भारतीय नौसेना को मिलेगा नया संचार कवच, इसरो 2 नवंबर को लॉन्च करेगा अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट
2025-10-30 08:05 AM
21
नई दिल्ली| देश की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संचार क्षमताओं को नई ऊंचाई देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक ऐतिहासिक मिशन की तैयारी में है। 2 नवंबर 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो अपने सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट सीएमएस-03 (जीसैट-7आर) को प्रक्षेपित करने जा रहा है। यह उपग्रह विशेष रूप से भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसके लॉन्च के साथ ही समुद्री निगरानी, संचार और रणनीतिक नियंत्रण में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
इसरो के अनुसार, यह सैटेलाइट एलवीएम3-एम5 रॉकेट के जरिए भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया जाएगा। इसका वजन लगभग 4,400 किलोग्राम है, जो इसे अब तक का सबसे भारी भारतीय संचार उपग्रह बनाता है। यह मल्टी-बैंड सैटेलाइट न केवल भारतीय समुद्री सीमाओं बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली संचार सेवाएं प्रदान करेगा।
इसरो ने बताया कि एलवीएम3 की पिछली उड़ान से चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा गया था, और अब वही प्रक्षेपण यान इस नए मिशन के लिए तैयार है। 26 अक्टूबर को सैटेलाइट को लॉन्च पैड पर अंतिम परीक्षणों के लिए ले जाया गया, जहां इसे रॉकेट से जोड़ दिया गया है।
इस सैटेलाइट के माध्यम से नौसेना को रियल टाइम कम्युनिकेशन, हवाई रक्षा, रणनीतिक कमांड कंट्रोल, समुद्री टोही, नेविगेशन और मौसम निगरानी जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं मिलेंगी। यह उपग्रह समुद्री अभियानों को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाएगा, जिससे भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा और भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैटेलाइट न केवल सैन्य क्षेत्र में बल्कि नागरिक संचार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित होगा। दूरदराज के द्वीपों और समुद्री क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिससे प्रशासनिक और राहत कार्यों में भी तेजी आएगी।
इसरो का यह मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा सहयोग की दिशा में एक और बड़ा कदम है, जो आने वाले वर्षों में देश की रणनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।