्गत पोर्टफोलियो मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषयों पर कई ज्ञानवर्धक सत्रों का संचालन किया। अपने व्याख्यानों के दौरान प्रोफेसर कुमार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि “यदि किसी परिसंपत्ति का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, तो उसका प्रबंधन भी संभव नहीं है।” उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि मूल्यांकन सभी निवेश निर्णयों का आधार है। प्रोफेसर सतीश कुमार ने प्रतिभागियों को आधुनिक पोर्टफोलियो सिद्धांत के जनक हैरी मार्कोविट्ज तथा कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल (सीएपीएम) और शार्प रेशियो के लिए प्रसिद्ध विलियम शार्प के योगदानों से भी अवगत कराया, जिन्हें वर्ष 1990 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया : राज्यपाल पटेल
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल से गोवा के सूचना एवं प्रचार विभाग का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को राजभवन में मिला। निदेशक सूचना एवं प्रचार दीपक बांडेकर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राजभवन आया था। राज्यपाल पटेल का निदेशक सूचना एवं प्रचार ने गोवा का पारंपरिक परिधान पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया और दल के सदस्यों का परिचय कराया।इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल ने दल के साथ चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मंशा-अनुसार उन्होंने राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया है। प्रदेश के दूरस्थ पिछड़े और वंचित क्षेत्रों के साथ जीवंत संवाद कायम किया है। कार्यकाल के पहले दो वर्षों में ही प्रदेश के सभी जिलों का भ्रमण किया है। वंचितों के साथ आत्मीयता के सूत्र कायम किए है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के घर पर परिजनों के साथ सह भोज करते है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सजग करने की मंशा से पूर्व में पांच गांवों के भ्रमण का कार्यक्रम देते हैं। अंतिम क्षण में किसी एक गांव का भ्रमण कर सम्पर्क और संवाद के द्वारा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं।
राज्यपाल ने मध्यप्रदेश के वनों, दर्शनीय स्थलों के संबंध में भी दल को जानकारी दी। प्रदेश के विकास कार्यों और गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने दल को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कार्य के अनुभवों को साझा किया।बताया कि प्रधानमंत्री में जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशीलता है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना की पहल अभूतपूर्व है। योजनाओं के माध्यम से देश के हर जनजातीय परिवार को लाभान्वित करने का प्रयास है। उन्होंने आदि कर्मयोगी योजना के माध्यम से जनजातीय जन जागरण के प्रयासों का भी ब्यौरा दिया।
राज्यपाल ने दल के सदस्यों को जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य की प्रमुख बाधा सिकल सेल एनीमिया रोग के संबंध में बताया। उन्होंने रोग के प्रत्यक्ष लक्षणों व्यवहारिक समस्याओं और रोग के चिकित्सकीय कारणों के बारे बताया। मध्यप्रदेश में रोग नियंत्रण, उपचार प्रबंधन प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय मिशन गठित कर प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन के क्रियान्वयन में प्रदेश का देश में अग्रणी स्थान है। उन्होंने बताया कि सिकल सेल रोग नियंत्रण में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण है।
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की
देलही : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और राज्य में मौसम पूर्वानुमान और आपदा तैयारी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश में डॉप्लर मौसम रडार स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। इससे क्षेत्र में मौसम के पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनियों की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हाल ही में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के मद्देनजर, मुख्यमंत्री ने राज्य भर में अतिरिक्त डॉप्लर रडार और स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) स्थापित करने का अनुरोध किया। इससे प्रत्येक जिले, विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में मौसम सम्बंधी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से तैयारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण की दिशा में सभी राज्यों के प्रयासों में सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश के मौसम विज्ञान नेटवर्क का विस्तार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में जनता और स्थानीय अधिकारियों तक महत्वपूर्ण मौसम सम्बंधी जानकारी का समय पर प्रसार सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के शासन दर्शन का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से ही सहकारी संघवाद की भावना को निरंतर बनाए रखा है और क्षेत्र तथा राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना प्रत्येक राज्य के लिए निष्पक्ष और समतापूर्ण सहयोग सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण राज्यों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय प्रशासन उभरती चुनौतियों का तेज़ी से और प्रभावी ढंग से सामना करने योग्य बनाना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि डॉप्लर रडार और एडब्ल्यूएस जैसे उन्नत मौसम विज्ञान उपकरण न केवल आपदा तैयारियों में, बल्कि कृषि, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों को कवर करने और जन सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस बुनियादी ढांचे के विस्तार में पूर्ण केंद्रीय सहायता का आश्वासन दिया।
इस बैठक में, पहाड़ी राज्य में विकास टिकाऊ और जलवायु जोखिमों के प्रति लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के वैज्ञानिक ढांचे को मज़बूत करने की साझा प्रतिबद्धता उभरकर समाने आई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मौसम विभाग और राज्य के अधिकारियों के बीच घनिष्ठ तालमेल से हिमाचल प्रदेश की चरम मौसम सम्बंधी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता और बढ़ेगी।
खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य तेजी से जारी
भोपाल : देवास जिले की खातेगांव जल प्रदाय परियोजना का कार्य एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से तेजी से किया जा रहा है। परियोजना के तहत नर्मदा नदी से जल लेकर 7.9 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शुद्ध किया जाएगा। वर्तमान में 4.75 एमएलडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र बनाया जा रहा है, जबकि 3.75 एमएलडी क्षमता का संयंत्र पहले से ही कार्य कर रहा है। जल संग्रहण के लिए 1000 किलोलीटर क्षमता का नया ओवरहेड टैंक बनाया जा रहा है। साथ ही एक मौजूदा ओवरहेड टैंक का उपयोग भी किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत कुल 6 हजार 300 घरों में नल कनेक्शन दिए जाने का कार्यक्रम बनाया गया है, इनमें से अब तक 3 हजार 526 घरों को जल प्रदाय नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।
इस योजना से खातेगांव की लगभग 18 हजार से अधिक की आबादी को शुद्ध पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना की कुल लागत करीब 33 करोड़ 21 लाख रुपये है और कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा तथा नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि कार्य के अंतर्गत नर्मदा नदी पर निर्माणाधीन इंटेक वेल का कार्य भी पंप के फ्लोर लेवल तक पूर्ण होकर एपोर्च ब्रिज का कार्य जारी है। वहीं खातेगॉव नगर परिषद के पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जल शोधन संयंत्र के विभिन्न घटकों का निर्माण भी तेज गति से जारी है। नेमावर इनटेक वेल से खातेगॉव तक रॉ वॉटर पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की उज्जैन इकाई के अंतर्गत यह कार्य किया जा रहा है। कंपनी द्वारा कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक जनहित में उपयोगी सिद्ध हो सके। परियोजना की खास बात यह है कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जा रहे हैं और शीघ्र ही खातेगांव को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
साइबर अपराध से लड़ाई पुलिस के साथ पूरे समाज की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' जागरूकता अभियान के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस सहित सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की है। तकनीक और कानून अपने स्थान पर हैं, पर सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जब नागरिक जागरूक होगा, तभी राष्ट्र सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने डिजिटल युग की सबसे जरूरी पहल को जन-आंदोलन का रूप दिया है। हम जिस रफ्तार से डिजिटल रूप से मजबूत हुए हैं उसी रफ्तार से नई परेशानियां और खतरे सिर उठाने लगे हैं। जिस तकनीक ने हमें जोड़ा है उसी तकनीक ने अपराधियों को नए हथियार भी दिए हैं और आज ठगी के नए-नए तरीके आ गए हैं। डिजिटल अरेस्ट, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी फॉड, ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी और फेक इन्वेस्टमेंट लिंक जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ये हमारे समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' डिजिटल युग में नागरिक सुरक्षा का कर्तव्य निभा रही है। साइबर सिपाही, जिम्मेदारी, सुरक्षा और जागरूकता की दौड़ के लिए एकजुट हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा और जागरूकता के लिए आयोजित रन फॉर साइबर अवेयरनेस के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रन के लिए एकत्र प्रतिभागियों को अटल पथ स्थित प्लेटिनम प्लाजा से झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रन अटल पथ से एपेक्स बैंक तिराहा होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर पूर्ण हुई। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर पुलिस बैंड की धुन के साथ सलामी दी गई। पुलिस महानिदेशक तथा अन्य पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल से गोवा के सूचना एवं प्रचार विभाग का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को राजभवन में मिला। निदेशक सूचना एवं प्रचार दीपक बांडेकर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राजभवन आया था।राज्यपाल पटेल का निदेशक सूचना एवं प्रचार ने गोवा का पारंपरिक परिधान पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया और दल के सदस्यों का परिचय कराया।इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दल के साथ चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंशा-अनुसार उन्होंने राजभवन को लोक कल्याण का केन्द्र बनाया है। प्रदेश के दूरस्थ पिछड़े और वंचित क्षेत्रों के साथ जीवंत संवाद कायम किया है। कार्यकाल के पहले दो वर्षों में ही प्रदेश के सभी जिलों का भ्रमण किया है। वंचितों के साथ आत्मीयता के सूत्र कायम किए है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के घर पर परिजनों के साथ सह भोज करते है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सजग करने की मंशा से पूर्व में पांच गांवों के भ्रमण का कार्यक्रम देते हैं। अंतिम क्षण में किसी एक गांव का भ्रमण कर सम्पर्क और संवाद के द्वारा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश के वनों, दर्शनीय स्थलों के संबंध में भी दल को जानकारी दी। प्रदेश के विकास कार्यों और गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने दल को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कार्य के अनुभवों को साझा किया।बताया कि प्रधानमंत्री में जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशीलता है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना की पहल अभूतपूर्व है। योजनाओं के माध्यम से देश के हर जनजातीय परिवार को लाभान्वित करने का प्रयास है। उन्होंने आदि कर्मयोगी योजना के माध्यम से जनजातीय जन जागरण के प्रयासों का भी ब्यौरा दिया।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दल के सदस्यों को जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य की प्रमुख बाधा सिकल सेल एनीमिया रोग के संबंध में बताया। उन्होंने रोग के प्रत्यक्ष लक्षणों व्यवहारिक समस्याओं और रोग के चिकित्सकीय कारणों के बारे बताया। मध्यप्रदेश में रोग नियंत्रण, उपचार प्रबंधन प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल रोग उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय मिशन गठित कर प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन के क्रियान्वयन में प्रदेश का देश में अग्रणी स्थान है। उन्होंने बताया कि सिकल सेल रोग नियंत्रण में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण है। पहला जेनेटिक काउंसलिंग, रोगी और वाहक युवक-युवती आपस में विवाह नहीं करें। दूसरा स्क्रीनिंग, सामान्य रोग वाहक और रोगी की पहचान करना है। राज्य ने इस दिशा में अग्रणी रहकर कार्य किया है। अनुमानतः 01 करोड़ 90 लाख की जनजातीय आबादी में से 01 करोड़ 23 लाख से अधिक की स्क्रीनिंग कर ली गई है। जेनेटिक काउंसलिंग के लिए 01 करोड़ से अधिक डिजिटल जेनेटिक काउंसिल कार्ड वितरित किए जा चुके है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं 01 करोड़ वॉ कार्ड वितरित कर प्रदेश के प्रयासों का अनुसमर्थन किया है। राज्यपाल पटेल ने दल के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की है कि वह जनजातीय समुदाय में स्वास्थ्य, शिक्षा के प्रति जन जागरण के प्रयासों को प्राथमिकता प्रदान करेंगे। विकास का वातावरण निर्मित करने में सक्रिय योगदान देंगे।
प्रतिनिधि दल पांच दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आया है। दल इंदौर, उज्जैन और भोपाल में जनसंपर्क, मीडिया हाऊसेस के साथ चर्चा करेगा। उनकी कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इन स्थानों के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी करेगा।राजभवन के वैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक में सूचना अधिकारी, डीआईपी, ऑल्विन एक्स. परेरा, संपादक, द नवहिंद टाइम्स, विजय डी.सूजा, संपादक, तरूण भारत, सागर जावड़ेकर, संपादक, लोकमत, सदगुरु पाटिल, गोयनकारपोन्न, सूरज नांद्रेकर, संपादक, नवप्रभा, परेश प्रभु, संपादक, आरडीएक्स मीडिया राजन केरकर, इन गोवा संपादक, अनिल लाड, सूचना सहायक, डीआईपी, सिद्धेश सामंत,फोटोग्राफर, डीआईपी, चंदू कोरगांवकर और राज्यपाल के प्रेस अधिकारी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री 30-31 अक्टूबर को गुजरात का दौरा करेंगे
देलही : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30-31 अक्टूबर को गुजरात के दौरे पर रहेंगे। 30 अक्टूबर को, प्रधानमंत्री केवड़िया के एकता नगर जाएंगे और शाम लगभग 5:15 बजे वहां ई-बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। शाम लगभग 6:30 बजे, वे एकता नगर में 1,140 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
31 अक्टूबर को सुबह लगभग 8 बजे, प्रधानमंत्री स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का आयोजन होगा। बाद में, करीब 10:45 बजे, वे ‘आरंभ 7.0’ में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
प्रधानमंत्री एकता नगर में विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इस क्षेत्र में पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना, सुगम्यता में सुधार लाना और सतत विकास पहलों को बढ़ावा देना है। कुल 1,140 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली ये परियोजनाएं दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के आसपास के क्षेत्र में इको-टूरिज्म, ग्रीन मोबिलिटी, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और आदिवासी विकास को बढ़ावा देने के सरकार के विजन को दर्शाती हैं।
जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा उनमें राजपीपला में बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय; गरुड़ेश्वर में आतिथ्य जिला (चरण-1); वामन वृक्ष वाटिका; सतपुड़ा सुरक्षा दीवार; ई-बस चार्जिंग डिपो और 25 इलेक्ट्रिक बसें; नर्मदा घाट विस्तार; कौशल्या पथ; एकता द्वार से श्रेष्ठ भारत भवन (चरण-2) तक पैदल मार्ग, स्मार्ट बस स्टॉप (चरण-2), डैम रिप्लिका फाउंटेन, जीएसईसी क्वार्टर आदि शामिल हैं।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री भारतीय शाही राज्य संग्रहालय; वीर बालक उद्यान; खेल परिसर; वर्षा वन परियोजना; शूलपनेश्वर घाट के पास जेटी विकास; स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर ट्रैवलेटर सहित विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 150 रुपये मूल्य का एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में भाग लेंगे और सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। वे एकता दिवस की शपथ दिलाएंगे और एकता दिवस परेड का अवलोकन करेंगे।
परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के साथ-साथ विभिन्न राज्य पुलिस बलों की टुकड़ियां शामिल होंगी। इस वर्ष के मुख्य आकर्षणों में विशेष रूप से रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड जैसे भारतीय नस्ल के स्वानों से युक्त बीएसएफ का मार्चिंग दस्ता, गुजरात पुलिस का घुड़सवार दस्ता, असम पुलिस का मोटरसाइकिल डेयरडेविल शो और बीएसएफ का ऊंट दस्ता तथा ऊंट पर सवार बैंड शामिल हैं।
परेड में सीआरपीएफ के पांच शौर्य चक्र विजेताओं और बीएसएफ के सोलह वीरता पदक विजेताओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने झारखंड में नक्सल-विरोधी अभियानों और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में असाधारण साहस का परिचय दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ कर्मियों की वीरता के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में एनएसजी, एनडीआरएफ, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, अंडमान- निकोबार द्वीप समूह, मणिपुर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पुडुचेरी की दस झांकियां शामिल होंगी, जो 'अनेकता में एकता' विषय पर आधारित होंगी। 900 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाते हुए भारत के शास्त्रीय नृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का विशेष महत्व है, क्योंकि राष्ट्र सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है।
प्रधानमंत्री ‘आरंभ 7.0’ के समापन पर 100वें फाउंडेशन कोर्स के प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। सातवें ‘आरंभ’ को "शासन की पुनर्कल्पना" विषय पर आयोजित किया गया है। इस 100वें फाउंडेशन कोर्स में भारत की 16 सिविल सेवाओं और भूटान की 3 सिविल सेवाओं के 660 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल होंगे।
जयपुर ग्रामीण में हाईटेंशन लाइन से झुलसी मजदूरों की बस, तीन की मौत, दस गंभीर
जयपुर, जयपुर ग्रामीण जिले के मनोहरपुर क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक भयावह सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मजदूरी के लिए आए लोगों को लेकर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस अचानक हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई। हादसे के बाद बस में भीषण आग लग गई, जिसमें तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दस अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
प्रकृति के प्रति आस्था ही हमें जीवन का सच्चा अर्थ सिखाती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के प्रति आस्था ही हमें जीवन का सच्चा अर्थ सिखाती है। भारतीय संस्कृति ने सदैव प्रकृति के साथ सामन्जस्य से जीने की परम्परा अपनाई है। दुनिया के कई देश प्रकृति का दोहन कर रहे हैं पर भारत ने सदियों से प्रकृति का पोषण किया है। उपभोग प्रधान जीवन शैली वर्तमान के जलवायु संकट को बढ़ाती है जबकि उपयोग से पहले संरक्षण की समझ और भोग से पहले योग का संतुलन ही भारतीय संस्कृति का सार है। भोपाल प्रकृति और प्रगति का अनूठा संगम है। प्राकृतिक सुंदरता और जैव-विविधता सहेजे इस सुंदर शहर में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्यशाला का आयोजन शहर की विशेषता के अनुरूप है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण और जीवन शैली-जलवायु परिवर्तन और सतत विकास वैचारिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य नीति आयोग, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और ऐप्को के संयुक्त तत्वावधान में मानव संग्रहालय में आयोजित संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। नर्मदा समग्र, सिकोईडिकोन, पैरवी और राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, कार्यक्रम के सह आयोजक हैं। जलवायु परिवर्तन के समाधान में राज्यों की भूमिका पर विचार विमर्श और व्यक्ति-समाज एवं सरकारों की सहभागिता से सतत विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है। उल्लेखनीय है कि जल, जंगल, जमीन, जैव विविधता और मानव जीवन के पहलुओं को प्रभावित कर रहे जलवायु संकट पर ब्राजील में नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन होगा। वैचारिक संगोष्ठी में प्राप्त सुझाव और विचार, ब्राजील के सम्मेलन में साझा किए जाएंगे। मध्यप्रदेश, इस चर्चा को आरंभ करने वाला भारत का पहला राज्य है। लिविंग द राइट वे की थीम पर आधारित संगोष्ठी में पर्यावरण और जीवन शैली, जलवायु और सतत विकास के बीच संबंधों का सुदृढ़ीकरण और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार विमर्श हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण जीवन शैली का हिस्सा बनना चाहिए। राज्य सरकार प्रदेश में ग्रीन कव्हरेज बढ़ाने, वेटलैंड संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और हरित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की यह संगोष्ठी मानवता के अस्तित्व, धरती के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा है। हमें स्थानीय सोच को वैश्विक समाधान से जोड़ने और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी और संचार माध्यमों से जुड़े प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के घरों के विद्युतीकरण के लिए 78 करोड़ 94 लाख रुपये
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) अंतर्गत प्रदेश में PVTG समूहों यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के घरों के विद्युतीकरण के लिए विद्युत वितरण कंपनियों की अतिरिक्त कार्ययोजना द्वितीय चरण का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
स्वीकृति अनुसार प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत अतिरिक्त 18 हजार 338 अविद्युतीकृत PVTG घरों के विद्युतीकरण के लिए विद्युत अधोसंरचना विस्तार के लिए लगभग 78 करोड़ 94 लाख रुपये की द्वितीय चरण की कार्ययोजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस के लिए 60 प्रतिशत राशि 47 करोड़ 36 लाख रूपये केन्द्र शासन से अनुदान प्राप्त होगा व शेष 40 प्रतिशत राशि 31 करोड़ 58 लाख रुपये राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।
पीएम जनमन अन्तर्गत प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के अविद्युतीकृत घरों के विद्युतीकरण के लिये बसाहट वार पूर्व स्वीकृत सीमा एक लाख रूपये प्रति हाउसहोल्ड को बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति हाउसहोल्ड किये जाने की स्वीकृति दी गई। विद्युत कंपनियों द्वारा 2 लाख रूपये प्रति हाउसहोल्ड तक आकलित लागत से विद्युतीकरण किया जायेगा। लागत अधिक होने की स्थिति में ऊर्जा विकास निगम द्वारा एक किलोवाट क्षमता का आफ ग्रिड सोलर पैनल और बैटरी लगाकर विद्युतीकरण किया जायेगा। 211 घरों का विद्युतीकरण आफ ग्रिड प्रणाली से किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत प्रदेश में 3 PVTG जनजाति, यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया समूहों के अविद्युतीकृत घरों का विद्युतीकरण किया जा रहा है। 11 मार्च, 2024 को संपन्न मंत्रि-परिषद बैठक में योजनांतर्गत प्रथम चरण में 10 हजार 952 घरों के विद्युतीकरण के लिए लगभग 65 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसमें से 8 हजार 752 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदाय किये जा चुके हैं।
मजदूरों से भरी बस हाईटेंशन लाइन से टकराई, आग लगी और सिलेंडर फटे
डेस्क। जयपुर में मंगलवार सुबह मनोहरपुर इलाके में मजदूरों को लेकर जा रही एक स्लीपर बस हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गई। बस में करंट दौड़ते ही उसमें आग लग गई। बस में रखे गैस सिलेंडर एक के बाद एक फटते चले गए। चीख-पुकार मच गई। हादसे में 2 मजदूरों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 10 झुलस गए।
बताया जा रहा है कि बस में 50 से ज्यादा मजदूर सवार थे, जिनमें से अधिकतर उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। ये सभी मजदूर टोडी स्थित ईंट भट्टे पर काम करने जा रहे थे। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बस में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की।
गंभीर रूप से घायल 5 लोगों को जयपुर के SMS हॉस्पिटल रेफर किया गया है, जबकि अन्य को शाहपुरा के उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में 5 से ज्यादा सिलेंडर रखे गए थे, जिनमें ब्लास्ट हुआ। इससे आग और तेजी से फैल गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन को कई बार हाईटेंशन लाइन हटाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इससे पहले भी राजस्थान में ऐसे हादसे हो चुके हैं — 14 अक्टूबर को जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर बस में आग लगी थी, जिसमें 27 लोगों की मौत हुई थी।
हर समाज को साथ लेकर चलना ही हमारी सरकार का उद्देश्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा दिवाली का यह समय शुभ अवसर है, जब जनकल्याण के कार्यों की शुरुआत करना मंगलकारी माना जाता है। सरकार का संकल्प है कि विकास की हर योजना जनता के द्वार तक पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार सभी वर्गों और समाजों को साथ लेकर समान अवसर और विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सुख और सुविधा पहुंचाना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के ‘अंत्योदय’ के विचार को मूर्त रूप देने का प्रयास हमारी हर योजना में झलकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ब्लू लोटस गार्डन इंदौर में आयोजित भूमिपूजन समारोह और सामाजिक समरसता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 के अंतर्गत अमृत 2.0 योजना के तहत सुदामा नगर सेक्टर-डी और ई में ₹30 करोड़ की लागत से 34.235 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाने के कार्य का भूमिपूजन किया। इस परियोजना से नागरिकों को ड्रेनेज चोकिंग की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी और जल-मल निकासी व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय समाज और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि पहली बार रानी दुर्गावती के नाम पर जबलपुर में कैबिनेट आयोजित की गई और खरगोन में टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। यह हमारी प्रतिबद्धता है कि हम हर समाज के महापुरुषों के योगदान को सम्मान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जहाँ प्रदेश का वार्षिक बजट 20 हज़ार करोड़ रुपये तक सीमित था, वहीं आज यह 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए हमारी सरकार ने 2 हजार 600 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा, जो हमारे किसान सम्मान के संकल्प का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘2047 अमृत काल’ के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश में विकास के नए मानक स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर और भोपाल एरिया में एक आधुनिक मेट्रोपॉलिटन सर्किट का निर्माण किया जा रहा है, जिससे मालवा क्षेत्र देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जलवायु परिवर्तन और सतत विकास वैचारिक संगोष्ठी में होंगे शामिल
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथी संकुल, मुक्ताकाश (एम्फिथियेटर) में 12 बजे जलवायु परिवर्तन और सतत विकास वैचारिक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।संगोष्ठी का आयोजन राज्य नीति आयोग,मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और EPCO के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। नर्मदा समग्र, सिकोईडिकोन, पैरवी, और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय कार्यक्रम के सह-आयोजक हैं।संगोष्ठी प्रातः 9:30 बजे से सायं 4:30 बजे तक होगी।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के समाधान में राज्यों की भूमिका पर विमर्श करना और व्यक्ति, समाज एवं सरकारों की सहभागिता से सतत विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। जलवायु संकट, जो जल, जंगल, जमीन, जैव विविधता और मानव जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित कर रहा है और वर्तमान समय की गंभीर चुनौती है। यह संगोष्ठी नवंबर 2025 में ब्राजील में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (CoP 30) के लिए पूर्व परामर्श का कार्य करेगी। इसके सुझाव और विचार CoP 30 के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर साझा किए जाएंगे। मध्यप्रदेश इस चर्चा को शुरू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
लिविंग द राइट वे की थीम पर आधारित इस संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित होंगे। इन सत्रों में पर्यावरण और जीवनशैली, जलवायु और सतत विकास के बीच संबंधों का सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य की भूमिका जैसे विषयों पर गहन चिंतन-मंथन किया जाएगा। इस आयोजन में विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, सरकारी अधिकारी और मीडिया प्रतिनिधि शामिल होंगे।
जेपी नड्डा ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई
देलही : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 के उपलक्ष्य में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सत्यनिष्ठा की शपथ ली। देश भर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2025 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। "सतर्कता: हमारी साझा ज़िम्मेदारी" विषय पर आधारित इस सतर्कता जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसा) के निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
नड्डा ने शपथ दिलाते हुए, शासन के हर स्तर पर नैतिक आचरण को संस्थागत बनाने और सतर्कता की संस्कृति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "क्या करें और क्या न करें, इसकी एक सूची सरल और आम बोलचाल की भाषा में तैयार की जानी चाहिए ताकि लोग सद्भावना या सहानुभूति के कारण कोई अनुचित कार्य न करें। प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण एक नियमित अभ्यास होना चाहिए ताकि सभी जागरूक और सतर्क रहें।"
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 की प्रस्तावना के रूप में इस वर्ष अगस्त महीने में एक परिपत्र जारी किया था जिसमें सभी संगठनों को 18 अगस्त से 17 नवंबर 2025 तक (i) लंबित शिकायतों का निपटारा (ii) लंबित मामलों का निपटारा (iii) क्षमता निर्माण कार्यक्रम (iv) परिसंपत्ति प्रबंधन, और (v) डिजिटल पहल आदि पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए निवारक सतर्कता पर तीन महीने का अभियान चलाने की सलाह दी गई थी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने शपथ समारोह में भाग लिया और सार्वजनिक सेवा में नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
शिवराज सिंह चौहान ने किया राष्ट्रीय बीज निगम के अत्याधुनिक बीज प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन
देलही : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पूसा परिसर, नई दिल्ली में राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) के नव-स्थापित अत्याधुनिक सब्जी एवं पुष्प बीज प्रसंस्करण संयंत्र और पैकिंग इकाई का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने बरेली, धारवाड़, हसन, सूरतगढ़ और रायचूर स्थित एनएससी के पांच बीज प्रसंस्करण संयंत्रों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।
पूसा, नई दिल्ली स्थित बीज भवन में स्थापित सब्जी बीज प्रसंस्करण संयंत्र की क्षमता 1 टन प्रति घंटा है, जबकि एनएससी के अन्य पांचों संयंत्रों की क्षमता 4 टन प्रति घंटा रखी गई है। ये संयंत्र अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हैं, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और बीज उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
कार्यक्रम के दौरान चौहान ने किसानों के लिए ‘बीज प्रबंधन 2.0’ प्रणाली और ऑनलाइन बीज बुकिंग प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया। इस प्रणाली के माध्यम से किसान अब अपनी बीज आवश्यकताओं की बुकिंग ऑनलाइन कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और उपलब्धता दोनों में सुधार होगा। छोटे किसानों तक अच्छी क्वॉलिटी के बीज पहुंचना जरूरी है।
चौहान ने इस अवसर पर कहा कि इन संयंत्रों से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ये नए प्लांट किसानों की जरूरतें पूरी करेंगे, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले दिनों चलाए गए विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें नकली और घटिया बीज के संबंध में आई थी, ऐसे में गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध होना आवश्यक है, जिसमें NSC की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार अपने स्तर पर इस मामले में कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय बीज निगम की टीम का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निगम का काम केवल आजीविका चलाना नहीं, बल्कि देश के अन्न के भंडार भरना है।